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Monday, October 15, 2018

वस्तु उपाय

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☆☆ ज्योतिष-झरोखा - 105 ★ नक्षत्र + निवास •• आजकल समय और परिस्तिथियाँ ऐसे हो गए हैं कि - अपना घर लेना और उसे अपनी इच्छा अनुसार बनाना आसान काम नहीं है । मत्स्य-पुराण, भविष्य-पुराण और स्कन्द-पुराण में वास्तु विषयक सामग्री मिलती है । परंतु महानगरों व् नगरों में सभी को वास्तु का लाभ मिल जाये, ऐसा असंभव सा होता जा रहा है । अथवा समस्या होता जा रहा है । शहरों की स्थिति ऐसी हो गई है कि - जहाँ जगह मिले निवास कर लो । ऐसे में वास्तु-सिद्धांत कैसे अपनाये जायें । अगर कोई किराये पे रहता है तो ये और भी जटील समस्या हो जाती है । व्यक्ति सदा इस बात से चिंतित रहता...

Posted By KanpurpatrikaMonday, October 15, 2018

Saturday, September 22, 2018

राजनीति का आनंद

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राजनीति का ''आनंद '' प्रदेश में नई सरकार आने के बाद नौकरियों में चली आ रही आपाधापी ख़त्म सी हो गयी थी । इसी बीच हमारी सालों से चली आ रही सरकारी नौकरियों की तैयारी को मानो पंख से लग गए हो । एकदम साफ और निष्पछ ब्यवस्था से पढने-लिखने वाले छात्रों को एक नई राह दिखाई थी । हमने भी पुलिस में दरोगा के लिए फॉर्म भरा और लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के बाद हमारा चयन दारोगा के पद पर हो गया । कुछ दिनों में हमे जोइनिंग भी मिल गयी।  अब हमारे परिवार में...

Posted By KanpurpatrikaSaturday, September 22, 2018

Wednesday, September 12, 2018

आत्महत्या दोहरे चरित्र की!

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आत्महत्या दोहरे चरित्र की!  आजकल आत्महत्या के कई सारे मामले नित्य-न्यूज़ पेपर्स की सुर्खियाँ बनते है आत्महत्या के कारण भी बड़े अजीब इत्तेफाक रखते है जैसे 90% अंक लाने वाला छात्र आत्महत्या करता है बेरोजगारी से परेशान 24 वर्षीय छात्रा आत्महत्या करती है एक जिन्दा दिल IPS अधिकारी घरेलु झगडे से परेशान हो आत्महत्या जैसा कदंम उठाता है । ऐसे कई सारे मामले सामने आते है मनोवैज्ञानिक से लेकर मोटिवेशनल स्पीकर तक अलग अलग पक्ष रखते है लेकिन वास्तविक...

Posted By KanpurpatrikaWednesday, September 12, 2018

Friday, September 7, 2018

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कल श्रावण कृष्‍ण चौदस है। सभी क्‍लेष दूर होना और इच्‍छापुर्ती क लिए महत्‍वपूर्ण मंत्र दे रहा हूँ । ओम नमो गोयम्‍मस्‍स अख्खिन महाण्‍णस्‍स लब्‍धी संपन्‍नस्‍स भगवान भाष्‍करीं -हीं श्रीं वृध्‍दय वृध्‍दय अणय अणय मम सर्व अरिष्‍ट निवारय निवारय मम सर्व कार्य सिध्‍दम कुरु कुरु स्‍वाहा । ओम श्री गौतम स्‍वामी नमो नम: यह मंत्र कल शुरु करे और जब आप को समय मिले तब इसका पठण किजीये । विजयानंद पाटील, माताराणी कामाख्‍यादेवी योनीपूजक भक्‍त, अर्धनारीनटश्‍वर स्‍वरुप, श्री वेताळमहाराज सुपुत्र, श्रीमद उच्छिष्‍ठमहागणपतीतथा श्रीमद उच्छिष्‍ठचांडालिनी मातंगी, सभी देव देवता...

Posted By KanpurpatrikaFriday, September 07, 2018

Tuesday, September 4, 2018

शमशान की धरती से पूछो

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।। शमशान की धरती से पूछो ।। दिल में कितना दर्द छुपा है मुस्कुराते हुए चेहरे से पूछो सुकून की रोटी कैसे खाता मजदूर उसके बाजू से पूछो बेटियों को कैसे पाला है उस मां के हाथों से पूछो कैसे बेदर्द नजरें नोचती है जिस्म को अकेले में उस लड़की से पूछो कैसे बिना दाग  विदा किया लड़की को उस बाप के कलेजे से पूछो किसको गिराते हैं और किसको उठाते हैं यह समाज के ठेकेदारों से सीखो कैसे चलते चलते  जिंदगी राख बनती है उस शमशान की धरती से पूछो...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, September 04, 2018

Sunday, September 2, 2018

RAHU KETU and MUSLIM CONNECTION

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RAHU KETU and MUSLIM CONNECTION Today I will show an interesting role of Rahu and Ketu with muslim connection. First of alI  I will give you some examples 1.  Shri Raj kapur was in madly love with Nargis ji. Raj kapur has Cancer lagna with Moon and Rahu in it. Ketu is in 7th house.  (Moon with Rahu and Ketu in 7th created madly  love with muslim co-star.) 2.  Sharmila Tagore married to famous cricketer Mansur ali khan Pataudi. Sharmila ji is Leo lagna and lord of 7th house Saturn is with close Ketu. (Strong connection of...

Posted By KanpurpatrikaSunday, September 02, 2018

Friday, August 31, 2018

माँ तुम अब भी रोती हो

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माँ तुम अब भी रोती हो क्यों दुःखो के बोझ ढोती हो । वो कड़वी यादे और वो वादे तुम्हे सताते है पता है मुझे तुम आज भी रोती हो जब तुम्हे खाना नही मिलता है तुम तब भी रोती थी जब उसको खाना नही मिलता था। माँ तुम ऐसी क्यों हो आज भी देती आशीष हो जबकि वो आज भी इस रिश्ते को ढोता है उसकी नज़र में तुम मां नही बोझ हो पता नही इस बात का तुमको कब बोध हो। माँ  कभी कुमाता भी नही होती फिर ये पूत कपूत क्यों बन जाते है जबकि उसी कोख से जन्मी पुत्री भी कुपुत्री न बनी। क्यों माँ क्यों माँ बता न माँ। पंडित आशीष त्रिपाठ...

Posted By KanpurpatrikaFriday, August 31, 2018

Friday, August 17, 2018

जिसको गले लगा न सके

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जिसको गले लगा न सके वो मित्र तो न थी लेकिन शत्रु सी थी वो हमसफर तो न थी लेकिन मंज़िल थी चेहरे में हंसी तो थी लेकिन दिल में ख़ुशी न थी वो सामने तो थी पर गले न लगा सके वो आती तो सबके सामने लेकिन दिखती न थी उसको गले लगाया तो लोग बिछड़ जाते । लोगो को गले लगाते तो उसको बुरा लगता । इधर ज़िन्दगी थी औऱ उधर मौत लेकिन मैं ज़िन्दगी को गले लगा न सका...

Posted By KanpurpatrikaFriday, August 17, 2018

Monday, August 6, 2018

ये लोकतंत्र ये कौन सा मंत्र है

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ये लोकतंत्र ये कौन सा मंत्र है यहाँ अपराधी नेता है और नेता अपराधी यहाँ बोलने का हक सबको है पर बोलता कौन है मुजफ्फर नगर और देवरिया बस दो बदनाम है और पता नही कितने छुपे हुए कितने नाम है समाज सेवी है मवेशी जो बेचते है इंसानो को गरीब और लाचारों को जो भागे थे घर से बचाने को इज़्ज़त उनका ही सौदा करके किया है इंसानियत को बेइज़्ज़त। सच बताना क्या तुमने माँ का दूध पिया था क्या एक पल भी उसको जिया था लेकिन तुम क्या बताओगे तुम उस दूध को भी बेच खाओगे। गलती उसकी ही थी जिसने तुम्हे जन्म दिया तुमने उसके दिल मे ही अनगिनत जख्म दिया। इज़्ज़त शोहरत पैसे के लिए ही तुम...

Posted By KanpurpatrikaMonday, August 06, 2018

Friday, August 3, 2018

साहित्य में सेंध लगाता सोशल मीडिया ! रेखा श्रीवास्तव

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साहित्य में सेंध लगाता सोशल मीडिया ! कल के स्टेटस पर सलिल वर्मा भाई ने कहा कि इस पर तो आलेख आना चाहिए तो प्रस्तुत है :--सोशल मीडिया जिसने हर उम्र के लोगों को अपना दीवाना बना रखा है , वह सिर्फ लोगों को ही नहीं बल्कि साहित्य में भी सेंध लगा रहा है।  इसने मानवीय संबंधो , लेखन , साहित्य सृजन और पठन पाठन को बुरी तरह से प्रभावित का रखा है।  हमारे आपसी सम्बन्ध घर परिवार , पति पत्नी , माँ बच्चों के मध्य सीमित हो गए हैं।  किसी को किसी की चिंता  नहीं है और इसी लिए मानवीय संबंध ख़त्म होते चले जा रहे हैं।  किताबें लिखने के बजाय , पूरी...

Posted By KanpurpatrikaFriday, August 03, 2018

Saturday, July 28, 2018

ऐ ज़िन्दगी बता न ।

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ऐ ज़िन्दगी तू क्या है बता न कभी तेज़ तो कभी धीमी चलती है तेरे साथ मस्त कैसे चलू बता न दो चार मुलाकातों ने हमराह बना दिया जिसने जन्म दिया उसे बेगाना बना दिया क्यों ऐ ज़िन्दगी बता न लोग कहते है कि प्यार अँधा होता है लेकिन फिर क्यों प्यार देख कर होता है क्यों ऐ जिंदगी बात न ऊँगली पकड़ कर जिसने चलना सिखाया आज उसी को उंगली दिखा कर शांत करा दिया क्यों ऐ जिंदगी बता न...

Posted By KanpurpatrikaSaturday, July 28, 2018

Friday, July 13, 2018

माँ तुम हो क्या और तेरे बिन मैं हु क्या

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ज़िन्दगी कुछ धीमी सी है सांसे भी थमी सी है आज दिन भी उदास सा है वो मन्नते मुरादे और वादे ये सब आज क्यों याद है आते तुम हो तो ज़िन्दगी ज़न्नत सी लगती है माँ पर तेरे बिन ये मंदिर की मन्नत ही लगती है तेरे बिन उदास सा हूँ जज्बात तो है लेकिन खामोश सा हूं तुम्हारी वो सीख हिम्मत तो देती थी पर तेरे बिना माँ ये दुनिया पैर खीच लेती है इस दुनियां की भीड़ में अपने तो सारे है लेकिन इन सब का साथ आसमान के तारे हैं इनका मिलना जुलना अच्छा तो लगता हैं पर तुम बिन सब बेगाना सा लगता हैं तेरी वो डांट और छिपी हुई मुस्कराहट अच्छी लगती थी पर ये दुनिया वालो की मुस्कराहट...

Posted By KanpurpatrikaFriday, July 13, 2018