
मनोभाव:जिसको देखा करते थे आसमान में चमकते हुएआज उसी मां को देखते है सरे राह तडपते हुएरोती थी वो बिलखती थी वो सारी रातपर पहले नहीं थे उसके ऐसे हालातअपनी इज्ज़त अपने घर में ही तो है ऐसा कहते थे वोलेकिन अपनी माँ को नीलाम घर पर ही तो करते थे वोइन चंद नेताओ ने कर दिया अपनी माँ का सौदाक्या कभी कोई बेटा करता था ऐसाइन मतलबी लोगों ने कर दिया अपनी माँ को नीलामक्या उस माँ ने पाला था ऐसा अरमानजो देती थी भूखे पेट...