Friday, June 20, 2014

दुःख के खँडहर में

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Posted By KanpurpatrikaFriday, June 20, 2014

वो मनहूस यादे

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Posted By KanpurpatrikaFriday, June 20, 2014

Wednesday, June 18, 2014

WHO IS GOD कौन है भगवान ?

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WHO IS GOD कौन  है भगवान ?


जब भी हम भगवान की बात करते है है तो बचपन से देखी  गई  सभी भगवान की तस्वीर दिमाग में घूमने  लगती है   और ये जवाब आता है की हम भगवान  को मानते तो है लेकिन जानते नहीं है जानते इसलिए नहीं है की क्योंकि आज तक हमने भगवान  के वास्तविक स्वरुप को देखा  ही नहीं | हा चित्रो के माध्यम से और  मूर्तियों और चमत्कारों को काफी  सुने  देखे लेकिन ये  नहीं मालूम  है की  ये करता कौन है और  कैसे है ?   इसका जवाब आज तक नहीं मिला ?

फिर ईश्वर और भगवान में अन्तर क्या है  
क्या ईश्वर  का दूसरा रूप भगवान है ?

क्या ईश्वर एक है  उसके अवतार अलग अलग है ?

 क्या उस अवतार को ही भगवान कहा जाता है ?

आखिर में भगवान  जो ईश्वर  है के अवतरित रूप है को हम भगवान मान लेते है, जैसे राम और श्री कृष्णा जिसको पड़ा है  किताबो में और देखा है ऐतिहासिक धरोहर में | और आज भी उनसे सम्बंधित चीज़े मिल जाती है /

तो हमे भगवान के स्वरुप पर विश्वास  करना होगा   अब सवाल  ये है की भगवान कौन  हो सकता है अर्थात भगवान  के अन्दर वो कौन से तत्व या गुण जो उन्हे  ईश्वर से प्राप्त होते है / जो उन्हे अवतारी पुरुष  ( भगवान ) बना देते है ?

भगवान  शब्द भाग+वान  और भाग्य +वान  से मिलकर बना है जिसका अर्थ भाग+वान अर्थात ईश्वर के भाग (तत्वों को धारण करने वाला और दूसरा भाग्य +वान जो शुभता को धारण करने वाला है अर्थ   दोनों का एक ही आता है /
पहला पञ्च तत्वों से बने भगवान कहते ही उसे हैं जो भूमि -गगन -वायु -अग्नि -नीर (भ +ग +व+आ +न )(I की मात्रा ,आ का डंडा से अग्नि ,न से नीर ,ग से गगन ,भ से भूमि  ) को नियंत्रित करता है।

या वो गुण भाग जो ईश्वर ने उस अवतारी  पुरुष को  दिए कौन से है वो गुण जो ईश्वर ने उस अवतारी पुरुष को दिए

वो गुण है ०१:-यश ०२:-कर्म ०३ धैर्य ०४:- ज्ञान ०५:-सौन्दर्य  ०६:-प्रेम

ये गुण  या तत्व उस अवतारी   पुरुष में बराबर मात्रा में होते है अर्थात 18 -18 प्रतिशत (18+18=36,3+6 =9)और(18=1+8=9)  18 गुणा 6 =108

108 कैसे वो ऐसे की 12 राशियाँ और 09 ग्रह =108 जो है और सिद्ध हो  चुका है | और हम यह भी जानते है की अगर कुंडली में 18 गुण मिल जाते है तो | ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि कुंडली में ९ गृह यदि शुभ भाव में स्थित हो तो वह जातक विलक्षण प्रतिभा का धनी होगा और भगवान श्री कृष्ण  श्री राम जी और इनके साथ यदि अन्य अवतारों की बात की जाए तो यह सभी अपने आप में विलक्षण प्रतिभा के धनि तो थे ही साथ ही प्रेम सौहार्द के साथ ज्ञान का भी अनुपम  उदहारण सभी ने अपने जीवन में दिया |

अर्थात भगवान तत्वों या गुणों से परिपूर्ण है जो श्रेष्ठ है जो ईश्वर है दूसरे शब्दों में जो सभी तत्वों से परिपूर्ण है

वो भगवान है /

जैसे हमारे सनातन धर्म में भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्णा जिन्होने अपने कर्म प्रेम धैर्य ज्ञान सौन्दर्य से समाज में एक नया सन्देश दिया |

इसलिए भगवान कहलाए अर्थात उस परम शक्ति के अवतार को भगवान कहते है |
अगर कोई यह भी कहता है की हमने तो भगवान देखे ही नहीं और जो दिखता नहीं उसको विज्ञान भी नहीं मानता तो उन सब के लिए यह उदहारण ही काफी है की जिस तरह दस मंजिल के मकान की छत पर रखे पानी के टैंक में पानी चढ़ाने के लिए किसी प्रकार की मोटर की आवश्यकता होती है तब ही वह पानी उस टैंक तक पहली मंजिल से १० मंजिल की छत तक पहुच पायेगा | इसका कारण विज्ञान का गुरुत्वा कर्षण का नियम होता है | लेकिन वही विज्ञान यह नहीं बता पाता की नारियल का पेड़ इतनी ऊपर होते हुए भी उस नारियल के अन्दर पानी कैसे पहुच जाता है वह न कोई मोटर न गुरुत्वाकर्षण का नियम काम  करता है |
यह सिर्फ अनुभव किया जा सकता है अर्थात उस ईश्वर उस सर्वशक्तिमान के आभा मंडल को हम कई प्रकार से अनुभव कर सकते है |

ये मेरे अपने निजी विचार है इससे किसी का भी सहमत होना जरुरी नहीं है न ही किसी की भावनाओ को ठेस पहुचाना मेरा मकसद है /

पंडित आशीष त्रिपाठी
ज्योतिषाचार्य


Posted By KanpurpatrikaWednesday, June 18, 2014

Thursday, May 22, 2014

आम आदमी की सुनामी

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                                                         आम आदमी की सुनामी

१६ वी लोकसभा  चुनाव मोदी बनाम अन्य राजनितिक पार्टिया बनकर रह गया ,एन डी ए  की सयोगी दलों  को छोड़कर / मोदी ने जहा राजनीती से ऊपर उठकर बात की विकास की सहयोग की आम आदमी के दुःख की   बाकि दलों ने राजनीती के सबसे निचले स्तर पर जा कर हमला बोला जो टाफी बिस्कुट गुब्बारे से होकर खूनी हाथो हत्यारा  जैसे शब्दों के साथ लहर और  अंत मे सुनामी के साथ  सब बह गया /
आखिर में सवाल ये उठता है की क्या वाकई में मोदी की लहर या सुनामी  थी या बी जे  पी की अपनी बात थी या फिर मोदी के साथ बी जे पी  या फिर दोनों का ही मिला जुला कर ये सुनामी आई थी जो सभी को बहा कर ले गई / लेकिन  अगर ऐसा ही था तो सिर्फ 284 सीट  ही क्यों 400  के आस पास क्यों नहीं सब को मिलाकर  सिर्फ 333  सीट्स ये कोई चमत्कार नहीं है ये तो अंधे के हाथ में बटेर लगने जैसा ही है क्या वास्तव में सभी ऐसा ही सोच रहे थे या फिर कुछ लोग ही इस जादूई अकड़े के पास खड़े थे ये तो वो ही बता सकते है लेकिन इसके उलट सच्चाई कुछ और ही कहती है /
अगर राज्यवर  चुनाव परिणामो को देखे तो मोदी जी गुजरात में कई सालो से है तो एम पी  में शिवराज जी और राजस्थान में बी जे पी  आई और कांग्रेस गई वही  उत्तर प्रदेश में जहा मायावती जी पूर्ण बहूमत  के साथ आती है और दूसरी बार अखिलेश जी की पूर्ण बहूमत से आ जाते  है तो यहाँ पर किसकी लहर या सुनामी चली / जहा आम आदमी पार्टी और बी जे पी ने दिल्ली में कांग्रेस को हिला  दिया वही बी जे पी उत्तराखंड में सरकार बनाते बनाते रह गई क्यों
कुल मिलाकर  इन सभी विधान सभा और लोक सभा चुनावो में किसी पार्टी या नेता की सुनामी या लहर न होकर जनता का  जागरूक होना एक अहम कारण  है / कही मोदी फैक्टर  या गांधी फैक्टर या कही और दीदी या बहन जी का फैक्टर काम नहीं करता बल्कि जनता जिस दिन एक साथ बदलाव की सोच लेती है उस दिन उस पार्टी का फैक्टर अपने आप  चल जाता है / जिसका जीता जगता उदाहरण है आम आदमी पार्टी जिसको जनता ने जहा सर का ताज़  बना कर सर आँखों पर रखा अब  उसको अपने पैरो के पास भी स्थान नहीं दे रही है  /
उत्तर प्रदेश में जहा मायावती पूर्ण बहुमत से आती है और सबको  आश्चर्य चकित कर देती है लेकिन दुसरे चुनाव में फिर से जनता  उनको आश्चर्य चकित कर देती है और समाज वादी पार्टी को पूर्ण बहुमत से ले आती है अब समजवादी पार्टी को लेकर सभी आश्चर्य चकित थे लेकिन लोक सभा चुनाव में जनता उन्हे फिर से आश्चर्यचकित कर देती है / क्या शराब और रूपये बाटने व लैपटॉप ,बेरोजगारी भत्ता ,और मुफ्त की दवाईया और आवास देने से  से वोट मिलने लगते है और सरकार बनने लगती है तो उत्त्तर प्रदेश में समाजवादी  पार्टी  एक बढ़िया उदाहरण है जो जीत कर भी हार गई /
आखिर सवाल फिर से वही है की क्या कारन है की जो राजनितिक पार्टिया और राजनीती की गहरी जानकारी रखने वाले ऐसे परिणाम आने पर सोचने पर मजबूर हो जाते है / इन सब सवालो का जवाब जनता   के ही पास है जनता यानि आम आदमी जो सभी पार्टियो के रोड शो और रैलियों में बराबर  से खड़े नज़र आते है लेकिन परिंणाम आने  के बाद एक दम अलग खड़ी दिखाई पड़ती है /
आप अपने आप को अपनी पार्टी को उचा उठा कर बताओ चाहे जितनी उपलब्धिया गिनाओ  लेकिन आज के आम आदमी को बेवकूफ बनाना मुश्किल ही नहीं नामुनकिन भी है / इसका मुख्य कारण सूचना  और संचार तंत्र का आम आदमी तक पहुंच जाना और उसके ऊपर  भी रामदेव , अरविन्द केजरीवाल और अन्ना जैसे लोगो के द्वारा इस आम आदमी को अक्ल दे जाना जो बाद में शायद इनके   लिए ही मुसीबत बन जाए लेकिन फिर भी जनता तो जाग गई न ! अब जनता आप के चुनावी भाषण  और उपलब्धिया सुनती ही नहीं बल्कि वास्तिविक  आकड़ो पर गौर भी फरमाती है /
लेकिन एक कमी को देखकर दुःख भी होता है की अगर इस काम में समाज का चौथा खम्भा भी बराबर से निष्पक्छ तरीके से साथ दे तो शायद तस्वीर कुछ और ही होती / लेकिन पता नहीं क्यों आज का मीडिया हाउस ज्यादातर पार्टियो के हाथो में है या यो कहे की इनके मालिक आज के नेता ,नेता के साथ ही साथ मीडिया हाउस के मालिक और साझेदार भी है ,जो एक बड़ी वजह है मीडिया का जनता के साथ  खड़े न हो पाना ,वो हवा के रुख (पैसो के रुख ) और रसूख के साथ खड़ी नज़र आती है /
कुल  मिलाकर कोई भी नेता और राजनितिक पार्टिया चाहे करोडो रुपया क्यों न बर्बाद कर दे ,उनकी जीत कभी भी सुनिश्चित नहीं हो सकती है सुनिश्चित तभी  हो सकती है जब नेता और राजनीतक पार्टिया जनता से सीधे सम्बंध  स्थापीत नहीं करते / जनता ने किसी राजनितिक पार्टी या नेता को वोट न देकर उन्होने विकास और रोजगार सस्ती वस्तुए को  दिया था अपने शहर  को विकसित और व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी  आपको दी थी लेकिन  आपने अपनी जिम्मेदारियों से  मुह मोड़ लिया तो जनता ने भी तो आप से मुह ही तो मोड़ा है ये जनता की सुनामी में बह गए   सब /
लेकिन वक़्त अभी भी है  यू पी  में समाज वादी पार्टी को वापसी करनी है 2017 में और बी जे पी को 2019 में ऐसे ही राजस्थान मद्य प्रदेश उत्तराखंड और बाकि राज्यों में अलग अलग पार्टियो को / नेता  और राजनितिक पार्टिया अपनी  पार्टी में चाहे जीतने फेर बदल कर ले जब तक फाइलो से और घोषणा पत्रो से निकल कर विकास हकीकत में नहीं नज़र आएगा तब तक कुछ भी नहीं होने वाला /

 

Posted By KanpurpatrikaThursday, May 22, 2014

Wednesday, February 19, 2014

सफलता के चार सूत्र आशीष त्रिपाठी के द्वारा

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      सफलता के चार सूत्र आशीष त्रिपाठी के द्वारा
हम सब जानते है की मार्च और अप्रैल महीने या यों कहे की जनवरी से चालू होने वाली एग्जाम की टेंशन रिजल्ट आने तक ख़त्म नहीं होती है / जो पास हो जाते है वो तो खुश और जो फेल हो जाते है वो दुखी, कुछ गलत रहो पर चल पड़ते है और कुछ इस दुनिया से अलविदा कह देते है / ऐसे न जाने कितनी बच्चे हर साल रिजल्ट आने के बाद सामने आते है / क्या ये सही है नहीं ये एकदम गलत है की हम  हार मान ले बिलकुल नहीं हम जीत कर ही रहेंगे जब तक सफल नहीं हो जायेंगे /
लेकिन कैसे  इसके लिए हमे अपने जीवन में चार बाते चार सूत्र हमेशा याद रखने होंगे .......
पहला सूत्र :- हम यानि हम सब जानते है की हम सफल हो पायेंगे की नहीं हम पास होंगे या फेल क्योंकि जैसा हमने तैयारी की है हम जानते है फिर हम फर्स्ट आयेंगे सेकंड या फिर थर्ड या फिर हम फेल हो जायेंगे हम बखूबी जानते है बस दूसरो से या फिर अपने आप से झूठ बोलते है / सही
लेकिन ये सच्चाई हम कभी किसी को नहीं बताते है यहाँ तक की पेपर देने के आने के बाद तो हम सौ प्रतिशत ये जान जाते है की रिजल्ट क्या आयेगा लेकिन फिर भी हम दोष किस्मत को देते है किस्मत क्या होती है मेरे हिसाब से किस्मत कुछ भी नहीं होती है किस्मत भाग्य और लक कुछ भी नहीं होता है अगर होता तो हम देख पाते लेकिन किस्मत भाग्य और लक को महसूस किया जा सकता है /
पेपर देने के आने के बाद यानि हमने कापी में कुछ भी नहीं लिखा है और हम पास हो जाते है तो उसकी किस्मत और अगर हमने सब कुछ लिख कर आते है और फेल हो जाते है तो किस्मत ख़राब नहीं किस्मत को दोष नहीं दे /
फिर यहाँ क्या होता है यहाँ पर सिस्टम ख़राब होता है जिन्हे समाज को सवारने की जिमेदारी दी गई थी उनमे से कुछ लोगो ने पैसे बनाने के चक्कर में किसी की जिंदगी ख़त्म कर दी और किसी के सपने, लेकिन उनको क्या पता की उनकी पैसे कमाने की चाहत किसी के घर का चिराग बुझा देगा / जितनी ज्यादा कापी आप चेक करते है उतनी ही कम नज़र आप सवालो पर दे पाते है जवाबो पर दे पाते है /
 लेकिन बच्चो अगर आप सब कुछ लिख कर आये है और फेल हो जाते है तो किस्मत को दोष देने से अच्छा है की सिस्टम को दोष दे और उस इन्सान को दोष दे जिनसे आप की जिंदगी और आपके सपनो से खेलने की सोची है / आप अगर सब कुछ लिख कर आये है तो आप अपनी दोबारा कापी चेक कराने की मांग रखे और दोबारा कापी चेक होने के बाद आप पास हो जाते है तो आप यहाँ पर शांत न बैठे आप केस करे उसके खिलाफ जिसने आप की जिंदगी  से खेलने की कोशिश की है ताकि किसी के साथ दोबारा ऐसा न हो /
दूसरा सूत्र :- हम हार  क्यों मान लेते है क्यों हम ये समझ लेते है की अब कुछ भी नहीं हो सकता आप जानते है की तीन ओर से तो हमारे रास्ते आस पास वाले बंद करते है और आखरी रास्ता हम खुद बंद कर लेते है क्यों
आप में से कितने लोग बचपन में एक बार में बैठना सिख गए थे
आप में से कितने लोग एक बार में चलना सीख गए थे और एक ही बार में दौड़ना
कितने लोग एक बार में ए बी सी डी और क ख ग  लिखना सिख गए  थे
फिर आप एक बार में सब कुछ पा लेने की  कैसे सोच लेते है एक बार में सफलता नहीं मिलती , तो दो बार , दो बार नहीं तो तीसरी बार  लगातार क्योंकि हमे सफलता चाहिए जिन्हे सफलता नहीं चाहिए वो शांत बैठ जाय क्योंकि उनकी किस्मत होगी तो सब कुछ  हो जायेगा ऐसा अगर वो मान लेते है तो वो पागल है /
हम हर बार प्रयास करेंगे और हर बार हम पहले से बेहतर पायेंगे और एक समय तो ऐसा आयेगा की हम सफल हो जायेंगे अगर नहीं हुए तो इतना तो आ ही जायेगा की हम किसी को पढाने लगेंगे , अगर ये भी नहीं हुआ तो हम अपने बच्चो को या आस पास वालो को तो बता ही सकते है यानि सफल तो हम हो ही जायेंगे / लेकिन प्रयास नहीं छोड़ना  है लगातार बार बार /
हम अपना बचपन कभी भी न भूले जैसे पापा ये रात क्यों होती है ये दिन क्यों होता है तोता हरा क्यों होता है पापा हम उड़ क्यों नहीं सकते बार बार क्यों क्यों क्यों लेकिन हमारे माता पिता हर बार हमारे सवालों  का जवाब देते जाते है / फिर जब हम बडे हो जाते है तो ये क्यों वाली आदत यानि अपना बचपन पीछे छोड़ देते है जितनी ज्यादा क्यों उतने ज्यादा जवाब समझ में  आया
यानि जो भी हम पड़ रहे है जब तक समझ में नहीं आ जाता तब तक पूछे और पूछने का तरीका की जहा पर आकर हम रुक जाते है यानि की जहा से हमे आंगे नहीं समझ में आता  वहा से पूछे,  ये नहीं की बिलकुल नहीं समझ में आया /
तीसरा सूत्र :- आप अपने दिन भर में हो रहे कार्यो यानि जो भी आप के साथ पूरे दिन में होता है अच्छा या ख़राब सही या गलत   आप  अपने माता या पिता या फिर दोनों से  बताए / इससे आपको जीवन में कभी शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा न आपको न आप के माता पिता को / ये आदत आज से ही डाल लीजिये शुरुआत में थोड़ी डाट पड़ेगी लेकिन आगे के सारे रास्ते साफ हो जायेंगे /
अगर आप नहीं बताते है तो क्या होगा जितना आप छुपाते जाते हो वो सब आपके पीछे इकठ्ठा होता जाता है और एक दिन वो इतना बड़ा हो जाता है और आप के पीछे खड़ा होता है पहाड़ ऐसा जिसे आप शायद न देख पाओ , लेकिन आपके अलावा सभी उसको देख रहे होते है और आप के साथ आपके परिवार को भी बुरा कहते है /
माँ समझती नहीं है पापा पुराने जमाने के है वो अनपड़ है उन्हे अक्ल ही नहीं है
ये शब्द भी हम ही यूज करते है जिन्होने हमे चलना सिखाया हमे बोलना सिखाया हमे सही और गलत में फर्क समझाया आज वो ही बेअक्ल हो गए जिन्होने हमे पड़ना सिखाया या पडने के लिए भेजा वो ही आज अनपद हो गए जिन्होने हमे समझदारी की बाते बताई वो ही न समझ हो गए / वहा प्रभु क्या है तेरी माया
लेकिन गलती कहा पर है सिर्फ जेनरेशन गैप बस इससे ज्यादा कुछ नहीं जो लगातार होता है आज आप के साथ है कल आपके बच्चो के साथ होगा / लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम अपने ही मम्मी पापा को गलत शब्द बोले अगर आज हम जैसा भी कर रहे है ये मान के चलिए की कल आपके साथ भी वैसा ही होगा ये आप सब भी जानते है जो साइंस पड़ते है वो अच्छे से जानते है न्यूटन का नियम किसी भी चीज़ को ऊपर उछालते ही वो अपने आप नीचे की और आ जाती है न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम यानि हम किसी को बुरा कह रहे है तो हमारे साथ भी कोई बुरा बोलेगा /
इसलिए अपने मम्मी पापा और अपने परिवार से बड कर कोई नहीं होता वही होते है वो जन्म से लेकर हमेशा हमारे साथ खडे होते है बाकि तो मतलब के साथी होते है /
चौथा और अंतिम सूत्र :- हमे अपने धर्म पर पूरा विश्वाश करना चाहिए फिर हमारा धर्म कुछ भी क्यों न हो हम हिन्दू हो  मुस्लिम हो सिख हो ईसाई हो , न ही दूसरो के धर्म की बुराई करनी चाहिए /
चालीस दिन मंदिर पैदल जाने से पांच रूपये का प्रसाद चढ़ाने  से या फिर मनौती मान लेने से कोई पास नहीं होता /
ईश्वर भी उसका साथ देते है जो कर्म करता है मेहनत करता है साथ ही अपने काम के प्रति ईमानदारी बरतता है / ईश्वर ये नहीं कहते की आप मेरी दो घंटे पूजा करो लेकिन लेकिन उस ईश्वर उस खुदा और उस वाहे गुरु को मानना भी जरुरी है आप सुबह उठे नामज़ पडे पूजा करे वाहे गुरु को याद करे या बाइबिल पडे या फिर प्रेयर करे लेकिन ये करे जरुर और फिर उस ईश्वर से कहे हमे हमारे काम में सहयोग करे , ताकि हम सफल हो सके फिर देखे की आप सफल कैसे नहीं होते है आप सब सफल हो ऐसी मैं भी ईश्वर  से कामना करता हु /
बस ये चार सूत्र आप अपने जीवन में उतर ले आप सफल हो ही जायेंगे / अब इसके अलावा भी अगर आप कुछ पूछना चाहते है तो पूछ सकते है अगर मेरे पास जवाब होगा तो मैं दूंगा नहीं तो बाद में दूंगा लेकिन गलत जवाब नहीं दूँगा मेरी ये आदत है /

Posted By KanpurpatrikaWednesday, February 19, 2014