Sunday, January 16, 2011

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आशीष त्रिपाठी

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आशीष त्रिपाठी ,लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं

गाय और माँ एक ऐसा शब्द जो काफी मिलता जुलता है हम भारतीय गाय को माँ कहते है …गाय की पूजा करते है पैर छूते है और उसका दूध प़ी कर बड़े होते

http://mediakhabar.com/index.php/media-khabar/appointments/1485-jitendra-dubey-tv-100.हटमल
जीतेन्द्र दूबे जो की 6 महीने पहले टीवी 100 न्यूज़ में बतौर यूपी ब्यूरो रह चुके है और बाद में उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया गया . लेकिन अब उन्हें दुबारा ले लिया गया है और ये कहा जा रहा है की प्रबंध तंत्र ने उनकी कार्य कुशलता को देखते हुए उनकी वापसी की है. उनका कद बढ़ाते हुए उन्हे न्यूज़ को आर्डिनेटर बना दिया गया है.जीतेन्द्र दूबे जिस समय टीवी 100 में बतौर ब्यूरो थे उस समय टीवी 100 को अपनी कार्यक्षमता से अलग पहचान दिलाई थी।
http://www.thenews24x7.com/news-in-hindi/newsinhindi9/8938-2011-04-22-12-52-०१
http://www.youtube.com/user/shafali1245#p/a/u/1/T5uiwCUc4_o
http://www.youtube.com/user/shafali1245#p/a/u/0/Ymaq8AD-kcE
http://www.youtube.com/user/shafali1245#p/a/u/2/v58g_qm_OMo

Posted By KanpurpatrikaSunday, January 16, 2011

Tuesday, December 28, 2010

कुंडली में बाधक ग्रह: पहचान, प्रभाव और अचूक निवारण

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कुंडली में बाधक ग्रह: पहचान, प्रभाव और अचूक निवारण

ज्योतिष शास्त्र में कई बार ग्रह उच्च या शुभ भाव में होने के बावजूद अपेक्षित फल नहीं देते। इसका एक मुख्य कारण उस ग्रह का 'बाधक' होना हो सकता है। बाधक ग्रह वह है जो कार्यों में अदृश्य अड़चनें, बीमारी और मानसिक क्लेश उत्पन्न करता है।

1. कैसे पहचानें अपना बाधक ग्रह?

बाधक ग्रह का निर्धारण आपकी लग्न राशि की प्रकृति के आधार पर होता है:

लग्न का प्रकार

राशियाँ (नंबर)

बाधक भाव

बाधक ग्रह (उदाहरण)

चर लग्न

1, 4, 7, 10

11वाँ भाव

मेष लग्न के लिए शनि

स्थिर लग्न

2, 5, 8, 11

9वाँ भाव

वृष लग्न के लिए शनि

द्विस्वभाव लग्न

3, 6, 9, 12

7वाँ भाव

मिथुन लग्न के लिए गुरु

विशेष तर्क: बाधक ग्रह तब अधिक घातक हो जाता है जब वह 6वें, 8वें या 12वें भाव के स्वामी (दुस्थानेश) के साथ संबंध बनाए। यदि बाधक ग्रह केंद्र या त्रिकोण में हो, तो वह अपनी बाधा डालने की शक्ति (Chesta Bala) में अधिक बलवान होता है।


2. विशेष तांत्रिक उपाय: 108 ग्राम दही का मिश्रण

भगवान शिव 'काल के भी काल' हैं, इसलिए ग्रहों की बाधा दूर करने के लिए अभिषेक विधि सर्वोत्तम है। यहाँ दी गई 108 ग्राम की विधि गणितीय और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है।

विधि की तैयारी:

·         कुल 108 ग्राम दही लें।

·         संबंधित बाधक ग्रह की सामग्री को दही में मिलाएं (ध्यान रहे कुल वजन 108 ग्राम से अधिक न हो)।

·         यह उपाय संबंधित ग्रह के वार को और उसी ग्रह की होरा (Hora) में करना अनिवार्य है।

पूजन प्रक्रिया (त्रि-अभिषेक विधि):

1.      प्रथम चरण: दही का एक तिहाई भाग शिवलिंग पर अर्पित करें, फिर गंगाजल से स्नान कराएं।

2.      द्वितीय चरण: पुनः दूसरा भाग अर्पित करें और गंगाजल से शुद्ध करें।

3.      तृतीय चरण: अंतिम भाग अर्पित कर पूर्ण स्नान कराएं।

अभिषेक के दौरान बाधक दोष दूर करने की प्रार्थना मन ही मन दोहराते रहें।


3. ग्रह अनुसार सामग्री एवं पुष्प तालिका

ग्रह

दही में मिलाने वाली वस्तु

अर्पित किए जाने वाले पुष्प (12 संख्या)

सूर्य

जावित्री चूर्ण

लाल पुष्प (गुड़हल/गुलाब)

चन्द्र

केवल शुद्ध दही

सफेद पुष्प (चांदनी/मोगरा)

मंगल

शहद

लाल पुष्प

बुध

गाय का घी

हरे पुष्प या बिल्वपत्र

गुरु

केसर और हल्दी

पीले पुष्प (गेंदा)

शुक्र

गुलाब जल

सफेद सुगंधित पुष्प

शनि

सरसों का तेल

नीले/काले पुष्प (अपराजिता)


तार्किक विश्लेषण (Scientific & Logical View):

·         108 की संख्या: ज्योतिष में 27 नक्षत्र और उनके 4 चरण होते हैं ($27 \times 4 = 108$), जो संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करते हैं। 108 ग्राम का माप ब्रह्मांडीय ऊर्जा को संतुलित करने का प्रतीक है।

·         दही का आधार: दही शुक्र और चंद्रमा का कारक है, जो शीतलता और सौम्यता प्रदान करता है। बाधक ग्रह की 'क्रूरता' को शिव तत्व और दही की सौम्यता से शांत किया जाता है।

·         होरा का महत्व: किसी विशेष ग्रह की होरा में किया गया कार्य सीधा उस ग्रह की ऊर्जा चक्र (Energy Cycle) को प्रभावित करता है।


यह उपाय न केवल सरल है, बल्कि बाधक ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मकता में बदलने की क्षमता रखता है। यदि आपकी महादशा या अंतर्दशा कष्टकारी चल रही है, तो यह प्रयोग रामबाण सिद्ध हो सकता है।

Posted By KanpurpatrikaTuesday, December 28, 2010