
रियल्टी शोज़ की चपेट में बचपन
आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई आगे निकालने की होड़ में भाग रहा है / शायद भागना भी चाहिए क्योकि जब हम आगे जायेंगे तभी कुछ हासिल भी होगा लेकिन ये क्या सही है की जब हम खुद कुछ नहीं कर सके तो अपने सपनो और जरुर्त्तो को पूरा करने के लिए उस दौड़ में अपने बचो को दुदा दिया ? ये तो सभी जानते है की दक्का देकर चलाया गया साईकिल का पहिया भी कुछ दूर तेज़ चलने के बाद गिर पड़ता है -क्या यही जिंदगी है ?
मैं ये इसलिए...