Friday, December 24, 2010

प्याज़ और लहेसून पर डकैती .....

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कानपुर क्या पुरे देश में एक बार फिर से प्याज़ सहित अन्य चीजों के दाम आसमान छुने लगे है और आम आदमी की पहुच इन चीजों से दूर होती जा रही है .. और अगर सत्ता पक्षमें जो भी पार्टी हो लेकिन विपक्ष में बैठी अन्य पार्टिया अपना विरोध प्रदर्शन उनके खिलाफ करना चालू कर देती है और नायब तरीके भी ढूँढ निकलती है शायद इनके पास कोई वैकल्पिक अनुवादों के लिए क्लिक करें">क्रिएटिव आदमी रहता है तभी तो नए नए तरीके हमेशा निकाल लाते है ..
अब कानपुर से सपा के विधायक इरफ़ा सोलंकी को ही ले लीजिये उन्होने भी विरोध का नायब और अनोखा तरीका ढूँढ निकला ..
कल शाम 3 बजे के बाद सपा कार्यालय नवीन मार्केट से इरफ़ान सोलंकी का जुलुस लाव लस्कर के साथ आरम्भ हुआ और देखते ही देखते प्याज और लहेसून और अन्य सब्जियों को इरफ़ान सोलंकी जैसे ही गाड़ी पर लेकर बैठे वैसे ही उनके चारो ओर अस्त्र शस्त्र धारी कमांडो आकर खडे हो गय पहले तो लोगो को समझ ही नहीं आया की अचानक इरफ़ान सोलंकी की इतनी सुरक्षा क्यों बढ गई है लेकिन कुछ देर बाद ही मामला समझ में आया और इरफ़ान सोलंकी ने बताया की ये मेरे लिए नहीं है अगर प्याज़ और अन्य सब्जियों के दाम इस तरह ही बदते रहे तो कही इन पर डकैती न पड़ने लगे सो इनकी सुरक्षा व्यवस्था भी तो करनी पड़ेगी सो इन की सुरक्षा के लिए ही ये कमांडो लाया गए है ..
और नारे बजी करते ही इरफ़ान सोलंकी बड़ा चुरह हिओतेय ही पंजाब अब्द सिंध बैंक के पास पहुच कर नारे बजी करने लगे फिर लोगो को आश्चर्य हुआ तो बताया गया की जब सब्जिय इतनी महेंगी होंगी तो उनको लाकर में भी रखन पड़ेगा इशलिये इनको बैंक के लाकर में रखने के लिए लाकर खुलवाने आया हु कुछ देर बाद ही बैंक मंजेर ने फॉर्म लाकर दिया और इरफ़ान सोलंकी ने पंजाब एंड सिंध बैंक में लाकर भी खुलवा दिया ...
कुल मिलाकर सब्जियों या अन्य चीजों के दम बड़े लेकिन नेताओ और राजनितिक पार्टिया तो सिर्फ विरोध प्रदर्शन करके अपना काम कर लेती है लेकिन आज तक किसी के भी विरोध प्रदर्शन के बाद दम काम नहीं होते है ...

Posted By Ashish TripathiFriday, December 24, 2010

जहा लोग पीते है खून का MILKSHAKE.......

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केन्या ओर तंजानिया के कुछ आदिवासी गाव ऐसे भी है जहा लोग शुबह ओर
शाम में खून का जूस पीते है.. वो भी जिन्दा जानवरों का जो की इनकी
दिनचर्या का हिस्सा है ..जो की झोपड़ पट्टियों में ओर कच्चे मकानों में
रहते है ओर अपना ज्यादा तर समय जानवरों के साथ ही बिताते है..जो की एक
प्रकार के चारवाह की तरह होते है ...जो की अपने धन को गाय के रूप में
देखते है यानि इन गावों में गौ सेवा ओर उन्हे पालने का कम ही सबसे ज्यादा
होता है जो की इनकी रोज़ी रोटी का हिस्सा है...गाव में जितनी ज्यादा गाय
आपके पास होगी आप उतने ही अमीर कहलाओगे ...इनका मुख्या भोजन दूध ओर मांस
ही है जिस पर की ये निर्वाह है ..खास बात ये है की ये सीधे जानवरों के
शरीर से खून निकल कर पीते है ..

Posted By Ashish TripathiFriday, December 24, 2010

दबंग का अंत

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कानपुर से सटे घाटमपुर गाव में एक दबंग का अंत वहा की जनता ने ही कर दिया . दबंग का नाम राजू (25 ) था जो की एक इनामी बदमाश था और उसके ऊपर लूट हत्या पुलिस के साथ मुटभेड और अपरहण अवैध वसूली हत्या के प्रयास सहित कई मामले दर्ज थे ..मौके पर पहुचे कोतवाल ऐ . एन राय और सी.ओ प़ी प़ी सिंह मौके पर पहुचे और उन्होने बताया की ...बदमाश राजू का मूल निवास घाटमपुर के भद्रस गाव में है और कुछ दिनों पहले ही वो जेल से छुट कर आया था और अपने पुराने काम अवैध वसूली में फिर से लिप्त हो गया और और करीब 2-3 महीने पहले ही बदमाश राजू ने गाव के ही अध्यापक निर्मल कुशवाहा से रंगदारी वसूलने की कोशिश की लेकिन वो इसमे सफल नहीं हो पाया और उसका निर्मल कुशवाहा से झगड़ा भी हुआ . ..19 दिसम्बर को बदमाश राजू और अध्यापक निर्मल कुशवाहा का फिर से आमना सामना हो गया जिस पर राजू ने निर्मल कुशवाहा को गालिया देना चालू कर दिया और फिर से वसूली की बात कहने लगा जिस पर एक बार फिर से निर्मल कुशवाहा ने एतराज़ जताया और उसको वहा से चले जाने के लिए कहा लेकिन राजू इस बार कुछ और ही सोच कर आया था... और राजू ने फरसे से उनपर जानलेवा हमला बोल दिया .. दोनों के झगड़े को ग्रामीण देख ही रहे थे तभी गाव वालो ने राजू को निर्मल कुशवाहा के ऊपर हमला करते हुए देखा तो उसको ललकरा जिस पर उसने गाव वालो की ओर फिर से हमला बोलना चाहा लेकिन इस बार गाव वाले कुछ और ही इरादा किये ही थे और उन्होने राजू की धमकियों को दरकिनार करे हुए उसको दौड़ा लिया जिस पर राजू वहा से गलिय देता हुआ भगा और ग्रामीणों का हौसला इस बात पर बाद गया और उन्होने राजू को दौड़ा कर पकड़ लिया और उसके ही फरसे से उस पर हमला बोल कर उसके टुकडे कर दिए . और एक दबंग के आतंक का अंत कर दिया . वही निर्मल कुशवाहा को गंभीर हालात में एक निजी नर्सिंग होम ले जाया गया लेकिन ज्यादा खून बह जाने के कारण उनको सी एच सी घाटमपुर ले जाया गया जहा भी उनको कानपुर के लिए रिफर कर दिया गया था खबर लिखे जाने तक निर्मल कुशवाहा की हालात नाजुक बनी हुई थी ..

Posted By Ashish TripathiFriday, December 24, 2010

जेमनी सर्कस शरू होने से पहले ही बंद...

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कानपुर के शास्त्री नगर इलाके के सेंट्रल पार्क में मशहूर जेमनी सर्कस कई दिनों से अपने करतब कानपुर वाशियों को दिखाने की तैय्यारी कर रहा था लेकिन आज जब जेमनी सर्कस का उद्घाटन होना था ठीक उसके एक दिन पहले ही सर्कस में काम करने वाली लड़की नेहा ने जेमनी सर्कस पर बंधक बनाने के आरोप लगाकर सर्कस शुरू होने से पहले ही बंद करवा दिया ...
सुचना मिलते ही की जेमनी सर्क में लडकिया बंधक बनाकर रखी गई है काकादेव पुलिस के होश उड़ गय और आनन फानन में पुलिस मौके पर पहुची और जाँच पड़ताद करके सर्कस को फ़िलहाल बंद कर दिया गया है ..
वाकया कुछ यु हुआ की 10 वर्षीय नेहा जो की कल शाम को अचानक सेंट्रल पार्क से बदहवाश हालात में भाग रही थी और जोर जोर से रोते हुए भागती जा रही थी .. तभी आस पास के लोगो ने उसको पकड़ कर कारण पूछा तो लड़की ने बताया की वो जेमनी सर्कस में काम करती थी जहा पर उसको बंधक बना कर रखा गया था आज मौका लगने पर वो वहा से भाग आई है ...
बकौल नेहा के वह मूलरूप से झासी की रहने वाली है जहा बड़ा गाव में माँ ने दूसरी शादी कर ली और वह पिता के साथ रहती थी गाव में ही जेमनी सर्कस करीब चार महीने पहले ही आया था जहा पर वो अपनी सहेली के साथ घुमने गई थी और वहा वह खो गई रोते ही उसको सर्कस के मैनेजेर ने देखा तो अपने पास ही रख लिया और तब से उसको अपने साथ ही रखे ही है .. यहाँ पर कई और लडकियों को बंधक बना कर रखा हुआ है गलती करने पर कोडे से मारते है काफी काम करने के बाद भी कम खाना देते है ..कुछ दिन पहले उसने गाव जाने की बात कही जिस पर उसको काफी पीटा गया और नेहा को सर्कस में ही काम करने वाले राजवीर और सोनिया के साथ कर दिया गया जो की पति पत्नी है और उसको रोज़ ही पिटते थे ...
उन लोगो की पिटाई से ही कुछ दिन पहले दार्जिलिंग की लड़की का सर फट गया था ...काकादेव थानाध्याच ने बतया की नेहा नाबालिग है और इस वजह से उसकी बयान पर किसी भी प्रकार की रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा सकती है लेकिन हमने सुचना के अधार पर सर्कस के मैनेजेर और राजवीर और संगीता को हिरासत में ले लिया गया है ..

Posted By Ashish TripathiFriday, December 24, 2010