Tuesday, August 3, 2010

जिस चीज़ को आप सुरक्षित मान रहे थे वो भी खतरनाक है...

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कानपुर,(आशीष त्रिपाठी)... जी हां, ऐसा सच है अगर आप देखने में साफ और बढ़िया क्वालिटी की प्लास्टिक की बोतल का इस्तेमाल करके ये सोच रहे है की इससे कोई नुकसान या बैक्टेरिया नहीं आयेंगे तो आप गलत सोच रहे है । अब आप सावधान हो जाइये क्योंकि अभी तक जिस चीज़ को आप सुरक्षित मान रहे थे वो भी खतरनाक है...
कैसे हो सकता है खतरा :-
अगर आप प्लास्टिक की बोतल को डिटर्जेंट से धोती है या फिर गर्म पानी मे खौलाती है तो आप सावधान हो जाइये । क्योंकि प्लास्टिक की बोतल और डिटर्जेंट मिलकर हानिकारक पोली कार्बोनेट बनाने लगता है और इसी बोतल में रखा पानी पीने से खासकर महिलओ में पुरष में पाई जाने वाले हारमोंस की संख्या बढ जाती है और लम्बे समय तक ऐसा करने से उनमे बाँझपन जैसे गंभीर समस्या पैदा हो जाती है और अगर किसी गर्भवती महिला में पोली कार्बोनेट पहुच गया तो उसके बच्चो मे भी संक्रामक रोग फ़ैल जाते है जिससे की बड़ा होने पर बच्चा नपुंसक तक हो सकता है... अब ध्यान ये देना है कैसे करे प्लास्टिक की बोतल का इस्तेमाल... सबसे पहले बोतल को कभी भी गर्म पानी में न खौलाए... और डिटर्जेंट का इस्तेमाल बोतल साफ करने के लिए न करे... समय समय पर बोतल बदल दे साथ ही सफ़र करते वक्त ज्याद देर रखा हुआ पानी न पिए और कार में बोतल बंद करके न छोडे और न ही पानी पिए...
नौकरी मिलने में होगी आसानी ....
अब कानपूर और आस पास के जिलो में बेरोजगार युवको को नौकरी के लिए दर दर नहीं भटकना पड़ेगा ..कानपूर सेवायोजन कार्यालय ने अपनी निजी वेब साईट बना ली जिसके द्वारा अब बेरोजगार युवक अपना पंजीयन ऑनलाइन करा सकेंगे ...इसकी अधिकारिक लौन्चिंग सितम्बर महा के अंत तक हो जाएगी अभी इसका ट्रायल हो चुका है ...इस वेब साईट के जरिये विभाग नौकरियों और स्वरोजगार के लिए कराई जाने वाली ट्रेनिंग की सूचना भी ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा ...
इस सेवा के द्वारा फतेह्गड़ कन्नौज इटावा कानपूर नगर रमाबाई नगर ( कानपुर देहात ) के उद्योगों में पदों की जानकारी इस वेब साईट के जरिये ही प्राप्त हो जाएगी...जिसमे सेवायोजक हर 3 महीनो में रिक्तियों व खाली पदों की सुचना ऑनलाइन भेज सकेंगे ...जिसके लिए उन्हे एक यूज़र नेम और पासवार्ड प्रदान किया जायेगा ...इस बात की जानकारी सेवायोजक अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने दी ...

लड़की ने करवाया 50 लाख की फिरौती के लिए अपने प्रेमी का अपरहण !
लड़की ने करवाया 50 लाख की फिरौती के लिए अपने प्रेमी का अपरहण !
एक लड़की ने ही अपने प्रेमी का अपरहण सिर्फ पैसो के खातिर करवाया/ कल्यानपुर के काकादेव इलाके में रहकर सी.ए की पढाई कर रहे मूल रूप से कायमगंज के रहने वाले तम्बाकू व्यापारी महेंद्र सिंह के लडके म्रदुल उर्फ़ बबलू क़ा अपरहण 24 जुलाई को हुआ था ..../ बबलू के परिवार वालो को तब मालुम पड़ा जब उनके पास 50 लाख की फिरौती का फ़ोन आया ..../तब परिजनों ने कल्यानपुर थाने में अपरहण की रिपोर्ट दर्ज कराई...... इस घटना की जाँच के लिए डी.आई.जी प्रेम प्रकाश ने एस.ओ.जी को लगाया था / उसके बाद से ही एस. ओ. जी ने इलेक्ट्रोनिक सर्विलांस पर बबलू के मोबाइल को लगाया ..... जिसकी लोकेशन बराबर रायबरेली मिलती रही ..... एक दम ठीक लोकेशन मिलते ही एस .ओ. जी ने रायबरेली के समस्तपुर खालसा गावं में छापा मार कर मंजूर अहमद के घर से बबलू को बंधी हुई हालत में मुक्त करवाया / इस घटना में मुख्य अभियुक्त बबलू के ही पडोसी कायम गंज निवासी मदन लाल बाल्मीकि और रेहान अहमद को पकड़ा गया ... इन लोगो से जब पूछ ताछ की गई तो मुसकान नाम की लड़की का नाम सामने आया जिसने रेहान और मदन के कहने पर ही बबलू को रायबरेली बुलाया था ... इस घटना में मुख्य भूमिका निभाने वाले मदन का बबलू के पिता से आपसी विवाद चल रहा था जिसमे उन्होने मदन और रेहान को जेल की हवा तक खिला दी थी .... इस संबंद मे बबलू ने बताया अगर एक दिन और देर हो जाती तो ये लोग मेरे को मार देते ... क्योंकि मैं रेहान और बबलू को पहचान गया था ...मेरी मुस्कान से दोस्ती फ़ोन द्वारा हुई थी ...और मुस्कान से मिलने के लिए मैं आया था जहा मुस्कान ने मुझे मंजूर के घर पर बुलाया और वहा पहले से ही मौजूद रेहान और मदन ने मुझे पकड कर बांध दिया और मेरे फ़ोन से पापा के मोबाइल पर 50 लाख की फिरौती मांगी ...
जिसके बाद पुलिस ने रेहान और मंजूर की निशान देही पर इलाहबाद के सैनी पहुची जहा से मंजूर की पत्नी नजमा और मुस्कान को गिरफ्तार कर लिया ...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, August 03, 2010

महंगाई ने कफ़न को भी किया महँगा ....

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महंगाई ने कफ़न को भी किया महँगा ...>जहा एक और महंगाई में जनता से लेकर संसद तक हाहाकार मचा हुआ है वही महंगाई ने डायन ने एक और को लील लिया है और वो है कफ़न ... जहा एक और महंगाई से खाने पीने की वस्तुए अभी तक महँगी थी वही अब कफ़न और दफ़न के दाम भी बढ गए है हिन्दू रीत रिवाजों से क्रिया कर्म करने वाले खर्चे में डेड से दोगुनी वृद्धी हो गई है जिसे की लोग अब यही कहेंगे की जीना भी हुआ मुश्किल और मरना भी ...
घाट पर अगर कोई व्यक्ति दाह संस्कार करने 1 से 2 साल पहले जाता था तो करीब 2500 से 3000 हज़ार रुपये का खर्च आता था लेकिन अब वही 5 से 6 हज़ार रुपये हो गया है ... हिन्दू धर्म के क्रिया कर्म मे मुस्लिम धर्म से ज्यादा खर्च होता है . और अगर महेंगाई बढ गई है तो पिंडो ने भी अपने दाम बड़ा दिए है... एक पिंडा राम किशोर पंडित ने कहा बाबु जब हर चीज़ के दाम बडे है तो हम भी तो वही खाइंत है तो जब हम दाम न बाडाइँबे तो खइबे का ...लेकिन वही अगर दाह संस्कार में कुछ काटोती कर भी ली जाय तो उसका उपाय विद्युत शव दाह है.. लेकिन पुरानी रीती रिवाजों को मानने वाले कहते है की इससे आत्मा को शांति नहीं मिलती ... अब देखना ये है की महेंगाई डायन और कितनो को खाएगी ...

Posted By KanpurpatrikaTuesday, August 03, 2010

पुलिस एक रूप अनेक ......यु पी पुलिस हमेशा

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पुलिस एक रूप अनेक ......यु पी पुलिस हमेशा से ही अपने अच्छे कामो से ज्यादा गंदे कामो की वजह से ज्यादा जानी जाती है ...कभी पुलिस हिरासत से भाग जाते है कैदी तो कभी किसी लड़की या महिलाओ की इज्ज़त तार तार करते मिलते है ये पुलिस वाले ... कभी बेसहारो को मारते है तो कभी अमीरजादो की गुलामी करते नज़र आते ये पुलिस वाले....

चेहरा एक ... कानपुर पुलिस के एक सिपाही ने मुफ्त जूस न देने पर गरीब जूस वाले का ठेलाही पलटा दिया ... ... किस्सा है रैनामार्केट का जहा रामदीन रोज़ की तरह अपना जूस का ठेला रैना मार्केट के पास लगाया था ... तभी कोहना थाने के दो सिपाही अपने दोस्तों के साथ फ्री में जूस पीने रामदीन की दुकान पर आ गय... बकौल रामदीन जब हमने फ्री में इतनी गिलास जूस देने से मना कर दिया तो गुस्से पुलिस वालो ने गाली देते हुए मेरा ठेला ही पलटा दिया ... जब इतने से ही दिल नहीं भरा तो उन्होने कोहना थाने से एक जीप में कई पुलिस वालो को बुला लिया... और अत्रिकमन लगाने के जुर्म में चालान करके थाने ले गई... वही कोहना थाना अध्यक्ष ने बतया की वी आई पी रोड से मिली हनी के कारन अक्सर अधिकारी यहाँ से निकलते है और अधिकारियो के कहने पर यहाँ से आत्रिकमन हटाया जा रहा था न मनाने पर ही ऐसी घटना हुई है ......दुकानदार के आरोप निराधार है ... वही रामदीन का कहना है की शुरुआत में तो हमने समझा की अगर यहाँ ठेला लगाना है तो पुलिस वालों की आवभगत तो करनी पड़ेगी लेकिन जब धीरे धीरे ज्यादा होने लगा और पुलिस वाले अपने दोस्तों के साथ आने लगे तो मैने मना कर दिया इससे गुस्साए पुलिस वालो ने ठेला पलटा दिया....
अरे कोहना थाना अध्यक्ष जी शहर के कई और क्षेत्र में भी टॉम अत्रिकमन लगा है और अधिकारी चिल्ला चिल्ला कर कहते है तब तो ऐसा नहीं होता है ...चेहरा दो ...मामला महिला थाने का है यहाँ पर महिला दरोगा पर आरोप है की पैसा लेने के बाद भी उसने काम नहीं किया ... मामला बर्रा 08 निवासी रामदीन की बेटी आशा की शादी 2008 में हुई थी जिसके बाद से ही ससुराल वाले आये दिन दहेज़ के लिए उसे परेशान करते थे इस आरोप में आशा के ससुराल वालो को नामजद किया गया था जिसमे उसकी सास और नन्द पति विवेक थे ... बकौल विवेक नाम हटाने के उनको 03 किस्तों में 17 हज़ार रुपये

दिए गई थे जो की तत्कालीन एस ओ मंजू कनोजिया जो की अब इटावा में है तथा दरोगा ओम प्रकाश सारस्वत लेकिन पैसा देते समय विवेक ने इनकी बाते अपने मोबाइल फ़ोन पर रिकॉर्ड कर ली थी ... पैसा देने के बाद भी उसको जेल भेज दिया गया था दिया ...जिसके बाद विवेक की बहन रीना ने पूरा मामला तत्कालीन एस एस पी को रेकॉर्डिंग सुना कर घटना की जानकारी दी थी ... मामला भ्रस्टाचार का होने के कारन उसे एंटी करप्सन विभाग को दे दिया गया था जिसकी जाँच होने पर मामला सही पाया गया ... इस सम्बन्ध में एंटी करप्सन टीम के इंस्पेक्टर एस के मिश्र ने इटावा व एटाके जिला पुलिस प्रमुखों को कार्यवाही के लिए लिखा है...
चेहरा 3 :- डी आई जी ने सभी थानों को एक आदेश दे रखा है की सप्ताह के पहले सोमवर को चेकिंग अभियान चलाया जाय जिसमे चौराहे के चारो और फाॅर्स लगा कर चेकिंग की जाय ... लेकिन यु पी पुलिस ऊपर से कानपुर .... वहां चेकिंग के नाम पर सिर्फ दो पहिया वाहनों को ही चेक किया जाता है ... इस चेकिंग के दौरान ब्रहम नगर चौराहे पर एक बाइक को पुलिस वालो ने रोकने की कोशिश की लेकिन वो भागने लगा फिर क्या था दौड़ा कर पकड लिया .. पकड़ा तो पकड़ा ऊपर से पिटाई भी कर दी साथ में चालान भी पकड़ा दिया ...पुलिस ने एक आदेश तो मान लिया की चेकिंग होगी लेकिन वाही डी आई जी ने ये भी कहा है की किसी से भी बदसुलूकी न करे लेकिन पुलिस है की मानती ही नहीं ...फिर हर कोई सत्ता पछ से जुड़ा है सो बाइक सवार थोड़ी ही देर में आधा दर्ज़न लोगो को लेकर पहुच गया जिसमे परिवार के लोगो के साथ एक नेता जी भी पहुच गय कहा सुनी हुई और गाली गलौज भी.. फिर क्या था पुलिस ने सभी को दौड़ा दौड़ा कर पीटा ... ये उत्तर प्रदेश पुलिस है जनाब ये तो सिर्फ 3 चेहरे ही है ... न जाने कितने चेहरे अभी भी छुपे है .

Posted By KanpurpatrikaTuesday, August 03, 2010

मीडिया हो निष्पक्ष

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मीडिया हो निष्पक्ष ....मीडिया हो निष्पक्ष ....कम से कम आज के समय में मीडिया को तो निष्पक्ष होजाना चाहिए ... जहा एक और राजनीतिक दल और छोटी पार्टियों के नेता हर बात पर राजनीती करते नज़र आते है ... मीडिया को इससे दूर होना जरुरी है..मेरा कहने का मतलब ये है की अगर कही भी कोई व्यक्ति मरता है तो वो गरीब या अमीर होगा .. ये हर व्यक्ति जनता है लेकिन आम जनता ये नहीं जानती की वो दलित होगा या मुश्लिम ये बात सिर्फ मीडिया ही बताती है.. जैसे जींद में दलित की पीट पीट कर हत्या..चार मुस्लिमो पर लाठी डंडो से हमला.. शायद ये भी खबर हो सकती है की जींद में एक युवक की पीट पीट कर हत्या... और चार युवको को लाठी डंडे से हमला ... अगर हम ही जातिवाद को बढावा देंगे को सही आइना कौन दिखायेगा..क्योंकि अगर हम ये कहते है की एक युवक की पीट पीट कर हत्या .. और वहा पर राजनितिक दल का नेता रिपोर्टर के पूछने पर ये बोले की ये एक दलित युवक था और ये हम बर्दास्त नहीं करेंगे तो शायद हम उस पर और लिख सकते है

Posted By KanpurpatrikaTuesday, August 03, 2010

Monday, July 12, 2010

ख़त्म होता कानपुर

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ख़त्म होता कानपुर का कारण नम्बर एक
कानपुर यु तो हमेशा से औद्योगिक नगरी के नाम से जाना जाता रहा है पिछले कई सालो में कानपुर ने अपनी औद्योगिक पहेचान खो दी है इसका मूल कारन यहाँ की मिलो में होने वाली राजनीती थी जिसको यहाँ के मतलबी और लाल झनडे वाले नेताओ ने बड़ा चड़ा कर बर्बाद कर दिया और हालात ये हो गई की करीब करीब सभी मिले बंद हो गई .कभी सुबहा से लेकर शाम तक मिलो से निकलने वाले सैरण और मिलो से निकालने वाले श्रमिको से हर सड़क और गली रोशन रहेती थी .और धीरे धीरे यहाँ के मिलो से निकालने वाले सैरण का सोर भी बंद हो गया और यहाँ के मजदूरो ने कभी तंगहाली से खुद खुसी कर ली तो कभी रिक्शा और कभी सब्जी बेच कर गुजरा करने लगे ।
ख़त्म होता कानपुर का कारण  नम्बर दो

धीरे धीरे ये कानपुर शहर फिर से उठ खड़ा हुआ और अपना नाम फिर से सारी दुनिया में रोशन करने की सोचने लगा इसमे ओ सफल भी होता क्योकि कानपुर अपना नाम इस बार शिक्षा के क्षेत्र में कर रहा था लेकिन कुछ ही साल ही हुंये थे की फिर से यहाँ की राजनीती चालू हुई और कानपुर को बिजली न देनी की साजिस जिससे पहेलें से ही कर्राहा रहे कानपुर पर एक जोर दार प्रहार था / यहाँ पर दूर दाराज़ के जिलो और शहेरो से छात्र पडने आते थे॥
लेकिन इस बार भी साजिश कर्ता इसमे सफल हो गए .सरकारी आकड़ो के मुताबिक कानपुर शहर से एक अच्छा खासा सरकारी राजस्व प्राप्त होता है लेकिन फिर भी कानपुर के साथ सौतेला व्यावाहर होता रहा है । जबकि कानपुर शहर से ही सांसद श्री प्रकाश जयसवाल है और पिछले कई सालो से सरकार में मंत्री पद भी हासिल किये हुए है कभी केंद्रीय ग्रह राज्य मंत्री तो कभी कोयला मंत्री। लेकिन फिर भी कोई आवाज़ कभी नहीं उठाई गई ।
ख़त्म होता कानपुर का कारण नम्बर तीन
तीसरा और सबसे महत्व पूर्ण कारण यहाँ की निर्मल पावन गंगा का जो अब लगबघ यहा के किनारों से किनारा कर चुकी है .यहाँ बीठुर जैसे पावन और धर्मिक तथा एतहासिक प्रष्ठ भुंमी रही है परमट मंदिर हो या मागज़ीने घाट । सभी अपने में महत्व पूर्ण थे लेकिन अब सभी घटो में गंदगी और बदबू दार पानी ही मिलता है कभी लोग अपने पाप दुलने यह जाते थी तो कभी बोतल में गंगा जल भरकर अपने को शुद्ध किया करते थे लेकिन अब सायद घ्रर का पानी ज्यादा शुद्ध है।
यहाँ के टेनरियो से छोड़ा जाने वाल विषैला पानी और गंगा में फ़ेकी जाने वाली गन्दगी और लाशे साफ देखि जा सकती अहै । और इसको बचाने के प्रयास में प्रधानमंत्री से लेकर स्वानी राम देव और फ़िल्मी हस्तियों ने भी कभी कभार यहाँ आकार सफाई की लेकिन सिर्फ और सिर्फ कैमरा के आंगे । और लिये गई कई संकल्प लेकिन आज क्या हुआ । यहाँ के राम जी त्रिपाठी ही अकेले एँसे व्याक्ति है जो लगा तार गंगा को बचाने क प्रयास कर रहे है ।
लेकिन गंगा जल पर भी राजनीती वह मेरे देश क्या हो राह है ?
ख़त्म होता कानपुर का कारण नम्बर चार
बिजली न आने से यह सभी जगह इन्वेर्टर और जन्र्तेटर दिन के १२ घंटे चलते हुंये नजर आ जायेंगे । लेकिन ये भी कानपुर को नष्ट करने के लिए काफी है । कानपुर से इस जहिरिले धुएँ के कारन पिछले कई सालो में टी बी घातक कैंसर और मानसिक रोगों के चलते कई मौते हो चुकी है .जनरेटरो से निकालने वाले धुल धुआ और ध्वनि प्रदुषण यहाँ आने वाले लोगो को साफ नज़र आ जाता है और और फिर कानपुर न आने की बात करते है .पिछले एक महीने में यहाँ के करीब ४० से ज्यादा हरे भरे वृछ गिर चुके है कभी आंधी से तो कभी पानी से और कभी लोगो के द्वारा गिराए जाते है और कभी अपने आप ही हरे भरे पेड़ गिर जाते है क्यों न की यहाँ का आदमी तो खोखला होता जा रा हा है साथ ही यह के पेड़ भी जो जरा से तेज़ हवा में भी गिर पड़ते है ।

कुल मिला कर बिजली व्यवस्था हो या प्रदुषण या फिर निर्मल पावन गंगा की सफाई ये सभी कानपुर को धीरे धीरे ख़त्म करने के लिए काफी है ।
सिर्फ पर्चे और पोस्टर पर लिख देने से ग्रीन कानपुर क्लीन कानपुर बात नहीं बनेंगी । प्रयास करना होगा सभी को ।
जब सुधरंगे हम तो सुधरेगा कानपुर का नारा बुलंद करना होगा

Posted By KanpurpatrikaMonday, July 12, 2010