Monday, July 12, 2010

ख़त्म होता कानपुर

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ख़त्म होता कानपुर का कारण नम्बर एक
कानपुर यु तो हमेशा से औद्योगिक नगरी के नाम से जाना जाता रहा है पिछले कई सालो में कानपुर ने अपनी औद्योगिक पहेचान खो दी है इसका मूल कारन यहाँ की मिलो में होने वाली राजनीती थी जिसको यहाँ के मतलबी और लाल झनडे वाले नेताओ ने बड़ा चड़ा कर बर्बाद कर दिया और हालात ये हो गई की करीब करीब सभी मिले बंद हो गई .कभी सुबहा से लेकर शाम तक मिलो से निकलने वाले सैरण और मिलो से निकालने वाले श्रमिको से हर सड़क और गली रोशन रहेती थी .और धीरे धीरे यहाँ के मिलो से निकालने वाले सैरण का सोर भी बंद हो गया और यहाँ के मजदूरो ने कभी तंगहाली से खुद खुसी कर ली तो कभी रिक्शा और कभी सब्जी बेच कर गुजरा करने लगे ।
ख़त्म होता कानपुर का कारण  नम्बर दो

धीरे धीरे ये कानपुर शहर फिर से उठ खड़ा हुआ और अपना नाम फिर से सारी दुनिया में रोशन करने की सोचने लगा इसमे ओ सफल भी होता क्योकि कानपुर अपना नाम इस बार शिक्षा के क्षेत्र में कर रहा था लेकिन कुछ ही साल ही हुंये थे की फिर से यहाँ की राजनीती चालू हुई और कानपुर को बिजली न देनी की साजिस जिससे पहेलें से ही कर्राहा रहे कानपुर पर एक जोर दार प्रहार था / यहाँ पर दूर दाराज़ के जिलो और शहेरो से छात्र पडने आते थे॥
लेकिन इस बार भी साजिश कर्ता इसमे सफल हो गए .सरकारी आकड़ो के मुताबिक कानपुर शहर से एक अच्छा खासा सरकारी राजस्व प्राप्त होता है लेकिन फिर भी कानपुर के साथ सौतेला व्यावाहर होता रहा है । जबकि कानपुर शहर से ही सांसद श्री प्रकाश जयसवाल है और पिछले कई सालो से सरकार में मंत्री पद भी हासिल किये हुए है कभी केंद्रीय ग्रह राज्य मंत्री तो कभी कोयला मंत्री। लेकिन फिर भी कोई आवाज़ कभी नहीं उठाई गई ।
ख़त्म होता कानपुर का कारण नम्बर तीन
तीसरा और सबसे महत्व पूर्ण कारण यहाँ की निर्मल पावन गंगा का जो अब लगबघ यहा के किनारों से किनारा कर चुकी है .यहाँ बीठुर जैसे पावन और धर्मिक तथा एतहासिक प्रष्ठ भुंमी रही है परमट मंदिर हो या मागज़ीने घाट । सभी अपने में महत्व पूर्ण थे लेकिन अब सभी घटो में गंदगी और बदबू दार पानी ही मिलता है कभी लोग अपने पाप दुलने यह जाते थी तो कभी बोतल में गंगा जल भरकर अपने को शुद्ध किया करते थे लेकिन अब सायद घ्रर का पानी ज्यादा शुद्ध है।
यहाँ के टेनरियो से छोड़ा जाने वाल विषैला पानी और गंगा में फ़ेकी जाने वाली गन्दगी और लाशे साफ देखि जा सकती अहै । और इसको बचाने के प्रयास में प्रधानमंत्री से लेकर स्वानी राम देव और फ़िल्मी हस्तियों ने भी कभी कभार यहाँ आकार सफाई की लेकिन सिर्फ और सिर्फ कैमरा के आंगे । और लिये गई कई संकल्प लेकिन आज क्या हुआ । यहाँ के राम जी त्रिपाठी ही अकेले एँसे व्याक्ति है जो लगा तार गंगा को बचाने क प्रयास कर रहे है ।
लेकिन गंगा जल पर भी राजनीती वह मेरे देश क्या हो राह है ?
ख़त्म होता कानपुर का कारण नम्बर चार
बिजली न आने से यह सभी जगह इन्वेर्टर और जन्र्तेटर दिन के १२ घंटे चलते हुंये नजर आ जायेंगे । लेकिन ये भी कानपुर को नष्ट करने के लिए काफी है । कानपुर से इस जहिरिले धुएँ के कारन पिछले कई सालो में टी बी घातक कैंसर और मानसिक रोगों के चलते कई मौते हो चुकी है .जनरेटरो से निकालने वाले धुल धुआ और ध्वनि प्रदुषण यहाँ आने वाले लोगो को साफ नज़र आ जाता है और और फिर कानपुर न आने की बात करते है .पिछले एक महीने में यहाँ के करीब ४० से ज्यादा हरे भरे वृछ गिर चुके है कभी आंधी से तो कभी पानी से और कभी लोगो के द्वारा गिराए जाते है और कभी अपने आप ही हरे भरे पेड़ गिर जाते है क्यों न की यहाँ का आदमी तो खोखला होता जा रा हा है साथ ही यह के पेड़ भी जो जरा से तेज़ हवा में भी गिर पड़ते है ।

कुल मिला कर बिजली व्यवस्था हो या प्रदुषण या फिर निर्मल पावन गंगा की सफाई ये सभी कानपुर को धीरे धीरे ख़त्म करने के लिए काफी है ।
सिर्फ पर्चे और पोस्टर पर लिख देने से ग्रीन कानपुर क्लीन कानपुर बात नहीं बनेंगी । प्रयास करना होगा सभी को ।
जब सुधरंगे हम तो सुधरेगा कानपुर का नारा बुलंद करना होगा

Posted By Ashish TripathiMonday, July 12, 2010