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Wednesday, May 13, 2020

जिंदगी की रेल से मौत के सफर तक एक मजदूर की कहानी

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  जिंदगी की रेल से मौत के सफर तक एक मजदूर की कहानी बेशक जिंदगी चलती का नाम गाड़ी है लेकिन अगर यही गाड़ी किसी कारणवश कही जिंदगी गाड़ी रुक जाए तो जीना मुश्किल सा लगता है लेकिन कहते हैं कि समय बड़ा बलवान होता है और समय को देख कर कौन आया है ।यह भी सब जानते हैं कि कब रुकी हुई सी गाड़ी है सरपट दौड़ने लगे और कब दौड़ती हुई गाड़ी अचानक बंद हो जाए ।कहना गलत ना होगा कि सबको जीवन में एक मौका अपनी भूल सुधारने का जरूर मिलता है लेकिन कभी-कभी यही मोके कड़े अनुभव भी दे जाते हैं ।रोती हुई मां को यह कहकर अकेले छोड़कर परदेस चले जाना कि मुझे अपने जीवन...

Posted By KanpurpatrikaWednesday, May 13, 2020

Monday, May 4, 2020

जब कोरोना काल में भूत हुए क्वॉरेंटाइन

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 जैसा की सर्वविदित है वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से सभी प्रकार के कामकाज ठप पड़े हैं कहीं पर भी अगर नजर दौड़ आएंगे तो आवश्यक सेवाओं के अतिरिक्त सब रुका हुआ है। ऐसे में अगर हम शांत मन से 2 माह पीछे की जिंदगी या यूं कहें कि दौड़ती हुई जिंदगी पर नजर डालें तो समझ आएगा हम कहां और किन हालातों और आपाधापी में जिंदगी गुजार रहे थे ।मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों और चर्च में हजारों की भीड़ रोजाना दर्शनार्थ जाती थी लेकिन अब सब जगह सन्नाटा है प्रार्थनाएं और पूजा-पाठ तो हो रहा है लेकिन बगैर भीड़ के। ईश्वर सबके साथ है बगैर किसी आडंबर के ।वहीं अगर आडंबर की बात...

Posted By KanpurpatrikaMonday, May 04, 2020

सच्ची घटना : स्वार्थ और निस्वार्थ सेवा की

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हम सभी अपने जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक एक स्वार्थी चरित्र को अपने  साथ लेकर चलते हैं कि जैसे ही एक बच्चा बच्चा बड़ा होता है और जैसे ही जीवन जीने की समझ उसमे आती है वह स्वार्थी चरित्र उसे घेर लेता है ऐसा नहीं कि वह ऐसा करता है लेकिन हमारे समाज में ज्यादातर लोग ऐसा ही करते हैं और जैसा सब करते हैं वैसा मनुष्य चरित्र है तो हम भी करते है । अपने आसपास जैसा देखते हैं वैसा देश काल और परिस्थिति के अनुसार करने लगते हैं।मौजूदा समय प्रकृति द्वारा दिया गया एक ऐसा समय है जो हमें दोबारा न मिले अपने जीवन में शायद ।जहां हम अपने आसपास की घटनाओं को जैसे...

Posted By KanpurpatrikaMonday, May 04, 2020