कुंडली में बाधक ग्रह: पहचान, प्रभाव और अचूक निवारण
ज्योतिष शास्त्र में कई बार ग्रह उच्च या शुभ भाव में होने के
बावजूद अपेक्षित फल नहीं देते। इसका एक मुख्य कारण उस ग्रह का 'बाधक' होना हो सकता है। बाधक
ग्रह वह है जो कार्यों में अदृश्य अड़चनें, बीमारी और मानसिक क्लेश उत्पन्न करता है।
1. कैसे पहचानें अपना बाधक ग्रह?
बाधक ग्रह का निर्धारण आपकी लग्न राशि की प्रकृति के आधार पर होता है:
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लग्न का प्रकार |
राशियाँ (नंबर) |
बाधक भाव |
बाधक ग्रह (उदाहरण) |
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चर लग्न |
1, 4, 7, 10 |
11वाँ भाव |
मेष लग्न के लिए शनि |
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स्थिर लग्न |
2, 5, 8, 11 |
9वाँ भाव |
वृष लग्न के लिए शनि |
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द्विस्वभाव लग्न |
3, 6, 9, 12 |
7वाँ भाव |
मिथुन लग्न के लिए गुरु |
विशेष तर्क: बाधक ग्रह तब अधिक घातक हो जाता है जब वह 6वें, 8वें या 12वें भाव के स्वामी
(दुस्थानेश) के साथ संबंध बनाए। यदि बाधक ग्रह केंद्र या त्रिकोण में हो, तो वह अपनी बाधा डालने की
शक्ति (Chesta Bala) में अधिक बलवान होता है।
2. विशेष तांत्रिक उपाय: 108 ग्राम दही का मिश्रण
भगवान शिव 'काल के भी काल'
हैं, इसलिए ग्रहों की बाधा दूर
करने के लिए अभिषेक विधि सर्वोत्तम है। यहाँ दी गई 108 ग्राम की विधि गणितीय और आध्यात्मिक रूप
से महत्वपूर्ण है।
विधि की तैयारी:
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कुल 108
ग्राम दही लें।
·
संबंधित बाधक ग्रह की
सामग्री को दही में मिलाएं (ध्यान रहे कुल वजन 108
ग्राम से अधिक न हो)।
·
यह उपाय संबंधित ग्रह के वार को और उसी ग्रह की होरा (Hora) में करना अनिवार्य है।
पूजन प्रक्रिया (त्रि-अभिषेक
विधि):
1.
प्रथम चरण: दही का एक तिहाई भाग शिवलिंग पर अर्पित करें, फिर गंगाजल से स्नान
कराएं।
2.
द्वितीय चरण: पुनः दूसरा भाग अर्पित करें और गंगाजल से शुद्ध
करें।
3.
तृतीय चरण: अंतिम भाग अर्पित कर पूर्ण स्नान कराएं।
अभिषेक के दौरान बाधक दोष दूर करने की प्रार्थना मन ही मन दोहराते
रहें।
3. ग्रह अनुसार सामग्री एवं पुष्प
तालिका
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ग्रह |
दही में मिलाने वाली वस्तु |
अर्पित किए जाने वाले पुष्प (12 संख्या) |
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सूर्य |
जावित्री चूर्ण |
लाल पुष्प (गुड़हल/गुलाब) |
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चन्द्र |
केवल शुद्ध दही |
सफेद पुष्प (चांदनी/मोगरा) |
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मंगल |
शहद |
लाल पुष्प |
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बुध |
गाय का घी |
हरे पुष्प या बिल्वपत्र |
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गुरु |
केसर और हल्दी |
पीले पुष्प (गेंदा) |
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शुक्र |
गुलाब जल |
सफेद सुगंधित पुष्प |
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शनि |
सरसों का तेल |
नीले/काले पुष्प (अपराजिता) |
तार्किक विश्लेषण (Scientific & Logical View):
·
108
की संख्या: ज्योतिष में 27 नक्षत्र और उनके 4 चरण होते हैं ($27 \times 4 = 108$),
जो संपूर्ण ब्रह्मांड का
प्रतिनिधित्व करते हैं। 108 ग्राम का माप ब्रह्मांडीय ऊर्जा को संतुलित करने
का प्रतीक है।
·
दही का आधार: दही शुक्र और चंद्रमा का कारक है, जो शीतलता और सौम्यता
प्रदान करता है। बाधक ग्रह की 'क्रूरता' को शिव तत्व और दही की सौम्यता से शांत किया
जाता है।
·
होरा का महत्व: किसी विशेष ग्रह की होरा में किया गया कार्य
सीधा उस ग्रह की ऊर्जा चक्र (Energy Cycle) को प्रभावित करता है।
यह उपाय न केवल सरल है, बल्कि बाधक ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा को
सकारात्मकता में बदलने की क्षमता रखता है। यदि आपकी महादशा या अंतर्दशा कष्टकारी
चल रही है, तो यह प्रयोग रामबाण सिद्ध हो सकता है।










नमस्कार मैंने आपकी पोस्ट पढ़ी बहुत अच्छी लगी आपका बहुत-बहुत शुक्रिया मेरा नाम विपर्ल शर्मा है और जन्म तारीख है 29 अगस्त 1954 समय है 22:56 ,Amritsar Punjab
ReplyDeleteइस वक्त मुझे चोट लगी हुई है तो मैं चल फिरने में असमर्थ हूं अब ठीक हूंगा
ReplyDeleteगुरु देव प्रणाम आपके द्वारा दी गई जानकारी बहुत उपयोगी है ।मेरी जन्मतिथि 4-10-1961 पर 9.35 सुबह स्थान पडरौना up है । मै oct 2012 से बहुत परेशान एवं बेरोजगार हू । मुझे क्या करना चाहिए कृपया मार्गदर्शन देने की कृपा करे ।
ReplyDeleteGuruji, thanks for the important article and my dob is 2nd Oct 1977, morning 7.07 Am in Mumbai. I m tensed n worried since 2019 related to job n financial problem now my parents health n my health since 2020 so pls tell me which grah is bandhan what remedies do I do to resolve health, job n financial issues. I hv asthma, allergy and eye burning issues since 2020
ReplyDeletePranaam guruji mera makerlagna me kya upay karneaa
ReplyDeleteSir ji pranam meri singh lagn ki kundali he mangal navmesh hokar 2nd house me 28 degree ka h ashtam bhav me chandra shani h mahadasha bhi mangal ki chal rahi kripya upai bataye aapki badi meharbani hogi.
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