Monday, January 18, 2021

पारद शिवलिंग

Filled under:

पारद शिवलिंग
वैदिक रीतियों में, पूजन विधि में, समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति में पारद से बने शिवलिंग एवं अन्य आकृतियों का विशेष महत्त्व होता है। पारद जिसे अंग्रेजी में एलम (Alum) भी कहते हैं , एक तरल पदार्थ होता है और इसे ठोस रूप में लाने के लिए विभिन्न अन्य धातुओं जैसे कि स्वर्ण, रजत, ताम्र सहित विभिन्न जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है। इसे बहुत उच्च तापमान पर पिघला कर स्वर्ण और ताम्र के साथ मिला कर, फिर उन्हें पिघला कर आकार दिया जाता है।

पारद को भगवान् शिव का स्वरूप माना गया है और ब्रह्माण्ड को जन्म देने वाले उनके वीर्य का प्रतीक भी इसे माना जाता है। धातुओं में अगर पारद को शिव का स्वरूप माना गया है तो ताम्र को माँ पार्वती का स्वरूप। इन दोनों के समन्वय से शिव और शक्ति का सशक्त रूप उभर कर सामने आ जाता है। ठोस पारद के साथ ताम्र को जब उच्च तापमान पर गर्म करते हैं तो ताम्र का रंग स्वर्णमय हो जाता है। इसीलिए ऐसे शिवलिंग को "सुवर्ण रसलिंग" भी कहते हैं।

पारद के इस लिंग की महिमा का वर्णन कई प्राचीन ग्रंथों में जैसे कि रूद्र संहिता, पारद संहिता, रस्मर्तण्ड ग्रन्थ, ब्रह्म पुराण, शिव पुराण आदि में पाया गया है।

योग शिखोपनिषद ग्रन्थ में पारद के शिवलिंग को स्वयंभू भोलेनाथ का प्रतिनिधि माना गया है। इस ग्रन्थ में इसे "महालिंग" की उपाधि मिली है और इसमें शिव की समस्त शक्तियों का वास मानते हुए पारद से बने शिवलिंग को सम्पूर्ण शिवालय की भी मान्यता मिली है ।

इसका पूजन करने से संसार के समस्त द्वेषों से मुक्ति मिल जाती है। कई जन्मों के पापों का उद्धार हो जाता है। इसके दर्शन मात्र से समस्त परेशानियों का अंत हो जाता है। ऐसे शिवलिंग को समस्त शिवलिंगों में सर्वोच्च स्थान मिला हुआ है और इसका यथाविधि पूजन करने से

मानसिक, शारीरिक, तामसिक या अन्य कई विकृतियां स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं। घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है।

पौराणिक ग्रंथों में जैसे कि "रस रत्न समुच्चय" में ऐसा माना गया है कि 100 अश्वमेध यज्ञ, चारों धामों में स्नान, कई किलो स्वर्ण दान और एक लाख गौ दान से जो पुण्य मिलता है वो बस पारे के बने इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही उपासक को मिल जाता है।

अगर आप अध्यात्म पथ पर आगे बढ़ना चाहते हों, योग और ध्यान में आपका मन लगता हो और मोक्ष की प्राप्ति की इच्छा हो तो आपको पारे से बने शिव लिंग की उपासना करनी चाहिए। ऐसा करने से आपको मोक्ष की प्राप्ति भी हो जाती है।

पारद एक ऐसा शुद्ध पदार्थ माना गया है जो भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है। इसकी महिमा केवल शिवलिंग से ही नहीं बल्कि पारद के कई और अचूक प्रयोगों के द्वारा भी मानी गयी है।

धातुओं में सर्वोत्तम पारा अपनी चमत्कारिक और हीलिंग प्रॉपर्टीज के लिए वैज्ञानिक तौर पर भी मशहूर है।

पारद के शिवलिंग को शिव का स्वयंभू प्रतीक भी माना गया है। रूद्र संहिता में रावण के शिव स्तुति की जब चर्चा होती है तो पारद के शिवलिंग का विशेष वर्णन मिलता है। रावण को रस सिद्ध योगी भी माना गया है, और इसी शिवलिंग का पूजन कर उसने अपनी लंका को स्वर्ण की लंका में तब्दील कर दिया था।

कुछ ऐसा ही वर्णन बाणासुर राक्षस के लिए भी माना जाता है। उसे भी पारे के शिवलिंग की उपासना के तहत अपनी इच्छाओं को पूर्ण करने का वर प्राप्त हुआ था।

ऐसी अद्भुत महिमा है पारे के शिवलिंग की। आप भी इसे अपने घर में स्थापित कर घर में समस्त दोषों से मुक्त हो सकते हैं। लेकिन ध्यान अवश्य रहे कि साथ में शिव परिवार को भी रख कर पूजन करें।

पारद के कुछ अचूक उपायों का विवरण निम्नलिखित है, जिन्हें आप स्वयं प्रयोग कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं:

1.

अगर आप अध्यात्म पथ पर आगे बढ़ना चाहते हों, योग और ध्यान में आपका मन लगता हो और मोक्ष के प्राप्ति की इच्छा हो तो आपको पारे से बने शिवलिंग की उपासना करनी चाहिए। ऐसा करने से आपको मोक्ष की प्राप्ति भी हो जाती है।

2. अगर आपको जीवन में कष्टों से मुक्ति नहीं मिल रही हो, बीमारियों से आप ग्रस्त रहते हों, लोग आपसे विश्वासघात कर देते हों, बड़ी-बड़ी बीमारियों से ग्रस्त हों तो पारद के शिवलिंग को यथाविधि शिव परिवार के साथ पूजन करें। ऐसा करने से आपकी समस्त परेशानियां ख़त्म हो जाएंगी और बड़ी से बड़ी बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाएगी।

3.

अगर आपको धन सम्पदा की कमी बनी रहती है तो आपको पारे से बने हुए लक्ष्मी और गणपति को पूजा स्थान में स्थापित करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जहां पारे का वास होता है वहां माँ लक्ष्मी का भी वास हमेशा रहता है। उनकी उपस्थिति मात्र से ही घर में धन लक्ष्मी का हमेशा वास रहता है।

4. अगर आपके घर में हमेशा अशांति, क्लेश आदि बना रहता हो, अगर आप को नींद ठीक से नहीं आती हो, घर के सदस्यों में अहंकार का टकराव और वैचारिक मतभेद बना रहता हो तो आपको पारद निर्मित एक कटोरी में जल डाल कर घर के मध्य भाग में रखना चाहिए। उस जल को रोज़ बाहर किसी गमले में डाल दें। ऐसा करने से धीरे-धीरे घर में सदस्यों के बीच में प्रेम बढ़ना शुरू हो जाएगा और मानसिक शान्ति की अनुभूति भी होगी।

पारद को पाश्चात्य पद्धति में उसके गुणों की वजह से Philospher's stone भी बोला जाता है। आयुर्वेद में भी इसके कई उपयोग हैं।

5. अगर आप उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, हृदय रोग से परेशान हैं, या फिर अस्थमा, डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों से ग्रसित हैं तो आपको पारद से बना मणिबंध जिसे कि ब्रेसलेट भी कहते हैं, अच्छे शुभ मुहूर्त में पहननी चाहिए। ऐसा करने से आपकी बीमारियों में सुधार तो होगा ही आप शान्ति भी महसूस करेंगे और रोगमुक्त भी हो जाएंगे।

पारे के शिवलिंग के पूजन की महिमा तो ऐसी है कि उसे बाणलिंग से भी उत्तम माना गया है। जीवन की समस्त समस्याओं के निदान के लिए पारद के उपयोग एवं इससे सम्बंधित उपाय अत्यंत प्रभावशाली हैं। यदि इनका आप यथाविधि अभिषेक कर, पूर्ण श्रद्धा से पूजन करेंगे तो जीवन में सुख और शान्ति अवश्य पाएंगे।

Posted By KanpurpatrikaMonday, January 18, 2021

जानिए कुंडली के मास्टर प्लेनेट के बारे में जो देता है सक्सेस

Filled under:

कुंडली का  मास्टर प्लेनेट
हर कुंडली में नौ ग्रह और बारह राशियों का अध्ययन किया जाता है परन्तु कुंडली केवल इन्ही पर निर्भर नहीं करती. कुंडली में एक विशेष ग्रह होता है जो कुंडली का प्राण होता है. वह विशेष ग्रह कुंडली का  मास्टर प्लेनेट है. अगर यह ग्रह कमजोर है तो कुंडली में कोई सफलता नहीं मिलती. अगर केवल वही ग्रह मजबूत है तो व्यक्ति जीवन में खूब सफलता पाता है.   

मेष लग्न:-
- इस लग्न के लिए सूर्य चमत्कारी परिणाम देता है
- सूर्य को मजबूत करके हर तरह की सफलता पायी जा सकती है
- साथ ही हमेशा स्वास्थ्य को अच्छा रक्खा जा सकता है  
- नित्य प्रातः सूर्य को जल अर्पित करना बेहद लाभकारी होता है    
   
वृष लग्न:-
- इस लग्न के लिए सब कुछ शनि ही है।
- शनि मजबूत रहे तो हर समस्या का समाधान हो जाता है।
- शनि को ठीक रखकर धन और सेहत की समस्या से बच सकते हैं  ।
- शनि को मजबूत करके वैभव और रिश्तों का वरदान मिलेगा  ।  
- कोई भी बीमारी बड़ा रूप धारण नही कर पायेगी।
- हर शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं  ।

मिथुन लग्न:-
- इस लग्न का कर्म और कर्म का फल दोनों बुध पर निर्भर है
- बुध को ठीक रखकर अपनी सोच को ठीक रख सकते हैं
- साथ ही आर्थिक मजबूती पा सकते हैं
- बुध के कमजोर होने पर बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है  
- नित्य प्रातः भगवान गणेश की उपासना सर्वोत्तम होगी  

कर्क लग्न:-
- इस लग्न के पास सबसे बड़ी शक्ति मंगल है।
- मंगल ठीक रहे तो सब ठीक रहता है।
- ख़ास तौर से दुर्घटनाओं और सेहत की समस्या से रक्षा होती है।
- व्यक्ति जीवन में कम प्रयास करके भी सफलता पाता है  
- हनुमान जी की उपासना खूब लाभकारी होती है  ।

सिंह लग्न:-
- इस लग्न की ताकत बृहस्पति और मंगल हैं
- यह हर तरह के उतार चढ़ाव से बचाएंगे   ।
- इससे आपके जीवन में संघर्ष कम होता जाएगा ।       
- साथ ही साथ आपका प्रभाव बढ़ता जाएगा  ।  
- सूर्य की उपासना सदैव लाभकारी होगी  ।

कन्या लग्न:-
- इस लग्न के लिए शुक्र सबसे ज्यादा बेहतरीन परिणाम देता है   
- शुक्र को मजबूत करके वैभव और रिश्तों का वरदान मिलेगा।
- साथ ही व्यक्ति  व्यक्तित्व प्रभावशाली हो जाता है   
- व्यक्ति जीवन में बहुत विलास और ग्लैमर प्राप्त करता है      
- शिव जी की उपासना करना विशेष लाभकारी होता है 
  
तुला लग्न:-
- इस लग्न की चाभी शनि के पास है  
- शनि अगर बेहतर हो तो व्यक्ति अपूर्व सफलता प्राप्त करता है  
- जीवन में कभी भी किसी चीज़ का अभाव नहीं होता
- व्यक्ति समाज में हमेशा एक विशिष्ट स्थान प्राप्त करता है  
- शनिवार को अन्न या भोजन का दान करना लाभकारी होगा  ।   

वृश्चिक लग्न:-
- वृश्चिक लग्न के लिए बृहस्पति सर्वाधिक महत्वपूर्ण है
- बृहस्पति को ठीक रखकर धन, संतान और ज्ञान का वरदान मिल सकता है
- बृहस्पति को ठीक रखने से लाभ ही लाभ होगा  
- एक पीला पुखराज, स्वर्ण या पीतल में पहनें
- इसे तर्जनी अंगुली में, बृहस्पतिवार प्रातः धारण करें

धनु लग्न:-
- इस लग्न की शक्ति मंगल के पास है
- मंगल को ठीक रखकर संघर्ष कम होगा    
- मुकदमों और विवादों से छुटकारा मिलेगा    
- शनि के हर दुष्प्रभाव से रक्षा होगी    
- यथाशक्ति  हनुमान जी की उपासना करें।  

मकर लग्न:-
- इस लग्न के लिए शुक्र सर्वाधिक महत्वपूर्ण है
- शुक्र से ही इनको विद्या, बुद्धि, करियर और धन की प्राप्ति होती है
- शुक्र ही इनका स्वास्थ्य ठीक रखेगा और संतान की समस्या दूर करेगा
- एक हीरा अथवा जरकन धारण करना लाभकारी होगा  
- जहाँ तक हो सके शराब और नशे से परहेज करें।
   
कुम्भ लग्न:-
- हालांकि इस लग्न के लिए बुध और शुक्र दोनों अनुकूल होते हैं
- फिर भी आपके लिए शुक्र ज्यादा महत्वपूर्ण है  
- शुक्र के कारण ये करियर की ऊंचाइयों को छू पाएंगे।
- और हर तरह की मानसिक समस्याओं से बचे रहेंगे।
- ज्यादा से ज्यादा सफ़ेद वस्त्र धारण करें  ।
- यथाशक्ति शिव जी की उपासना करें । 

मीन लग्न:-
- मीन लग्न की ताकत चन्द्रमा में छिपी होती है
- चन्द्रमा के कारण ही ये ज्ञानी, शानदार और सफल हो पाते हैं
- चन्द्रमा से आप अच्छाi करियर और संपत्ति पा सकेंगे।
- एक मोती चांदी में अवश्य धारण करें  
- इसे सोमवार रात्रि को, कनिष्ठा अंगुली में पहनें।

Posted By KanpurpatrikaMonday, January 18, 2021

Sunday, January 17, 2021

❖▩ஜआज का पंचांग 19 जनवरी 2021, मंगलवार ❖▩ஜ

Filled under:


❖▩ஜआज का पंचांग 19 जनवरी 2021, मंगलवार ❖▩ஜ

🌞🛕 *जय रामजी की*🛕🌞 

 🏹 *जय माँ जगदम्ब भवानी*🏹

       *🐀🐘जय श्री गणेश🐘🐀*
          ▩ஜआज का पंचांग ۩۞۩ஜ

19 जनवरी 2021, मंगलवार, विक्रमी सम्वत 2077, शाका 1942, पौष मास, शुक्ल पक्ष, माघ मास की प्रविष्टा 6, उत्तरायण, दक्षिणगोल, शिशिर ऋतु, तिथि षष्ठी सुबह 10:59 तक तदनन्तर सप्तमी, नक्षत्र उत्तराभाद्रपद सुबह 9:55 तक तदनन्तर रेवती, सूर्योदय 7:30am, सूर्यास्त 5:47pm, राहुकाल अपरान्ह 3:00 से 4:30

 पंचक विचार, गण्डमूल विचार सुबह 9:55 से

🐏 *मेष (Aries):*स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। क्रोध और उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। व्यापार में बड़े खर्च सामने आ सकते हैं। दुष्ट जनों से आपको सावधान रहना चाहिये। कानून का पूरा सम्मान करें वरना समस्या हो सकती है।

🐂 *वृषभ (Tauras):*समाज की भलाई वाले कार्य करेंगे जिससे आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। IT और बैंकिंग से जुड़े लोगों को शानदार सफलता मिलेगी। उच्चाधिकारी आपसे खासे प्रसन्न रहेंगे। लम्बित कार्यों को पूरा करने में सफल रहेंगे। सन्तान की उपलब्धियों से गर्व की अनुभूति होगी।

👭 *मिथुन (Gemini):अपनी सुख-सुविधा में काफी धन खर्च करेंगे। ससुराल पक्ष से लोगों से आपको लाभ प्राप्त हो सकता है। रिश्तों में आ रही कड़वाहट दूर होगी। कंसल्टेंसी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिये दिन बहुत ही अच्छा रहेगा। बेरोजगार लोगों को नौकरी मिल सकती है।

🦀 *कर्क (Cancer):*व्यवसायिक यात्रा होने के योग बन रहे हैं। व्यापारिक दृष्टि से दिन बहुत ही अच्छा रहेगा। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। जीवनसाथी को कुछ उपहार दे सकते हैं। सरकारी कार्यों में आ रही बाधा दूर होगी।

🦁 *सिंह (Leo):व्यापारियों को आय में कुछ समस्या आ सकती है। वायरल इन्फेक्शन का शिकार हो सकते हैं। उच्च रक्तचाप और मधुमेंह के रोगियों को अपने खानपान का ध्यान रखना चाहिये। आज किसी को कर्ज न दें। कार्यक्षेत्र में आपके शत्रु बढ़ सकते हैं।

👧🏻 *कन्या (Virgo):*जीवनसाथी के साथ कहीं घूमने का विचार बना सकते हैं। जीवनसाथी से आपको काफी सहयोग मिलेगा। आपके अधिकार क्षेत्र में वृद्धि होगी। व्यवसाय में नकदी की कमी को दूर कर लेंगे। लोग आपकी वाकपटुता से काफी प्रसन्न और आकर्षित रहेंगे।

⚖ *तुला (Libra):*आपकी कार्यशैली में सुधार होगा। धन लाभ के मार्ग प्रशस्त होंगे। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलने के योग बन रहे हैं। नयी सम्पत्ति खरीदने का विचार बनायेंगे। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। पैतृक व्यवसाय में आपको लाभ मिलेगा।

🦂 *वृश्चिक (Scorpio):*सन्तान पक्ष से लाभ प्राप्त होगा। घर के लिये आवश्यक वस्तु खरीद सकते हैं। मित्रों के सहयोग कई सारे कार्य पूरे हो जायेंगे। आज सुबह से ही काफी सक्रिय और ऊर्जावान रहेंगे। कार्यक्षेत्र में आपका प्रभुत्व बढ़ेगा।

🏹 *धनु (Sagittarius):*पारिवारिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। आपकी दिनचर्या अच्छी रहेगी। घर के बुजुर्गों से संवाद अच्छा रखें। सहकर्मी आपसे काफी प्रसन्न रहेंगे। आपको अड़ियल रवैये से बचना चाहिये। शाम के समय पेटदर्द की शिकायत हो सकती है।

🐊 *मकर (Capricorn):*धन लाभ के कई अवसर आपको प्राप्त होंगे। कृषि कार्यों में लाभ प्राप्त होगा। आपका मन काफी प्रसन्न रहने वाला है। आपके अधिकारों में वृद्धि होगी। आध्यात्म की तरफ आपका झुकाव बढ़ेगा। ऑफिस में आपके अधिकार बढ़ेंगे।

⚱ *कुंभ (Aquarius)* कार्यक्षेत्र में सोच-समझकर आपको काम करना चाहिये। कारोबारी यात्रा में परेशानी हो सकती है। कीमती वस्तुओं को सँभाल कर रखें। बॉस से तनातनी होने की आशंका है। दिनचर्या उथल-पुथल रहेगी।

🧜‍♀ *मीन (Pisces)दिन की शुरुआत से ही महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता में रखेंगे। परिवार में सुख-शान्ति का वातावरण रहेगा। व्यापार में अचानक धन लाभ प्राप्त होगा। बड़े भाई-बहनों से आपके सम्बन्ध मधुर रहेंगे। इंटरव्यू आदि में आपको सफलता मिल सकती है।

*💥🌺🚩आपका दिन शुभ हो 🚩🌺💥*

     पंडित आशीष त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य 

    *🎊🎉🎁 आज जिनका जन्मदिवस या विवाह वर्षगांठ हैं उन सभी मित्रो को कोटिशः शुभकामनायें🎁🎊🎉*
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
       *😍आपका दिन शुभ हो😍*
     *🚩जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम🚩*

Posted By KanpurpatrikaSunday, January 17, 2021

Saturday, January 16, 2021

❖▩ஜआज का पंचांग 18 जनवरी 2021, सोमवार ❖▩ஜ

Filled under:


❖▩ஜआज का पंचांग 18 जनवरी 2021, सोमवार ❖▩ஜ

🌞🛕 *जय रामजी की*🛕🌞 

 🏹 *जय माँ जगदम्ब भवानी*🏹

       *🐀🐘जय श्री गणेश🐘🐀*
          ▩ஜआज का पंचांग ۩۞۩ஜ

18 जनवरी 2021, सोमवार, विक्रमी सम्वत 2077, शाका 1942, पौष मास, शुक्ल पक्ष, माघ मास की प्रविष्टा 5, उत्तरायण, दक्षिणगोल, शिशिर ऋतु, तिथि पंचमी सुबह 9:14 तक तदनन्तर षष्ठी, नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद सुबह 7:43 तक तदनन्तर उत्तराभाद्रपद, सूर्योदय 7:00 प्रातः , सूर्यास्त 5:46 सायं , राहुकाल प्रातः 7:30 से 9:00, पंचक विचार

🐏 *मेष (Aries):*आज पूरा दिन व्यस्त रहेंगे। किन्तु इच्छानुसार परिणाम न मिलने से कुछ अप्रसन्नता रहेगी। लोग आपका खुला विरोध कर सकते हैं। जीवनसाथी से किसी बात पर महभिन्नता होगी। आज आपको यात्राओं से बचना चाहिये। सिरदर्द हो सकता है।

🐂 *वृषभ (Tauras):*समाज की भलाई वाले कार्य करेंगे जिससे आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। IT और बैंकिंग से जुड़े लोगों को शानदार सफलता मिलेगी। उच्चाधिकारी आपसे खासे प्रसन्न रहेंगे। लम्बित कार्यों को पूरा करने में सफल रहेंगे। सन्तान की उपलब्धियों से गर्व की अनुभूति होगी।

👭 *मिथुन (Gemini):व्यापार में काफी अच्छा लाभ प्राप्त होगा। शोध कार्यों में विद्यार्थी काफी रुचि लेंगे। ऑफिस के कार्यों में काफी व्यस्त रहेंगे। जीवनसाथी से अच्छा तालमेल रहेगा। शासन और प्रशासन से जुड़े लोगों को सम्मान प्राप्त होगा।

🦀 *कर्क (Cancer):*आपकी आर्थिक स्थिति थोड़ी कमजोर हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। बॉस से झगड़ा हो सकता है। दिखावे से आपको बचना चाहिये। घर में बिना बुलाये मेहमान आ सकते हैं।

🦁 *सिंह (Leo):विद्यार्थी किसी नये कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। प्रणय जीवन में थोड़ी परेशानी आयेगी। स्वास्थ्य खराब होने की आशंका है। जीवनसाथी के साथ मतभेद हो सकता है। व्यर्थ में धन खर्च होगा। धन प्राप्ति में बाधायें आयेगी।

👧🏻 *कन्या (Virgo):*नौकरीपेशा लोगों को अच्छा लाभ प्राप्त होगा। मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों को बेहतरीन लाभ मिलेगा। शेयर मार्केट से जुड़े लोगों की आय बढ़ेगी। व्यापार में आपकी स्थिति सुदृढ़ होगी। अविवाहित लोगों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं।

⚖ *तुला (Libra):*मनोनुकूल कार्य होने से उत्साहित रहेंगे। शत्रुओं पर भारी पड़ेंगे। अपने बलबूते कई समस्याओं को निपटा लेंगे। ऑफिस में सहयोगी लोग आपका समर्थन करेंगे। सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों को नयी नौकरी के ऑफर मिल सकते हैं।

🦂 *वृश्चिक (Scorpio):*आपके नये दोस्त बन सकते हैं। रिश्तों में मजबूती आयेगी। आपका सामाजिक दायरा बढ़ सकता है। घर के सदस्यों की भावनाओं का ध्यान रखें। आय के नये स्तोत्र बना सकते हैं। धैर्यपूर्वक निर्णय लेंगे।

🏹 *धनु (Sagittarius):*अपने खर्चों को नियंत्रित रखें। गुस्से के कारण मित्र और परिजन आपसे मुख मोड़ सकते हैं। मन अप्रसन्न रहेगा। वाहन में खराबी आ सकती है। बाहर के जंकफूड खाने से आपको बचना चाहिये। पुराने रोगों के कारण परेशानी हो सकती है।

🐊 *मकर (Capricorn):*आज पूरे मनोयोग से काम करेंगे। कानूनी कार्यों में आपको सफलता मिलेगी। लोगों के बीच आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी। आपका आत्मविश्वास और पराक्रम बढ़ेगा। व्यापार में वृद्धि होने के योग बन रहे हैं। आज पूरा दिन काफी ऊर्जावां रहेंगे।

⚱ *कुंभ (Aquarius)* आपके ऊपर कोई ज़िम्मेदारी आ सकती है। कब्ज के कारण सिरदर्द हो सकता है। छोटे बच्चों की पढ़ाई में ध्यान दें। ऑफिस में आपके जूनियर्स से विवाद होगा। लव लाइफ में तनाव की सम्भावना है। धन को लेकर समस्या हो सकती है।

🧜‍♀ *मीन (Pisces)रियल स्टेट से जुड़े लोगों को शानदार लाभ प्राप्त होगा। जॉब में नवीन अवसर प्राप्त होंगे। स्वास्थ्य बहुत ही अच्छा रहने वाला है। ललित कला में आप काफी रुचि लेंगे। शारीरिक रूप से काफी चुस्त-दुरुस्त रहेंगे।

*💥🌺🚩आपका दिन शुभ हो 🚩🌺💥*

     पंडित आशीष त्रिपाठी ज्योतिषाचार्य 

    *🎊🎉🎁 आज जिनका जन्मदिवस या विवाह वर्षगांठ हैं उन सभी मित्रो को कोटिशः शुभकामनायें🎁🎊🎉*
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
       *😍आपका दिन शुभ हो😍*
     *🚩जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम🚩*

Posted By KanpurpatrikaSaturday, January 16, 2021

सारे तीर्थ बार-बार गंगा सागर एक बार जाने क्यों

Filled under:



गंगा सागर को तीर्थों का पिता कहा जाता है, कहने का तात्पर्य है कि गंगा सागर का अन्य तीर्थों की अपेक्षा अत्यधिक महत्व है। शायद यही कारण है कि जन साधारण में यह कहावत बहुत प्रचलित है कि- ''सब तीरथ बार-बार, गंगा सागर एक बार।'

' गंगा जिस स्थान पर समुद्र में मिलती है, उसे गंगा सागर कहा गया है। गंगा सागर एक बहुत सुंदर वन द्वीप समूह है जो बंगाल की दक्षिण सीमा में बंगाल की खाड़ी पर स्थित है। प्राचीन समय में इसे पाताल लोक के नाम से भी जाना जाता था। कलकत्ते से यात्री प्रायः जहाज में गंगा सागर जाते हैं। 

यहां मेले के दिनों में काफी भीड़-भाड़ व रौनक रहती है। लेकिन बाकी दिनों में शांति एवं एकाकीपन छाया रहता है। तीर्थ स्थान-सागर द्वीप में केवल थोड़े से साधु ही रहते हैं। यह अब वन से ढका और प्रायः जनहीन है। इस सागर द्वीप में जहां गंगा सागर मेला होता है, वहां से एक मील उत्तर में वामनखल स्थान पर एक प्राचीन मंदिर है।

 इस समय जहां गंगा सागर पर मेला लगता है, पहले यहीं गंगाजी समुद्र में मिलती थी, किंतु अब गंगा का मुहाना पीछे हट गया है। अब गंगा सागर के पास गंगाजी की एक छोटी धारा समुद्र से मिलती है। आज यहां सपाट मैदान है और जहां तक नजर जाती है वहां केवल घना जंगल। 

मेले के दिनों में गंगा के किनारे पर मेले के लिए स्थान बनाने के लिए इन जंगलों को कई मीलों तक काट दिया जाता है। गंगा सागर का मेला मकर संक्रांति को लगता है। खाने-पीने के लिए होटल, पूजा-पाठ की सामग्री व अन्य सामानों की भी बहुत-सी दुकानें खुल जाती हैं। 

सारे तीर्थों का फल अकेले गंगा सागर में मिल जाता है। संक्रांति के दिन गंगा सागर में स्नान का महात्म्य सबसे बड़ा माना गया है। प्रातः और दोपहर स्नान और मुण्डन-कर्म होता है। यहां पर लोग श्राद्ध व पिण्डदान भी करते हैं।

 कपिल मुनि के मंदिर में जाकर दर्शन करते हैं, इसके बाद लोग लौटते हैं ओर पांचवें दिन मेला समाप्त हो जाता है। गंगा सागर से कुछ दूरी पर कपिल ऋषि का सन् 1973 में बनाया गया नया मंदिर है जिसमें बीच में कपिल ऋषि की मूर्ति है। 

उस मूर्ति के एक तरफ राजा भगीरथ को गोद में लिए हुए गंगाजी की मूर्ति है तथा दूसरी तरफ राजा सगर तथा हनुमान जी की मूर्ति है। इसके अलावा यहां सांखय योग के आचार्य कपिलानंद जी का आश्रम, महादेव मंदिर, योगेंद्र मठ, शिव शक्ति-महानिर्वाण आश्रम और भारत सेवाश्रम संघ का विशाल मंदिर भी हैं।

 रामायण में एक कथा मिलती है जिसके अनुसार कपिल मुनि किसी अन्य स्थान पर तपस्या कर रहे थे। ऐसे ही समय में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा सगर एक अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करने लगे। उनके अश्वमेध यज्ञ से डरकर इंद्र ने राक्षस रूप धारण कर यज्ञ के अश्व को चुरा लिया और पाताल लोक में ले जाकर कपिल के आश्रम में बांध दिया। 

राजा सगर की दो पत्नियां थीं- केशिनी और सुमति। केशिनी के गर्भ से असमंजस पैदा हुआ और सुमति के गर्भ से साठ हजार पुत्र। असमंजस बड़ा ही उद्धत प्रकृति का था। वह प्रजा को बहुत पीड़ा देता था। अतः सगर ने उसे अपने राज्य से निकाल दिया था। 

अश्वमेध का घोड़ा चुरा लिये जाने के कारण सगर बड़ी चिंता में पड़ गये। उन्होंने अपने साठ हजार पुत्रों को अश्व ढूंढने के लिए कहा। साठों हजार पुत्र अश्व ढूंढते ढूंढते-ढूंढते पाताल लोक में पहुंच गये। 

वहां उन लोगों ने कपिल मुनि के आश्रम में यज्ञीय अश्व को बंधा देखा। उन लोगों ने मुनि कपिल को ही चोर समझकर उनका काफी अपमान कर दिया। अपमानित होकर ऋषि कपिल ने सभी को शाप दिया- 'तुम लोग भस्म हो जाओ।

' शाप मिलते ही सभी भस्म हो गये। पुत्रों के आने में विलंब देखकर राजा सगर ने अपने पौत्र अंशुमान, जो असमंजस का पुत्र था, को पता लगाने के लिए भेजा। अंशुमान खोजते-खोजते पाताल लोक पहुंचा। वहां अपने सभी चाचाओं को भस्म रूप में परिणत देखा तो सारी स्स्थिति समझ गया। 

उन्होंने कपिल मुनि की स्तुति कर प्रसन्न किया। कपिल मुनि ने उसे घोड़ा ले जाने की अनुमति दे दी और यह भी कहा कि यदि राजा सगर का कोई वंशज गंगा को वहां तक ले आये तो सभी का उद्धार हो जाएगा। अंशुमान घोड़ा लेकर अयोध्या लौट आया। यज्ञ समाप्त करने के बाद राजा सगर ने 30 हजार वर्षों तक राज्य किया और अंत में अंशुमान को राजगद्दी देकर स्वर्ग सिधार गये। अंशुमान ने गंगा को पृथ्वी पर लाने का काफी प्रयत्न किया, लेकिन सफल नहीं हो पाया। अंशुमान के पुत्र दिलीप ने दीर्घकाल तक तपस्या की। 

लेकिन वह भी सफल नहीं हो पाया। दिलीप के पुत्र भगीरथ ने घोर तपस्या की। गंगा ने आश्वासन दिया कि मैं जरूर पृथ्वी पर आऊंगी, लेकिन जिस समय मैं स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आऊंगी, उस समय मेरे प्रवाह को रोकने के लिए कोई उपस्थित होना चाहिए। 

भगीरथ ने इसके लिए भगवान शिव को प्रसन्न किया। भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटा में धारण कर लिया। भगीरथ ने उन्हें पुनः प्रसन्न किया तो शिवजी ने गंगा को छोड़ दिया।

 गंगा शिवजी के मस्तक से सात स्रोतों में भूमि पर उतरी। ह्रानिदी, पावनी और नलिनी नामक तीन प्रवाह पूर्व की ओर चल गये, वड.क्ष, सीता तथा सिंधु नामक तीन प्रवाह पश्चिम की ओर चले गये और अंतिम एक प्रवाह भगीरथ के बताए हुए मार्ग से चलने लगा। 

भगीरथ पैदल गंगा के साथ नहीं चल सकते थे, अतः उन्हें एक रथ दिया गया। भगीरथ गंगा को लेकर उसी जगह आये जहां उनके प्रपितामह आदि भस्म हुए थे। गंगा सबका उद्धार करती हुई सागर में मिल गयी। भगीरथ द्वारा लाये जाने के कारण गंगा का एक नाम भागीरथी भी पड़ा। 

जहां भगीरथ के पितरों का उद्धार हुआ, वही स्थान सागर द्वीप या गंगासागर कहलाता है। गंगा सागर से कुछ दूरी पर कपिल ऋषि का सन् 1973 में बनाया गया नया मंदिर है जिसमें बीच में कपिल ऋषि की मूर्ति है। उस मूर्ति के एक तरफ राजा भगीरथ को गोद में लिए हुए गंगाजी की मूर्ति है तथा दूसरी तरफ राजा सगर तथा हनुमान जी की मूर्ति है।
〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰

Posted By KanpurpatrikaSaturday, January 16, 2021