भारत माँ के नारों से गूंज रहा हिमालय था
चौक चौराहो पर घूम रहा टोला दीवानो का था।
माँ के आंचल को लपेट सोया सैनिक दीवाना था
देश के लिए बलिदान दिया वो भाई हमारा था।
मौत को डराकर बांधे अपने बाजुओ में जो
रोशन करता नाम एक माँ का नही देश का वो ।
पता नही सैनिक की शहादत पर रोते है
वो तो खुशनसीब है जो माँ के आँचल से लिपटे है।
कौन कहता है सैनिक वीर गति को प्राप्त हुआ
वो तो लाखों में था जो अपनी माँ से मिला।
माना कि हम सभी देश भक्त है
पर वो तो माँ की सेवा में अभी भी मस्त है।
मौत भी रुककर झुककर सोचती होगी
इन वीरो की माँ किस दूध से इन्हें पोसती होगी।
एक ओर धरती...