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Tuesday, August 31, 2010

परिंदा

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परिंदा कैद पिंजरे में परिंदा फ़डफ़ाडाता पंख अपने हो दुखित वो सोचता टूट गए मेरे वो सपने चाहता था वो गगन में दूर तक विस्तार अपना भाग्य के हाथ का वो बन गया फिर से खिलौना वो परिंदा है तो जिन्दा है अंत अपना चाहता है लेके फिर से जन्म वो स्वछंद विचरण चाहता है http://www.hindudevotionalblog.com/search/label/Ganesha%20Mantras पथिक एक पथिक चड़ पड़ा निडर लेकर दृढ़ संकल्प नहीं पता ले जायेगा किस और समय का चक्र सहसा उसकी रहा में आया एक तूफान भ्रमित हुआ वो...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, August 31, 2010

Monday, August 30, 2010

पवन

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मेरी जिंदगी पूछती पगली पवन  आंचल उड़ा के क्यों चली कौन है साथी तुम्हारा   किसकी है ,तू मनचली  न कोई साथी है   मेरा न किसी की है तलाश क्योंकि मेरा   ये अकेलापन मेरे है आसपास  अपने जज्बातों को   बयां करती हु मैं चाँद से जिंदगी की राह में पूछती भगवान से क्या मेरी जिंदगी पर तू तरस न खायेगा संघर्षमय जीवन में तन्हा ही छोड़ जायेगा ..... क्यों मेरी दोस्ती का हाथ...

Posted By KanpurpatrikaMonday, August 30, 2010

एक लड़की

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एक लड़की एक लड़की का मासूम चेहरा तनहा वो अपनों में है होठ है खामोश लेकिन बोलती नजरो से है जिंदगी सुख दुःख का सागर कोसती किस्मत को है फिर भी दुःख सहकर भी उसको आस आखिर सुख की है .... भीड़ तारो की भीड़ में भी ऐसा एक सितारा तनहा है जो बेचारा सोचता है एक दिन होगा कोई सहारा उम्मीद में किसी के बेटे न जीवन का सारा ..... याद याद में किसी की इस कदर खो गए है होश न रहा की बेखबर हो गए  है जेहन जब तलक उनकी यादो का असर है...

Posted By KanpurpatrikaMonday, August 30, 2010

बचपन

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बचपन सपने में आया एक सपना था एक प्यारा सा घर अपना बचपन में खेले जिस घर में भाई बहन साथी भी संग में  गुडिया का ब्याह रचाना   गुड्डे की बारात बुलाना गुडिया को डोली में बिठाना था बचपन का खेल सुहाना बचपन का वो दामन छूटा खुशियों का वो आगन छूटा भाग्य को कोई समझ न पाया एक दिन ऐसा मंजर आया छूट गया वो खेल खिलौने  भूल गए वो गुड़िया की शादी  दूर हुए सब संग साथी  रह केवल यादे बाकि ...... संध्या ...

Posted By KanpurpatrikaMonday, August 30, 2010

रिश्ते

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रिश्ते इस मतलब परस्त दुनिया में रिश्तो की परिभाषा क्या है ? खून के रिश्ते ये सब झूठे है अपना और पराया क्या है ? अपने अपनों में खोये है गैरो समझाना क्या है ? गैर तो हो जाते है अपने अब अपनों का ठिकाना क्या है ...

Posted By KanpurpatrikaMonday, August 30, 2010

ख्वाब

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ख्वाब कौन कहता है की ख्वाब हकीकत में बदल जाते है मेरे तो किसी ख्वाब को हकीकत की जमीं ही नहीं मिली ख्वाब में उनसे मुलाकात तो होती है मगर सामने मिलने की ख्वाहिश ख्वाब में ही रह गई ख्वाब में जीता रहा की एक दिन ऐसा आयेगा ख्वाब मेरा शायद हकीकत में बदल जायेगा पर न जाने क्या हुआ शाम यूँ ही ढल गई जिंदगी तन्हा मेरी एक ख्वाब में गुज़र गई ......संध...

Posted By KanpurpatrikaMonday, August 30, 2010

हमसफ़र

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हमसफ़र जिंदगी के इस सफ़र में हमसफ़र गर साथ हो जिंदगी कट जाएगी हाथ मे जो हाथ होउम्र भर चलती रहूँ बस तुम्हारे साथ मैं कोई भी ठोकर लगे न अब पाँव मेअब हमारे बीच कोई न तकरार हो आइना जब भी देखू बस तुम्हारा ही दीदार होजिंदगी के इस सफ़र में हमसफ़र गर साथ होजिंदगी कट जाएगी हाथ मे जो हाथ हो .....दूरिया हो चाहे जितनी न कोई दूरी लगे .....पास रहकर भी ये कैसी मन से मन की दूरियां हैउम्र भर साथी मेरे बस तुम्हारा साथ होप्यार से है जिंदगी ... जिंदगी भर प्यार हो...

Posted By KanpurpatrikaMonday, August 30, 2010

Sunday, August 29, 2010

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" साँझ का आस्तित्व "साँझ के आगोश में जब आ गया संसार ,तब जा कर मिला है जिंदगी का सारपंछियों का लौटना ये दे रहा है सन्देश ।सुबह का भुला हुआ है आया अपने देश ,तूफान का झोका जो आया मद्य पारावार में ,मांझी सिमट कर रहा गया उस सघन मंझधार में ,अस्त होता सूर्य देता है सन्ति का सन्देश ,फिर जलाओ दीप लेकर एक नया उद्देश्य "........"संध्या...

Posted By KanpurpatrikaSunday, August 29, 2010

Saturday, August 28, 2010

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आपकी दोस्ती आपकी वफ़ा ही काफी है ,तमाम उम्र ये असर ही काफी है ,जहा भी मिलो मिल के मुस्करा देना ,खुशीके लिए ये सिलसिला ही काफी...

Posted By KanpurpatrikaSaturday, August 28, 2010

पलकों पर दस्तक

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पलकों पर दस्तक देने कोई ने वाला है खबर मिली है की वो ख्वाब सच होने वाला है हमने कहा उसकी पलकों पर जा जो अभी सोने वाल है -------------------------- यद् ए कभी तो ऑंखें बंद न करना हम चले भी जय तो गम न करना ये तो जरुरी नहीं की हर रिश्ते का कोई नाम हों पर मेरी दोस्ती का एहसास दिल से कम न होने देना ------------------------------------------------ जख्म ऐसा दिया की कोई दवा काम न आई आग ऐसी लगाई की पानी भी बुझा न पाई आप भी रोते है उनकी याद में जिस बेवफा को मेरी याद न आई। ----------------------------------- धीरे से पलकों की सेज पर सपनो की परियो को...

Posted By KanpurpatrikaSaturday, August 28, 2010

Friday, August 6, 2010

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न्यूजरूममजमा लगता है हर रोज़,सवेरे से,खबरों की मज़ार परऔर टूट पड़ते हैं गिद्दों के माफिकहम...हर लाश परऔर कभी...ठंडी सुबह...उदास चेहरे,कुहरे में कांपते होंठ-हाथ-पांव,और दो मिनट की फुर्सत... काटने दौड़ती है आजकलअब शरीर गवाही नहीं देता सुस्ती की...न दिन में और न रात में...जरूरी नहीं रहे दोस्त...दुश्मन...अपने...बहुत अपनेज्यादा खास हो गयी हैफूटी आंख न सुहाने वालीटेलीफोन की वो घंटी... जो नींद लगने से पहले उठाती है...और खुद को दो चार गालियां देकर...फिर चल पड़ता हूं...चीड़ फाड़ करने...न्यूजरुम में...न्यूजरूममजमा लगता है हर रोज़,सवेरे से,खबरों की मज़ार...

Posted By KanpurpatrikaFriday, August 06, 2010

Tuesday, August 3, 2010

जिस चीज़ को आप सुरक्षित मान रहे थे वो भी खतरनाक है...

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कानपुर,(आशीष त्रिपाठी)... जी हां, ऐसा सच है अगर आप देखने में साफ और बढ़िया क्वालिटी की प्लास्टिक की बोतल का इस्तेमाल करके ये सोच रहे है की इससे कोई नुकसान या बैक्टेरिया नहीं आयेंगे तो आप गलत सोच रहे है । अब आप सावधान हो जाइये क्योंकि अभी तक जिस चीज़ को आप सुरक्षित मान रहे थे वो भी खतरनाक है... कैसे हो सकता है खतरा :- अगर आप प्लास्टिक की बोतल को डिटर्जेंट से धोती है या फिर गर्म पानी मे खौलाती है तो आप सावधान हो जाइये । क्योंकि प्लास्टिक की बोतल और डिटर्जेंट मिलकर हानिकारक पोली कार्बोनेट बनाने लगता है और इसी बोतल में रखा पानी पीने से खासकर महिलओ...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, August 03, 2010

महंगाई ने कफ़न को भी किया महँगा ....

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महंगाई ने कफ़न को भी किया महँगा ...>जहा एक और महंगाई में जनता से लेकर संसद तक हाहाकार मचा हुआ है वही महंगाई ने डायन ने एक और को लील लिया है और वो है कफ़न ... जहा एक और महंगाई से खाने पीने की वस्तुए अभी तक महँगी थी वही अब कफ़न और दफ़न के दाम भी बढ गए है हिन्दू रीत रिवाजों से क्रिया कर्म करने वाले खर्चे में डेड से दोगुनी वृद्धी हो गई है जिसे की लोग अब यही कहेंगे की जीना भी हुआ मुश्किल और मरना भी ... घाट पर अगर कोई व्यक्ति दाह संस्कार करने 1 से 2 साल पहले जाता था तो करीब 2500 से 3000 हज़ार रुपये का खर्च आता था लेकिन अब वही 5 से 6 हज़ार रुपये...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, August 03, 2010

पुलिस एक रूप अनेक ......यु पी पुलिस हमेशा

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पुलिस एक रूप अनेक ......यु पी पुलिस हमेशा से ही अपने अच्छे कामो से ज्यादा गंदे कामो की वजह से ज्यादा जानी जाती है ...कभी पुलिस हिरासत से भाग जाते है कैदी तो कभी किसी लड़की या महिलाओ की इज्ज़त तार तार करते मिलते है ये पुलिस वाले ... कभी बेसहारो को मारते है तो कभी अमीरजादो की गुलामी करते नज़र आते ये पुलिस वाले.... चेहरा एक ... कानपुर पुलिस के एक सिपाही ने मुफ्त जूस न देने पर गरीब जूस वाले का ठेलाही पलटा दिया ... ... किस्सा है रैनामार्केट का जहा रामदीन रोज़ की तरह अपना जूस का ठेला रैना मार्केट के पास लगाया था ... तभी कोहना थाने के दो सिपाही अपने दोस्तों...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, August 03, 2010

मीडिया हो निष्पक्ष

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मीडिया हो निष्पक्ष ....मीडिया हो निष्पक्ष ....कम से कम आज के समय में मीडिया को तो निष्पक्ष होजाना चाहिए ... जहा एक और राजनीतिक दल और छोटी पार्टियों के नेता हर बात पर राजनीती करते नज़र आते है ... मीडिया को इससे दूर होना जरुरी है..मेरा कहने का मतलब ये है की अगर कही भी कोई व्यक्ति मरता है तो वो गरीब या अमीर होगा .. ये हर व्यक्ति जनता है लेकिन आम जनता ये नहीं जानती की वो दलित होगा या मुश्लिम ये बात सिर्फ मीडिया ही बताती है.. जैसे जींद में दलित की पीट पीट कर हत्या..चार मुस्लिमो पर लाठी डंडो से हमला.. शायद ये भी खबर हो सकती है की जींद में एक युवक की पीट...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, August 03, 2010