Sunday, November 20, 2011

अगर तुम होती ...

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अगर तुम होती ...
अगर तुम होती तो ऐसा होता
अगर तुम होती तो वैसा होता माँ.....
आज मैं दूर हु अपनी माँ से मैं मजबूर हु, अपने आप से
कभी थक कर आता था घर ..माँ का आंचल पता था भर
थकावट दूर होती थी मिलो की ..एक नई सुबह होती थी उम्मीदों की ...
अगर तुम होती तो ऐसा होता
अगर तुम होती तो वैसा होता , माँ...
जब भूखा होता था तो खिलाती थी खाना
आज अपनी ही बनी जली रोटी हु खाता
जब करता था शैतानी तो देती थी सजा
आज मेरे पास है पैसा मस्ती और मज़ा
पर नहीं है तो वो प्यारी माँ और उसकी सजा
जब चलते चलते गिरता था जमीन पर जब सोते सोते रोता था रातो में
तब एक माँ ही थी जो उठती सहलाती थी और दवा लगाती थी
आज रोते रोते सोता हु माँ की यादो में
और गिर गिर कर चलता हु बिन माँ के सहारे से
अगर तुम होती तो ऐसा होता
अगर तुम होती तो वैसा होता , माँ....
पैसो का मोल समझाती थी माँ
संस्कारो की दौलत देती थी माँ
आज पैसा भी है मेरे पास
संस्कारो की दौलत भी है मेरे पास
अगर नहीं है कुछ तो वो प्यारी माँ मेरे पास
वो माँ का गलतियों पर डाटना और अछाइयो पर गुडडन कहना
लेकिन अब कोई बेटा अपनी माँ को अलविदा कहना
क्योकि आज परदेश में आकर ...अकेले में अपने आप से हु पूछता
की बिन माँ के बेटा कैसा होता है
अगर माँ होती तो ऐसा होता है
अगर माँ होती तो वैसा होता है ....


आशीष त्रिपाठी ...

Posted By KanpurpatrikaSunday, November 20, 2011

Friday, November 4, 2011

तेल के खेल में सरकार आउट


तेल के खेल में सरकार आउट

किसी भी उत्पाद के दाम तब ही बडते है जब उत्पाद का नया प्रिंट बाज़ार में आता है ऐसा कभी नहीं होता है और न ही कोई कर सकता है की पुराने प्रिंटेड दाम पर नई कीमत ले ले ..लेकिन एक बात नहीं समझ में आती की पेट्रोल और डीजल के दाम आदेश आने दिन के रात 12 बजे के बाद बड़ा दिए जाते है /

या ऐसा होता होगा एक टैकर पेट्रोल अगर एक पेट्रोल पम्प मालिक 65 रुपए प्रति लीटर के दर पर खरीदता है और दूसरे दिन अगर सरकार रेट बड़ा देती है तो जहा से टैंकर आया है वहा का एक प्रतिनिधि आता है और रात 12 बजे के बाद पेट्रोल पम्प के टैंक में जितना पेट्रोल होता है उसको नापता है और जितना बचा होता है उसपर बड़े हुए दाम लेकर चला जाता है .... लेकिन ऐसा नहीं होता है ...

या फिर ऐसा होता होगा की जितना पेट्रोल बचा है उस पर जो भी मुनाफा होगा उस पर आधा आधा ऐसा भी नहीं होता है .. फिर क्या होता है

होता ये है की आम जनता जो एक मदारी के इशारो पर नाचती या या एक माता पिता अपने बच्चो को जैसे फुसलाते है वैसे ही सरकार महेंगाई का रोना रो कर आम जनता से पैसे वसूल लेती है लेकिन ये आम जनता या आम आदमी जो कभी दिखाई नहीं दिया तो विरोध कैसे करेगा ...हा ऐसा जरुर होता है की भारतीय तेल कंपनिया विदेशो से प्रति बैरेल 90 डालर ( प्रति लीटर 25 रुपया ) के हिसाब से खरीदती है और फिर सारे मुनाफे निकलने के बाद घटा जोड़ा जाता है और उस घाटे का बोझा पहले राज्य सरकार के ऊपर फिर राज्य सरकार उस घाटे को अपने सर से हटा कर आम जनता के ऊपर ड़ाल देती है .../

अब आम जनता का खून तेल माफिया के खिलाडी जूस समझ कर पीते है .../

जब साल में एक बार बजट पारित होता है और सारे उत्पादों पर टैक्स और सारी चीजे निर्धारित हो जाती है तो फिर पेट्रोल रसोई गैस और डीज़ल में ऐसा क्या होता है की हर दो से तीन महीने में दाम बड़ा दिए जाते है ...कही तेल का खेल खेल रहे माफियो का शैतानी दिमाग तो नहीं जो या कांग्रेस सरकार अब तक के सबसे बड़े घोटाले तेल घोटाले में फस रही है ...

एक प्राइवेट नौकरी करने वाला व्यक्ति को महीने में दो हज़ार से पांच हज़ार रूपये महीने से ज्यादा नहीं मिलता और वाहन खर्च के रूप में एक हज़ार से 1500 सौ रूपये ही मिलते है जो कभी साल भर में या फिर दो से तीन साल में एक बार ही बढते है .. लेकिन सरकार ये क्योँ नहीं समझती है की हर दो से तीन महीने में दाम बढ़ाने से जनता को क्या फर्क पड़ेगा शायद इसलिए की सभी सरकारी खर्च पर चलते है ...लेकिन प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारी के मालिक ह दो से तीन महीने में सेलरी नहीं बढ़ाते है ...लेकिन जो बढ़ाते है वो होता है दूध वाला सब्जी वाला स्कूल बस वाला सभी अपने अपने अपने उत्पाद में एक से पांच रुपये बढ़ा देते है .../यानि वही आम आदमी के घर का बज़ट बिगड़ जाता है और वो हर महीने गिर कर संभालता है और एक अतिरक्त बढ़ोतरी उसके ऊपर लाद दी जाती है ...वो एक के बाद एक दर्द को संभालता हुआ खड़ा होता है और जीने को मजबूर है ...

अब एक नज़र आकड़ो पर ..

आकडे बताते है की वर्ष 2011 में ही कुल पेट्रोल के दाम 13 रूपये बड़े है

जनवरी 2011 से पहले पेट्रोल के दाम ...59.37/ लीटर

जनवरी 2011 में 15 जनवरी तीन रूपये बढकर 62.05/लीटर

और ठीक तीन महीने बाद 15मई पांच रूपये बढकर 67.30 /लीटर

फिर एक बार दो महीने बाद एक जुलाई .30 पैसा बढकर 67.30 /लीटर

फिर ठीक डेड़ महीने बाद 16 सितम्बर को तीन रूपये बढकर 70.93 /लीटर

और अंत में में फिर डेड़ महीने बाद तीन नवम्बर को 2 रूपये बड़ा कर 72.83 / लीटर

यानि एक सा में प्रत्येक डेड से तीन महीने में दो से पांच रूपये तक बडाये गए ...

अब अगर यही आकडे का अनुमान 2012 में लगाय जाय तो

जनवरी 2012 से पहले पेट्रोल के दाम ...72.83 / लीटर

जनवरी 2012 में दो रूपये बढकर 74.83/लीटर

और ठीक तीन महीने बाद मई 1.00 रूपये बढकर 75.83 /लीटर

फिर एक बार दो महीने बाद एक जुलाई 1.50 पैसा बढकर 77.33 /लीटर

फिर ठीक डेड महीने बाद सितम्बर को पांच रूपये बढकर 82.33 /लीटर

और अंत में में फिर डेड महीने बाद नवम्बर को 2.97 रूपये बड़ा कर 85 .50 / लीटर

अब अगर यही हाल रहा तो पार्टी वर्ष 10 रूपये के हिसाब से अगर बड़े तो वर्ष२०१४ तक पेट्रोल 105 /लीटर में बिकेगा

2010 में............ 59 .37 /लीटर

2011 में............... 72 .83 /लीटर

2012 में .............. 85 .50 /लीटर

2013 में.............. 95 .82 /लीटर

2014 में.............. 105 .20 /लीटर ( पेट्रोल के दाम उत्तर प्रदेश से लिए गए है )

यानि सरकार का कार्यकाल ख़त्म होते होते पेट्रोल के दाम 105 रूपये /लीटर हो जायेंगे और रसोई गैस 600 /सिलेंडर ....

क्या अब एक आवाज़ नहीं उठानी चहिये की सालन बज़ात के साथ ही पेट्रोल की कीमत में पांच से दस रूपये ही बढ़ाये जाय नाकि हर महीने या दो महीने जब सरकार का मन चाहे .../और हमे हर महीने में अपने घर के बज़ट का रोना रोना पडे ...

एक ओर देश तरक्की कर रहा है और दूसरी ओर उसी देश की जानत खुदखुशी कर रही है ....

आज सरकार अपना बखान करने में अपनी सरकार

की उपलब्धिया गिनाने में करोडो खर्च कर देती है

लेकिन उसी देश की जनता के पास इतने पैसे भी

नहीं है वो आत्महत्या भी कर सके बात कानपुर

की है जहा एक बेरोजगार युवक और आर्थिक तंगी

से परेशान युवक ने पहले पत्नी का गला दबाया और

फिर डेड़ साल के बच्चे का और फिर अपनी पुरानी

लुंगी से फासी लगाई लेकिन उसकी किस्मत ख़राब

थी की लुंगी पुरानी थी सो फट गई और वो बच गया

फिर रात भ लाशो के पास रोता रहा ...ये तो एक

बानगी है न जाने कितनी मौते रोज़ देश में हो रही है

और देश लोकपाल और जनलोक पाल की की लड़ाई

देख रहा है फार्मूला वन पर अरबो खर्च कर सरकार से से सहायता मांग रहे है ... ऐसा देश है मेरा ....

तेल की कीमतों पर कांग्रेस और सरकार कब तक जनता को मुर्ख बनायेंगे ??

हर एक डिबेट में कांग्रेस के नेता तेल की कीमतों के बढ़ोतरी को जायज ठहराते है और सरकार को हो रहे नुकसान का रोना रोते है .. लेकिन सरकार और कांग्रेस कब तक जनता को मुर्ख समझेगी ?

आज कच्चे तेल की कीमत है 90 डॉलर प्रति बैरेल

यानि 25.50 रूपये प्रति लीटर

एक लीटर कच्चे तेल को रिफाइन करने का खर्च है .20 पैसे .

यानि सरका

को एक लीटर पेट्रोल की लगत आयी रूपये - 25.70

अब असली खेल यहाँ से शुरू होता है ..

सरकार कच्चे तेल पर 17 % इम्पोर्ट ड्यूटी लेती है . [केंद्र सरकार के खाते में जाता है ]

25.70 का 17 % = 30.06

13 % उत्पाद

कर [एक्साइज ] [केंद्र सरकार के खाते में जाता है ]

30.06 + 13% = 34

पोर्ट टैक्स [ तेल के टेंकर से वसूला जाता है ] केन्द्र सरकार

१५०० डॉलर छोटे टेंकर से और २५००० डॉलर बड़े टेंकर से

एक लीटर पर करीब ३ % होगा

34 + 3% =

35.02

8 % रिफाइनरी मार्जिन टैक्स [केंद्र सरकार के खाते में जाता है ]

35.02 +8% = 37.82

8% से 12.5 % तक वैट [ राज्य सरकार ]

37.82+ 12.5% = 42.54

4 % से 8

% तक एडुकेशनल सेस [ राज्य सरकार ]

42.54+8% = ४६

(One Barrel of Crude Oil makes 19.5 gallons of Gasoline, which converts to 73.8 liters of petrol/गसोलिने)

यानि सरकार एक लीटर पेट्रोल से २० रूपये पचीस पैसे पहले ही कमा लेती है .

फिर भी आज

पेट्रोल ७३ रूपये में बिक रहा है ..

असल में भारत में जो सरकारी तेल कम्पनिया है उनमे बहुत ही भ्रष्टाचार है ..

भारत पेर्टोलियम, इंडियन आयल , हिंदुस्तान पेट्रोलियम . तथा ओएनजीसी में पुरे विश्व में प्रति लीटर मार्जिन : प्रति कर्मचारी खर्च [ सेलेरी ] का अनुपात बहुत जयादा है ..

हर तेल कंप

नी का 58 % केवल कर्मचारियो पर ही खर्च है .

दूसरे देशो के मुकाबले भारत में पेट्रोल के दाम

पाकिस्तान 26 /लीटर
बांगला देश 22 /लीटर
कुबा 19 /लीटर
नेपाल 34 /

लीटर
बर्मा जैसे देश में 30 /लीटर
अफगानिस्तान में 36 /लीटर

और अपने भारत में प्रति लीटर पेट्रोल औसत 72 रुपये प्रति लीटर

Posted By KanpurpatrikaFriday, November 04, 2011

Saturday, October 1, 2011

शिव हरे

ब्रह्ममुरारिसुरार्चित लिगं निर्मलभाषितशोभित लिंग |
जन्मजदुःखविनाशक लिंग तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥१

मैं उन सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ जिनकी ब्रह्मा, विष्णु एवं देवताओं द्वारा अर्चना की जाति है, जो सदैव निर्मल भाषाओं द्वारा पुजित हैं तथा जो लिंग जन्म-मृत्यू के चक्र का विनाश करता है (मोक्ष प्रदान करता है)

देवमुनिप्रवरार्चित लिंगं, कामदहं करुणाकर लिंगं|
रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥२

देवताओं और मुनियों द्वारा पुजित लिंग, जो काम का दमन करता है तथा करूणामयं शिव का स्वरूप है, जिसने रावण के अभिमान का भी नाश किया, उन सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

सर्वसुगंन्धिसुलेपित लिंगं, बुद्धिविवर्धनकारण लिंगं|
सिद्धसुरासुरवन्दित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥३

सभी प्रकार के सुगंधित पदार्थों द्वारा सुलेपित लिंग, जो कि बुद्धि का विकास करने वाल है तथा, सिद्ध- सुर (देवताओं) एवं असुरों सबों के लिए वन्दित है, उन सदाशिव लिंक को प्रणाम।

कनकमहामणिभूषित लिंगं, फणिपतिवेष्टितशोभित लिंगं|
दक्षसुयज्ञविनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥४

स्वर्ण एवं महामणियों से विभूषित, एवं सर्पों के स्वामी से शोभित सदाशिव लिंग जो कि दक्ष के यज्ञ का विनाश करने वाल है ; आपको प्रणाम।

कुंकुमचंदनलेपित लिंगं, पंङ्कजहारसुशोभित लिंगं|
संञ्चितपापविनाशिन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥५

कुंकुम एवं चन्दन से शोभायमान, कमल हार से शोभायमान सदाशिव लिंग जो कि सारे संञ्चित पापों से मुक्ति प्रदान करने वाला है, उन सदाशिव लिंग को प्रणाम

देवगणार्चितसेवित लिंग, भवैर्भक्तिभिरेवच लिंगं|
दिनकरकोटिप्रभाकर लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥६

आप सदाशिव लिंग को प्रणाम जो कि सभी देवों एवं गणों द्वारा शुद्ध विचार एवं भावों द्वारा पुजित है तथा जो करोडों सूर्य सामान प्रकाशित हैं।

अष्टदलोपरिवेष्टित लिंगं, सर्वसमुद्भवकारण लिंगं|
अष्टदरिद्रविनाशित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥७

आठों दलों में मान्य, एवं आठों प्रकार के दरिद्रता का नाश करने वाले सदाशिव लिंग सभी प्रकार के सृजन के परम कारण हैंआप सदाशिव लिंग को प्रणाम।

सुरगुरूसुरवरपूजित लिंगं, सुरवनपुष्पसदार्चित लिंगं|
परात्परं परमात्मक लिंगं, ततप्रणमामि सदाशिव लिंगं||

दवताओं एवं देव गुरू द्वारा स्वर्ग के वाटिका के पुष्पों से पुजित परमात्मा स्वरूप जो कि सभी व्याख्याओं से परे हैउन सदाशिव लिंग को प्रणाम।

Posted By KanpurpatrikaSaturday, October 01, 2011

Thursday, September 8, 2011

तू मचलता क्यों नहीं

ऐ थके हारे समंदर तू मचलता क्यों नहीं

तू उछलता क्यों नहीं .

साहिलों को तोड़ के बाहर निकलता क्यों नहीं


तू मचलता क्यों नहीं
तू उछलता क्यों नहीं

तेरे साहिल पर सितम की बस्तियाँ आबाद हैं,


शहर के मेमार* सारे खानमाँ-बरबाद* हैं


ऐसी काली बस्तियों को तू निगलता क्यों नहीं

तू मचलता क्यों नहीं


तू उछलता क्यों नहीं

तुझ में लहरें हैं न मौज न शोर..


जुल्म से बेजार दुनिया देखती है तेरी ओर


तू उबलता क्यों नहीं

तू मचलता क्यों नहीं


तू उछलता क्यों नहीं

ऐ थके हारे समंदर

तू मचलता क्यों नहीं


तू उछलता क्यों नहीं



एक लम्हा


जिन्दगी नाम है कुछ लम्हों का..

और उन में भी वही एक लम्हा


जिसमे दो बोलती आँखें


चाय की प्याली से जब उठे


तो दिल में डूबें


डूब के दिल में कहें


आज तुम कुछ न कहो


आज मैं कुछ न कहूँ


बस युहीं बैठे रहो


हाथ में हाथ लिए


गम की सौगात लिए..


गर्मी-ए जज़्बात लिए..


कौन जाने कि इस लम्हे में


दूर परबत पे कहीं


बर्फ पिघलने ही लगे..


Posted By KanpurpatrikaThursday, September 08, 2011

दायरा


दायरा



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रोज बढ़ता हूँ जहाँ से आगे
फिर वहीँ लौट के आ जाता हूँ
बारहा तोड़ चूका हूँ जिनको
उन्ही दीवारों से टकराता हूँ..
रोज बसते हैं कई शहर नए
रोज धरती में समा जाते हैं .
जलजलों में थी जरा सी गर्मी
वो भी अब रोज ही आ जाते हैं..
जिस्म से रूह तलक रेत ही रेत
न कहीं धुप,न साया, न *सराब
कितने अरमान हैं किस सहरा में
कौन रखता है मजारों का हिसाब
नब्ज बुझती भी, भड़कती भी है
दिल का मामुल है घबराना भी
रात अँधेरे ने अँधेरे से कहा
एक आदत है जिए जाना भी
*कौस एक रंग की होती है *तुलूअ
एक ही चाल भी पैमाने की
गोशे गोशे में खड़ी है मस्जिद
शक्ल क्या हो गयी मैखाने की..

Posted By KanpurpatrikaThursday, September 08, 2011