Wednesday, September 4, 2013

जीत जायेंगे हम The Winning Spirit

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जीत जायेंगे हम The Winning Spirit


जीवन में सफलता और असफलता हमेशा आते है कोई सफल होकर असफल होता है तो कोई असफल होकर सफल होता है / सफलता और असफलता प्रायः आशा ख़ुशी और सकारात्मक सोच लेकर आते है वही असफलता निराशा दुःख और नकारात्मक सोच को लेकर आते है / हमेशा असफलता से सभी डर जाते है नकारत्मक सोच हावी होने  लगती है आस पास का माहौल भी अनुकूल नहीं लगता है / हम सबसे दूर जा रहे होते है कोई हमे समझ ही नहीं पा रहा है और न ही समझना चाहता है / ऐसे में क्या करे और क्या न करे समझ में भी नहीं आता है अक्सर  गुस्सा आना चिड चिड़ापण बात बात में गुस्सा आना / ऐसे में कुछ लोग करवाने ( तंत्र मंत्र और दुआ ताबिज़ जैसे चक्कर में फसकर समय और पैसा बर्बाद करके और नकारत्मक सोच से घिर जाते है / और ऐसे समय में अगर कोई उन्हे सबसे बुरा लगता है तो वो है ईश्वर जो सब कुछ देखते हुए भी चुप रहता है / मैं कितना परेशां हु क्या उस ईश्वर  को नहीं दिख रह है / पंडितो द्वारा बताई गई  चीजे भी कि लेकिन उनका भी कोई फायदा नहीं क्या मेरी किस्मत  ही ख़राब  है क्या मैं वाकई में कुछ नहीं कर सकता हु /
ऐसे में ज्यादा नकारत्मक सोच बढने से हम आत्माहत्या कि और बढने लगते है और ज्यादातर लोग जिंदगी कि जगह मौत चुनते है / क्या ये रास्ता सही है ? क्या हम वास्तव में हार  जाते है क्या कारण है कि हम लाख कोशिश के बाद भी असफल हो  रहे है /
क्या जब हम असफल होते है तब हमे कुछ नहीं मिलता हर तरफ नाकामी होती है ? हम शून्य हो जाते है ? शून्य  पर आकार खडे हो जाते है ?हमे कुछ नहीं मिला ऐसा हम सोचते है ?
लेकिन ऐसा नहीं होता है हमे हर पल कुछ न कुछ मिलता रहता है लेकिन हम उन नकारात्मक सोच के कारण उन चीजों कि और ध्यान ही नहीं दे पाते है जो हमे असफलता के दिनों में मिलती है जो हमारी जिंदगी के महवपूर्ण दिन होते है / ”The Golden Period of Our Life is our Unsucsess Time” जब हम असफलता कि सीढ़िया चढ़ रहे होते है /
हर एक इन्सान जो आपके साथ उठता था बैठता था आपसे बात करता था आपके असफल होने के बाद से आप के पास बैठना पसंद नहीं करता उसके पास आपके पास बैठने के लिए टाइम नहीं है
आपकी बुराई चालू कर देते है /
आपकी हा में हा मिलने वाले अब आपसे बात नहीं करते क्यों कि आप कुछ नहीं है /
आपके अपने आप को निकम्मा कहते है /
क्या आप अपने आप को और अपनी क्सिमत को ख़राब मानते है /
अगर ये सही है तो आप असफल व्यक्ति कि लाइन में खडे है और आप उस लाइन  से आगे निकल कर दोबारा देखे  कि आप क्या देख पा रहे है .........
जो आप के पास बैठते थे आप से बाते करते थे आपकी हा में हा मिलते थे वो आज आपके पास नहीं आते है आप से दूर जा रहे है आपकी बुराई कर रहे है उनके पास आपके लिए समय नहीं है क्योंकि आप फेल हो चुके है /
जो आपके साथ उस समय नहीं है जब आपको उनकी जरुरत थी जब आप समस्या में थे जब आपको सही सलाह कि जरुरत थी तो आपके अपने न हो कर वो आपके सच्ये दोस्त न होकर और वो आपसे नहीं आपके पद आपके पैसो और आपसे मतलब के कारण जुडे थे ऐसे लोग असफलता के आने पर साफ नज़र आ जाते है / ये सर्फ असफलता ही दिखा  सकती है सफलता के दिनों में आप् किसी को भी नहीं पहचान  पायेंगे /
हो सकता यही लोग उस समय जब आप मुसीबत  में होते हौर बुलाते तब न आते तब लेकिन आज असफल होने के बाद ये तो मालूम पड़ गया कि ये इन्सान तो कभी  समस्या में काम आने वाला नहीं है ये है असफलता के दिनों में मिलने वाली चीजे जो हम देख नहीं पते / आप कुछ नहीं है आप असफल है आप डूबते हुए  सूर्य है / तो हा मैं हु क्योंकि  सूर्य डूबते समय भी उतना बड़ा होता है जितना बड़ा  वो उगते समय होता है / सूर्य डूबते समय भी उस रंग का होता है जिस रंग का उदय होते समय होता है / तो  मैं आज अगर डूब रहा हूँ तो मैं उग रहा हूँ मैं वैसा हु जैसा पहली बार काम  करने गया था और मेरा साथ किसी ने नहीं दिया था मैने खुद मुसीबतों से लड़कर सीखा और आज फिर मैं वैसा ही हु और फिर मैं उगूंगा और पूरा सूर्य जैसे उजाला फैलाता है मैं भी फैलाऊंगा अंधरे में मुझे कौन उजाला दिखाता है ये देखना है या मुझे अंधेरे में छोड़ जाते है जो सो सच के साथ नहीं है / और अँधेरे में वो ही जाते है जिन्हे उजाला खोजना होता है /
फिर भी मान लिजिए कि असफलता के दिनों में कुछ न मिला तो शुन्य तो मिला शुन्य यानि जीरो यानि गोल यानि प्रथ्वी जो गोल है उसमे बसने वाले गोल मोल लोगो तो दिखे / दूसरा शुन्य मिला तो कुछ तो मिला अब ये हमारें ऊपर है कि शुन्य  को हा कैसे यूज़ करते है 1 के साथ 2 के साथ या 9 के साथ ........ जो 10 20 90 बना सकता है फिर हम जीरो को कितनी बार यूज़ करते है 100 1000 100000 ये हमारें ऊपर है /
पंडित के दिए मंत्र दुआ और पहना गय ताबीज भी असफलता के दिनों में काम नहीं आता ,इससे ये मालूम पड़ता है कि ये कि अंधविश्वास से दूर रहो जो आपके बुरे वक्त को सही नहीं कर सका वो क्या कर पायेगा /
असफलता  के दिनों में भी सकरात्मक सोच बनाय रखे आप अपने ईश्वर खुद बने आप अपने आप को खुद देखे कि आप ने क्या किया असफल होने  के पहले कि असफल क्यों हुए /
ईश्वर ने हमारे शारीर में दो हाथ दो पैर दो आंख दो कान दिए है /जो क्रमशः दाहिने और बाएँ और होते है /
दांया ----------Right...........सीधा..........सही
बांया..............Left..............उल्टा........गलत
यही जीवन का सूत्र है हमारी सोच और हमारे आस पास वालो कि सोच यहाँ तक ही जाती है कि आप का सीधे हाथ से ही काम कर सकते है और जो दिख रहा है अगर आपने कोशिश करके भी लेफ्ट हैण्ड से लिखा है तो भी उन्हे राईट हैण्ड से लिखा ही दिखेगा / मतलब इसका ये है कि अगर हम जो सही कर  रहे है जो हम सामने से दिख रहे है वही लोगो को दिखाई पड़ता है हम पीठ के पीछे यानि छुप कर क्या करते है ये किसी को नहीं मालूम होता है जो लेफ्ट हैण्ड करता है जो उल्टा है हमारे चरित्र का जो गलत है /
अब असफलता के दिनों में अपने  उन पालो को याद करे जो समय अपने अकेले बिताया जिसके बारे  में आप और सिर्फ आप ही जानते है आप के वो काम जो सिर्फ आप ने किये जिनको आप ही जानते है सोचे क्या वो चीजे आपने किसी को बताई नहीं क्यों क्योंकि वो गलत थी / उन पालो को जो अपने गलत बिताया याद करे मज़ा आयेगा और असफल क्यों हुए पता लगेगा / जब भी  हम असफल होने बाद  सफलता वाले दिनों में जी रहे होते है तो हमे अपने वो पल याद करने चाहिए जब हम असफल थे तब महसूस होगा जब इतनी मुसीबत और कठनाई के दिनों में हौसला बनाए रखा तो ये क्या दिन है अब तो सब कुछ हमारे अनूकुल है अब तो जीत जायेंगे हम हम अगर साथ है /
 मतलब  अपना साथ हमे खुद अपने आप को देना है अपना ईश्वर हमे खुद बनाना है / हम ही अपनी किश्मत और अपने असफलता को सफलता में बदल सकते है /
जीत जायंगे हम अगर हम साथ है
जिंदगी हर पल एक नई सोच है
जिंदगी हर पल एक नई खोज है
लड़ेंगे हम भिड़ेंगे हम असफलताओ से
जीतेंगे हम जितना है हमे
जीत जायंगे हम अगर हम साथ है



Posted By Ashish TripathiWednesday, September 04, 2013