Tuesday, September 4, 2018

शमशान की धरती से पूछो

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।। शमशान की धरती से पूछो ।।

दिल में कितना दर्द छुपा है मुस्कुराते हुए चेहरे से पूछो
सुकून की रोटी कैसे खाता मजदूर उसके बाजू से पूछो
बेटियों को कैसे पाला है उस मां के हाथों से पूछो कैसे बेदर्द नजरें नोचती है जिस्म को अकेले में उस लड़की से पूछो
कैसे बिना दाग  विदा किया लड़की को उस बाप के कलेजे से पूछो
किसको गिराते हैं और किसको उठाते हैं यह समाज के ठेकेदारों से सीखो
कैसे चलते चलते  जिंदगी राख बनती है उस शमशान की धरती से पूछो ।

Posted By KanpurpatrikaTuesday, September 04, 2018

Sunday, September 2, 2018

राहू-केतु और मुस्लिम संबंध: एक ज्योतिषीय विश्लेषण

राहू-केतु और मुस्लिम संबंध: एक ज्योतिषीय विश्लेषण



ज्योतिष शास्त्र में राहू और केतु को 'म्लेच्छ' या विजातीय ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। जब भी इनका संबंध विवाह (सप्तम भाव) या दीर्घकालिक संबंधों (एकादश भाव) से होता है, तो यह अक्सर अंतर-धार्मिक संबंधों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के साथ जुड़ाव को दर्शाता है।

प्रसिद्ध हस्तियों के उदाहरण:

1.      राज कपूर: कर्क लग्न की कुंडली में चंद्रमा और राहू लग्न में स्थित हैं, जबकि केतु सप्तम भाव में है। चंद्रमा-राहू और सप्तमस्थ केतु के इस योग ने उन्हें अपनी मुस्लिम सह-कलाकार (नरगिस जी) के प्रति अत्यधिक प्रेम में बांधा।

2.      शर्मिला टैगोर: सिंह लग्न की कुंडली में सप्तमेश शनि के साथ केतु की युति है। केतु का सप्तमेश के साथ यह प्रबल संबंध उनके नवाब मंसूर अली खान पटौदी से अंतर-धार्मिक विवाह का आधार बना।

3.      अमृता सिंह: इनकी कुंडली में चंद्रमा और राहू की निकट युति है, जिसके कारण इनका विवाह सैफ अली खान से हुआ।

4.      संजय दत्त: एकादश भाव में स्थित राहू की दृष्टि सप्तम भाव पर पड़ती है। एकादश का राहू या केतु अक्सर मुस्लिम पार्टनर के साथ दीर्घकालिक संबंध बनाता है। इनका विवाह भी एक मुस्लिम महिला से हुआ।

5.      महेश भट्ट: एकादश भाव में केतु की उपस्थिति और सप्तम पर उसकी दृष्टि। इनके जीवन में दो विवाह हुए और दोनों ही पत्नियां मुस्लिम समुदाय से थीं।

6.      रत्ना पाठक शाह: सप्तम भाव में शनि, शुक्र और केतु की युति। इनका विवाह प्रसिद्ध अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से हुआ।

7.      ऋतिक रोशन: सप्तमेश बुध का राहू के साथ निकट संबंध है, जिसके चलते इनका विवाह सुज़ैन खान से हुआ।

8.      आदित्य पंचोली: सप्तम भाव में साक्षात राहू की उपस्थिति ने मुस्लिम कनेक्शन (ज़रीना वहाब) बनाया।

9.      आयशा टाकिया: चंद्रमा और राहू का निकट संबंध होने के कारण मुस्लिम युवक से विवाह।

10.  मनोज तिवारी (कांग्रेस सांसद): चंद्रमा के साथ राहू और सप्तमेश के साथ केतु की युति के कारण मुस्लिम लड़की से विवाह।

11.  अनिल विश्वास (संगीतकार): इनके सप्तमेश मंगल की केतु के साथ निकट युति थी, जिससे इनका विवाह मुस्लिम महिला से हुआ।

 

व्यावहारिक अनुभव (Case Studies):

·         सूरत का मामला: तुला लग्न (7 डिग्री) में राहू (8 डिग्री) की युति थी और केतु सप्तम में था। पूछने पर महिला ने स्वीकार किया कि उसके जीवन में मुस्लिम मित्र था, जो उसके बच्चे का वास्तविक पिता थायह एक गुप्त सत्य था।

·         कन्या लग्न का मित्र: लग्न में केतु और सप्तम में राहू होने के कारण वह 4 वर्षों तक एक मुस्लिम युवती के प्रेम में रहे, हालांकि माता-पिता के विरोध के कारण विवाह नहीं हो सका।

·         एक पिता की चिंता: एक कन्या की कुंडली में चंद्रमा और केतु सप्तम भाव में थे। वह अपने मुस्लिम सहकर्मी के साथ प्रेम विवाह के लिए दृढ़ थी और अंततः उसने उसी से विवाह किया।

मुख्य ज्योतिषीय निष्कर्ष:

·         सप्तम भाव (7th House): यहाँ राहू या केतु का होना जीवनसाथी के विजातीय या मुस्लिम होने की संभावना बढ़ाता है।

·         एकादश भाव (11th House): यहाँ राहू-केतु होने पर व्यक्ति के दीर्घकालिक संबंध या 'लिव-इन रिलेशनशिप' मुस्लिम पार्टनर के साथ हो सकते हैं।

·         चंद्रमा का संबंध: मन का कारक चंद्रमा यदि राहू या केतु से पीड़ित हो, तो व्यक्ति सामाजिक बंधनों को तोड़कर दूसरे धर्म की ओर आकर्षित होता है।

·         विवाद की स्थिति: यदि मुस्लिम संबंध न भी बने, तो राहू-केतु सप्तम भाव में विवाह को विवादास्पद बना देते हैं, जैसे अंतर्जातीय विवाह या घर से भागकर विवाह करना।

राहू और केतु का यह प्रभाव शत-प्रतिशत हर कुंडली में नहीं होता, लेकिन जहाँ भी अंतर-धार्मिक या मुस्लिम संबंधों की बात आती है, वहाँ सप्तम या एकादश भाव में राहू-केतु की भूमिका अनिवार्य रूप से दिखाई देती है।

 

Posted By KanpurpatrikaSunday, September 02, 2018

Friday, August 31, 2018

माँ तुम अब भी रोती हो

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माँ तुम अब भी रोती हो
क्यों दुःखो के बोझ ढोती हो ।
वो कड़वी यादे और वो वादे तुम्हे सताते है
पता है मुझे तुम आज भी रोती हो
जब तुम्हे खाना नही मिलता है
तुम तब भी रोती थी जब उसको खाना नही मिलता था।
माँ तुम ऐसी क्यों हो
आज भी देती आशीष हो
जबकि वो आज भी इस रिश्ते को ढोता है
उसकी नज़र में तुम मां नही बोझ हो
पता नही इस बात का तुमको कब बोध हो।
माँ  कभी कुमाता भी नही होती
फिर ये पूत कपूत क्यों बन जाते है
जबकि उसी कोख से जन्मी पुत्री भी कुपुत्री न बनी।
क्यों माँ क्यों माँ बता न माँ।
पंडित आशीष त्रिपाठी

Posted By KanpurpatrikaFriday, August 31, 2018

Friday, August 17, 2018

जिसको गले लगा न सके

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जिसको गले लगा न सके
वो मित्र तो न थी लेकिन शत्रु सी थी
वो हमसफर तो न थी लेकिन मंज़िल थी
चेहरे में हंसी तो थी लेकिन दिल में ख़ुशी न थी
वो सामने तो थी पर गले न लगा सके
वो आती तो सबके सामने लेकिन दिखती न थी
उसको गले लगाया तो लोग बिछड़ जाते ।
लोगो को गले लगाते तो उसको बुरा लगता ।
इधर ज़िन्दगी थी औऱ उधर मौत
लेकिन मैं ज़िन्दगी को गले लगा न सका ।

Posted By KanpurpatrikaFriday, August 17, 2018

Monday, August 6, 2018

ये लोकतंत्र ये कौन सा मंत्र है

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ये लोकतंत्र ये कौन सा मंत्र है
यहाँ अपराधी नेता है और नेता अपराधी
यहाँ बोलने का हक सबको है
पर बोलता कौन है
मुजफ्फर नगर और देवरिया बस दो बदनाम है
और पता नही कितने छुपे हुए कितने नाम है
समाज सेवी है मवेशी जो बेचते है इंसानो को
गरीब और लाचारों को
जो भागे थे घर से बचाने को इज़्ज़त
उनका ही सौदा करके किया है इंसानियत को बेइज़्ज़त।
सच बताना क्या तुमने माँ का दूध पिया था
क्या एक पल भी उसको जिया था
लेकिन तुम क्या बताओगे तुम उस दूध को भी बेच खाओगे।
गलती उसकी ही थी जिसने तुम्हे जन्म दिया
तुमने उसके दिल मे ही अनगिनत जख्म दिया।
इज़्ज़त शोहरत पैसे के लिए ही तुम ऐसा करते हो
बताओ क्या तुम अपनी बहन और बेटी बेचोगे
हम सब खरीदेंगे पड़ा लिखा उसे इंसान बनाएंगे
और एक दिन उसकी कलम से ही तुम्हे फांसी दिलवाएंगे ।

Posted By KanpurpatrikaMonday, August 06, 2018