Thursday, February 16, 2012

बोलो खरीदोगे ?

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बोलो खरीदोगे ?
आज के समय में हर वस्तु बिकाऊ है चाहे  वो निर्जीव हो या सजीव इन्सान हो या जानवर किसी की मौत बिकती है तो किसी की जिंदगी किसी की लाश बिकती है तो किसी का जिस्म खरीदोगे क्या ? नेता पुलिस चोर या डाक्टर बिकते है भगवान यहाँ पर पुजारियों के हाथ खरीदोगे क्या ? मोल लगाओगे क्या यहाँ सब बिकता है बस खरीदने वाले की जेब में पैसा चहिये /बस कुछ भी बिक सकता है इंसानियत ईमानदारी तक बिक रही है आज के समय में /
नेता देश को बेच रहे है डाक्टर इलाज और मर्ज़ को पुलिस अपराध को पुजारी भगवान को और पाखंडी धर्म  को  सब अपनी दुकान सजाए बैठे है खरीदने वाले और बेचने वाले / कभी दुर्घटना में घायल व्यक्ति मदद  के लिए तडपता सड़क पर पड़ा होता है तो कोई मदद करने के बजाए   उसकी जेव और शरीर  से पैसे निकाल कर चलता बनता है उससे बचा तो पुलिस है ,अब जिन्दा बचे तो मरने के लिए डाक्टर  है ,बिना पैसो के इलाज कैसे होगा ? क्योंकि डाक्टर भी अपने आप को बेच रहा  है /
लड़की का पिता अपनी लड़की को पढाता  है लिखाता है काबिल बनता है लेकिन जब वही पिता अपनी लड़की के रिश्ते के लिए लड़का ढूँढने  जाता है तो  लडके के माँ बाप और लड़का खुद अपनी बोली लगाता है अगर डाक्टर है तो 10  से 20  लाख इंजिनियर की भी ऐसी ही कीमत सरकरी नौकरी की कीमत पद के हिसाब से बढता जाता है क्यों क्या लड़की के पिता ने लड़की को पड़ने  और उसे काबिल बनाने में पैसा नहीं खर्चा किया ! किया लेकिन यहाँ पर वो अपनी लड़की के जीवन साथी की खरीददारी  में जो निकला है हर चीज़ बिकती है बोलो खरीदोगे ?
संस्कार मर्यादा संस्कृति और गुणों की कीमत नहीं है कीमत है कीमत की जो पैसे के आगे  बौने हो जाते है /आपकी जेब में पैसे होने  चहिये बस आप अपनी बेईज्ज़त को इज्ज़त  में बदल सकते है और जो आपकी इज्ज़त करते है वो आपकी इज्ज़त करके आपके पैसो की इज्ज़त करते है जानते है फिर भी खरीदते   है इज्ज़त /
गरीब लड़की चाहे  कितनी भी सुन्दर सुसंस्कारित क्यों हो कितनी भी पड़ी लिखी क्यों हो उसे अच्छा पति मिलना मुश्किल होगा अच्छा घर मिलना मुश्किल होगा वही अगर उसके पास पैसा है यानि वो आमिर है तो सब मैनेज हो जायेगा !कुछ लोग ऐसे गरीब लड़कियों को अपने घर की बहु बनाते  भी है दहेज़ लेने की कुरूतियों को दिखाते भी है /लेकिन सच क्या है वही पैसो का मोल यानि इन आमिर  लडको में कुछ कुछ कमी होती है और पैसे वाला तो इनके पास आयेगा नहीं सो गरीब लड़की के संस्कार मर्यादा संस्कृति और गुणों की कीमत लगा देत है ये उसको बताते है की आज के समय में पैसे  का ही मोल है की आपका अगर आपके  पास पैसा है तो सब कुछ  है / उस लड़की के सपनो को खरीदते है उसकी मुस्कराहट को तौलते है और उसकी उम्मीदों को तोडते  है उसकी हर एक चीज़ को पैसे के तराजू पर तौल के दिखाते  है की कीमत किसकी है इन्सान की या पैसो की /सबकुछ बिकता है खरीदोगे ?
दोस्त हो या भाई बहन हो या माता पिता आज के समय में सब पैसे से रिश्ते  बना रहे है आज आपको भाई भी मिल जायेगा और दोस्त भी बहन भी मिल जाएगी अगर आपके पास पैसा है तो !या यु कहे की  अगर आप गरीब है और आपका ही सगा भाई आमिर तो सारे रिश्तेदार भाई बहन और माता पिता उसको ही तवज्जो देंगे उसकी ज्यादा इज्ज़त करंगे की आपकी !क्यों और आखिर क्यों रिश्ते बिक रहे और क्यों रिश्ते बेच रहे है लोग ? सभी माया के मोह्पास में फसते जा रहे है /
नेता पैसे के लिए अपना ईमान अपने संस्कार अपना धर्म तक बेच रहे है आज उन्हे इन्सान और इंसानियत से कोई सरोकार ही नहीं रह गया है पैसे की राजनीती हो गई है मतदातो को पैसे के दम पर खरीद रहे है तो कोई नेता को ही पैसे की दम  पर खरीद रहा है 8 वी पास नेता पडे लिखे आई एस और प़ी सी एस अधिकारियो की ऐसी तैसी कर देता है क्योंकि उसके पास पैसा था और उसने पैसे की दम पर चुनाव जीत कर वहा बैठ गया जहा सालो की मेहनत के बाद एक आई एस बैठा था !क्या पैसा ही सब कुछ है ?

क्या आज के परिवेश  में सभी चीजों का सौदा किया जा रहा है जो सबसे बड़ा सौदा हो रह है वो है इंसानियत का अगर अपने अपनी इंसानियत बेच दी तो सब कुछ बेच सकते है आप !कोई बलात्कारकी शिकार महिला या लड़की को सरकारी नौकरी देने की बात कर रह है तो कोई उसका भी मजाक उड़ा रहा है क्या एक सरकारी नौकरी उसकी इज्ज़त वापस कर सकती है लेकिन नेताओ ने यहाँ भी वोट की राजनीती के पीछे औरत की इज्ज़त का सौदा कर दिया /बात कुल मिलकर यहाँ पर भी यही है की नेता ने अपनी  इंसानियत मार कर ही ये कहा है उसने अपनी इंसानियत बेच दी है क्योंकि यहाँ सब बिकता है बोलो खरीदोगे ?
यहाँ जिंदगी बिकती है बिकती है मौत यहाँ 
यहाँ लाश बिकती है बिकता है जिश्म यहाँ 
यहाँ भक्त बिकते  है बिकते है भगवान यहाँ 
 बोलो खरीदोगे ?
यहाँ डाक्टर बिकते है बिकते है ईमान यहाँ 
बिकते है नेता यहाँ बिकती है जुबान यहाँ 
बिकते है अपराध यहाँ बेचती  है पुलिस यहाँ  
बोलो खरीदोगे ?
बिकती है इज्ज़त यहाँ बिकती है शर्म हया
बिकती है बेटी यहाँ बिकती है बहने यहाँ 
बिकती है ममता यहाँ बेचती  है माँ  यहाँ   
बोलो खरीदोगे ?
बिक रहा है ईमान यहाँ बेच रहे ईमानदारी  यहाँ 
बिक रहा गुनाह यहाँ बेच रहे गुनहगार यहाँ   
बिक रहा देश यहाँ बिक रहे देशवाशी यहाँ
बोलो खरीदोगे ? 
आशीष त्रिपाठी 







Posted By KanpurpatrikaThursday, February 16, 2012

Monday, February 13, 2012

अगले जन्म हमे बिटिया न दीजो

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गले जन्म हमे बिटिया दीजो या अगले जन्म हमे बिटिया कीजो में ज्यादा अंतर नहीं है अर्थ दोनों का एक ही आता है की २१ वी शताब्दी में जी रहे इस पुरुष प्रधान समाज में हम स्त्रियों की एक सुनिश्चित जगह नहीं बना पाए है /एक ओर लडकिया अपने माता पिता और देश का नाम दुनिया में रोशन कर रही होती हैअख़बार या न्यूज़ चैनल में सुर्खिया बनती है /और वही अख़बार के दुसरे या तीसरे पन्नो और न्यूज़ चैनल की चट पट न्यूज़ में कन्या भ्रूण हत्या की खबरे होती है /आखिर कारण क्या है की लोग सुर्ख़ियों में रही उन लड़कियों  से प्रेरित  होकर अपने यहाँ जन्मी या अजन्मी लड़कियों को मार देते है/
क्यों क्या विचारो और मस्तिष्क  सोच  इस बात को मनाने को तैयार ही नहीं है की लड़की कुल की मर्यादा नहीं बन सकती एक वंश को आगे नहीं बड़ा सकती क्या सिर्फ लडके ही मर्यादा बढ़ाते है /
सानिया मिर्जा पी.टी उषा  मायावती हो या फिर इन्द्रा गाँधी आशा भोश्ले जैस शख्सियत सभी एक बच्ची (महिला ) ही तो थी सभी ने अपने अपने कुल और खानदान का नाम रोशन किया फिर लोग इनके जैसी बेटिया पैदा करने की क्यों नहीं सोचते  है क्यों मार देते है उस कन्या भ्रूण को जो इतिहास लिख सकती थी /लेकिन लोग इनके जैसी लडकिया पैदा करके सचिन  अभिषेक अमिताभ   ऋतिक जैसे लडके पैदा करने की सोचते है क्यों ?
लड़की एक बहन होकर हमे स्त्रियों की रक्षा करना सीखती है एक माँ होकर निःस्वार्थ प्रेम और ममता का सन्देश देती है और एक बेटी होकर दानकी शिक्षा देती है और क्या क्या सिखाती है ये बेटिया हमे लेकिन हम ? और गर हमारे बीच में ये बेटिया ही होंगी तो ये शिक्षा होगी और फिर हम किसी राक्षस से कम होंगे  /ये सत प्रतिशत सत्य भी है जब आज के समाज में सिर्फ लड़कियों का प्रतिशत ही कम हुआ है तो राक्षसी प्रवत्ति के लोग बढने लगे है और मामले सामने आते है कानपुर के मासूम दिव्या हत्या कांड अरुणिमा सिन्हा रेल हादसा और सोनाली अनुराधा नॉएडा का  कांड ये कुछ इसे मामले है जो सामने आए और पता नहीं कितने मामले जो आए ही नहीं समाज की नजरो में उनका क्या हुआ होगा /ये सब लडकियों के भ्रूण में हो रही हत्याओ से उपजा असंतुलन है जो इस समाज की राक्षसी प्रवति को दिखा रहा है सोचिये अगर जब इस समाज में लडकिया होगी ही नहींतो समाज में किस तरह के लोग होंगे /
आखिर क्यों लड़की या उसे पैदा करने वाले दोनों ये सोचते है अपने अपने स्तर पर की लड़की इस दुनिया में आए ही क्यों ?लड़की भी नहीं चाहती है की वो ऐसे समाज का हिस्सा बने जहा शोषण और शोषित नजरो से उसे देखा जाए /
आखिर कौन है जिम्मेदार इन सब के पीछे कौन और क्यों मारता है एक अजन्मी और जन्मी लड़की को !एक तरह  से हम यानि ये समाज ही उकसाता है उन लोगो को ऐसा करने पर जो करते है भ्रूण हत्या /जब एक लड़की के साथ बलात्कार की घटना घटित हनी मत्र से समाज में जाने कितनी कन्या भ्रूण हत्याओ को जन्म दे जाती है /एक वेश्या के वेश्यावृति की खबर से जाने कितनी मासूम जन्मी लडकिया मौत के घाट उतार दी जाती है /और एक घर से प्रेम जाल में भागी लड़की जाने कितनी अबोध लडकियों को घर से बेघर कर देती है /लेकिन इस समाज के लोग कहा ये सोचते है वो तो अपने कुछ कुकृत्यो से /
 अब अगर बात हम लडको की करे तो क्या लडके ही सब कुछ कर सकते है लेकिन आज ये सोच भी लडकियों ने बदल दी है की जिस पुरुष प्रधान समाज में लड़कियों के लिए कोई स्थान था आज लडकियों ने हर उस जगह अपना स्थान बना लिए है जहा उनका एकाधिकार चलता था /
जहा पुरुषो की हिम्मत डोल रही है वही पर महिला शक्ति  बोल रही
नित नए नए आयाम गड़ती जा रही है ये आज की लडकिया लेकिन फिर भी हमारी सोच हमारे आड़े जाती है क्योंहम अभी यही कहते है और उन देवी मंदिरों में जा कर मान्यता मानते है की हे माँ हे देवी हमे पुत्र देना एक लडके की अभिलाषा बनी ही रहती है क्यों?
और ये कहते है की अगले जन्म हमे बिटिया दीजो / बिटिया शब्द जितना प्यारा है उतना ही प्यारा है उसका साथ /एक बिन बहन के घर  में बैठा भाई यही सोचता है की अगर एक बहन होती तो आज मैं भी इस कोरी कलाई में राखी बांधे खुशिया मनाता / बिन माँ के घर में बैठा एक बेटा यही सोचता है की अगर माँ होती तो एक नहीं दो नहीं दस बार पूछती और खुद खाती लेकिन अपने बेटो खाना खिला देती/बिन बेटी के एक पिता यही सोचता है की अगर बेटी होती तो अपने से दूर जाने के दर्द का एहसास तो होता /बिन लड़की के एक घर कैसा होता है ये जानते है हम /हमने कभी एक बेटी की चाहत ही की /
 अगले जन्म हमे बिटिया ही दीजो चाहे धन दौलत और बेटा दीजो 
आशीष त्रिपाठी  


Posted By KanpurpatrikaMonday, February 13, 2012

Sunday, February 12, 2012

क्यों पसरा है सन्नाटा

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क्यों पसरा है सन्नाटा

आया है माहौल चुनावी इस बार सन्नाटे में ...
द्वार द्वार न झंडे है न पोस्टर बैनर बिल्ले है 
न ही नेता दिखते शोर  मचाते न दिखते चमचे है
क्यों पसरा है सन्नाटा बाजारों में और गलियारों  में
क्यों पकड़ा जाता बीच चौराहों पर काला  धन सफ़ेद कपड़ो में
सभी पहने है सफ़ेद कपडे काले मन और तन पर
सभी मिटाएगे  भ्रस्टाचार खा के कसम ये कहते  है
क्यों पसरा है सन्नाटा बाजारों में और गलियारों  में
इसने लूटा उसने लूटा इस बार लूटेंगे हम भी
इतनी बार बने हो वेबकुफ़ इस बार हमसे भी बन के देखो
नहीं है यू. पी. की सत्ता में हम सालो से
अब चाहत है बनकर आने की युवराज  यू .पी.का
मिटा देंगे भुखमरी और गरीबी , बेरोजगार  न होगा कोई
कहते कहते गला दुःख गया है मेरा
अब तो सो जाओ जनता एक बार फिर से
क्यों पसरा है सन्नाटा बाजारों में और गलियारों  में
सज धज कर आयेंगे इस बार लूटने हम भी
क़तर देंगे माया रूपी जाल धन का , मारंगे गुंडों  को घर पर
क्यों जाग  रही हो जनता भ्रष्टाचार के अन्धकार से
क्यों बर्बाद कर रहे हो करियर नेताओ   का
फरवरी की ठण्ड में और सो जाओ फिर देखो काम हमारा
नेता है हम भी बेरोजगार  मत बनाओ हमको
तुम्हारी बेरोजगारी से ही तो रोजगार हमे है मिलता
क्यों पसरा है सन्नाटा बाजारों में और गलियारों  में
आशीष त्रिपाठी

Posted By KanpurpatrikaSunday, February 12, 2012