Sunday, April 26, 2020

प्लाज़्मा थेरैपी में अग्रणी रहा है भारत

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भारत कोरोना महामारी से कम संसाधनों और बेहतर चिक्तिस्य सुविधाएं न होने पर भी विश्व के अन्य देशों के मुकाबले काफी हद तक इस महामारी को काबू करने में सफल है और यही विश्वास भी किया जा सकता है कि जल्द ही भारत प्लाज़्मा थेरैपी या वैक्सीन के जरिये इस बीमारी को समुलतः नष्ट करने में सफल हो जाएगा क्योंकि

इतिहास में कई महामारीओं को भारत अपनी जीवनशैली या चिकित्सक प्रणाली से परास्त कर चुका है ऐसा ही एक गर्व करने योग्य किस्सा है सन 1710 में इंग्लैंड के डॉक्टर ऑलिवर नामक एक अंग्रेज चिकित्सक भारत आया और बंगाल में घूमा उसके बाद अपनी डायरी में उसने लिखा मैंने भारत आकर पहली बार देखा कि चेचक जैसी महामारी को भारतवासी कितनी आसानी से ठीक कर लेते हैं ।
चेचक तब यूरोप में महामारी थी और इससे लाखों यूरोप वासी मारे जा चुके थे डॉक्टर अलीगढ़ ने आगे लिखा यहां लोग चेचक के टीके लगाते हैं जो एक सुई से लगाया जाता है 3 दिन तक व्यक्ति को बुखार आता है जिसे ठीक करने के लिए पानी की पट्टियां सिर पर रखी जाती हैं फिर व्यक्ति ठीक हो जाता है एक बार जिसने टीका लगवा लिया वही जिंदगी भर चेचक से मुक्त रहता है ।
डॉक्टर अलीगढ़ ने भारत से लंदन पहुँच कर वहां डाक्टरों के डॉक्टरों की सभा बुलाई और भारत में चेचक के टीके की बात बताई वहां के दिग्गज डॉक्टरों को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ तब डॉक्टर ऑलिवर ने सभी दलों को अपने खर्च पर भारत लाए। 
 यहां चेचक का टीका लगाते लोगों को दिखाया । डॉक्टर ने भारतीय वैद्यो से पूछा कि इस टीके में क्या है। वैद्यो ने बताया कि जो लोग चेचक के रोगी होते हैं हम उनके शरीर का थोड़ा सा पस निकाल कर सुई की नोक के बराबर पस स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करा देते हैं इससे उस व्यक्ति का शरीर  इस की रोग से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता धारण कर लेता है

 यह पश्चिमी देशों के डॉक्टर्स के लिए एकदम नई बात थी। डॉ. ऑलिवर ने डायरी में आगे लिखा- 'जब मैंने वैद्यों से पूछा
कि आपको यह सब किसने सिखाया? तब वे बोले कि हमारे गुरू ने, उन्हें उनके गुरू ने और उनके गुरू को उनके भी गुरू ने। अर्थात मेरे अनुसार कम से कम डेढ़ हजार (1500) वर्षों से ये टीका भारत में लगाया जा रहा है।' अंत में डॉ. ऑलिवर
ने लिखां- हमें भारत के वैद्यों का अभिनंदन करना चाहिए कि वे नि:शुल्क रूप से घर-घर जाकर लोगों को टीका-लगा रहे हैं।' किंतु आपको यह जानकर आश्चर्य और क्षोभ होगा कि आज दुनिया एडवर्ड जेनर (सन्‌ 1749-1823) नामक अंग्रेज चिकित्सक को चेचक के टीके का जनक मानती है।


 

Posted By KanpurpatrikaSunday, April 26, 2020