Monday, July 18, 2016

किसको नमस्कार करने से आप पर आ सकती है मुसीबत

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किसको नमस्कार करने से आप पर आ सकती है मुसीबत

आजकल की जनरेशन

आजकल की जनरेशन जब किसी से मिलती है तो उसे हाय-हैलो करती है। सामने वाला व्यक्ति किस एज ग्रुप का है और किस रिश्ते में है, इस बात से कोई लेना-देना नहीं है। अन्य पाश्चात्य तौर-तरीकों की तरह यह भी एक ऐसा ही पाश्चात्य रिवाज है जिसे बड़े शौक से स्वीकार कर लिया गया है।

भारतीय संस्कृति

लेकिन भारतीय संस्कृति जो अपनी परंपराओं और रिवाजों की पक्की है, उसमें हमेशा बड़ों को सम्मान देने की बात कही गई है। इसलिए वे लोग जो वाकई अपनी संस्कृति का पालन करते हैं, वे अपने से बड़े लोगों से जब मिलते हैं तो सम्मान स्वरूप उनके चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

परंपरा

इसके अलावा नमस्कार करने की भी परंपरा हमारी संस्कृति में मौजूद है, जिसके अंतर्गत दोनों हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर सामने वाले व्यक्ति को नमस्कार किया जाता है

नमस्कार करना

नमस्कार करना एक अच्छी आदत है, निश्चित रूप से यह सामने वाले व्यक्ति की आत्मा को भी संतुष्ट करती है, लेकिन क्या आप जानते शास्त्रों के अनुसार कभी-कभी नमस्कार करना ही हमारी बर्बादी का कारण बन सकता है।

बर्बादी का कारण

अब आप सोच रहे होंगे कि एक तरफ तो हम नमस्कार कर, दूसरों को सम्मान देने की पैरवी कर रहे हैं और दूसरी तरफ हम ये भी कह रहे हैं कि नमस्कार करना आपकी बर्बादी का कारण बन सकता है!!

हिन्दू धर्म शास्त्र

दरअसल हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें कभी भूलकर भी नमस्कार नहीं करना चाहिए। जानते हैं वो लोग कौन हैं?

नुकसानदेह

ऐसे लोग जो दूसरों के साथ बुरा करते हैं, किसी भी रूप में दूसरों को हानि पहुंचाते हैं, कष्ट देते हैं, उन्हें नमस्कार कर सम्मान देना आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है।

अंतिम संस्कार

जो किसी के अंतिम संस्कार से आ रहा हो या अंतिम संस्कार के लिए जा रहा हो, उसे अपवित्र माना जाता है। शास्त्रों और धर्मग्रंथों के अनुसार अपवित्र व्यक्ति को कभी नमस्कार नहीं करना चाहिए

स्नान

स्नान करते हुए व्यक्ति को नमस्कार करना कभी सही नहीं ठहराया गया। इसके दो कारण है, एक तो यह शास्त्रों की दृष्टि से सही नहीं है और दूसरा ये दोनों के लिए असहज भी हो सकता है।

काम में लिप्त व्यक्ति

किसी काम में लिप्त व्यक्ति को कभी नमस्कार नहीं करना चाहिए। एक तो ये उस व्यक्ति के काम में खलल डालता है दूसरा उसे टोक लग जाती है, इसके चलते उसका काम सफल नहीं होता।

मानसिक रूप से कपटी

मूर्ख, बुरे आचरण वाले या मानसिक रूप से कपटी लोगों को नमस्कार करना आपके सम्मान को तो ठेस पहुंचाता ही है, साथ ही ऐसा करने से आपका भाग्य भी प्रभावित होता है।

भाग्य

नमस्कार के जरिए किसी को सम्मान देना अच्छी बात है, लेकिन उपरोक्त बातों का ध्यान भी अवश्य रखना चाहिए ताकि आपका भाग्य भी हमेशा आपके साथ रहे।

Posted By Ashish TripathiMonday, July 18, 2016

कैसा है आपका नाम सकरात्मक या फिर नकारात्मक

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कैसा है आपका नाम सकरात्मक या फिर नकारात्मक 

नाम में दोहराने वाले अक्षर
इतना ही नहीं, उस विशेष नाम में कितने अक्षरों को कितनी बार दोहराया गया है, यह भी एक अहम बिंदु है। इसका भी हमारे जीवन से खास संबंध होता है। उदाहरण के लिए मेरा नाम गुलनीत (GULNEET) है। इस नाम में अंग्रेजी का ‘E’ अक्षर दो बार दोहराया गया है।

सकारात्मक-नकारात्मक प्रभाव

माना जाता है कि नाम में अक्षर को दोहराने से व्यक्ति के स्वभाव पर सकारात्मक या फिर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मेरे नाम में दोहराए गए ‘E’ अक्षर का भी अवश्य ही मेरे स्वभाव पर कोई असर होगा, लेकिन आपका नाम और उसमें दोहराए जाने वाले अक्षर आपके स्वभाव पर कैसे प्रभावी हैं, आइए आगे की स्लाइड्स में जानते हैं:

अक्षर A,I,J,Q,Y

यदि आपके नाम में अंग्रेजी का A,I,J,Q या Y अक्षर दोहराया जा रहा है तो आप साहसी स्वभाव के हैं। आपका यह निडर स्वभाव आपकी रोजाना की गतिविधियों में भी दिखाई देता है। इसके अलावा आप काफी मजबूत स्वभाव के हैं तथा दूसरों पर हावी होना जानते हैं।

निडर इंसान

आप खुद को संसार में एक अच्छे वर्ग का इंसान मानते हैं। पैसा कमाने का क्रेज आपमें कूट-कूट कर भरा हुआ है। लेकिन इसके बावजूद भी आप लोगों के प्रति सहायक स्वभाव के हैं। किसी की मदद करने में कभी पीछे नहीं हटते।

अक्षर B, K, R

इस सूची में अगले अक्षर हैं- B, K और R अक्षर। यदि आपके नाम में यह अक्षर बार-बार दोहराए जा रहे हैं तो आप भावुक किस्म के इंसान हैं। किसी भी प्रकार की बात जल्द ही आपके दिल को छू जाती है जो कई बार आपको चिंता में डाल देती है।

दिलचस्प अंदाज़

लेकिन इसके अलावा आपका अंदाज़ कुछ दिलचस्प भी है। आपको संगीत और कलात्मक चीज़ें बहुत भाती हैं। इसके अलावा लोगों की मदद करना आपको पसंद है और साथ ही आप बेहद विनम्र स्वभाव के हैं।

अक्षर C, G, L, S

अगले अक्षर हैं - C, G, L और S, यदि यह आपके नाम में हैं तो आप काफी कल्पनात्मक स्वभाव हैं। यही कारण है कि इस श्रेणी के लोग ज्यादातर कलाकार ही होते हैं। ये लोग विशेष रूप से कला की दुनिया में हों या ना हों, लेकिन दुनिया इनकी कलात्मक खूबी को पहचान ही लेती है।

नकारात्मक प्रभाव

लेकिन यह अक्षर कई बार उस व्यक्ति के लिए नकारात्मक भी साबित हो जाते हैं। इन अक्षरों को दोहराने से व्यक्ति स्वार्थी बन जाता है। कई बार ऐसे लोगों में आत्मविश्वास की कमी भी देखी जाती है।

अक्षर D, M, T

यदि आपके नाम में अंग्रेजी के अक्षर D, M और T को बार-बार दोहराया जाता है तो यह आपके स्वभाव पर नकारात्मक से ज्यादा सकारात्मक प्रभाव करता है। इन अक्षरों को इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति काम में कुशल, ध्यान से कार्य करने वाले और साथ ही यदि ये बिजनेसमैन हैं तो काफी तरक्की करते हैं।

अक्षर E, H, N, X

अपने नाम में E, H, N या फिर X अक्षर का प्रयोग बार-बार करने वाले लोगों को सफलता जल्दी हासिल होती है। ऐसे लोग सामाजिक एवं कानूनी क्षेत्र में सफलता पाते हैं। लेकिन इन्हीं अक्षरों को जरूरत से ज्यादा नाम में दोहराने पर नकारात्मक प्रभाव भी होता है।

ज्यादा बार ना दोहराएं

यदि इनमें से कोई भी अक्षर एक नाम में सात या फिर इससे भी ज्यादा बार दोहराया जाए तो यह व्यक्ति के स्वभाव और सफलता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे जीवन में अनचाही कठिनाइयां आती हैं और पारिवारिक सुख भी नष्ट होने का खतरा बना रहता है।

अक्षर U, V, W

यदि आपके नाम में अंग्रेजी के U, V या W अक्षर का एक से ज्यादा बार इस्तेमाल किया गया है तो यह आपको एक जिम्मेदार व्यक्ति बनाते हैं। इसके अलावा इससे आपका स्वभाव प्यार के मामले में रोमांटिक और लोगों के संदर्भ में जिम्मेदार इंसान वाला बनता है।

अक्षर O, Z

आपके नाम में O या Z अक्षर को एक से ज्यादा बार दोहराने से यह आपको शांत किस्म का इंसान बनाता है। ऐसे लोगों को व्यायाम करना और ध्यान-साधना करना बेहद पसंद है। यही कारण है कि ऐसे लोग भीड़-भाड़ वाले इलाके और परिवारिक चिंताओं से दूर ही रहते हैं।

अक्षर P, F

नाम में P या F अक्षर को दोहराने से यह अक्षर व्यक्ति के स्वभाव को मजबूत बनाते हैं। घर के साथ-साथ व्यापार में भी सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं ये अक्षर। ऐसे लोगों को अत्यंत पारिवारिक सुख हासिल होता है। लेकिन कई बार इन लोगों को जरूरत से ज्यादा खर्चीले स्वभाव का पाया जाता है।


Posted By Ashish TripathiMonday, July 18, 2016

रुद्राक्ष-धारण करने से पहले जान ले ये बाते

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रुद्राक्ष-धारण करने से पहले उसके असली होने की जांच अवद्गय करवा लें। असली रुद्राक्ष ही धारण करें। खंडित, कांटों से रहित या कीड़े लगे हुए रुद्राक्ष धारण नहीं करें।

जपादि कार्यों में छोटे और धारण करने में बड़े रुद्राक्षों का ही उपयोग करें। तनाव से मुक्ति हेतु 100 दानों की, अच्छी सेहत एवं आरोग्य के लिए 140 दानों की, अर्थ प्राप्ति के लिए 62 दानों की तथा सभी कामनाओं की पूर्ति हेतु 108 दानों की माला धारण करें। जप आदि कार्यों में 108 दानों की माला ही उपयोगी मानी गई है। अभीष्ट की प्राप्ति के लिए 50 दानों की माला धारण करें। द्गिाव पुराण के अनुसार 26 दानों की माला मस्तक पर, 50 दानों की माला हृदय पर, 16 दानों की माला भुजा पर तथा 12 दानों की माला मणिबंध पर धारण करनी चाहिए।
जिस रुद्राक्ष माला से जप करते हों, उसे धारण नहीं करें। इसी प्रकार जो माला धारण करें, उससे जप न करें। दूसरों के द्वारा उपयोग में लाए गए रुद्राक्ष या रुद्राक्ष माला को प्रयोग में न लाएं।
रुद्राक्ष की प्राण-प्रतिष्ठा कर शुभ मुहूर्त में ही धारण करना चाहिए
ग्रहणे विषुवे चैवमयने संक्रमेऽपि वा।
दर्द्गोषु पूर्णमसे च पूर्णेषु दिवसेषु च।
रुद्राक्षधारणात् सद्यः सर्वपापैर्विमुच्यते॥
ग्रहण में, विषुव संक्रांति (मेषार्क तथा तुलार्क) के दिनों, कर्क और मकर संक्रांतियों के दिन, अमावस्या, पूर्णिमा एवं पूर्णा तिथि को रुद्राक्ष धारण करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
मद्यं मांस च लसुनं पलाण्डुं द्गिाग्रमेव च।
श्लेष्मातकं विड्वराहमभक्ष्यं वर्जयेन्नरः॥ (रुद्राक्षजाबाल-17)
रुद्राक्ष धारण करने वाले को यथासंभव मद्य, मांस, लहसुन, प्याज, सहजन, निसोडा और विड्वराह (ग्राम्यशूकर) का परित्याग करना चाहिए। सतोगुणी, रजोगुणी और तमोगुणी प्रकृति के मनुष्य वर्ण, भेदादि के अनुसार विभिन्न प्रकर के रुद्राक्ष धारण करें।
रुद्राक्ष को शिवलिंग अथवा शिव-मूर्ति के चरणों से स्पर्द्गा कराकर धारण करें। रुद्राक्ष हमेद्गाा नाभि के ऊपर शरीर के विभिन्न अंगों (यथा कंठ, गले, मस्तक, बांह, भुजा) में धारण करें, यद्यपि शास्त्रों में विशेष परिस्थिति में विद्गोष सिद्धि हेतु कमर में भी रुद्राक्ष धारण करने का विधान है। रुद्राक्ष अंगूठी में कदापि धारण नहीं करें, अन्यथा भोजन-द्गाौचादि क्रिया में इसकी पवित्रता खंडित हो जाएगी।
रुद्राक्ष पहन कर श्मद्गाान या किसी अंत्येष्टि-कर्म में अथवा प्रसूति-गृह में न जाएं। स्त्रियां मासिक धर्म के समय रुद्राक्ष धारण न करें। रुद्राक्ष धारण कर रात्रि शयन न करें।
रुद्राक्ष में अंतर्गर्भित विद्युत तरंगें होती हैं जो शरीर में विद्गोष सकारात्मक और प्राणवान ऊर्जा का संचार करने में सक्षम होती हैं। इसी कारण रुद्राक्ष को प्रकृति की दिव्य औषधि कहा गया है। अतः रुद्राक्ष का वांछित लाभ लेने हेतु समय-समय पर इसकी साफ-सफाई का विद्गोष खयाल रखें। शुष्क होने पर इसे तेल में कुछ समय तक डुबाकर रखें।
रुद्राक्ष स्वर्ण या रजत धातु में धारण करें। इन धातुओं के अभाव में इसे ऊनी या रेशमी धागे में भी धारण कर सकते हैं। अधिकतर रुद्राक्ष यद्यपि लाल धागे में धारण किए जाते हैं, किंतु एक मुखी रुद्राक्ष सफेद धागे, सात मुखी काले धागे और ग्यारह, बारह, तेरह मुखी तथा गौरी-शंकर रुद्राक्ष पीले धागे में भी धारण करने का विधान है।
रुद्राक्ष धारण करने के लिए शुभ मुहूर्त या दिन का चयन कर लेना चाहिए। इस हेतु सोमवार उत्तम है। धारण के एक दिन पूर्व संबंधित रुद्राक्ष को किसी सुगंधित अथवा सरसों के तेल में डुबाकर रखें। धारण करने के दिन उसे कुछ समय के लिए गाय के कच्चे दूध में रख कर पवित्र कर लें। फिर प्रातः काल स्नानादि नित्य क्रिया से निवृत्त होकर क्क नमः शिवाय मंत्र का मन ही मन जप करते हुए रुद्राक्ष को पूजास्थल पर सामने रखें। फिर उसे पंचामृत (गाय का दूध, दही, घी, मधु एवं शक्कर) अथवा पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, मूत्र एवं गोबर) से अभिषिक्त कर गंगाजल से पवित्र करके अष्टगंध एवं केसर मिश्रित चंदन का लेप लगाकर धूप, दीप और पुष्प अर्पित कर विभिन्न शिव मंत्रों का जप करते हुए उसका संस्कार करें।
तत्पश्चात संबद्ध रुद्राक्ष के शिव पुराण अथवा पद्म पुराण वर्णित या शास्त्रोक्त बीज मंत्र का 21, 11, 5 अथवा कम से कम 1 माला जप करें। फिर शिव पंचाक्षरी मंत्र क्क नमः शिवाय अथवा शिव गायत्री मंत्र क्क तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् का 1 माला जप करके रुद्राक्ष-धारण करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करें। रुद्राक्ष धारण के दिन उपवास करें अथवा सात्विक अल्पाहार लें।
विशेष : उक्त क्रिया संभव नहीं हो, तो शुभ मुहूर्त या दिन में (विशेषकर सोमवार को) संबंधित रुद्राक्ष को कच्चे दूध, पंचगव्य, पंचामृत अथवा गंगाजल से पवित्र करके, अष्टगंध, केसर, चंदन, धूप, दीप, पुष्प आदि से उसकी पूजा कर शिव पंचाक्षरी अथवा शिव गायत्री मंत्र का जप करके पूर्ण श्रद्धा भाव से धारण करें।

Posted By Ashish TripathiMonday, July 18, 2016