विश्व स्वास्थ संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 30 करोड़ लोग पूरी दुनिया में अवसाद से पीड़ित है और 18% प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहे है । पहले आर्थिक तंगी आत्महत्या का प्रमुख कारण होता था लेकिन आज के समय मे युवा वर्ग जो समझदार है तरक्की कर रहा है और जिसके लिए लोग तरसते है वो सब भी उसके पास होता है लेकिन फिर भी वह आत्महत्या जैसे कदम उठा रहें हैं,कुछ मोटिवेशनल स्पीकर जिन्होंने लोगों की राह आसान की मंच से स्पीच दी । एक दिन अवसाद ने उनको भी घेर लिया और आत्महत्या जैसा कदम उन्होंने भी उठाया ऐसा क्यों? शायद यह सवाल ही है जो आत्महत्या करने वाले लोंगो के साथ ही दफ़न हो जाता है ।
एक 24 वर्षीय युवती प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल होती है और उसे बेरोजगारी का डर सताता है और वह दीवार पर सुसाइड नोट लिखकर फंदे पर झूल जाती है क्या ऐसा हो सकता है कि आप 24 साल की उम्र में हार मान लें | एक आदिवाशी परिवार की आर्थिक तंगी के हालात ऐसे थे की लड़के की दादी ने आत्महत्या कर ली और कुछ दिनों बाद उसके चाचा ने भी और कुछ महीनो बाद परिवार और दो सदस्यों ने आत्महत्या की राह चुनी उस लड़के के परिवार के चार लोग आर्थिक तंगी के चलते हार मानकर जीवन लीला समाप्त कर चुके थे लड़के के माता-पिता कुछ चीज़ो को बेच कर उस लड़के को पढ़ाते है लड़का आईएस बनना चाहता था और वो दो दर्जन से ज्यादा प्रतियोगी परीक्षाओं में एक, डेढ़ और दो नंबर से फेल हो जाता था लेकिन हार नहीं मानी और लड़ा उस जीवन से जो उसे जीने के लिए मिला था और उसने जिया और ग्राम सेवक की नौकरी में चयनित भी हुआ |अपने माता-पिता जो बूढ़े हो चुके थे उनका सहारा बना ऐसा सख्स जो अपने ही परिवार में आर्थिक तंगी से चार-चार आत्महत्याएं देख चुका हो और खुद उन हालातों से संघर्ष करते हुयें आगे बढ़ा और दो दर्जन से ज्यादा परीक्षाओं में असफल भी हुआ उसके लिए तो प्रतिदिन आत्महत्या के द्वार खुले थे लेकिन उसने अपने जीवन को चुना पर निराश नहीं हुआ |
एक मुख्य कारण कि ईस्वर ने हमें जो दिया जीने के लिए और हमने फोकस किया उस पर जो हमें मिला नहीं ।आज दुनिया भर में 33% से ज्यादा लोग अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं है और 81% लोग अपने कार्य क्षेत्र को और निजी जिन्दगी के बीच संतुलन न बैठा पाने के कारण परेशान है दूसरा मुख्य कारण आत्महत्या करने का जो प्रमुखता से उभर कर आता है और लोग उस पर ध्यान नहीं दे पाते वह उनका लाइफ स्टाइल और उनका वास्तविक स्टाइल कहने का अर्थ मनुष्य का दोहरा चरित्र जिसमे वो जीता है और वही चरित्र एक दिन उनकी जान ले लेता है और वास्तविक चरित्र की हत्या कर देता है|
घर में दोनों पति और पत्नी का नौकरी करना और व्यस्त दिनचर्या, एक ही घर में रहते हुए हम हफ्ते में एक आध बार ही बातचीत कर पाते है | कहने को तो हमारे पास सबकुछ होता है दिखने में भी सब कुछ लेकिन वो सब काल्पनिक होता है और जब लोगो को उसके वास्तविक चरित्र के बारे में पता चलता है तो वो टूट जाता है | असल वो जो बाहर की लाइफ स्टाइल में लोगो को दिखा रहा था वो तो वो था ही नहीं वो तो कोई और ही था | यह लेख आपको कैसा लगा कमेन्ट जरूर करे।
आपका
पंडित आशीष त्रिपाठी ।










