Friday, September 6, 2013

जाने अर्धनारेश्वर शिव चित्र के बारे में




जाने अर्धनारेश्वर शिव चित्र के बारे में
अर्धनारेश्वर शिव चित्र मतलब आधे शिव और आधी पार्वती जी का चित्र जो हम सभी ने देखा और सुना | सभी पूजते है इस चित्र को सनातन  धर्मं  में | लेकिन क्या कभी जानने कि कोशिश कि क्या ये चित्र भी हमे कुछ बताता है ?
 सनातन  धर्मं  में एक भी चित्र से लेकर वेद  पुराण  तक सभी में ज्ञान है हमारे  जीवन को चलाने के लिए बस बात है समझने कि और समझाने कि कैसे पता चले उस ज्ञान के बारे में जो हमें हमारे शरीर को स्वस्थ रखे |
अब जानते है अर्धनारेश्वर चित्र के दाहिने और माँ पार्वती के चित्र से....
माँ पार्वती स्त्री का प्रतिनिधित्व कर रही है स्त्री जो पूजनीय है जो प्रथम है जो जननी है
माँ पार्वती का आधा भाग यह दर्शाता है कि जीवन में पहले एक स्त्री के गुणों को जीवन में अमल में लाना चाहिये  और उसके बाद पुरुष  के चरित्र और गुणों को ...
स्त्री के मस्तिष्क :- स्त्री के गुणों का अनुसरण करने से तात्पर्य यह है कि एक स्त्री जो जननी है जो पली और बड़ी हुई किसी और घर में और अपने जीवन का आधे से ज्यादा समय किसी और के यहाँ बिता देती है और अपने  मस्तिष्क के अनुरूप काम लेकर उस घर में अपने को ढाल लेती है जैसा वहा का वातावरण होता है |
अगर हम भी यानि सभी अपने जीवन में कभी  अनजानी और अपरचित जगह जाते है तो एक स्त्री के मष्तिष्क कि तरह काम लेकर वहा के अनुरूप ढल जाय | ताकि हम उस वातावरण में रहकर कार्य कर सके |
स्त्री के नेत्र कि तरह :- एक स्त्री के नेत्र विषम परिस्थितयों में ही क्रोध से भरे दिखाई देते है नहीं तो एक स्त्री हमेशा प्रेम स्नेह और ममतापूर्ण नेत्रों से देखती है दयालुता सम्मान उसके नेत्रों में दिखाई पड़ती है  | तो हमे भी अपने जीवन में स्त्री नेत्रों कि तरह ही प्यार और सम्मान से लोगो को देखना चाहिए |
स्त्री के कान :- एक स्त्री ससुराल में अपने कानो से सब कुछ सुनकर वहा पर सामंजस्य बनाकर रखती है | स्त्री के कान सब कुछ सुन कर भी सहन करने कि क्षमता रखते है विशेष परिस्थितियों में ही उसे बोलने कि जरुरत पड़ती है | तो हमे भी सर्व प्रथम अपने  कानो को स्त्री के कानो कि तरह ही इस्तेमाल  करना चाहिए |
स्त्री मुख :- स्त्री मुख से निकलने वाले बोल भी कोमल और स्नेह से भरे होते है ,कभी भी असहज लगने वाले सब्दो का प्रयोग नहीं करती है स्त्रिया | इसलिए  हमे भी अपने मुख से क्रोधी और असहज  लगने वालो शब्दों का प्रयोग न करना स्त्री मुख से सीखना चाहिए या उनका अनुसरण करना चाहिए |
अगर हम क्रोधित होते  है को कई लोग क्रोधित होते है और क्रोध नाश का कारण होता है और मुख ही शुभ और अशुभ संकेत दे जाता है |
स्त्री ह्रदय :- स्त्री का ह्रदय कोमल दया से भरा प्यार और स्नेह  लिए हुए होता है ईर्ष्या  और बदले कि भावना उसके दिल में नहीं होती है वो तो परोपकारी  ह्रदय कि स्वामी होती है जिसको देना आता है | माँ बहन पत्नी और बेटी इसका उदाहरण है हमे भी जीवन में पहले स्त्री ह्रदय से काम लेना चाहिए |
स्त्री के हाथ और पैर  :- स्त्री के हाथ और पैर  हमेशा दूसरो कि मदद और सेवा के लिए उठते है जिनमे स्वार्थ और बदले कि भावना तनिक भी नहीं होती है हमे भी अपने हाथ और पैर में स्त्री के हाथ और पैर  के गुण रखने चाहिए |
इन स्त्री गुणों को हमे अपने जीवन मे पहले अपनाना चाहिए जिसके बाद शिव यानि पुरुष गुणों को जीवन में लाना चाहिए |
चित्र के बाई और शिव स्वरुप ईश्वर  यानि पुरुष कर प्रतिनिधित्व कर रहे है | जो जीवन में स्त्री आचरण के बाद पुरुष आचरण को लाने का सन्देश देते है |
पुरुष का मष्तिष्क :- पुरुष मष्तिष्क तीव्र गति से सोचने वाला तीव्र निर्णय लेने वाला और समय और परिस्थित के अनुसार व्यवहार करने वाला होता है अतः हमे पुरुष मष्तिष्क का अनुसरण स्त्री मस्तिष्क के उपरांत करना चाहिए |
पुरुष नेत्र :-पुरुष नेत्रों में कठोरता क्रोध ज्यादा और  भावुकता कम ही होती है | अतः हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष नेत्रों का इस्तेमाल करना चाहिए |
पुरुष कान :- पुरुषो के कान  ज्यादा गंभीर और ज्यादा देर तक सहन नहीं कर सकते है | अतः हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष कानो का इस्तेमाल करना चाहिए |
पुरुष मुख :-स्त्री मुख कि अपेक्षा पुरुष मुख से कोमल व स्नेही शब्द कम ही निकलते है अतः हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष मुख का इस्तेमाल  करना चाहिए |
पुरुष ह्रदय :- पुरुष  ह्रदय कठोर होता है उसमे स्त्री ह्रदय कि तरह भावना  कम होती है | यहाँ पर भी हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष ह्रदय को अपना लेना चाहिए |
पुरुष के हाथ और पैर :- पुरुष के हाथ बलशाली और पैर तीव्र गति लिए होते है जो जरूरत पडने पर हमेशा  मजबूती प्रदान करते है अतः स्त्री के हाथ और पैरो के गुणों के बाद आवश्यकता पडने पर पुरुष के  हाथ और पैरो कि तरह ही आचरण करना चाहिए |
भगवन शिव  जिनका प्रतिनिधित्व कर रहे है  जो पालनकर्ता है जो विघ्नहर्ता है जो कर्ता  है | उनका अनुसरण करना चाहिए |

पंडित आशीष त्रिपाठी 
ज्योतिषाचार्य 

Posted By KanpurpatrikaFriday, September 06, 2013

Wednesday, September 4, 2013

जीत जायेंगे हम The Winning Spirit

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जीत जायेंगे हम The Winning Spirit


जीवन में सफलता और असफलता हमेशा आते है कोई सफल होकर असफल होता है तो कोई असफल होकर सफल होता है / सफलता और असफलता प्रायः आशा ख़ुशी और सकारात्मक सोच लेकर आते है वही असफलता निराशा दुःख और नकारात्मक सोच को लेकर आते है / हमेशा असफलता से सभी डर जाते है नकारत्मक सोच हावी होने  लगती है आस पास का माहौल भी अनुकूल नहीं लगता है / हम सबसे दूर जा रहे होते है कोई हमे समझ ही नहीं पा रहा है और न ही समझना चाहता है / ऐसे में क्या करे और क्या न करे समझ में भी नहीं आता है अक्सर  गुस्सा आना चिड चिड़ापण बात बात में गुस्सा आना / ऐसे में कुछ लोग करवाने ( तंत्र मंत्र और दुआ ताबिज़ जैसे चक्कर में फसकर समय और पैसा बर्बाद करके और नकारत्मक सोच से घिर जाते है / और ऐसे समय में अगर कोई उन्हे सबसे बुरा लगता है तो वो है ईश्वर जो सब कुछ देखते हुए भी चुप रहता है / मैं कितना परेशां हु क्या उस ईश्वर  को नहीं दिख रह है / पंडितो द्वारा बताई गई  चीजे भी कि लेकिन उनका भी कोई फायदा नहीं क्या मेरी किस्मत  ही ख़राब  है क्या मैं वाकई में कुछ नहीं कर सकता हु /
ऐसे में ज्यादा नकारत्मक सोच बढने से हम आत्माहत्या कि और बढने लगते है और ज्यादातर लोग जिंदगी कि जगह मौत चुनते है / क्या ये रास्ता सही है ? क्या हम वास्तव में हार  जाते है क्या कारण है कि हम लाख कोशिश के बाद भी असफल हो  रहे है /
क्या जब हम असफल होते है तब हमे कुछ नहीं मिलता हर तरफ नाकामी होती है ? हम शून्य हो जाते है ? शून्य  पर आकार खडे हो जाते है ?हमे कुछ नहीं मिला ऐसा हम सोचते है ?
लेकिन ऐसा नहीं होता है हमे हर पल कुछ न कुछ मिलता रहता है लेकिन हम उन नकारात्मक सोच के कारण उन चीजों कि और ध्यान ही नहीं दे पाते है जो हमे असफलता के दिनों में मिलती है जो हमारी जिंदगी के महवपूर्ण दिन होते है / ”The Golden Period of Our Life is our Unsucsess Time” जब हम असफलता कि सीढ़िया चढ़ रहे होते है /
हर एक इन्सान जो आपके साथ उठता था बैठता था आपसे बात करता था आपके असफल होने के बाद से आप के पास बैठना पसंद नहीं करता उसके पास आपके पास बैठने के लिए टाइम नहीं है
आपकी बुराई चालू कर देते है /
आपकी हा में हा मिलने वाले अब आपसे बात नहीं करते क्यों कि आप कुछ नहीं है /
आपके अपने आप को निकम्मा कहते है /
क्या आप अपने आप को और अपनी क्सिमत को ख़राब मानते है /
अगर ये सही है तो आप असफल व्यक्ति कि लाइन में खडे है और आप उस लाइन  से आगे निकल कर दोबारा देखे  कि आप क्या देख पा रहे है .........
जो आप के पास बैठते थे आप से बाते करते थे आपकी हा में हा मिलते थे वो आज आपके पास नहीं आते है आप से दूर जा रहे है आपकी बुराई कर रहे है उनके पास आपके लिए समय नहीं है क्योंकि आप फेल हो चुके है /
जो आपके साथ उस समय नहीं है जब आपको उनकी जरुरत थी जब आप समस्या में थे जब आपको सही सलाह कि जरुरत थी तो आपके अपने न हो कर वो आपके सच्ये दोस्त न होकर और वो आपसे नहीं आपके पद आपके पैसो और आपसे मतलब के कारण जुडे थे ऐसे लोग असफलता के आने पर साफ नज़र आ जाते है / ये सर्फ असफलता ही दिखा  सकती है सफलता के दिनों में आप् किसी को भी नहीं पहचान  पायेंगे /
हो सकता यही लोग उस समय जब आप मुसीबत  में होते हौर बुलाते तब न आते तब लेकिन आज असफल होने के बाद ये तो मालूम पड़ गया कि ये इन्सान तो कभी  समस्या में काम आने वाला नहीं है ये है असफलता के दिनों में मिलने वाली चीजे जो हम देख नहीं पते / आप कुछ नहीं है आप असफल है आप डूबते हुए  सूर्य है / तो हा मैं हु क्योंकि  सूर्य डूबते समय भी उतना बड़ा होता है जितना बड़ा  वो उगते समय होता है / सूर्य डूबते समय भी उस रंग का होता है जिस रंग का उदय होते समय होता है / तो  मैं आज अगर डूब रहा हूँ तो मैं उग रहा हूँ मैं वैसा हु जैसा पहली बार काम  करने गया था और मेरा साथ किसी ने नहीं दिया था मैने खुद मुसीबतों से लड़कर सीखा और आज फिर मैं वैसा ही हु और फिर मैं उगूंगा और पूरा सूर्य जैसे उजाला फैलाता है मैं भी फैलाऊंगा अंधरे में मुझे कौन उजाला दिखाता है ये देखना है या मुझे अंधेरे में छोड़ जाते है जो सो सच के साथ नहीं है / और अँधेरे में वो ही जाते है जिन्हे उजाला खोजना होता है /
फिर भी मान लिजिए कि असफलता के दिनों में कुछ न मिला तो शुन्य तो मिला शुन्य यानि जीरो यानि गोल यानि प्रथ्वी जो गोल है उसमे बसने वाले गोल मोल लोगो तो दिखे / दूसरा शुन्य मिला तो कुछ तो मिला अब ये हमारें ऊपर है कि शुन्य  को हा कैसे यूज़ करते है 1 के साथ 2 के साथ या 9 के साथ ........ जो 10 20 90 बना सकता है फिर हम जीरो को कितनी बार यूज़ करते है 100 1000 100000 ये हमारें ऊपर है /
पंडित के दिए मंत्र दुआ और पहना गय ताबीज भी असफलता के दिनों में काम नहीं आता ,इससे ये मालूम पड़ता है कि ये कि अंधविश्वास से दूर रहो जो आपके बुरे वक्त को सही नहीं कर सका वो क्या कर पायेगा /
असफलता  के दिनों में भी सकरात्मक सोच बनाय रखे आप अपने ईश्वर खुद बने आप अपने आप को खुद देखे कि आप ने क्या किया असफल होने  के पहले कि असफल क्यों हुए /
ईश्वर ने हमारे शारीर में दो हाथ दो पैर दो आंख दो कान दिए है /जो क्रमशः दाहिने और बाएँ और होते है /
दांया ----------Right...........सीधा..........सही
बांया..............Left..............उल्टा........गलत
यही जीवन का सूत्र है हमारी सोच और हमारे आस पास वालो कि सोच यहाँ तक ही जाती है कि आप का सीधे हाथ से ही काम कर सकते है और जो दिख रहा है अगर आपने कोशिश करके भी लेफ्ट हैण्ड से लिखा है तो भी उन्हे राईट हैण्ड से लिखा ही दिखेगा / मतलब इसका ये है कि अगर हम जो सही कर  रहे है जो हम सामने से दिख रहे है वही लोगो को दिखाई पड़ता है हम पीठ के पीछे यानि छुप कर क्या करते है ये किसी को नहीं मालूम होता है जो लेफ्ट हैण्ड करता है जो उल्टा है हमारे चरित्र का जो गलत है /
अब असफलता के दिनों में अपने  उन पालो को याद करे जो समय अपने अकेले बिताया जिसके बारे  में आप और सिर्फ आप ही जानते है आप के वो काम जो सिर्फ आप ने किये जिनको आप ही जानते है सोचे क्या वो चीजे आपने किसी को बताई नहीं क्यों क्योंकि वो गलत थी / उन पालो को जो अपने गलत बिताया याद करे मज़ा आयेगा और असफल क्यों हुए पता लगेगा / जब भी  हम असफल होने बाद  सफलता वाले दिनों में जी रहे होते है तो हमे अपने वो पल याद करने चाहिए जब हम असफल थे तब महसूस होगा जब इतनी मुसीबत और कठनाई के दिनों में हौसला बनाए रखा तो ये क्या दिन है अब तो सब कुछ हमारे अनूकुल है अब तो जीत जायेंगे हम हम अगर साथ है /
 मतलब  अपना साथ हमे खुद अपने आप को देना है अपना ईश्वर हमे खुद बनाना है / हम ही अपनी किश्मत और अपने असफलता को सफलता में बदल सकते है /
जीत जायंगे हम अगर हम साथ है
जिंदगी हर पल एक नई सोच है
जिंदगी हर पल एक नई खोज है
लड़ेंगे हम भिड़ेंगे हम असफलताओ से
जीतेंगे हम जितना है हमे
जीत जायंगे हम अगर हम साथ है



Posted By KanpurpatrikaWednesday, September 04, 2013

Monday, July 29, 2013

स्वप्न विज्ञान सपने कितने सच्चे कितने झूठे_:

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स्वप्न विज्ञान सपने कितने सच्चे कितने झूठे
स्वप्न अर्थात सपने ... अपने जीवन में सभी अपने सपनो को बुनते है जिनमे कुछ सपने सच हो जाया करते है और कुछ सपने सपने बनकर सपनो में ही आया करते है / कहते है खुली अखो से देखे गय  सपने सच होते है लेकिन कौन होगा जो खुली आँखों  से सपने देखना पसंद नहीं करेगा, सभी चाहते है / सपनो का संसार एक चमत्कारिक संसार तो है ही साथ  में रहस्यमई  भी है / इसे जितना सुलझाया जाता है उससे ज्यादा ये उलझता जाता है /
काफी सोचा, पड़ा और फिर सोचा की आखिर सपने होते क्या है ! कुछ लोगो का  कहना है की सपने वो है जिन्हे हम दिन भर सोचेत है और जो काम करते है वो नींद में सपने बनकर जाते है वही मशहूर मनोवैज्ञानिक सिगमंड फ्रायड के अनुसार सपने हमारी वो अतृप्त इच्छाए है जिन्हे  हम अपने जीवन में सोचते है या  करते  है वो सपने बनकर आते है / सिगमंड फ्रायड ने मनुष्य के मष्तिष्क को बहूत गहरे से पडने की कोशिश की और सपनो पर आधारित उनकी किताब इंशपरेशन  आफ ड्रीम्स काफी लोक प्रिय हुई /
सभी ने कुल मिलाकर   सपनो की जो व्याख्या की वो यही थी की दैनिक जीवन में किये जाने वाले  वो कार्य जो हम सोचते जो मन में रखते है या जो कर चुके है नींद आने पर हमे सपने के रूप में दिखाई देते है / लेकिन अगर इन्हे सपने कहते है तो फिर वो क्या है जो नींद आने पर दिखाई देते है और ठीक वैसे  ही भविष्य  में घटित हो जाता है ! क्या इन्हे स्वप्न  या सपने नहीं कहेंगे  / या फिर बच्चे जन्म लेने   के कुछ महीनो तक अपने आप ही हस्ता है और आपने  आप हो रोने लगते है सोते सोते / जब की उस अवस्था में वो अपनी माँ को भी ठीक तरह से नहीं पहचान  पाते है/ फिर  उस छोटे से बच्चे की कौन  सी अतृप्त इच्छा हो गई या फिर उसने दिन में  कौन सा काम  किया नहीं या कौन सा कार्य उसने सोचा / जबकि उसने ज्यादातर समय तो सोने में बिता दिया होता है / क्या ये भी स्वप्न है या कुछ और ?
अगर वो चीजे हमे नींद आने के बाद आती है जिनकी बारे में हमने कभी देखा पड़ा और ही सोचा  और  वो नींद आने के बाद रही है और  वैसा ही जीवन में घटित हो रहा है तो ये स्वप्न नहीं  है क्या ये पूर्व आभास  है या फिर कुछ और अगर पूर्वाभास है तो ये कैसे संभव है / ये भी एक अबूझ पहेली है  /इस बारे में हमने भी काफी सोचा कई लोगो से बात की और जिसके बाद कुछ तथ्य निकले जो शायद सपनो की दुनिया से कुछ पर्दा हटा सके !
हमारे अनुसार सपने दो प्रकार के होते है या हम सभी ये जानते है की हमे दो प्रकार के सपने आते है 
एक वो जो हम अपने दैनिक जीवन  में जो कार्य या विचार लाते है वो नींद में स्वप्न बनकर आते है
और दुसरे  वो जिन्हे  हम सोचते है और नहीं करते है और किसी किसी संकेत के रूप में सपने में आते है /
इस निष्कर्ष पर स्वप्न दो प्रकार के होते है
सांसारिक स्वप्न और सांकेतिक स्वप्न
सांसारिक स्वप्न वो स्वप्न होते है जो हमे नींद आने के डेड़  से दो घंटे बाद आते है और वो हमारे  विचारो और कार्यो की एक ऐसी टूटीं फूटी कहानी होती है जो कड़ी कड़ी जुड़ कर एक पूरी कहानी बन जाती है और हम स्वप्न में पत्रों को भी अपने अनुसार ही जोड़ लेते है /
सांकेतिक स्वप्न सांकेतिक स्वप्न वो स्वप्न होते है जो की हमे नींद आने के तीन  से चार घंटे के बाद आते है या फिर रात्रि के चौथे पहर में आते है जो हमे हमारे  जीवन या हमारे आस पास घटित हनी  वाली घटनाओं के संकेत  के रूप में आते है / सांकेतिक स्वप्न भी  प्रायः  दो प्रकार के होते है
एक जिन्हे  हम अपने परिवार या अपने जीवन में घटित होने  से पहले  स्वप्न के रूप में देख लेते है /
दुसरे  वो जिन्हे  हम अपने  जीवन में होने  वाली शुभ अशुभ घटनाओ  को भी स्वप्न के माध्यम से देख लेते है ऐसे  स्वप्न  व्यक्ति प्रायः भूल जाता है / जिन्हे पूर्वाभास भी कह सकते है/
इस संसार में आने के बाद एक बात तो निश्चित होती है की हम जो भी कर रहे है या जो भी करेंगे वो पहले से ही पूर्वनियोजित है ! हम सभी एक कहानी के पात्र  के रूप  में आते है और अपना कार्य कर के चले जाते है / अपना चरित्र कहानी से ख़त्म होने  के बाद जीवन के रंग मंच से चले जाते है किसी और कहनी में अभिनय करने के लिए /
इसका मतलब ये है की जब सब कुछ पूर्वनियोजित है तो वो विचार जो हमे आते है वो या तो घट चुके होते है या घटने  वाले होते है / हम वर्तमान में होते है और भूत हमारे पीछे और भविष्य हमारे आगे खड़ा  होता है हम अपने जीवन  में ज्यादा तर   भूत काल में किये गए  कार्यो पर ही विचार या चिंतन करते है / जो हमे सांसारिक स्वप्न के रूप में आते है / और  जो भविष्य के लिए सोच बनाते रहते  है वो सांकेतिक स्वप्न के रूप में सामने आती है /
अब ये ठीक वैसे ही हो सकता है की डाकिया किसी और का पत्र हमारे   पते पर दे जाय  और वो पत्र हम पड़  ले / मतलब किसी और के स्वप्नों की  जो उर्जा तरंगो के रूप में  हम  तक पहुच रहे है किसी और तक पहुचना था लेकिन उन्हे  हमने या हमरी उर्जा तरंगो  ने अपनी  और आकर्षित  कर लिया/ ऐसे संकेत्तिक स्वप्नों में हम येकहते  नज़र आते है की इसका तो मैने सोच ही नहीं था या इस जगह पर मैं कभी आया ही नहीं और वो हमे स्वप्न के रूप में जाते है / हम वही सोचते है वही बोलते है जो पहले  से तय है या पहले हो चूका होता है या होने वाला होता है या हम कुछ  भी लिखते है तो वो भी पहले घट चूका होता है या घटित होने  वाला होता है / हमे जो भी विचार इस संसार में रहे है उर्जा तरंगो के रूप  में और हम उसे कर रहे या लिख रहे है / या काफी बार हुआ है की कई लेखको ने कई कहानिया लिखी और भविष्य  में घटित  हुई / क्या इन्हे भी हम सांकेतिक स्वप्न कह सकते है या खुली अखो से देखे गय  स्वप्न /
अब बात करते  है की स्वप्न के बारे में ही .......
प्रत्येक  मनुष्य जब भी सोता है तो सोने के डेड़  घंटे बाद तक हमारा  मस्तिस्क पूरी तरह से सुप्त अवस्था  मेंचला  जाता है यहाँ तक की हमारा शारीर भी /और इस दौरान ज्यादातर लोगो को कोई स्वप्न नहीं आते है / यदि आता भी है तो  याद नहीं रहता है / इसके बाद दिमाग की थकावट दूर होने  के बाद  दिन भर किये गए  कार्यो  और विचारो को जिसे हमारे मस्तिष्क ने  ग्रहण  किया होता है उन्हे व्यवस्थित तरीके से एकत्रित  करता है और और पूरे दिन भर के घटना क्रम को एक कहानी के रूप में जोड़ कर पत्रों का चयन करता है और फिर चालू होता है सपनो का रंगमंच / ऐसे  सपनो में कभी ऐसा  भी होता है की जब मस्तिष्क  अपने  अनुसार पत्रों का चयन   कर लेता है और जब हम सुबह  उठते है तो आश्चर्य में पड़ जाते है की ये कैसे संभव हुआ / जैसे की स्कूल की प्रधानआचार्य को हम अपने घर में देखते और वो हमारे  साथ हमारे  किसी  ऐसे  रिश्तेदार के घर में पहुच जाते जिनका   उसने कोई लेना देना ही नहीं होता है कभी कुछ और /
 
वैज्ञानिको ने नींद को कुछ इस प्रकार से समझाया है की जिसमे शरीर तो निष्क्रिय हो जाता है लेकिन आंखे गतिशील रहती है जिन्हें वैज्ञानिको ने R .E .M यानि रैपिड आई मोवमेंट / दुसरे  प्रकार के सपने हमे ऐसी स्थित आते है जिनमे आँखों के साथ शारीर भी गति शील हो जाता है जिसमे कई बार व्यक्ति आँखों के साथ शारीर को भी चलाता  है कभी  बोलता भी है और कई बार नींद में चलने भी  लगता है / जिसे एक प्रकार की बीमारी में कहते है,Sleepwalking disorder या (Somnambulism)  / कई बार लोग इस बात पर विश्वास नहीं करते हैं कि नींद में चलते समय भी बच्चा हकीकत में गहरी नींद में ही होता है और उसे अपनी उस स्थिति का अहसास तक नहीं होता क्योंकि नींद में चलते वक्त भी उसकी आँखे खुली रहती हैं, लेकिन चेहरा पूरी तरह सोई हुई स्थित में  रहता है। कई बार तो चलते चलते वो चीजों से टकरा कर घायल भी हो जाता है  नींद में चलते वक्त इसे लोग अपने आस पास हो रही  बातचीत या घटनाओ पर भी ध्यान नहीं दे पाते  है / नींद के प्रारंभिक दो घंटो के मध्य ही नींद में चलने की घटनाएं सबसे आम होती है। नींद में चलने का समय 15 मिनट से लेकर दो घंटे तक का हो सकता है। इस अवस्था में बच्चा तैयार होकर घर से बाहर भी जा सकता है।
इन सब का कारण है की हमारा  शारीर एक Energy  उर्जा से चल रह है तभी कुछ लोगो को कहते भी सुना जा सकता है की मेरे शारीर में अब इतनी Energy  उर्जा नहीं बची है की मैं चल सकू ,इस Energy  उर्जा को   वैज्ञानिको ने भी शोध से पता लगाया है की अगर किसी जीवित व्यक्ति को शीशे के बॉक्स में बंद कर दिया जय और उसकी मृत्यु  के 30  सेकेंड्स के बाद वो शीशे का बॉक्स चटक जायेगा / यानि उस व्यक्ति के शरीर से निकली वो उर्जा ( आत्मा ) उस शीशे को भी तोड़ के पार निकल जाती है / ऐसी उर्जाओ  को अक्सर हम अपने आस पास महसूस कर सकते है जिन्हें  हम भूत या आत्मा  कहते है /
खैर  ये बात दूसरी ओर  की है अब वापस आते है की स्वप्न क्या है सपनो के बारे में हमारे प्राचीन काल के ग्रंथो भी लिखा गया है जिसमे स्वप्न विज्ञान से सम्बंथित रहस्यों  को बताया गया है / जिसमे प्रश्नोउप्निशद में श्लोक  के माध्यम से समझाया गया है की सभी प्राणियो  को स्वप्न आते है फिर वो मनुष्य के अतरिक्त पशु हो पक्षी हो या कोई और / और ऐसा  बताया गया है की ईश्वर  की और से आने वाली तरंगे ही स्वप्न होती है / इसे स्वप्न सांकेतिक होते है जो भविष्य में घटने वाली घटनाओ के बारे में बताते है /अक्सरसाल से 12   और कभी 14  साल कि उम्र तक के बच्चे छत  से या उचाई से गिरने के , किसी के दौड़ने पर दौड़ पाने के .एक दम आसहाय  से होने  वाले स्वप्न देखते रहते है  / ऐसे  स्वप्न उन्हे इस लिए आते है की उन्हे एक अनजाना  सा भय रहता है या विचार होता है जिसे वो किसी  से कह नहीं पाते   है  जो नींद के आने पर ऐसे स्वप्न के रूप में सामने आता है /
अक्सर सीने  पर हाथ रख कर सोने पर कही से भी गिरने या पैर फिसलने जैसे स्वप्न आते जो हमरे हृदय  पर बड़ रहे दबाव के संकेतक होते है जिसमे हम चौक से जाते है /
किसी सोते व्यक्ति के चेहरे पर यदि पानी की कुछ बूंदे डाली जाय  तो उसे बारिश का या नहाने  सम्बंधित स्वप्न आने लगते है /
परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को अक्सर परीक्षा  के छुट जाने के या फेल  हो जाने के स्वप्न आते है / किसी व्यक्ति के शरीर में किसी  गर्म वस्तु को छुलाने  पर उसे आग के या आग से जलने के स्वप्न  आने लगते है /
कभी हम दिन में भी सोते ही स्वप्नों के संसार में खो जाते है है कारन हमारा   दिमाग और शरीर इतनी थकावट महसूस  ही नहीं कर रहा था और हम सपनो में खो जाते है / यदि हम रात्रि में ११  बजे सो जाय  और सुबह   बजे उठे ऐसा  वर्णन हमारे   धर्म ग्रंथो में भी है की सुबह  ब्रम्ह मुहूर्त में उठाना चैचाहिए / तो हमे स्वप्न  नहीं आयेंगे कारन हमारे शरीर और मष्तिष्क  का पूरी तरह से सुप्तअवस्था में चला जाना और और जब वो  सक्रिय  होता है तब तक हम उठ जाते है इसी स्थित में सपने के बराबर आते  है या फिर हम अक्सर भूल जाते है /
सपनो को ज्योतिषयो ने घटित घटनाओ  के आधार पर विश्लेषण करके उनके अर्थ निकाले जिन्हे स्वप्न के शुभ  और अशुभ विचार कहा जाता है /
जैसे की अगर  रात्रि  के प्रथम प्रहर में देखे गय  सपने का शुभ और अशुभ फल एक साल के अंदर मिलता है /
रात्रि के दुसरे प्रहर में देखे  गय स्वप्न का शुभ और अशुभ फल आठ  महीने  में /
रात्रि के तीसरे प्रहर में देखे गय स्वप्न का शुभ और अशुभ फल तीन महीने में /
रात्रि के चौथे  प्रहर में देखे गय स्वप्न  का शुभ और अशुभ फल एक महीने में / और भोर के समय देखे गय  स्वप्न का फल एक माह में  मिलने का विचार ज्योतिष विद्या करती है या ज्योतिषी करते है /
इन सब बातो से निष्कर्ष यही निकलता है की स्वप्न विज्ञान एक अबूझ  पहेली है  जिसको सुलझाने  पर ये उलझती ही जाती है जिसको सालो से खोज जा रहा है और खो जा जाता रहेगा /
शिव बिना शरीर  है ही नहीं  जय शिव

                                      

Posted By KanpurpatrikaMonday, July 29, 2013