राहू-केतु और
मुस्लिम संबंध: एक ज्योतिषीय विश्लेषण
ज्योतिष शास्त्र में राहू और केतु को 'म्लेच्छ' या विजातीय ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। जब भी इनका संबंध विवाह
(सप्तम भाव) या दीर्घकालिक संबंधों (एकादश भाव) से होता है, तो यह अक्सर अंतर-धार्मिक संबंधों, विशेषकर मुस्लिम
समुदाय के साथ जुड़ाव को दर्शाता है।
प्रसिद्ध हस्तियों
के उदाहरण:
1. राज
कपूर: कर्क लग्न की कुंडली में चंद्रमा और राहू लग्न में स्थित हैं, जबकि केतु सप्तम भाव में है। चंद्रमा-राहू और सप्तमस्थ केतु के इस योग ने
उन्हें अपनी मुस्लिम सह-कलाकार (नरगिस जी) के प्रति अत्यधिक प्रेम में बांधा।
2. शर्मिला
टैगोर: सिंह लग्न की कुंडली में सप्तमेश शनि के साथ केतु की युति है। केतु का
सप्तमेश के साथ यह प्रबल संबंध उनके नवाब मंसूर अली खान पटौदी से अंतर-धार्मिक
विवाह का आधार बना।
3. अमृता
सिंह: इनकी कुंडली में चंद्रमा और राहू की निकट युति है, जिसके कारण इनका विवाह सैफ अली खान से हुआ।
4. संजय
दत्त: एकादश भाव में स्थित राहू की दृष्टि सप्तम भाव पर पड़ती है। एकादश का राहू
या केतु अक्सर मुस्लिम पार्टनर के साथ दीर्घकालिक संबंध बनाता है। इनका विवाह भी
एक मुस्लिम महिला से हुआ।
5. महेश
भट्ट: एकादश भाव में केतु की उपस्थिति और सप्तम पर उसकी दृष्टि। इनके जीवन में दो
विवाह हुए और दोनों ही पत्नियां मुस्लिम समुदाय से थीं।
6. रत्ना
पाठक शाह: सप्तम भाव में शनि, शुक्र और केतु की युति। इनका विवाह प्रसिद्ध अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से
हुआ।
7. ऋतिक
रोशन: सप्तमेश बुध का राहू के साथ निकट संबंध है, जिसके चलते इनका
विवाह सुज़ैन खान से हुआ।
8. आदित्य
पंचोली: सप्तम भाव में साक्षात राहू की उपस्थिति ने मुस्लिम कनेक्शन (ज़रीना वहाब)
बनाया।
9. आयशा
टाकिया: चंद्रमा और राहू का निकट संबंध होने के कारण मुस्लिम युवक से विवाह।
10. मनोज
तिवारी (कांग्रेस सांसद): चंद्रमा के साथ राहू
और सप्तमेश के साथ केतु की युति के कारण मुस्लिम लड़की से विवाह।
11. अनिल
विश्वास (संगीतकार): इनके सप्तमेश मंगल की केतु के साथ निकट
युति थी, जिससे इनका विवाह मुस्लिम महिला से हुआ।
व्यावहारिक अनुभव (Case Studies):
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सूरत का मामला: तुला लग्न (7 डिग्री) में राहू (8 डिग्री) की युति थी और केतु सप्तम में था। पूछने पर महिला ने स्वीकार किया
कि उसके जीवन में मुस्लिम मित्र था, जो उसके बच्चे का
वास्तविक पिता था—यह एक गुप्त सत्य था।
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कन्या लग्न का मित्र: लग्न में केतु और सप्तम में राहू होने के कारण वह 4 वर्षों तक एक मुस्लिम युवती के प्रेम में रहे, हालांकि माता-पिता के विरोध के कारण विवाह नहीं हो सका।
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एक पिता की चिंता: एक कन्या की कुंडली में चंद्रमा और केतु सप्तम भाव में थे। वह अपने मुस्लिम
सहकर्मी के साथ प्रेम विवाह के लिए दृढ़ थी और अंततः उसने उसी से विवाह किया।
मुख्य ज्योतिषीय
निष्कर्ष:
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सप्तम भाव (7th House): यहाँ राहू या केतु का होना जीवनसाथी के विजातीय या मुस्लिम होने की संभावना
बढ़ाता है।
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एकादश भाव (11th House): यहाँ राहू-केतु होने पर व्यक्ति के दीर्घकालिक संबंध या 'लिव-इन रिलेशनशिप' मुस्लिम पार्टनर के साथ हो सकते हैं।
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चंद्रमा का संबंध: मन का कारक चंद्रमा यदि राहू या केतु से पीड़ित हो, तो व्यक्ति सामाजिक बंधनों को तोड़कर दूसरे धर्म की ओर आकर्षित होता है।
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विवाद की स्थिति: यदि मुस्लिम संबंध न भी बने, तो राहू-केतु सप्तम
भाव में विवाह को विवादास्पद बना देते हैं, जैसे अंतर्जातीय
विवाह या घर से भागकर विवाह करना।
राहू और केतु का यह प्रभाव शत-प्रतिशत
हर कुंडली में नहीं होता, लेकिन जहाँ भी अंतर-धार्मिक या मुस्लिम संबंधों की बात आती है, वहाँ सप्तम या एकादश भाव में राहू-केतु की भूमिका अनिवार्य रूप से दिखाई
देती है।








