Saturday, December 19, 2020

कुण्डली में चंद्र की स्थिति दर्शाती है कि - आपके विचार कैसे हैं ?

Filled under:

• इन्सान के मन की संकल्प-शक्ति और ईच्छा-शक्ति - विचारों को जन्म देती है । ये विचार अच्छे भी हो सकते है और बुरे भी हो सकते हैं । फिर एक प्रक्रिया का जन्म होता है  - एक वैचारिक शक्ति का उदय होता है । इस वैचारिक शक्ति से शरीर मे थरथराहट पैदा होती है जो बढ़ती जाती है फिर एक लहर के रूप में परिवर्तित हो जाती है और धीरे-धीरे इसमे दबाव पैदा करने की शक्ति आ जाती है । ये दबाव व्यक्ति को कर्म करने को प्रेरित करता है । इससे व्यक्ति उस दिशा में कर्म करता है - जैसी उसकी वैचारिक शक्ति होती है । यहीं से ये शक्ति शरीर की आवश्यकता के अनुसार ऊर्जा के विभिन्न रूपों में प्रकट होती है । फिर - ये ऊर्जा शरीर पर प्रभाव डालने लगती है । 
विभिन्न रूपों में ऊर्जा का एक रूप परमाणु अथवा अणु के रूप में प्रकट होता है । जिससे शरीर के ऊतक अथवा कोशिकायें बनती है और फिर इनसे शारीरिक अंग पुष्ट होते है अथवा नये अंग बनते है ।
अब - अच्छे विचार, रचनात्मक विचार और उन्नतिशील विचार इंसान को सुंदर, हष्ट-पुष्ट और सफल बनाते हैं । लेकिन - बुरे विचार, विध्वंसक विचार और नकारात्मक विचार इन्सान को असुंदर, रोगी और मलिन बनाते हैं । 
अपनी ऊर्जा को हम जिस रूप में उपयोग करेंगे उसका वैसा ही फल हमारे समक्ष प्रकट होगा । इसका जन्म हमारे विचारों से होता है ।
हमारे विचार - हमारे मन से उपजते है और मस्तिष्क में पनपते है । हमारे मन का कारक ग्रह - चंद्र है । कुण्डली में चंद्र की स्थिति दर्शाती है कि - आपके विचार कैसे हैं ? हमारी बुद्धी का कारक बुध है और कुण्डली में बुध की स्थिति दर्शाती है कि - हमारे विचार कैसे पनपते है । जब ये दोनों पीड़ित होते है - तभी मनोविकार पैदा होता है । जब - ये दोनों बलवान होते हैं - तभी व्यक्ति बुद्धीमान, सफल और आकर्षक होता है ।
जहाँ - बलवान चंद्र, व्यक्ति को व्यवहार कुशल और दुनियादारी में दक्ष बनाता है । वहीं - उसके विचारों को रचनात्मक और सुन्दर बनाता है - जिससे व्यक्ति उत्साहित रहता है और उसके शरीर मे प्रफुल्लित ऊतकों और कोशिकाओं का निर्माण होता है और व्यक्ति निरोगी रहता है । इसके विपरीत निर्बल चंद्र, व्यक्ति को निराश और हतोत्साहित बनाता और उसके अंतर्मन में मलिन तथा विध्वंसक विचारों का जन्म होता है - जिससे उसके शरीर मे निर्बल ऊतकों और कोशिकाओं का निर्माण होता है - जो अंत मे रोग का कारण बनते हैं ।
वैसे - तो चंद्र और बुध को बलवान बनाने के बहुत से उपाय हैं । 
जैसे - रत्न पहनना, पूजा-पाठ और मंत्रोउच्चारण करना, यंत्र स्थापित करना, इन दोनो ग्रहों से संबंधित खान-पान, रंग और जड़ी-बूटी का उपयोग करना - इत्यादि ।
लेकिन - प्राणायाम इसका सबसे बेहतरीन उपाय है । प्राणायाम करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और इससे कुण्डली में कर्क-राशि बलवान होती है - जिसका स्वामी चंद्र है । जब फेफड़े सशक्त होकर कार्य करते हैं - तो अधिक ऑक्सिजन को शरीर मे प्रवेश कराते है । ऑक्सिजन का स्वामी बुध है । बुध - चंद्र का पुत्र है । बाप, बेटे के लिये रास्ता तो बनाता ही है । निरन्तर प्राणायाम करने से मेटाबॉलिज़्म को बूस्ट मिलता है जिससे खाना सहज ही पच जाता है और शरीर हष्ट-पुष्ट बनता है । इससे पेट साफ होता है और छोटी-आँत ज्यादा लचीली हो जाती है - जिसका स्वामी बुध है ।
जब शरीर मे ऑक्सिजन की बढ़ोतरी होती है तब शरीर से कार्बन-डाइऑक्साइड विदा होने लगती है । कार्बन-डाइऑक्साइड - राहु है । जब राहु का प्रभाव कम होने लगे तो सहज ही मलिन, बुरे और विध्वंसक विचार कम हो जायेंगे । शरीर मे ऑक्सीजन और कार्बन-डाइऑक्साइड का अनुपात ही शरीर के रोगी और निरोगी होने को तय करता है ।
जब - पेट साफ हो, छोटी आँत लचीली हो और शरीर हष्ट-पुष्ट हो तो 'पिट्यूटरी-ग्लैण्ड' पीयूष-ग्रंथि हरकत में आती है । इसका स्वामी भी बुध है - ये हरकत में हो तो विचारों को उन्नतिशील ढंग से पनपने का मौका मिलता है । ये दाहिने कान के ऊपर और माथे के अन्तिम छोर पर होती है । इसकी हरकत फिर एक चमकीली नीली लहर को पैदा करती है जो पिनियल-ग्लैण्ड की ओर जाती है । पिनियल-ग्लैण्ड अथवा आज्ञा-चक्र का स्वामी चंद्र है । सूर्य भी आज्ञा-चक्र का स्वामी है - परन्तु को किसी और सन्दर्भ में है । बहरहाल, पिनियल-ग्लैंड से न्यूरॉन्स की सप्लाई होती है - जो शरीर के सुरक्षा-तंत्र को मजबूत करते हैं । पिनियल-ग्लैंड अथवा आज्ञा-चक्र के सक्रीय होने से विचारों पर भी नियंत्रण हो जाता है । 
इस तरह प्राणायाम करने से चंद्र और बुध तथा इनके उपकरण बलवान होते चले जाते हैं ।
सुरेश भारद्वाज - उल्हासनगर, मुम्बई

Posted By KanpurpatrikaSaturday, December 19, 2020

मनोकामना पूर्ण करने का उपाय

Filled under:

ज्योतिष के मुताबिक रोज़ाना 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Posted By KanpurpatrikaSaturday, December 19, 2020

❖▩ஜआज का पंचांग,21 दिसम्बर 2020,सोमवार,❖▩ஜ

Filled under:


❖▩ஜआज का पंचांग,21 दिसम्बर 2020,सोमवार,❖▩ஜ

🌞🛕 *जय रामजी की*🛕🌞 

 🏹 *जय माँ जगदम्ब भवानी*🏹

       *🐀🐘जय श्री गणेश🐘🐀*
       ▩ஜआज का पंचांग ۩۞۩ஜ

21 दिसम्बर 2020, सोमवार, विक्रमी सम्वत 2077, शाका 1942, मार्गशीर्ष मास, कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष मास की प्रविष्टा 7, दक्षिणायन, दक्षिणगोल, हेमन्त ऋतु,  तिथि सप्तमी 04:14 दोपहर  तक तदन्तर अष्टमी, पूर्व भाद्रपद 11:03 रात्रि तक तदन्तर उत्तर भाद्रपद,  सूर्यउदय 6:53 प्रातः, सूर्यास्त 5:21 सायं , राहुकाल  08:11 से 09:30 प्रातः तक। साल का सबसे छोटा दिन।

 🌞 🛕 *राशिफल*🛕🌞 

🐏 *मेष (Aries):*पूरे उत्साह के साथ अपने काम करेंगे। भूमि-सम्पत्ति में निवेश करने के लिये समय शुभ रहेगा। आपको खुशी का एहसास होगा। व्यापारियों को बेहतरीन परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। लोग आपसे काफी आकर्षित रहने वाले हैं। मित्रों से उपहार मिल सकता है।

🐂 *वृषभ (Tauras):*स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से दिन बहुत अच्छा रहने वाला है। परिवार और कारोबार में सन्तुलन रहेगा। मन सन्तुष्ट रहेगा। विद्यार्थी उच्च शिक्षा को लेकर काफी आशान्वित रहेंगे। दाम्पत्य जीवन में खुशहाली रहेगी। अध्यात्मिक विचारों से ओत-प्रोत रहेंगे।

👭 *मिथुन (Gemini):*आर्थिक दृष्टिकोण से दिन बहुत ही अच्छा रहने वाला है। भविष्य को लेकर आशंकित रहेंगे। प्रतिस्पर्धा की भावना रहेगी। आपकी वाक्पटुता की प्रशंसा होगी। अपने काम को लेकर दूसरों पर निर्भर न रहें। आपके भीतर सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।

🦀 *कर्क (Cancer):*जीवनसाथी को लेकर थोड़े परेशान हो सकते हैं। अपना चरित्र अच्छा रखें। दिनचर्या का क्रम बिगड़ने न दें। आलस्य से आपको बचना चाहिये। अनहोनी ही आशंका रहेगी। महिलाओं से अपना व्यवहार अच्छा रखें।

🦁 *सिंह (Leo):*व्यापार में नये समझौते कर सकते हैं। नये वस्त्र और आभूषण पर धन खर्च करेंगे। शेयर मार्केट और म्यूचुअल फण्ड आदि से लाभ प्राप्त हो सकता है। टीमवर्क की तरह काम करने से कठिन लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। दाम्पत्य जीवन का तनाव दूर होगा। मन में दबी हुई कोई इच्छा पूरी हो सकती है।

👧🏻 *कन्या (Virgo):*आपको बड़े अनुभवी व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा। आत्मविश्वास का बेहतरीन लाभ मिलेगा। कारोबार में शानदार लाभ प्राप्त होगा। कोई शुभ सूचना मिल सकती है। अनजान लोगों पर ज्यादा भरोसा न करें।

⚖ *तुला (Libra):*मित्रों से आपको बेहतर सलाह प्राप्त होगी। छात्रों को अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। आपके घर में सुख-समृद्धि रहेगी। कार्यक्षेत्र में चुनौतियों का मजबूती से सामना करना पड़ेगा। आप पूरे उत्साह से काम करेंगे। मीडिया से जुड़े लोगों के लिये बहुत अच्छा समय है।

🦂 *वृश्चिक (Scorpio):*सीनियर्स के साथ आपके मतभेद हो सकते हैं। माता-पिता के साथ धार्मिक स्थल की यात्रा कर सकते हैं। आर्थिक समस्या के कारण परेशानी होगी। गुस्से और उत्तेजना पर नियन्त्रण रखें। अपनी क्षमता का सही प्रयोग नहीं कर पायेंगे।

🏹 *धनु (Sagittarius):*कार्यक्षेत्र की परेशानियों का समाधान निकाल लेंगे। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन बेहद शानदार रहेगा। किसी नयी डील की शुरुआत कर सकते हैं। भाग्य आपका पूरा साथ देगा। नौकरी में आपकी सैलरी बढ़ सकती है।

🐊 *मकर (Capricorn):*बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े लोगों के लिये दिन काफी शुभ रहेगा। वैवाहिक जीवन में प्रेम और रोमांस बढ़ेगा। रुका हुआ धन प्राप्त होगा। अपनी ऊर्जा का सार्थक प्रयोग करने का प्रयास करेंगे। कम प्रयास से लाभ प्राप्त होगा।

⚱ *कुंभ (Aquarius)* आज आप पूरा दिन व्यस्त रहेंगे। वैवाहिक निर्णय सहमति लें। विवादों को टालना आपके लिये बेहतर होगा। जीवनसाथी के प्रति आकर्षित रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। बड़ों की सलाह का अनुसरण करना लाभकारी होगा।

🧜‍♀ *मीन (Pisces):*अनायास खर्च सामने आ सकते हैं। सिरदर्द की समस्या हो सकती है। महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सँभाल कर रखें। सोच-समझकर ही आपको बोलना चाहिये। ऑफिस में आपके व्यवहार से लोग नाराज हो सकते हैं।

*💥🌺🚩आपका दिन शुभ हो 🚩🌺💥*

     पंडित आशीष त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य 

    *🎊🎉🎁 आज जिनका जन्मदिवस या विवाह वर्षगांठ हैं उन सभी मित्रो को कोटिशः शुभकामनायें🎁🎊🎉*
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
       *😍आपका दिन शुभ हो😍*
     *🚩जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम🚩*

Posted By KanpurpatrikaSaturday, December 19, 2020

Friday, December 18, 2020

*क्या धर्मांतरण भी है पित्र दोष का कारण*

Filled under:

*क्या धर्मांतरण भी है पित्र दोष का कारण* 
व्यक्ति की कुण्डली में एक ऎसा दोष है जो सभी प्रकार के दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में योग या यूं कहें कि दोषों में से एक दोष पितृदोष भी है । जिसकी अक्सर चर्चा होती है। कुंडली में पित्र दोष किन कारणों से होता है ,उस पर अगर बात की जाए तो कई कारण निकल कर सामने आते हैं। उनमें से जो मुख्य बिंदु है ,वह यह है कि कोई भी जातक जब मनुष्य रूप में पृथ्वी पर जन्म लेता है ,तो उसके पूर्व जन्म (प्रारब्ध) के कर्म भी इस जन्म में वह लेकर आता है। जिसमें कुछ अच्छे कर्म (योग) और कुछ पूरे कर्म (ऋण) के रूप में सामने आते हैं । 
पित्र दोष या योग मुख्यतः अपने धर्म कर्म और संस्कार से विरक्त होना , पित्र दोष का मुख्य कारण होता है । जैसे किसी ने सनातन धर्म में जन्म लिया परंतु धर्म विपरीत आचरण करना ,क्योंकि उसके पित्र या पूर्वज उसी धर्म का अनुसरण करते हुए पीढ़ी दर पीढ़ी आगे आ रहे थे । जिसका अनुसरण न करके वह अपने धर्म का दोषी हो गया । जिसके उसको पित्र दोष लगा । दूसरा जो उसका कर्म था अपने पूर्वजों अपने पितरों के लिए जिस कर्म को उसने भली-भांति पूर्ण नहीं किया यह भी एक कारण पितृदोष का होता है। हिंदू संस्कारों के अनुसार उसने 16 संस्कारों को धर्म अनुरूप नहीं पूर्ण किया, तो वह पित्र दोष उसके कुंडली में व्याप्त होगा । अपने धर्म मे जन्म लेकर दूसरे धर्म का पालन करना या दूसरे धर्म में परिवर्तित हो जाना भी पितृदोष का एक कारण होता है । कुंडली में किन ग्रहों की स्थिति निर्मित होता है पितृदोष इसी तरह हमारे पितृ धर्म से विराक्त होने से या पूर्वजों का अपमान करने आदि से पितृ दोष ऋण बनता है, इस ऋण का दोष आपके बच्चों पर लगता है जो आपको कष्ट देकर इसके प्रति सतर्क करते हैं। पितृ ऋण के कारण व्यक्ति को मान प्रतिष्ठा के अभाव से पीड़ित होने के साथ-साथ संतान की ओर से कष्ट, संतानाभाव, संतान का स्वास्थ्य खराब रहने या संतान का सदैव बुरी संगति में रहने से परेशानी झेलना होती है। पितर दोष के और भी दुष्परिणाम देखे गए हैं- जैसे कई असाध्य व गंभीर प्रकार का रोग होना। पीढ़ियों से प्राप्त रोग को भुगतना या ऐसे रोग होना जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहे। पितर दोष का प्रभाव घर की स्त्रियों पर भी रहता 
ज्योतिष और पुराणों की अलग अलग धारणा है लेकिन यह तय है कि यह हमारे पूर्वजों और कुल परिवार के लोगों से जुड़ा दोष है। पितृदोष के कारण हमारे सांसारिक जीवन में और आध्यात्मिक साधना में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। हमारे पूर्वजों का लहू, हमारी नसों में बहता है। हमारे पूर्वज कई प्रकार के होते हैं, क्योंकि हम आज यहां जन्में हैं तो कल कहीं ओर। 
पितृ दोष के कई कारण और प्रकार होते हैं। 
*ब्रह्मा ऋण* : पितृ ऋण या दोष के अलावा एक ब्रह्मा दोष भी होता है। इसे भी पितृ के अंर्तगत ही माना जा सकता है। ब्रम्हा ऋण वो ऋण है जिसे हम पर ब्रम्हा का कर्ज कहते हैं। ब्रम्हाजी और उनके पुत्रों ने हमें बनाया तो किसी भी प्रकार के भेदवाव, छुआछूत, जाति आदि में विभाजित करके नहीं बनाया लेकिन पृथ्वी पर आने के बाद हमने ब्रह्मा के कुल को जातियों में बांट दिया। अपने ही भाइयों से अलग होकर उन्हें विभाजित कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ की हमें युद्ध, हिंसा और अशांति को भोगना पड़ा और पड़ रहा है। 
पूर्वजों के कारण वंशजों को किसी प्रकार का कष्ट ही पितृदोष माना गया है ऐसा नहीं है और भी कई कारणों से यह दोष प्रकट होता है। ज्योतिष के अनुसार पितृ दोष और पितृ ऋण से पीड़ित कुंडली शापित कुंडली कही जाती है। ऐसे व्यक्ति अपने मातृपक्ष अर्थात माता के अतिरिक्त मामा-मामी मौसा-मौसी, नाना-नानी तथा पितृपक्ष अर्थात दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई आदि को कष्ट व दुख देता है और उनकी अवहेलना व तिरस्कार करता है। पितर दोष पिछले पूर्वज (बाप दादा परदादा) से चला आता है, जो सात पीढ़ियों तक चलता रहता है। 
इसके अलावा  गुरु का ऋण, शनि का ऋण, राहु और केतु का ऋण भी होता है। इसमें से शनि के ऋण उसे लगता है जो धोके से किसी का मकान, भूमि या संपत्ति आदि हड़ लेता हो, किसी की हत्या करवा देता हो या किसी निर्दोष को जबरन प्रताड़ित करता हो। ऐसे में शनिदेव उसे मृत्यु तुल्य कष्ट देते हैं और उसका परिवार बिखर जाता है।
जन्म कुंडली में दूसरे चौथे पांचवें सातवें नौवें दसवें भाव में सूर्य राहु या सूर्य शनि की युति स्थित हो तो यह पितृदोष माना जाता है. सूर्य यदि तुला राशि में स्थित होकर राहु या शनि के साथ युति करें तो अशुभ प्रभावों में और ज्यादा वृद्धि होती है. इन ग्रहों की युति जिस भाव में होगी उस भाव से संबंधित व्यक्ति को कष्ट और परेशानी अधिक होगी | लग्नेश यदि छठे आठवें बारहवें भाव में हो और लग्न में राहु हो तो भी पितृदोष बनता है. शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है। 
कुन्डली का नवां घर धर्म का घर कहा जाता है, यह पिता का घर भी होता है, अगर किसी प्रकार से नवां घर पापी या क्रूर ग्रहों से ग्रसित होता है तो सूचित करता है कि पूर्वजों की इच्छायें अधूरी रह गयीं थी, जो प्राकृतिक रूप से अशुभ ग्रह होते है वे सूर्य मंगल शनि कहे जाते है और कुछ लगनों में अपना काम करते हैं, नवां भाव, नवें भाव का स्वामी ग्रह, नवां भाव चन्द्र राशि से और चन्द्र राशि से नवें भाव का स्वामी अगर राहु या केतु से ग्रसित है तो यह पितृ दोष कहा जाता है। इस प्रकार का जातक हमेशा किसी न किसी प्रकार की समस्याओ से घिरा रहता है, 
कुंडली में राहु पांचवें भाव में हो तो पितृ दोष का असर होता है। इसकी वजह से शादी और नौकरी मिलने में बाधाएं अाती हैं । 
*जानिए पितृ दोष के कुछ खास संकेत, जो दैनिक जीवन में मिलते हैं*...
बगैर कुंडली के ये पॉइंट बता देते है कि पित्र दोष है
1 बाबा की पीढ़ी पापा के पापा
में से कोई अविवाहित मृत्यु या किसी बीमारी से कम उम्र में मृत्यु।
2 तीसरी पीढ़ी में संतान का विकलांग होना।
3 घर मे शीलन और दीवार का चटकना।
4 नल से पानी टपकना जितना भी अच्छा नल लगवा ले कुछ दिनों बाद पानी टपकेगा।
•जमीन-जायदाद, घर खरीदने-बेचने में नुकसान उठाना पड़ सकता है। 
•शादी होने में और नौकरी में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
•अगर पुरुष की कुंडली में पितृ दोष है तो संतान का सुख मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
•पितृ दोष के कारण धन होने पर भी घर में सुख-शांति नहीं रहती है। पति-पत्नी के बीच विवाद होते रहते हैं।
•ज्योतिष की मान्यता है कि अगर परिवार में किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हो जाती है और मृत व्यक्ति का सही विधि से श्राद्ध नहीं हो पाता है।
•उस परिवार में जन्म लेने वाली संतान की कुंडली में पितृ दोष रहता है। खासतौर पर पुत्र संतान की कुंडली में पितृ दोष रहता है।
*खास उपाय* : पितृ दोष या ऋण को उतारने के तीन उपाय- देश के धर्म अनुसार कुल परंपरा का पालन करना, पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध करना और संतान उत्पन्न करके उसमें धार्मिक संस्कार डालना। प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ना, भृकुटी पर शुद्ध जल का तिलक लगाना, तेरस, चौदस, अमावस्य और पूर्णिमा के दिन गुड़-घी की धूप देना, घर के वास्तु को ठीक करना और शरीर के सभी छिद्रों को अच्छी रीति से प्रतिदिन साफ-सुधरा रखने से भी यह ऋण चुकता होता है।
*पितृ दोष के लिये उपाय* सोमवती अमावस्या को (जिस अमावस्या को सोमवार हो) पास के पीपल के पेड के पास जाइये, उस पीपल के पेड को एक जनेऊ दीजिये और एक जनेऊ भगवान विष्णु के नाम का उसी पीपल को दीजिये, पीपल के पेड की और भगवान विष्णु की प्रार्थना कीजिये, और एक सौ आठ परिक्रमा उस पीपल के पेड की दीजिये, हर परिक्रमा के बाद एक मिठाई जो भी आपके स्वच्छ रूप से हो पीपल को अर्पित कीजिये। परिक्रमा करते वक्त :ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते जाइये। परिक्रमा पूरी करने के बाद फ़िर से पीपल के पेड और भगवान विष्णु के लिये प्रार्थना कीजिये और जो भी जाने अन्जाने में अपराध हुये है उनके लिये क्षमा मांगिये। सोमवती अमावस्या की पूजा से बहुत जल्दी ही उत्तम फ़लों की प्राप्ति होने लगती है। 
•पितृ दोष के लिए हर माह अमावस्या पर तर्पण और श्राद्ध करना चाहिए। पितरों के लिए धूप-दीप करना चाहिए। ऊँ पितृदेवताभ्यो नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।
•हर साल श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए दान-पुण्य और तर्पण आदि शुभ काम करना चाहिए। इससे भी दोष शांत होता है।
•ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है इसीलिए सूर्य देव को रोज सुबह जल चढ़ाना चाहिए। इससे दोष का निवारण हो सकता है

Posted By KanpurpatrikaFriday, December 18, 2020

शनि पीड़ा शांत करने के उपाय

Filled under:

शनि महाराज प्रत्येक शनिवार के दिन के दिन पीपल के वृक्ष में निवास करते हैं। इसदिन जल में चीनी एवं काला तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करके तीन परिक्रमा करने से शनि प्रसन्न होते हैं। शनिवार के दिन उड़द दाल की खिचड़ी खाने से भी शनि दोष के कारण प्राप्त होने वाले कष्ट में कमी आती है।

Posted By KanpurpatrikaFriday, December 18, 2020