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जो बोलता नही क्या उसके पास शब्द नही ,
रिश्तों की अहमियत और बड़ो का आदर ,
उसके संस्कार और उसकी परवरिश ,
ही मौन है यह मत पूछो वो कौन है।
दर्पण भी मौन है लेकिन बोलता तो सच है,
शब्दो मे कहाँ जान है वो भी मौन है।
यह तश्वीरें यह आकृतिया भी,
ये किताबे ये मुर्तिया भी कहाँ बोलती है,
शायद ये भी मौन है फिर ये कौन है।
ये चाँद ये तारे और ये नज़ारे
यह धरती और यह आकाश
भी तो मौन है।
अगर यह सब मौन है ।
तो बोलता कौन है?
पंडित आशीष त्रिपाठी
ज्योतिष आचार्य
तुम थे तो हमारे जैसे ही
अलग क्या हुए हमसे
तुम्हारा दिल और दिमाग
रक्त और वक्त
इंसानियत और मासूमियत
सभी से तो तुमने मुँह फेर लिया
ये तुमने कौन सा रूप लिया
तुमसे जो अलग हुआ
वो बढ़ता ही गया
लेकिन तुम हमसे अलग
होकर घटते चले गए
ऐ मौला वो कौन सा वक्त था
जब कश्मीर पर कभी मेरा
कभी उनका नाम हुआ
उनको उस धरती पर
ऐसा क्या गुमान हुआ
की उनकी नफ़रतें
सिर्फ हमारे नाम हुई।
पंडित आशीष जी त्रिपाठी
सुन माताओं के क्रंदन
भड़का शोला अभिनंदन का
सीना चीर पवन का
चूमा मस्तक नील गगन का
सामने देख शत्रुओ को
टूट पड़ा मिग 21 से जो
सामने था शत्रु का एक एफ 16 शेष
भारत माँ की रक्षा को जो था गगन में
एक लक्ष्य था कि न होगा रुदन देश मे
मार कर पहुँच गया था दुश्मन देश मे वो
भारत माँ के नारों से गूंज उठा तब शत्रु देश वो
मृत्यु को जिसने दिया था रोक
उसने की शत्रुओ पर अनगिनत चोट
उस अभिनंदन का वंदन करता भारत देश
युवा रखेगा अब उनका जैसा वेश।
पंडित आशीष जी त्रिपाठी
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