Friday, August 9, 2019

जो मौन है वह कौन है

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https://youtu.be/6R44NUiictg

Posted By KanpurpatrikaFriday, August 09, 2019

Monday, August 5, 2019

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इस पृथ्वी पर 12 तरह के मनुष्य जन्म लेते है 
और इन सभी में कुछ अलग अलग गुण होते है। 
मनुष्य अगर अपने इन्ही गुणों को पहचान जाए 
तो वो अपने जीवन मे मन चाही सफलता प्राप्त कर सकता है।
क्योंकि मनुष्य अगर स्वयं को जान लेगा तो वो ईश्वर को जान लेगा ।
लेकिन मनुष्य सिर्फ इसकी खोज में ही पूरा जीवन 
दर दर भटकता रहता है और उसकी खोज उसके 
जीवन के साथ ही खत्म हो जाती है।
तो हम आपको बताएंगे वो कौन से गुण होते है
जिससे उसको सफलता मिलेगी ।
देखते रहिये सिर्फ जय JYOTISH AND YOU
हमे आश्चर्य होता है उन लोगो पर जो ज्योतिष और तारो को झूठ मानते है ।
जब पृथ्वी के घूमने से रात सुबह में बदल जाती  है ।
जब तारो के चाल बदलने से चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के परिवर्तित होने से ये मौसन बादल प्रकृति का स्वभाव बदल जाता है ।
तो फिर इन्ही तारो चंद्रमा और सूर्य के प्रभाव से इंसान की सोच दिमाग और उसकी किस्मत कैसे नही बदलती ।
जरूर बदलती है
जो विद्या ईश्वर से जुड़ी हो जो उस ईश्वर की देन हो
जो कुछ भी बदल सकती है।
ज्योतिष के इन्ही रहस्यो से पर्दा उठाने आ रहे है हम
देखना न भूलिये बहुत जल्द सिर्फ ज्योतिष एन्ड you पर।
क्या आप भी ज्योतिषियों की कही बाते समझ नही पाते
उच्च के गृह खराब दृष्टि शत्रु के घर मे बैठे ग्रह आदि शब्द आपको बोझल करते है
क्या आप कुंडली मे बने चार्ट को समझ नही पाते
आपकी इन सभी परेशानियों को दूर करेगा शिवहोहम एंटरटेनमेंट के द्वारा प्रस्तुत
ज्योतिष एंड यू कार्यक्रम जो अब तक कि सबसे आसान भाषा मे समझायेंगे कुंडली का विश्लेषण।

Posted By KanpurpatrikaMonday, August 05, 2019

Wednesday, May 1, 2019

जो मौन है वह कौन है?

जो बोलता नही क्या उसके पास शब्द नही ,
रिश्तों की अहमियत और बड़ो का आदर ,
उसके संस्कार और उसकी परवरिश ,
ही मौन है यह मत पूछो वो कौन है।
दर्पण भी मौन है लेकिन बोलता तो सच है,
शब्दो मे कहाँ जान है वो भी मौन है।
यह तश्वीरें यह आकृतिया भी,
ये किताबे ये मुर्तिया भी कहाँ बोलती है,
शायद ये भी मौन है फिर ये कौन है।
ये चाँद ये तारे और ये नज़ारे
यह धरती और यह आकाश
भी तो मौन है।
अगर यह सब मौन है ।
तो बोलता कौन है?

पंडित आशीष त्रिपाठी
ज्योतिष आचार्य

Posted By KanpurpatrikaWednesday, May 01, 2019

Sunday, March 3, 2019

कश्मीर के नाम पैग़ाम

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तुम थे तो हमारे जैसे ही
अलग क्या हुए हमसे
तुम्हारा दिल और दिमाग
रक्त और वक्त
इंसानियत और मासूमियत
सभी से तो तुमने मुँह फेर लिया
ये तुमने कौन सा रूप लिया
तुमसे जो अलग हुआ
वो बढ़ता ही गया
लेकिन तुम हमसे अलग
होकर घटते चले गए
ऐ मौला वो कौन सा वक्त था
जब कश्मीर पर कभी मेरा
कभी उनका नाम हुआ
उनको उस धरती पर
ऐसा क्या गुमान हुआ
की उनकी नफ़रतें
सिर्फ हमारे नाम हुई।

पंडित आशीष जी त्रिपाठी

Posted By KanpurpatrikaSunday, March 03, 2019

वंदन अभिनंदन का

सुन माताओं के क्रंदन
भड़का शोला अभिनंदन का
सीना चीर पवन का
चूमा मस्तक नील गगन का
सामने देख शत्रुओ को
टूट पड़ा मिग 21 से जो
सामने था शत्रु का एक एफ 16 शेष
भारत माँ की रक्षा को जो था गगन में
एक लक्ष्य था कि न होगा रुदन देश मे
मार कर पहुँच गया था दुश्मन देश मे वो
भारत माँ के नारों से गूंज उठा तब शत्रु देश वो
मृत्यु को जिसने दिया था रोक
उसने की शत्रुओ पर अनगिनत चोट
उस अभिनंदन का वंदन करता भारत देश
युवा रखेगा अब उनका जैसा वेश।

पंडित आशीष जी त्रिपाठी

Posted By KanpurpatrikaSunday, March 03, 2019