
एक फूल हु मैंफूल हु मैं कोई कागज़ तो नहीं जो फाड़ के फैक दिया जायफूल हु मैं कोई राख तो नहीं जो झाड़ दिया जायफूल हु मैं कोई कटा तो नहीं जो चुभन दे जाऊफिर क्योँ मुझे भी बाट दिया इंसानों के हिसाब सेलाश पर चढू तो लोग छुने में शर्माते हैभगवान पर चढू तो लोग उठाने के लिए लड़ जाते हैपेड़ पर हु तो सब तोडना चाहते हैसड़क पर हु तो सब कुचलना चाहते हैशहीद पर चढू तो सब नमन करना जानते हैगद्दार पर चढू तो सब थूकना जानते है ...पर क्योँ मैं फूल हो तो हु कोई...