Friday, November 4, 2011

तेल के खेल में सरकार आउट


तेल के खेल में सरकार आउट

किसी भी उत्पाद के दाम तब ही बडते है जब उत्पाद का नया प्रिंट बाज़ार में आता है ऐसा कभी नहीं होता है और न ही कोई कर सकता है की पुराने प्रिंटेड दाम पर नई कीमत ले ले ..लेकिन एक बात नहीं समझ में आती की पेट्रोल और डीजल के दाम आदेश आने दिन के रात 12 बजे के बाद बड़ा दिए जाते है /

या ऐसा होता होगा एक टैकर पेट्रोल अगर एक पेट्रोल पम्प मालिक 65 रुपए प्रति लीटर के दर पर खरीदता है और दूसरे दिन अगर सरकार रेट बड़ा देती है तो जहा से टैंकर आया है वहा का एक प्रतिनिधि आता है और रात 12 बजे के बाद पेट्रोल पम्प के टैंक में जितना पेट्रोल होता है उसको नापता है और जितना बचा होता है उसपर बड़े हुए दाम लेकर चला जाता है .... लेकिन ऐसा नहीं होता है ...

या फिर ऐसा होता होगा की जितना पेट्रोल बचा है उस पर जो भी मुनाफा होगा उस पर आधा आधा ऐसा भी नहीं होता है .. फिर क्या होता है

होता ये है की आम जनता जो एक मदारी के इशारो पर नाचती या या एक माता पिता अपने बच्चो को जैसे फुसलाते है वैसे ही सरकार महेंगाई का रोना रो कर आम जनता से पैसे वसूल लेती है लेकिन ये आम जनता या आम आदमी जो कभी दिखाई नहीं दिया तो विरोध कैसे करेगा ...हा ऐसा जरुर होता है की भारतीय तेल कंपनिया विदेशो से प्रति बैरेल 90 डालर ( प्रति लीटर 25 रुपया ) के हिसाब से खरीदती है और फिर सारे मुनाफे निकलने के बाद घटा जोड़ा जाता है और उस घाटे का बोझा पहले राज्य सरकार के ऊपर फिर राज्य सरकार उस घाटे को अपने सर से हटा कर आम जनता के ऊपर ड़ाल देती है .../

अब आम जनता का खून तेल माफिया के खिलाडी जूस समझ कर पीते है .../

जब साल में एक बार बजट पारित होता है और सारे उत्पादों पर टैक्स और सारी चीजे निर्धारित हो जाती है तो फिर पेट्रोल रसोई गैस और डीज़ल में ऐसा क्या होता है की हर दो से तीन महीने में दाम बड़ा दिए जाते है ...कही तेल का खेल खेल रहे माफियो का शैतानी दिमाग तो नहीं जो या कांग्रेस सरकार अब तक के सबसे बड़े घोटाले तेल घोटाले में फस रही है ...

एक प्राइवेट नौकरी करने वाला व्यक्ति को महीने में दो हज़ार से पांच हज़ार रूपये महीने से ज्यादा नहीं मिलता और वाहन खर्च के रूप में एक हज़ार से 1500 सौ रूपये ही मिलते है जो कभी साल भर में या फिर दो से तीन साल में एक बार ही बढते है .. लेकिन सरकार ये क्योँ नहीं समझती है की हर दो से तीन महीने में दाम बढ़ाने से जनता को क्या फर्क पड़ेगा शायद इसलिए की सभी सरकारी खर्च पर चलते है ...लेकिन प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारी के मालिक ह दो से तीन महीने में सेलरी नहीं बढ़ाते है ...लेकिन जो बढ़ाते है वो होता है दूध वाला सब्जी वाला स्कूल बस वाला सभी अपने अपने अपने उत्पाद में एक से पांच रुपये बढ़ा देते है .../यानि वही आम आदमी के घर का बज़ट बिगड़ जाता है और वो हर महीने गिर कर संभालता है और एक अतिरक्त बढ़ोतरी उसके ऊपर लाद दी जाती है ...वो एक के बाद एक दर्द को संभालता हुआ खड़ा होता है और जीने को मजबूर है ...

अब एक नज़र आकड़ो पर ..

आकडे बताते है की वर्ष 2011 में ही कुल पेट्रोल के दाम 13 रूपये बड़े है

जनवरी 2011 से पहले पेट्रोल के दाम ...59.37/ लीटर

जनवरी 2011 में 15 जनवरी तीन रूपये बढकर 62.05/लीटर

और ठीक तीन महीने बाद 15मई पांच रूपये बढकर 67.30 /लीटर

फिर एक बार दो महीने बाद एक जुलाई .30 पैसा बढकर 67.30 /लीटर

फिर ठीक डेड़ महीने बाद 16 सितम्बर को तीन रूपये बढकर 70.93 /लीटर

और अंत में में फिर डेड़ महीने बाद तीन नवम्बर को 2 रूपये बड़ा कर 72.83 / लीटर

यानि एक सा में प्रत्येक डेड से तीन महीने में दो से पांच रूपये तक बडाये गए ...

अब अगर यही आकडे का अनुमान 2012 में लगाय जाय तो

जनवरी 2012 से पहले पेट्रोल के दाम ...72.83 / लीटर

जनवरी 2012 में दो रूपये बढकर 74.83/लीटर

और ठीक तीन महीने बाद मई 1.00 रूपये बढकर 75.83 /लीटर

फिर एक बार दो महीने बाद एक जुलाई 1.50 पैसा बढकर 77.33 /लीटर

फिर ठीक डेड महीने बाद सितम्बर को पांच रूपये बढकर 82.33 /लीटर

और अंत में में फिर डेड महीने बाद नवम्बर को 2.97 रूपये बड़ा कर 85 .50 / लीटर

अब अगर यही हाल रहा तो पार्टी वर्ष 10 रूपये के हिसाब से अगर बड़े तो वर्ष२०१४ तक पेट्रोल 105 /लीटर में बिकेगा

2010 में............ 59 .37 /लीटर

2011 में............... 72 .83 /लीटर

2012 में .............. 85 .50 /लीटर

2013 में.............. 95 .82 /लीटर

2014 में.............. 105 .20 /लीटर ( पेट्रोल के दाम उत्तर प्रदेश से लिए गए है )

यानि सरकार का कार्यकाल ख़त्म होते होते पेट्रोल के दाम 105 रूपये /लीटर हो जायेंगे और रसोई गैस 600 /सिलेंडर ....

क्या अब एक आवाज़ नहीं उठानी चहिये की सालन बज़ात के साथ ही पेट्रोल की कीमत में पांच से दस रूपये ही बढ़ाये जाय नाकि हर महीने या दो महीने जब सरकार का मन चाहे .../और हमे हर महीने में अपने घर के बज़ट का रोना रोना पडे ...

एक ओर देश तरक्की कर रहा है और दूसरी ओर उसी देश की जानत खुदखुशी कर रही है ....

आज सरकार अपना बखान करने में अपनी सरकार

की उपलब्धिया गिनाने में करोडो खर्च कर देती है

लेकिन उसी देश की जनता के पास इतने पैसे भी

नहीं है वो आत्महत्या भी कर सके बात कानपुर

की है जहा एक बेरोजगार युवक और आर्थिक तंगी

से परेशान युवक ने पहले पत्नी का गला दबाया और

फिर डेड़ साल के बच्चे का और फिर अपनी पुरानी

लुंगी से फासी लगाई लेकिन उसकी किस्मत ख़राब

थी की लुंगी पुरानी थी सो फट गई और वो बच गया

फिर रात भ लाशो के पास रोता रहा ...ये तो एक

बानगी है न जाने कितनी मौते रोज़ देश में हो रही है

और देश लोकपाल और जनलोक पाल की की लड़ाई

देख रहा है फार्मूला वन पर अरबो खर्च कर सरकार से से सहायता मांग रहे है ... ऐसा देश है मेरा ....

तेल की कीमतों पर कांग्रेस और सरकार कब तक जनता को मुर्ख बनायेंगे ??

हर एक डिबेट में कांग्रेस के नेता तेल की कीमतों के बढ़ोतरी को जायज ठहराते है और सरकार को हो रहे नुकसान का रोना रोते है .. लेकिन सरकार और कांग्रेस कब तक जनता को मुर्ख समझेगी ?

आज कच्चे तेल की कीमत है 90 डॉलर प्रति बैरेल

यानि 25.50 रूपये प्रति लीटर

एक लीटर कच्चे तेल को रिफाइन करने का खर्च है .20 पैसे .

यानि सरका

को एक लीटर पेट्रोल की लगत आयी रूपये - 25.70

अब असली खेल यहाँ से शुरू होता है ..

सरकार कच्चे तेल पर 17 % इम्पोर्ट ड्यूटी लेती है . [केंद्र सरकार के खाते में जाता है ]

25.70 का 17 % = 30.06

13 % उत्पाद

कर [एक्साइज ] [केंद्र सरकार के खाते में जाता है ]

30.06 + 13% = 34

पोर्ट टैक्स [ तेल के टेंकर से वसूला जाता है ] केन्द्र सरकार

१५०० डॉलर छोटे टेंकर से और २५००० डॉलर बड़े टेंकर से

एक लीटर पर करीब ३ % होगा

34 + 3% =

35.02

8 % रिफाइनरी मार्जिन टैक्स [केंद्र सरकार के खाते में जाता है ]

35.02 +8% = 37.82

8% से 12.5 % तक वैट [ राज्य सरकार ]

37.82+ 12.5% = 42.54

4 % से 8

% तक एडुकेशनल सेस [ राज्य सरकार ]

42.54+8% = ४६

(One Barrel of Crude Oil makes 19.5 gallons of Gasoline, which converts to 73.8 liters of petrol/गसोलिने)

यानि सरकार एक लीटर पेट्रोल से २० रूपये पचीस पैसे पहले ही कमा लेती है .

फिर भी आज

पेट्रोल ७३ रूपये में बिक रहा है ..

असल में भारत में जो सरकारी तेल कम्पनिया है उनमे बहुत ही भ्रष्टाचार है ..

भारत पेर्टोलियम, इंडियन आयल , हिंदुस्तान पेट्रोलियम . तथा ओएनजीसी में पुरे विश्व में प्रति लीटर मार्जिन : प्रति कर्मचारी खर्च [ सेलेरी ] का अनुपात बहुत जयादा है ..

हर तेल कंप

नी का 58 % केवल कर्मचारियो पर ही खर्च है .

दूसरे देशो के मुकाबले भारत में पेट्रोल के दाम

पाकिस्तान 26 /लीटर
बांगला देश 22 /लीटर
कुबा 19 /लीटर
नेपाल 34 /

लीटर
बर्मा जैसे देश में 30 /लीटर
अफगानिस्तान में 36 /लीटर

और अपने भारत में प्रति लीटर पेट्रोल औसत 72 रुपये प्रति लीटर

Posted By KanpurpatrikaFriday, November 04, 2011

Saturday, October 1, 2011

शिव हरे

ब्रह्ममुरारिसुरार्चित लिगं निर्मलभाषितशोभित लिंग |
जन्मजदुःखविनाशक लिंग तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥१

मैं उन सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ जिनकी ब्रह्मा, विष्णु एवं देवताओं द्वारा अर्चना की जाति है, जो सदैव निर्मल भाषाओं द्वारा पुजित हैं तथा जो लिंग जन्म-मृत्यू के चक्र का विनाश करता है (मोक्ष प्रदान करता है)

देवमुनिप्रवरार्चित लिंगं, कामदहं करुणाकर लिंगं|
रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥२

देवताओं और मुनियों द्वारा पुजित लिंग, जो काम का दमन करता है तथा करूणामयं शिव का स्वरूप है, जिसने रावण के अभिमान का भी नाश किया, उन सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

सर्वसुगंन्धिसुलेपित लिंगं, बुद्धिविवर्धनकारण लिंगं|
सिद्धसुरासुरवन्दित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥३

सभी प्रकार के सुगंधित पदार्थों द्वारा सुलेपित लिंग, जो कि बुद्धि का विकास करने वाल है तथा, सिद्ध- सुर (देवताओं) एवं असुरों सबों के लिए वन्दित है, उन सदाशिव लिंक को प्रणाम।

कनकमहामणिभूषित लिंगं, फणिपतिवेष्टितशोभित लिंगं|
दक्षसुयज्ञविनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥४

स्वर्ण एवं महामणियों से विभूषित, एवं सर्पों के स्वामी से शोभित सदाशिव लिंग जो कि दक्ष के यज्ञ का विनाश करने वाल है ; आपको प्रणाम।

कुंकुमचंदनलेपित लिंगं, पंङ्कजहारसुशोभित लिंगं|
संञ्चितपापविनाशिन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥५

कुंकुम एवं चन्दन से शोभायमान, कमल हार से शोभायमान सदाशिव लिंग जो कि सारे संञ्चित पापों से मुक्ति प्रदान करने वाला है, उन सदाशिव लिंग को प्रणाम

देवगणार्चितसेवित लिंग, भवैर्भक्तिभिरेवच लिंगं|
दिनकरकोटिप्रभाकर लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥६

आप सदाशिव लिंग को प्रणाम जो कि सभी देवों एवं गणों द्वारा शुद्ध विचार एवं भावों द्वारा पुजित है तथा जो करोडों सूर्य सामान प्रकाशित हैं।

अष्टदलोपरिवेष्टित लिंगं, सर्वसमुद्भवकारण लिंगं|
अष्टदरिद्रविनाशित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥७

आठों दलों में मान्य, एवं आठों प्रकार के दरिद्रता का नाश करने वाले सदाशिव लिंग सभी प्रकार के सृजन के परम कारण हैंआप सदाशिव लिंग को प्रणाम।

सुरगुरूसुरवरपूजित लिंगं, सुरवनपुष्पसदार्चित लिंगं|
परात्परं परमात्मक लिंगं, ततप्रणमामि सदाशिव लिंगं||

दवताओं एवं देव गुरू द्वारा स्वर्ग के वाटिका के पुष्पों से पुजित परमात्मा स्वरूप जो कि सभी व्याख्याओं से परे हैउन सदाशिव लिंग को प्रणाम।

Posted By KanpurpatrikaSaturday, October 01, 2011

Thursday, September 8, 2011

तू मचलता क्यों नहीं

ऐ थके हारे समंदर तू मचलता क्यों नहीं

तू उछलता क्यों नहीं .

साहिलों को तोड़ के बाहर निकलता क्यों नहीं


तू मचलता क्यों नहीं
तू उछलता क्यों नहीं

तेरे साहिल पर सितम की बस्तियाँ आबाद हैं,


शहर के मेमार* सारे खानमाँ-बरबाद* हैं


ऐसी काली बस्तियों को तू निगलता क्यों नहीं

तू मचलता क्यों नहीं


तू उछलता क्यों नहीं

तुझ में लहरें हैं न मौज न शोर..


जुल्म से बेजार दुनिया देखती है तेरी ओर


तू उबलता क्यों नहीं

तू मचलता क्यों नहीं


तू उछलता क्यों नहीं

ऐ थके हारे समंदर

तू मचलता क्यों नहीं


तू उछलता क्यों नहीं



एक लम्हा


जिन्दगी नाम है कुछ लम्हों का..

और उन में भी वही एक लम्हा


जिसमे दो बोलती आँखें


चाय की प्याली से जब उठे


तो दिल में डूबें


डूब के दिल में कहें


आज तुम कुछ न कहो


आज मैं कुछ न कहूँ


बस युहीं बैठे रहो


हाथ में हाथ लिए


गम की सौगात लिए..


गर्मी-ए जज़्बात लिए..


कौन जाने कि इस लम्हे में


दूर परबत पे कहीं


बर्फ पिघलने ही लगे..


Posted By KanpurpatrikaThursday, September 08, 2011

दायरा


दायरा



_____________________

रोज बढ़ता हूँ जहाँ से आगे
फिर वहीँ लौट के आ जाता हूँ
बारहा तोड़ चूका हूँ जिनको
उन्ही दीवारों से टकराता हूँ..
रोज बसते हैं कई शहर नए
रोज धरती में समा जाते हैं .
जलजलों में थी जरा सी गर्मी
वो भी अब रोज ही आ जाते हैं..
जिस्म से रूह तलक रेत ही रेत
न कहीं धुप,न साया, न *सराब
कितने अरमान हैं किस सहरा में
कौन रखता है मजारों का हिसाब
नब्ज बुझती भी, भड़कती भी है
दिल का मामुल है घबराना भी
रात अँधेरे ने अँधेरे से कहा
एक आदत है जिए जाना भी
*कौस एक रंग की होती है *तुलूअ
एक ही चाल भी पैमाने की
गोशे गोशे में खड़ी है मस्जिद
शक्ल क्या हो गयी मैखाने की..

Posted By KanpurpatrikaThursday, September 08, 2011

Thursday, August 18, 2011

जाने अन्ना के बारे में


जाने अन्ना के बारे में

आरंभिक जीवन

अन्ना हजारे का जन्म 15 जून, 1938 को महाराष्ट्र">महाराष्ट्र के अहमद नगर (पृष्ठ मौजूद नहीं है)">अहमद नगर के भिंगारी गांव के एक किसान परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम बाबूराव हज़ारे और मां का नाम लक्ष्मीबाई हजारे है। [1] उनका बचपन बहुत गरीबी में गुजरा। पिता मजदूर थे। दादा फौज में। दादा की पोस्टिंग भिंगनगर में थी। वैसे अन्ना के पुरखों का गांव अहमद नगर जिले में ही स्थित रालेगन सिद्धि में था। दादा की मौत के सात साल बाद अन्ना का परिवार रालेगन आ गया। अन्ना के छह भाई हैं। परिवार में तंगी का आलम देखकर अन्ना की बुआ उन्हें मुम्बई ले गईं। वहां उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की। परिवार पर कष्टों का बोझ देखकर वह दादर स्टेशन के बाहर एक फूल बेचनेवाले की दुकान में 40 रुपये की पगार में काम करने लगे। इसके बाद उन्होंने फूलों की अपनी दुकान खोल ली और अपने दो भाइयों को भी रालेगन से बुला लिया।

व्यवसाय

वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद सरकार की युवाओं से सेना में शामिल होने की अपील पर अन्ना 1963 में सेना की मराठा रेजीमेंट में ड्राइवर के रूप में भर्ती हो गए। उनका पहला पदस्थापन पंजाब में हुआ। 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अन्ना हज़ारे खेमकरण सीमा पर तैनात थे। 12 नवंबर 1965 को चौकी पर पाकिस्तानी हवाई बमबारी में वहां तैनात सारे सैनिक मारे गए।[2] इस घटना ने अन्ना की ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। इसके बाद उन्होंने सेना में १३ और वर्षों तक काम किया। उनका पदस्थापन मुंबई और कश्मीर में भी हुआ। १९७५ में जम्मू पदस्थापन के दौरान सेना में सेवा के १५ वर्ष पूरे होने पर उन्होंने स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले ली। वे पास के रालेगांव सिद्धि में रहने लगे और इसी को अपनी सामाजिक कर्मस्थली बना लिया।

सामाजिक कार्य

१९६५ के युद्ध में मौत से साक्षात्कार के बाद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उन्होंने विवेकानंद की एक बुकलेट 'कॉल टु दि यूथ फॉर नेशन' देखा और खरीद लिया। इसे पढ़कर उनके मन में भी अपना जीवन समाज को समर्पित करने की इच्छा बलवती हो गई। उन्होंने गांधी और विनोबा की भी पुस्तकें पढ़ी। 1970 में उन्होंने आजीवन अविवाहित रहकर स्वयं को सामाजिक कार्यों के लिए पूर्णतः समर्पित कर देने का संकल्प कर लिया।

रालेगांव सिद्धि

मुम्बई पदस्थापन के दौरान वह अपने गांव रालेगन आते-जाते रहे। वे वहाँ चट्टान पर बैठकर गांव को सुधारने की बात सोचा करते थे। १९७५ में स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर रालेगाँव आकर उन्होंने अपना सामाजिक कार्य प्रारंभ कर दिया। इस गांव में बिजली और पानी की ज़बरदस्त कमी थी। अन्ना ने गांव वालों को नहर बनाने और गड्ढे खोदकर बारिश का पानी इकट्ठा करने के लिए प्रेरित किया और ख़ुद भी इसमें योगदान दिया। अन्ना के कहने पर गांव में जगह-जगह पेड़ लगाए गए। गांव में सौर ऊर्जा और गोबर गैस के जरिए बिजली की सप्लाई की गई।[3] उन्होंने अपनी ज़मीन बच्चों के हॉस्टल के लिए दान कर दी और अपनी पेंशन का सारा पैसा गांव के विकास के लिए समर्पित कर दिया। वे गांव के मंदिर में रहते हैं और हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के लिए बनने वाला खाना ही खाते हैं। आज गांव का हर शख्स आत्मनिर्भर है। आस-पड़ोस के गांवों के लिए भी यहां से चारा, दूध आदि जाता है। गांव में एक तरह का राम राज है।

महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन १९९१

१९९१ में अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा की सरकार के कुछ 'भ्रष्ट' मंत्रियों को हटाए जाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की। ये मंत्री थे- शशिकांत सुतर, महादेव शिवांकर और बबन घोलाप। अन्ना ने उन पर आय से ज़्यादा संपत्ति रखने का आरोप लगाया था। सरकार ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन उसे हारकर दो मंत्रियों सुतर और शिवांकर को हटाना ही पड़ा।[4] घोलाप ने अन्ना के खिलाफ़ मानहानि का मुकदमा कर दिया। अन्ना अपने आरोप के समर्थन में न्यायालय में कोई सबूत पेश नहीं कर पाए और उन्हें तीन महीने की जेल हो गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने उन्हें एक दिन की हिरासत के बाद छोड़ दिया। एक जाँच आयोग ने शशिकांत सुतर और महादेव शिवांकर को निर्दोष बताया। लेकिन अन्ना हज़ारे ने कई शिवसेना और भाजपा नेताओं पर भी भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप लगाए।

सूचना का अधिकार आंदोलन १९९७-२००५

1997 में अन्ना हज़ारे ने सूचना के अधिकार क़ानून के समर्थन में मुंबई के आजाद मैदान से अपना अभियान शुरु किया। 9 अगस्त, 2003 को मुंबई के आजाद मैदान में ही अन्ना हजारे आमरण अनशन पर बैठ गए। 12 दिन तक चले आमरण अनशन के दौरान अन्ना हजारे और सूचना के अधिकार आंदोलन को देशव्यापी समर्थन मिला। आख़िरकार 2003 में ही महाराष्ट्र सरकार को इस क़ानून के एक मज़बूत और कड़े मसौदे को पास करना पड़ा। बाद में इसी आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले लिया। इसके परिणामस्वरूप 12 अक्टूबर 2005 को भारतीय संसद ने भी सूचना का अधिकार अधिनियम पारित किया। [5] अगस्त, 2006 में सूचना के अधिकार में संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ अन्ना ने 11 दिन तक आमरण अनशन किया, जिसे देशभर में समर्थन मिला। इसके परिणामस्वरूप , सरकार ने संशोधन का इरादा बदल दिया।

महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन २००३

2003 में अन्ना ने कांग्रेस और एनसीपी सरकार के चार मंत्रियों-सुरेश दादा जैन, नवाब मलिक, विजय कुमार गावित और पद्मसिंह पाटिल को भ्रष्ट बताकर उनके ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ दी और भूख हड़ताल पर बैठ गए। तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने इसके बाद एक जांच आयोग का गठन किया। नवाब मलिक ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। आयोग ने जब सुरेश जैन के ख़िलाफ़ आरोप तय किए तो उन्हें भी त्यागपत्र देना पड़ा। [6]

लोकपाल विधेयक आंदोलन २०११

देखें मुख्य लेख जन लोकपाल विधेयक आंदोलन" class="mw-redirect">जन लोकपाल विधेयक आंदोलन जन लोकपाल विधेयक">जन लोकपाल विधेयक (नागरिक लोकपाल विधेयक) के निर्माण के लिए जारी यह आंदोलन अपने अखिल भारतीय स्वरूप में ५ अप्रैल २०११ को समाजसेवी अन्ना हजारे" class="mw-redirect">अन्ना हजारे एवं उनके साथियों के जंतर मंतर, दिल्ली">जंतर-मंतर पर शुरु किए गए अनशन के साथ आरंभ हुआ, जिनमें मैग्सेसे पुरस्कार विजेता अरविंद केजरीवाल">अरविंद केजरीवाल, भारत की पहली महिला प्रशासनिक अधिकारी किरण बेदी">किरण बेदी, प्रसिद्ध लोकधर्मी वकील प्रशांत भूषण (पृष्ठ मौजूद नहीं है)">प्रशांत भूषण, पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट">पतंजलि योगपीठ के संस्थापक बाबा रामदेव" class="mw-redirect">बाबा रामदेव आदि शामिल थे। संचार साधनों के प्रभाव के कारण इस अनशन का प्रभाव समूचे भारत में फैल गया और इसके समर्थन में लोग सड़कों पर भी उतरने लगे। इन्होंने भारत सरकार">भारत सरकार से एक मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल विधेयक बनाने की माँग की थी और अपनी माँग के अनुरूप सरकार को लोकपाल बिल का एक मसौदा भी दिया था। किंतु मनमोहन सिंह">मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने इसके प्रति नकारात्मक रवैया दिखाया और इसकी उपेक्षा की। इसके परिणामस्वरूप शुरु हुए अनशन के प्रति भी उनका रवैया उपेक्षा पूर्ण ही रहा। किंतु इस अनशन के आंदोलन का रूप लेने पर भारत सरकार ने आनन-फानन में एक समिति बनाकर संभावित खतरे को टाला और १६ अगस्त तक संसद" class="mw-redirect">संसद में लोकपाल विधेयक पास कराने की बात स्वीकार कर ली। अगस्त से शुरु हुए मानसून सत्र में सरकार ने जो विधेयक प्रस्तुत किया वह कमजोर और जन लोकपाल के सर्वथा विपरीत था। अन्ना हजारे ने इसके खिलाफ अपने पूर्व घोषित तिथि १६ अगस्त से पुनः अनशन पर जाने की बात दुहराई। १६ अगस्त को सुबह साढ़े सात बजे जब वे अनशन पर जाने के लिए तैयारी कर रहे थे, उन्हें दिल्ली पुलिस ने उन्हें घर से ही गिरफ्तार कर लिया। उनके टीम के अन्य लोग भी गिरफ्तार कर लिए गए। इस खबर ने आम जनता को उद्वेलित कर दिया और वह सड़कों पर उतरकर सरकार के इस कदम का अहिंसात्मक प्रतिरोध करने लगी। दिल्ली पुलिस ने अन्ना को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। अन्ना ने रिहा किए जाने पर दिल्ली से बाहर रालेगाँव चले जाने या ३ दिन तक अनशन करने की बात अस्वीकार कर दी। उन्हें ७ दिनों के न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। शाम तक देशव्यापी प्रदर्शनों की खबर ने सरकार को अपना कदम वापस खींचने पर मजबूर कर दिया। दिल्ली पुलिस ने अन्ना को सशर्त रिहा करने का आदेश जारी किया। मगर अन्ना अनशन जारी रखने पर दृढ़ थे। बिना किसी शर्त के अनशन करने की अनुमति तक उन्होंने रिहा होने से इनकार कर दिया। 17 जुला तक देश में अन्ना के समर्थन में प्रदर्शन होता रहा। दिल्ली में तिहाड़ जेल के बाहर हजारों लोग डेरा डाले रहे। 17 अगस्त की शाम तक दिल्ली पुलिस रामलीला मैदान में और 7 दिनों तक अनशन करने की इजाजत देने को तैयार हुई। मगर अनशन ने 30 दिनों से कम अनशन करने की अनुमति लेने से मना कर दिया. उन्होंने जेल में ही अपना अनशन जारी रखा। अन्ना को राम्लीला मैदान मै १५ दिन कि अनुमति मिलि

व्यक्तित्व और विचारधारा

गांधी की विरासत उनकी थाथी है। कद-काठी में वह साधारण ही हैं। सिर पर गांधी टोपी और बदन पर खादी है। आंखों पर मोटा चश्मा है, लेकिन उनको दूर तक दिखता है। इरादे फौलादी और अटल हैं। महात्मा गांधी के बाद अन्ना हजारे ने ही भूख हड़ताल और आमरण अनशन को सबसे ज्यादा बार बतौर हथियार इस्तेमाल किया है। इसके जरिए उन्होंने भ्रष्ट प्रशासन को पद छोड़ने एवं सरकारों को जनहितकारी कानून बनाने पर मजबूर किया है।

अन्ना हजारे गांधीजी के ग्राम स्वराज्य को भारत के गाँवों की समृद्धि का माध्यम मानते हैं। उनका मानना है कि ' बलशाली भारत के लिए गाँवों को अपने पैरों पर खड़ा करना होगा।' उनके अनुसार विकास का लाभ समान रूप से वितरित न हो पाने का कारण रहा गाँवों को केन्द्र में न रखना.

व्यक्ति निर्माण से ग्राम निर्माण और तब स्वाभाविक ही देश निर्माण के गांधीजी के मन्त्र को उन्होंने हकीकत में उतार कर दिखाया, और एक गाँव से आरम्भ उनका यह अभियान आज 85 गावों तक सफलतापूर्वक जारी है। व्यक्ति निर्माण के लिए मूल मन्त्र देते हुए उन्होंने युवाओं में उत्तम चरित्र, शुद्ध आचार-विचार, निष्कलंक जीवन व त्याग की भावना विकसित करने व निर्भयता को आत्मसात कर आम आदमी की सेवा को आदर्श के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया है।

सम्मान

सौरसे :-http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BE_%E0%A4%B9%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%८७

Posted By KanpurpatrikaThursday, August 18, 2011