
ये सर्दी
कभी हसांती है कभी रुलाती
है
कभी डराती है कभी मौज
कराती है
ये सर्दी अज़ब रंग दिखाती है
ये सर्दी
कभी घने कोहरे में तो कभी
सर्द हवाओ से
कभी दिन में कभी रात में
अलग अलग रंग दिखाती है
ये सर्दी कभी सिगरेट के
धुएँ से
कभी शराब के पैग से
कभी गर्म धुप से कभी लकड़ी
के अलाव
से दूर भागती है
ये सर्दी अज़ब रंग दिखाती है
कभी गर्मी कभी बरसात
कभी सावन के दिनों की
कभी कुन्नु मनाली तो कभी
कश्मीर
की याद दिलाती...