Thursday, March 10, 2022

मोदी योगी लहर अभी भी जारी

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पांच राज्यों में ईवीएम के खुलने के बाद जिस तरह से रुझान आने शुरू हुए उससे भारतीय जनता पार्टी को चार राज्य में  सरकार बनना तय माना जाने लगा था उससे स्पष्ट हो गया था कि कहीं ना कहीं इस बार भी तमाम विरोध के बावजूद मतदाताओं में मोदी लहर रही सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की सरकार फिर से बन गई है इससे स्पष्ट हो गया है कि लखीमपुर खीरी में किसान आंदोलन की हिंसा की नाराजगी पूरे प्रदेश के किसानों में भाजपा के खिलाफ इस जनादेश में देखने को नहीं मिली महंगाई का मुद्दा भी इस बार भाजपा के खिलाफ कोई भी दल जुटा नहीं पाया बल्कि या यूं कहें कि समाजवादी पार्टी ने लड़ाई तो उत्तर प्रदेश में की  किंतु जहां तक बात है जो वास्तविकता है उसमें प्रधानमंत्री मोदी योगी और उनकी स्टार प्रचारक टीम के आरोपों का एक से एक बढ़कर जवाब देने में ही अखिलेश उलझे रहे जनता के मूल  महंगाई मूल अधिकारों को किसी दल को महत्व ही नहीं दिया इसका परिणाम यह रहा कि भाजपा जो चाहती थी सपा मुखिया या समूचा विपक्ष उसी में काम करता रहा जिसका भाजपा को फायदा मिला  जहां तक इस बार की बात है तो यह चुनाव भाजपा ने जमीनी स्तर पर ही लड़ा जिसमें उसको घर घर सदस्य बनाने का पैटर्न बहुत तेजी से काम किया ऐसी सूरत में जब समर्थकों की बात है तो यह तय है कि जब भाजपा के समर्थक ज्यादा होंगे तो 55 से 60 फ़ीसदी मतदान में जीतना स्वाभाविक है जहां तक पंजाब की बात है तो जहां से कांग्रेस को बड़ी उम्मीद थी वहां भी कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को किसान आंदोलन में पक्षधर बने रहने का फायदा नहीं मिल सका जिसमें स्पष्ट हो गया है कि वहां की जनता ने कांग्रेस को हटाकर आम आदमी पार्टी की सरकार को बेहतर समझा जिसमें यहां के मतदाताओं ने किसान आंदोलन की अपनी नाराजगी भाजपा से निकाल कर उन्हें यहां खड़े नहीं होने दिया |

Posted By KanpurpatrikaThursday, March 10, 2022

Monday, March 7, 2022

संभव नहीं दिखता युद्ध विराम

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तीसरे दौर की बातचीत के पूर्व जिस तरह से रूस और यूक्रेन के बीच एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं उससे यह तय हो गया है कि इस शांति समझौते की टेबल में 11 दिन बाद भी कोई निष्कर्ष निकलता नहीं दिख रहा है जिससे युद्ध विराम की स्थिति हाल फिलहाल तो नहीं दिख रही है बल्कि इस बात का सबसे बड़ा डर है कि अगर यह वार्ता विफल होती है तो उत्तेजना में रूस हमले और तेज कर सकता है विदित हो कि 11 दिन में सबसे ज्यादा नुकसान यूक्रेन के शहर ओडिशा खानकिव  विनित्सिया का हुआ है इन्हीं ने सबसे ज्यादा आक्रमण झेले हैं हालांकि यूक्रेन की राजधानी कीव पर भी हमले तेज़ है जहां तक यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने रूस पर आरोप लगाया है कि रूसी सेना लगातार उनके ऊर्जा संयंत्रों पर कब्जे की कोशिश में लगा है जिससे रूस में दो यूक्रेनी परमाणु सयंत्रो पर कब्जा भी कर लिया है तथा वह लगातार तीसरे पर कब्जे की ओर बढ़ रहा है जबकि रूस का आरोप है कि यूक्रेन राष्ट्रपति ने न्यूक्लियर बम बनाने की ओर से जोर शोर से तैयारी करवा रहे हैं इस तरह के तीसरे वार्ता के पूर्व जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है उससे यह बात तो स्पष्ट है कि युद्धविराम के लिए दोनों देशों की बातचीत में रूस तो झुकने वाला नहीं है क्योंकि वह यूक्रेन पर हावी है वह अपनी हर शर्त को यूक्रेन पर थोपेगा ऐसी सूरत में यूक्रेन जैसा छोटा देश यह भली बात जानता है कि रूस से लड़ने की हैसियत में नहीं है किंतु युद्धविराम की समझौते की टेबल में वह भी चाहेगा कि रूस उसके सामने ऐसी बात रखें उसका भी सम्मान बना रहे कहने का आशय यह है कि उसकी भी सुनी जाए क्योंकि उसका नुकसान जो होना था वह हो चुका है लिहाजा नहीं लगता है कि यूक्रेन रूस की शर्तों पर सहर्ष हथियार डाल देगा बहरहाल दुनिया भर के देशों को तीसरे दौर की दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ता में युद्धविराम की उम्मीद काफी कम लगती है किंतु फिर भी वह चाहते हैं कि 11 दिन के इस युद्ध का अब विराम हो जाना चाहिए बात तो वहीं पर आकर अटक गई कि क्या यूक्रेन रूस के सामने इस तीसरे दौर में हथियार डालकर उसकी सारी बातें तो शर्त मान लेगा ऐसा होता तो नहीं दिख रहा है किंतु हमारी यही गुजारिश और दुआ भी है कि युद्ध विराम होना चाहिए क्योंकि युद्ध में नुकसान ही नुकसान है |

Posted By KanpurpatrikaMonday, March 07, 2022

Sunday, March 6, 2022

धमाके पर मुंह से बरबस निकलती हैं आहें

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जिन विषम परिस्थितियों में यूक्रेन से युद्ध जैसी बड़ी त्रासदी में बम धमाकों के बीच से निकलकर आए छात्र-छात्राओं की सलाम करना चाहिए क्योंकि  उन्होंने ऐसी विषम परिस्थितियों में अपने हौसले को कम नहीं होने दिया जहां तक जो बच्चे अभी भी वहां फंसे हुए हैं उनका तो हाल बुरा है ही साथ ही उनके भारत में मौजूद अभिभावकों को कितनी बुरे हालातो  से गुजरना पड़ रहा है उनके मुंह से बरबस यही है निकल रहा है कि बुद्धि मारी गई थी जो बच्चे का भविष्य बनाने के लिए धमाकों की भट्टी में झोंक दिया जिसमें अगर  पिता ने बच्चों को यूक्रेन जाने की पैरवी की है तो माँ ने उनका जीना हराम किए हुए हैं कि तुम ही ने बेटे या बेटी को आग की भट्टी में झोंका है अगर उसे कुछ हो गया तो जिंदगी भर माफ नहीं करूंगी ऊपरवाला किसी तरह से मेरे बच्चे को सुरक्षित वापस घर ला दे तभी दिल को चैन मिलेगा माताओं की इस समय बेहद दयनीय स्थिति है अज्ञात आशंकाओं से ग्रसित इनके कान आंखें टीवी चैनलों के पर्दे में लगी हैं कभी मोबाइल की तरफ देखते हैं मोबाइल की घंटी बजते ही अज्ञात आशंका से वो डरते हुए फोन उठाते हैं जिसमें बस एक ही बात होती है जैसे किसी करीबी का फोन आता है तो पूछ तो वह फोन पर ही बिलख पड़ती है बार-बार विदेश मंत्रालय फ़ोन मिलाया जा रहा है अधिकारी भी दिलासा देते देते परेशान है कि आखिर वह क्या करें उड़ाने तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश में लगे हैं कि जल्द से जल्द पूरी भारत की दुरी तय की जाएं पायलट जैसे ही युक्रेन से उड़ान को इंडिया की सरजमी पर ब्रेक लेता है उस समय अभिभावकों के हालात देखने वाले होते हैं इस प्लेन में जिनके बच्चे नहीं आ पाते उनके बुरे हाल होते हैं रोते-रोते उनका बुरा हाल होता है और फिर से नई उम्मीद से अपने बच्चो की कुशल वापसी की प्रार्थना करने लग जाते है |

Posted By KanpurpatrikaSunday, March 06, 2022

Wednesday, March 2, 2022

जिसका डर था वही हुआ ना

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जिसका डर था वही हुआ ना

आखिर यूक्रेन में रूस के निरंतर हमलावर होने के बाद जिसका डर था वही हो गया भारतीय छात्र कर्नाटक का रहने वाला नवीन शेखरअप्पा उस समय एक धमाके का शिकार हो गया जब एक पेट की आग बुझाने के लिए राशन की कतार में खड़ा था इस दर्दनाक हादसे का यह असर हुआ कि भारतीय छात्रों में भगदड़ मच गई है प्रत्येक छात्र छात्रा डरी सहमी है वह ऐसे स्थान की तलाश में भागते ही जा रहे हैं जहां उन्हें बम और मिसाइलों के धमाके ना सुनाई दें बहुत ही बुरे हालात हैं यहां उनके परिवारों के हालात भी बहुत बुरे हैं पल-पल वह टीवी मोबाइलों से अपने बच्चों के संपर्क में बने हुए हैं भारतीय दूतावास में लगातार फोन खनखना रहे हैं अधिकारी उड़ानों के विषय में बताते बताते परेशान हैं जिसमें एक ही निवेदन होता है कि कैसे भी हो सके उनके बच्चों को बचा कर ले आए यहां तक हालात यह हैं कि अभिभावक इस कदर उतावले हैं कि उनके बच्चों को जो भी सूरत हो सुरक्षित ले आया जाए भारतीय छात्र की मौत के बाद स्थितियां बहुत ही खराब हो गई है हालांकि भारत 3 दिन में उड़ाने बढ़ाने की तैयारी में जुट गया है किंतु यूक्रेन में फंसे छात्र छात्राओं की जो सूचना मिल रही है कि दहशत में बदहवास अवस्था में भागते भागते थक चुके हैं और व्यवस्थाएं ऐसी हैं कि भूखे छात्र छात्राओं को और प्यास भी परेशान करती जा रही है उसके बाद जैसे ही वे भूख प्यास मिटाने के लिए निकलते हैं वैसे ही धमाका हो जाता है बेचारे फिर से दुबक जाते हैं भारत सरकार करे भी तो करे क्या वह भली भांति जानता है किंतु वह हाथ पर हाथ धरे तो बैठा तो नहीं है उसके भी प्रयास जारी हैं फिर भी वहां के हालातों को देखते हुए भारत सरकार को प्रयास बढ़ाने चाहिए यही अपील के साथ मृत छात्र की आत्मा की शांति के साथ उनके परिवार को भी हिम्मत रखने की सांत्वना देता है | 

Posted By KanpurpatrikaWednesday, March 02, 2022

Tuesday, March 1, 2022

भारतीय मीडिया पर रूसी आपत्ति का सच

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रूस ने जिस तरह से यूक्रेन पर की जा रही अपनी सैनिक कार्रवाई को लेकर दिखाई जा रही खबरों व छप रही खबरों पर भारतीय मीडिया को सलाह दी है कि वह तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रसारित करें गलत दिखाकर तथ्यहीन  खबरों का भ्रामक प्रचार ना करें रूस ने कहा की हमने  यूक्रेन पर खुद हमला नहीं बोला बल्कि यूक्रेन से पश्चिमी देशों की सेना हटाने व नाज़ीकरण से मुक्त करने व डानबस में यूक्रेन द्वारा साल से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए विशेष सैन्य अभियान चलाया है इसे युद्ध या हमले का नाम देना भी गलत है उन्होंने यह भी स्पष्टीकरण दिया है कि हम वहां हम किसी शहर को नुकसान नहीं पंहुचा रहे है बल्कि सैन्य ठिकानों पर ही कार्यवाही की जा रही है जहां तक रूसी दूतावास की बात है तो वह पहले ही भारतीय मीडिया ने कजाखस्तान में भड़की हिंसा पर भी तथ्यहीन खबरें छापने को लेकर आपत्ति जता चुका है साथ ही उसने सचेत किया था कि कजाखस्तान उसका दोस्त है जिसके लिए उसने कलेक्टिव पीसकीपिंग फोर्स भेजा था रूसी दूतावास की इस तरह की दूसरी बार भारतीय मीडिया पर उंगली उठाने के पीछे भारतीय मीडिया को निःसंदेह इस पर ध्यान देने वाली बात है कि प्रतिस्पर्धा में जल्दबाजी को हम कोई ऐसी खबर ना छाप दें कि उस पर दुनिया भर के देशों के सामने हमारी जग हंसाई हो एक और हमें इस और ध्यान रखना चाहिए कि रूस अपनी सैन्य कार्यवाही रोकने के लिए इनसे वार्ता करने के लिए ना सिर्फ तैयार है ऐसे में हमारा भी तो मुख्य मकसद यही है कि किसी भी तरह से रूस और यूक्रेन के बीच चल रही सैन्य कार्यवाही समाप्त हो दोनों ही अपने मित्र राष्ट्र हैं लिहाजा इस पर कहीं ना कहीं हमें उग्र रूप दिखाने की बजाय लचर रुख अख्तियार करना चाहिए क्योंकि हमारा मकसद यह है कि सैनिक कार्रवाई रुके और खून बहना बंद हो जहां तक रूसी दूतावास की आपत्ति पर हमें फिर से इस विषय पर सोचना चाहिए क्योंकि भारतीय मीडिया का एक अपना अलग स्थान है लिहाजा इसमें किसी तरह का दाग ना लगे हमें दोनों देशों से अपने देश के संबंध संबंधों का भी ख्याल रखकर साफ-सुथरी अपनी छवि  बनाये रखे |

Posted By KanpurpatrikaTuesday, March 01, 2022