Thursday, February 24, 2011

बड़ा हुआ छोटा पर्दा ... Posted on November 13, 2010, 8:37 am Posted By जब मैने होश संभाला और पड़ोस के घर में टी वी देखा तो बड़ा अचम्भा लगा ...सोचा कैस

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जब मैने होश संभाला और पड़ोस के घर में टी वी देखा तो बड़ा अचम्भा लगा ...सोचा कैसे ये टी वी के पीछे से लोग इनके घर आ कर ये सब कर रहे है ... फिर बड़ा हुआ और मालूम पड़ा कि दूर दर्शन को बुद्दू बक्सा भी कहा जाता है ...

Posted By KanpurpatrikaThursday, February 24, 2011

Wednesday, February 23, 2011

करोडो के है ये पेड़ कीमत समझो

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Posted By KanpurpatrikaWednesday, February 23, 2011

Wednesday, February 2, 2011

प्यार का अंत ....

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प्यार का अंत ....(एक सच्ची घटना )

हम दोनों बड़े ही खुश थे क्योंकि अपनी बहनों से इस रक्षा बंधन में राखी जो बंधवाते, मन ही मन दोनों भाई खुश होते और कई तरह की बाते करते थे , दीदी कितना प्यार करती हमे कैसे हमारे छोटे हाथो में राखी बांधती कैसे हमारे छोटे से माथे पर तिलक करती कैसे मिठाई खिलाती ... हम दोनों जुड़वाँ है और शायद दीदी को परेशान भी करते की दीदी ने किसे पहले राखी बांधी थी कैसे पहचानती वो कैसे ... खूब मस्ती होती हमारे बीच लेकिन अभी हमारे परिवार में किसी को प़ता ही नहीं था की हम दोनों भाई आने वाले है और हमे तो प़ता था की कब हम इस धरती पर जन्म लेंगे कैसे हमारे परिवार की खुशिया बड़ जाएँगी ..हम दोनों अन्दर ही अन्दर लडते भी थे की कौन पहले जायेगा इस दुनिया में लेकिन समझ भी जाते थे की हमे तो पाता होगा लेकिन बाकि कोई नहीं पहचान पायेगा ..
उधर माँ और पिता जी और दादी बाबा सभी खुश थे की अब दो बहनो में एक भाई आने वाला है इस कुल को बढ़ाने वाला आने वाला है ..लेकिन उन्हे ये नहीं पाता था की हम दो आ रहे है जो की पहले हमारे खानदान में नहीं हुआ क्योंकि हमारे परिवार में बापू भी एक लौते थे और बाबा भी लेकिन हम दो आक़र सबकी खुशिया दोगुनी कर देंगे ...सभी ने बड़े अरमान पाल रखे थे ..सभी की मुरादे पूरी होने को है कहते है न की ईश्वर इस दुनिया में सब कुछ कर सकता है ..अगर आप सच्चे मन से भगवान से कुछ भी मांगोगे तो वो जरुर देगा ,.
हमारे परिवार में सभी ये सोचते थे की भगवान एक लड़का दे दो बस क्योंकि इस वंश लो चलाने वाला आ जाय बस ....
क्योंकि अगर इस बार नहीं हुआ तो क्या हमारे वंश का चिराग बुझ जायेगा, नहीं ...लेकिन हम एक सवाल पूछते है की लडकिया क्योँ नहीं अपने वंश का नाम आगे बड़ा सकती है जब लडकिया चाँद पर जा सकती है देश चला सकती है तो फिर वंश का नाम आगे क्योँ नहीं बड़ा सकती क्योँ ? क्या हम 21 शदी में आकर हर चीज़ में महिलओं की भागीदारी का लोहा मान रहे लेकिन एक वंश को चलाने के लिए आज भी एक लडके की ही क्योँ जरुरत होती है बदलनी होगी हमे अपनी सोच ...
लेकिन ये क्या हुआ हमारी सोच को हमारी खुशियों को ये किसकी नज़र लग गई ...क्या जो हमारे साथ ऐसा हुआ क्या हमारी बहने जिंदगी भर अपने भाईयों के हाथ में राखी नहीं बांध पाएंगी , और तरसते रहंगे मेरे माँ और बापू क्योँ...?
और क्या जिंदगी भर माँ को कोसा जाता रहेगा की वो एक लडके को जन्म न दे पाई क्योँ ऐसा क्या हुआ ?
आखिर क्योँ इन्सान भगवान पर विश्वास रखते हुए भी इन इंसानों की बातो में विश्वास कर लेता है..क्योँ किसी पंडित की बातो पर आकर लोग अन्धिविश्वास में अंधे हो जाते है ..क्योँ नहीं मानते की इन्सान कितना भी तरक्की कर ले लेकिन भगवान से आगे नहीं निकल सकता ..आखिर किसी और की बातो में आकर माँ बापू ने हमारे साथ अन्याय क्योँ किया ?
क्योँ ईश्वर भी हमारे माँ और बापू की खुशियों से चीड़ गया क्योँ ?
लेकिन भगवान को भी तो समझना चाहिए की उनके इस श्राप से कितने लोगो को पीड़ा पहुचेगी ...

आखिर आप लोग भी जानना चाहते है न की आखिर ऐसा हमारे साथ क्या हुआ ...
मेरे माँ बापू बाबा दादी सभी ने ( हमारे गर्भ में आने के ) एक से दो महीने बाद इस आधुनिक युग में शामिल होकर हमारा अंत करवा दिया हम जुड़वाँ भाइयो को मार दिया ? हा दोनों जुड़वाँ भाइयो की भ्रूण हत्या कर दी गए दो लडको की भूर्ण हत्या....सुनने में शायद विश्वाश न हो या पडने में सोचे की लिखने वाले ने कोई गलती कर दी है लेकिन नहीं ये सच है की दो जुड़वाँ लडको की भूर्ण हत्या ... मैं एक बात और बता दू ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है न किसी की सोच है न कोई लेख है ये कानपुर शहर की एक सच्ची घटना है जो अखबारों की शुर्खिया नहीं बन पाई न ही टी. वी. चैनेल्स की ब्रेकिंग न्यूज़ क्योँ क्योंकि ...
क्योंकि माँ और बापू ने सभी के कहने पर अल्ट्रासाउंड करवाकर पाता लगने की कोशिश की क्या ये लडके है या फिर लड़की ..लेकिन भगवान स्वरुप माने जाने वाले डाक्टर ने माँ और बापू को दो लडकिया होने की जानकारी होने की बात बता कर चौंका दिया ... और बापू ने और परिवार के सभी सदस्यों ने कहा की दो लडकिया है और अगर दो और हो गई तो क्या करोगे ये सब बाते सोच कर सभी ने भूर्ण हत्या करने की सोच ली और जुड़वाँ भाइयो का अंत कर दिया गया ..और हम अपनी बहनो से मिले बिना ही बिछुड़ गए ....
लेकिन तश्वीर का दूसरा पहलू भी देखिये की जब भूर्ण को निकाला गया तो सभी देख कर सकते में आ गए की ये हमने क्या किया क्या भगवान ने या फिर डाक्टर ने हमारे साथ मजाक किया है आखिर किन कर्मो की सज़ा हमे मिल रही है ... सोचिये उस माँ का हाल जो की ये जान कर की वो दो लडकियों को नहीं बल्कि दो जुड़वाँ लडको को जन्म देनी जा रही थी क्या हुआ होगा उसका हाल मत पूछिए ...... मैं जब भी ये बात सोचता हु तो मुझको रोना आ जाता है.....

Posted By KanpurpatrikaWednesday, February 02, 2011

Friday, January 28, 2011

आखिर क्यों .....

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आखिर क्यों .....
आखिर क्यों सभी चिल्लाते है पोस्टर लगाते है कहते है " सेव गर्ल चाइल्ड " आखिर क्यों क्या इसलिए की लड़की कभी माँ बन कर कभी बहन बन कर और कभी पत्नी बन कर इन इंसानों के अत्याचारों को सहे... क्या इसलिए की आज का इन्सान अकेला पा कर भूखे भेड़िये की तरह टूट पड़ता है न उम्र देखता है न सम्बन्ध सिर्फ इस लिए की मैं एक लड़की हु.... इस समाज में लड़की होना एक जुर्म हो गया है ..विधायक हो या पुलिस शिक्षक हो या पिता क्या सभी के मस्तिष्क में एक ही विचार है .....
क्या करुँगी मैं इस दुनिया में आकार जब मैं पहले से ही देखती हु अरुशी को दिव्या शीलू और कविता के रूप में अपने आप को , और न जाने कितनी वो जो अखबारों की सुर्खिया न बन पाई ...आखिर क्योँ आऊँ और मैं इस दुनिया में क्या इसलिए की माँ बन कर बच्चो का पालन करू और बच्चे बड़े हो कर मुझे ही सड़क पर छोड़ दे तडपने के लिए ... क्या इसलिए की बहन बन कर भाई का प्यार बनू और वही भाई पैसो के खातिर मुझे ही बेच दे ... क्या इसलिए की एक बेटी बन कर आऊं वही पिता अपनी ही बेटी को हवस का शिकार बना डाले आखिर क्यों आऊँ .
आखिर क्यों आऊँ मैं इस दुनिया में जब मैं अन्दर से ही सुनती हु और देखती हु अपनी माँ को दादी के ताने देते हुए की गर लड़की हुई तो घर से बाहर कर दूंगी और पापा भी लड़की होने के पीछे भी माँ को ही दोष देते है और पंडित से भी तो मेरे न आने के लिए ही उपाय किये जाते है , और देवी मंदिरों में जा कर लोग लड़का ही तो मांगते है लेकिन शायद वो उस समय ये भूल जाते है की वो देवी भी एक लड़की का स्वरूप है .... 21 शदी में भी आने के बाद क्या आज भी लड़की एक अभिशाप है क्या सब कुछ बदल रहा है पर इन्सान की सोच लडकियों के बारे में क्यों नहीं बदलती ...
कभी कूडे के ढेर में तो कभी रेलवे ट्रेक पर तो कभी अस्पताल की छत पर सेफैक दी जाती हु मैं क्यों क्या माँ निर्दयी होती है नहीं लेकिन समाज की नजरे और सोच उस समय एक माँ को कातिल कुमाता जैसे शब्दों से बुलाते है लेकिन वो ममता की देवी जानती है की अभी मर गई तो एक बार ही मरेगी लेकिन अगर जी गए तो न जाने कितने बार मर मर कर जीना पडे ...क्योंकि समाज के भेड़िये के सामने बेटी को पालना कितना कष्ट कारक होगा ....घर से लेकर स्कूल तक लड़की कही भी सुरक्षित न रह पायेगी ...वो समय न देखना पडे इस लिए ही तो मैं आज तुम्हे मुक्त कर रही हुई ...माँ ने मार दिया मुझको ....
क्योंकि अन्दर से हर लड़की अपनी माँ से यही कहती है " माँ मार दो मुझको " ....
आखिर क्यों लड़की के साथ ही धोखा होता है ... मुझे याद है की जब मैं जन्मी थी उस समय मेरी माँ और पापा की आखो से आंशु छलके थे सभी बड़े रो रहे थे मुझे ख़ुशी हुई की मैं इस दुनिया में आई लेकिन जब मैने सबकी बाते सुनी तो मेरे भी आखो से आंशु निकलने लगे मैं भी जोर जोर से रोने लगी .. क्योंकि वो माँ और पिता के ख़ुशी के आंशु नहीं थे वो तो लड़की के पैदा होने के दुःख के आंशु थे .. सभी मुझे किनारे लगाने की बात कर रहे थे और रात के अंधेरे में मुझे मेरे पापा कूड़े के ढेर में फैक आए और रात भरमैं शर्द रातो में रोती रही चीखती रही की भगवान क्यों मुझे भेजा इस दुनिया में .... सुबह होते ही सभी उस कूडे के ढेर के पास से निकले और देखना तो दूर सभी मुह्ह मे कपडा लगाय ही थे क्योंकि मैं वहा पड़ी थी नहीं जहा जोर दार बदबू थी लोग उस जगह के पास से निकलना की भी नहीं सोचते है मैने तो एक रात वहा बिताई है ......और कुत्ते सुबह होते भोजन की तलाश में कूडे के ढेर में मुह मारते है लेकिन कुछ ही पालो में उनको मेरी गंध लग जाती है और सभी मुझे नोचने लगते है और मैं चीखती रहती हु लेकिन मैं खुश भी थी की मैं मौत के मुह में जा रही हु कम से कम उन इंसानी कुतो के मुह्ह से तो बच गई जो बार बार मार के भी जीने पर मजबूर करते ...
आखिर ये समाज चहाता क्या है न ही हमे पडने दे रहा है न ही आगे बडने दे रहा है और न इस धरती पर जन्म लेने दे रहा है फिर मैं क्योँ जन्म लू इस धरती पर ॥
अगर आकडे देख ले तो लगातार इस भारत में लडकियों की संख्या कम होती जा रही है लेकिन फिर भी किसी को चिंता ही नहीं है लेकिन जो बची है उनके साथ तो अन्याय मत करो लेकिन नहीं ये समाज की मानसिकता है ये शायद नहीं बदलेगी तभी तो अनुराधा और सोनाली ने इन समाज की नजरो से अपने को बचाया वही इनके अपनों ने इनका साथ नहीं दिया क्योँ .. आखिर क्योँ उनके साथ ऐसा हुआ जो सात महीने तक और न जाने कितने दिनों तक और बंद रहती वो .. क्या उसके भाई का फ़र्ज़ ये नहीं था की वो अपनी बहनों को ख्याल रखता जिन बहनों ने अपने जीवन के बारे में न सोच कर अपने करिएर के बारे में न सोच कर अपने छोटे भाई को पाला लेकिन छोटा जब बड़ा हुआ तो छोड़ दिया उनको उनके हालतों पर ..
मैं पूछना चाहती हु की जब बचपन में एक बार में कोई चीज़ समझ में नहीं आती थी तो सोनाली और अनुराधा दस बार समझाती थी तब उन्होने एक बार भी नहीं कहा की मैं तुम्हारा साथ नहीं दे पाऊँगी उन्होने तो तुम्हारे सपनो में अपने सपने देखे थे .. लेकिन उन्हे नहीं मालूम था सपने चाहे खुली आखो से देखो या बंद सपने सपने ही होते है .. इसलिए ही तो भाई जब काबिल हो गया तो छोड़ दिया बहनों को मरने के लिए ..अब जब ये हालात है लडकियों के तो क्या करू मैं जन्म ले कर...
आखिर क्यों समाज के ठेकेदार नेता और अभिनेता सभी ये गुजारिश करते है की " सेव द गर्ल चाइल्ड " आखिर क्यों ये सवाल मैं आप सब से पूछती हु और माँ से यही कहती हु " माँ मार दो मुझको " माँ मार दो मुझको............ माँ मार दो मुझको...........
भारत की जन संख्या २०११ के मुताबिक
जनसंख्या कुल 1,210,193,422
पुरुष 623,724,248
महिलायें 586,469,174
साक्षरता कुल 74.04%
पुरुष 82.14%
महिलायें 65।46%


ये अनुपात भी यही कह रहे है की हम इस धरती में आना ही नहीं चाहते है इसलिए ही तो हम कह रहे है
"
माँ मार दो मुझको अभी....."

एक दिन खोई थी मैं अपने ही सपनो में ,
तनहा थी जबकि मैं बैठी थी अपनों में ....
आवाज़ दी मुझको किसी ने पर वहा कोई न था
गूंज मेरे कानो में गूंजती फिर भी रही

मनो मुझसे कह रही हो माँ मुझे तुम मत बुलाओ
दुनिया की इस आग में घुट - घुट के मुझे मत जलाओ
मानव रूपी दानव मुझे समाज में जीने न देगा
मस्त परिंदे की तरह मुझे आकाश में उड़ने न देगा
रौंदकर देह मेरी कुचलेगा सपनो को मेरे
काट देगा पंख मेरे छोड़ देगा रक्त रंजित ,
रक्तरंजित.........
क्या मेरे इस दर्द को तब सहन कर पाओगी ?
मेरे ह्रदय की वेदना को दुनिया से कह पाओगी ?
माँ अभी हु मैं अजन्मी, जान हू तेरी अभी ,
दिल पर पत्थर रख लो माँ
मार दो मुझको अभी .... मार दो मुझको अभी अभी अभी अभी ..........
( लेख ... संध्याशिश त्रिपाठी के द्वारा )



Posted By KanpurpatrikaFriday, January 28, 2011

Friday, January 21, 2011

नेता नहीं है भ्रष्टाचारी

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-: नेता नहीं है भ्रष्टाचारी :-

देश के नेता नहीं है भ्रष्टाचारी ये मैं क्यों कह रहा हु आप सोच रहे होंगे क्योंकि जो दिखता है वो बिकता है ... के नाम पर सिर्फ नेताओ प्रशासन शासन और सरकारी अधिकारियो को भ्रष्टाचारी बता देना कहा की समझदारी है क्यों
क्योंकि एक चाय की दुकान में काम करने वाला नौकर जिसको दिन भर में मात्र 50 से 100 रूपए दिहाड़ी मिलती है वो भी दिन भर भ्रष्टाचार करके (उपरी आमदनी ) करके 20 से 30 या अधिक कमा लेता है क्या आप जानते है ये भी एक प्रकार का भ्रस्ताचार है
दूसरा ऑफिस में कामकरने वाला बन्दा भी क्या अपने को मिलने वाली पगार के हिसाब से kama ईमानदारी से करता है नहीं और न ही ईमानदारी से काम करने वाले को कम्पनी उतना वेतन देती है यानि दोनों ही भ्रस्ताचार फैला रहे है
तीसरा सड़क पर फल आया अन्य सामान बेचने वाले क्या आपसे सही कीमत लेकर आपको सही चीज़ देते है नहीं यानि वो भी भ्रष्टाचार फैला रहे है तो फिर सिर्फ नेता ही क्यों ...
साधू महात्मा जो सत्य का ढोंग करते है क्या वो सही शिक्षा अपने अनुयाइयो को देते है नहीं चाहे अभी हाल मे ही मथुरा में पकडे गए महाराज जी वो या दिल्ली में पकडे गया बाबा या फिर जिनका उपदेश आप अपने टीवी चैनेल्स पर देखते है .... सभी भ्रष्ट है
फिरे पुलिस प्रशाशन मुर्दा बाद क्यों
चौथा सरे लिहाज़ से चौथा खम्भा मीडिया क्या ये सही है सभी जानते है की आज की मीडिया की कलम में भर्ष्टाचार की कितनी स्याही भरी हुई है किसी ने कहा है की आज की मीडिया एक चाभी से चलने वाले खिलौने की तरह है जितना भरोगे उतना ही चलेगा नहीं भरोगे तो पाता नहीं कहा और कैसे चलेगा ...
फिर कुछ लोगो को ही भ्रष्टाचारी बता देना कहा की अक्लमंदी है

Posted By KanpurpatrikaFriday, January 21, 2011