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Thursday, December 17, 2015

पूरी हर होगी मनोकामना जाने क्या है तरीका

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मंत्रों के जप का सही तरीका ,पूरी होगी मनोकामना इस तरह मंत्रों का जप करें आपकी हर मनोकामना पूरी होगी भगवान राम ने माता शबरी के निवेदन पर उन्हें भक्ति का ज्ञान देते हुए कहा है कि 'मंत्र जप मम दृढ़ विश्वासा! पंचम भजन सो वेद प्रकाशा! अर्थात् मंत्र जप करना भी मेरी पांचवीं प्रकार की भक्ति है, ऐसा वेद भी कहते हैं। तात्पर्य यह है कि कोई भी प्राणी कल्याण कारक मंत्रों को उस मंत्र के योग्य जपनीय माला द्वारा...

Posted By KanpurpatrikaThursday, December 17, 2015

Tuesday, December 15, 2015

देशांतर संस्कार

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अब हम थोडा और आगे बढ़ेंगे | जैसे जैसे हम आगे बढ़ते हैं, वैसे वैसे हमारा वास्ता पंचांग और कैलेंडर से पड़ता जायेगा | अतः हमें पंचांग के भी कुछ अंगों से प्रत्यक्ष होना पड़ेगा | पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण, ये पांच अंग होते हैं इसीलिए इसे पंचांग कहा जाता है | हम इसमें से कुछ को पहले बता चुके हैं, जैसे वार कैसे आते हैं ? तिथि क्या होती है ? अब उस से आगे बढ़ते हैं | तिथि – चन्द्रमा की एक कला को एक तिथि माना गया है | अमावस्या के बाद प्रतिपदा...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, December 15, 2015

नवग्रहों की स्तिथि एवं विभिन्न पातालों का वर्णन

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नवग्रहों की स्तिथि एवं विभिन्न पातालों का वर्णन नारद जी ने कहा – कुरुश्रेष्ठ ! भूमि से लाख योजन ऊपर सूर्य मंडल है । भगवान् सूर्य के रथ का विस्तार नौ सहस्त्र योजन है । इसकी धुरी डेढ़ करोड़ साढ़े सात लाख योजन की है । वेद  के जो सात छंद हैं वे ही सूर्य के रथ के सात अश्व हैं । उनके नाम सुनो – गायत्री, वृहती, उष्णिक, जगती, त्रिष्टुप, अनुष्टुप और षडंक्ति – ये छंद ही सूर्य के घोड़े बताये गए हैं । सदा विद्यमान रहने वाले सूर्य का न तो कभी अस्त होता है और न ही कभी उदय होता है । सूर्य का दिखाई देना ही उदय...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, December 15, 2015

सौर मंडल

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सौर मंडल – सौर मंडल में ९ ग्रहों में अरूण ग्रह (यूरेनस), वरुण ग्रह (नेपच्यून) और यम (प्लूटो) को प्राचीन ज्योतिष में नहीं गिना गया है (ऐसा माना गया है कि इनसे आती हुई किरणें मनुष्य जीवन को बहुत प्रभावित नहीं करते या इनका प्रभाव नगण्य है | ) चंद्रमा और दो छाया ग्रह जिन्हें राहु, केतु माना गया है | राहु और केतु वास्तव में कोई वास्तविक ग्रह नहीं है बल्कि गणितीय गणनाओं से आई सूर्य और चंद्रमा कि कक्षाओं के मिलान बिंदु हैं | शुक्र और बुध, पृथ्वी...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, December 15, 2015

राशिचक्र

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राशिचक्र – सूर्य जिस मार्ग से चलता हुआ आकाश में प्रतीत होता है उसे कान्तिवृत्त कहते हैं | अगर इस कान्तिवृत्त को बारह भागों में बांटा जाये तो हर एक भाग को राशि कहते हैं अतः ऐसा वृत्त जिस पर नौ ग्रह घूमते हुए प्रतीत होते हैं (ज्योतिष में सूर्य को भी ग्रह ही माना गया है ) राशीचक्र कहलाता है | इसे हम ऐसे भी कह सकते हैं की पृथ्वी के पूरे गोल परिपथ को बारह भागों में विभाजित कर उन भागों में पड़ने वाले आकाशीय पिंडों के प्रभाव के आधार पर पृथ्वी के...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, December 15, 2015

राशिचक्र

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राशिचक्र – सूर्य जिस मार्ग से चलता हुआ आकाश में प्रतीत होता है उसे कान्तिवृत्त कहते हैं | अगर इस कान्तिवृत्त को बारह भागों में बांटा जाये तो हर एक भाग को राशि कहते हैं अतः ऐसा वृत्त जिस पर नौ ग्रह घूमते हुए प्रतीत होते हैं (ज्योतिष में सूर्य को भी ग्रह ही माना गया है ) राशीचक्र कहलाता है | इसे हम ऐसे भी कह सकते हैं की पृथ्वी के पूरे गोल परिपथ को बारह भागों में विभाजित कर उन भागों में पड़ने वाले आकाशीय पिंडों के प्रभाव के आधार पर पृथ्वी के...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, December 15, 2015