Saturday, August 28, 2010

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आपकी दोस्ती आपकी वफ़ा ही काफी है ,
तमाम उम्र ये असर ही काफी है ,
जहा भी मिलो मिल के मुस्करा देना ,
खुशीके लिए ये सिलसिला ही काफी है

Posted By Ashish TripathiSaturday, August 28, 2010

पलकों पर दस्तक

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पलकों पर दस्तक देने कोई ने वाला है
खबर मिली है की वो ख्वाब सच होने वाला है
हमने कहा उसकी पलकों पर जा
जो अभी सोने वाल है
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यद् ए कभी तो ऑंखें बंद न करना
हम चले भी जय तो गम न करना
ये तो जरुरी नहीं की हर रिश्ते का कोई नाम हों
पर मेरी दोस्ती का एहसास दिल से कम न होने देना
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जख्म ऐसा दिया की कोई दवा काम न आई
आग ऐसी लगाई की पानी भी बुझा न पाई
आप भी रोते है उनकी याद में
जिस बेवफा को मेरी याद न आई।
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धीरे से पलकों की सेज पर सपनो की परियो को आने दो ,
खो जाओ नींद के आगोश मे खुद को ख्वाबो की सैर पर जाने दो



Posted By Ashish TripathiSaturday, August 28, 2010