Monday, October 20, 2014

रे पथिक रुक जा तनिक

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पथिक

एक पथिक चाल पड़ा निडर ....

लेकर दृढ़ संकल्प

नहीं पता ले जायेगा किस और

समय का चक्र

सहसा उसकी रहा में आया एक तूफान

भ्रमित हुआ वो पथिक

पथ हुआ अंजान

बदलो की गरज़ना सी आई एक आवाज़

रे पथिक रुक जा तनिक

कर ले तू विश्राम

जानता था वो पथिक ये काल का है पाश

पथिक बोला पथ पर पहुचकर

होगा मेरा विश्राम

रुक गई बदल की गरज़ं

थम गया तूफान

ह्रदय में था पथिक के

एक नया अरमान ....

Posted By Ashish TripathiMonday, October 20, 2014

Sunday, October 19, 2014

ए ख़त तू बता दे

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ए ख़त तू बता दे तुझमे लिखा क्या है 


एक स्याही तू तो बता लिखा तुझसे क्या गया 


लिफाफे जिसको लेकर आया तू बडे इत्मीनान से 


आखिर उस मजमून में ख़ुशी या गम तू ही  बता दे 


लिखा है मेरे प्यार में इत्मीनान से जिसने मोहब्बत 


ऐ कागज़ तुम्हे तो पता ही होगा 


वफ़ा से भरा ख़त है या बेवफ़ाई लिखी उसमे है  


पड़ना आता आता अगर हमे खतो को 


तो मोहब्बत हम शब्दों से करते !


आशीष त्रिपाठी


Posted By Ashish TripathiSunday, October 19, 2014

Wednesday, October 15, 2014

मृत्यु तुम क्यों आती हो

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मृत्यु तुम क्यों आती हो
सबको क्यों रुलाती हो
जीवन जब आता है
खुशिया ढेरो लाता  है
सबको हँसाता है
यादे बचपन की ताज़ा कर जाता है
लेकिन मृत्यु जब तुम आती हो
दुःख अपार लाती  हो
खुशियों पर अघात लगाती हो
तन मन सब छिन्न भिन्न हो जाता है
मष्तिष्क भी उदास हो जाता है
ईश्वर ही भेजता जीवन तुमको भी
और मृत्यु तुमको भी
फिर इतना अंतर क्यों रखा उस ईश्वर ने
जीवन जो हँसाता  है
मृत्यु क्यों रुलाती है 
जीवन लगता लड़का है
म्रत्यू लगती लड़की है
जो बिदा होती घर से
तो दुःख सबको होता है
जीवन लगता लड़का है
जो लाता घर पर खुशिया है
क्या लड़का इसलिए ही चिराग है
और लड़की बोझ है
इसलिए ही जीवन जवानी है
और बुढ़ापा बोझ है
मृत्यु तुम क्यों आती हो
जीवन की तरह खुशियाँ क्यों नहीं लाती हो / 

Posted By Ashish TripathiWednesday, October 15, 2014

Thursday, October 9, 2014

चक्रव्यूह जीवन का

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चक्रव्यूह जीवन का 

जीवन के चक्रव्यूह में कोई नहीं चाहता बीमारियों को शरीर पर
डाक्टर भी नहीं चाहता की मैं इलाज के पैसे लू
दुकानदार भी नहीं चाहता दवाई पर नफा लू
ईश्वर भी नहीं चाहता की मैं अपने भक्तो को कष्ट दू /
पर जीवन के इस चक्रव्यूह में एक समय एसा आता है की सब
न चाहते हुए भी जीवन के उस चक्रव्यूह में फस जाते है
कोई उस चक्रव्यूह में ही फसा रह जाता है(जीवन) तो  ,
कोई उस चक्रव्यूह को भेद कर बहार आ जाता है(मृत्यु) /
 

Posted By Ashish TripathiThursday, October 09, 2014