क्यों पसरा है सन्नाटा
आया है माहौल चुनावी इस बार सन्नाटे में ...
द्वार द्वार न झंडे है न पोस्टर बैनर बिल्ले है
न ही नेता दिखते शोर मचाते न दिखते चमचे है
क्यों पसरा है सन्नाटा बाजारों में और गलियारों में
क्यों पकड़ा जाता बीच चौराहों पर काला धन सफ़ेद कपड़ो में
सभी पहने है सफ़ेद कपडे काले मन और तन पर
सभी मिटाएगे भ्रस्टाचार खा के कसम ये कहते है
क्यों पसरा है सन्नाटा बाजारों में और गलियारों में
इसने लूटा उसने लूटा इस बार लूटेंगे हम भी
इतनी बार बने हो वेबकुफ़ इस बार हमसे भी बन के देखो
नहीं है यू. पी....