Monday, July 29, 2013

स्वप्न विज्ञान सपने कितने सच्चे कितने झूठे_:

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स्वप्न विज्ञान सपने कितने सच्चे कितने झूठे
स्वप्न अर्थात सपने ... अपने जीवन में सभी अपने सपनो को बुनते है जिनमे कुछ सपने सच हो जाया करते है और कुछ सपने सपने बनकर सपनो में ही आया करते है / कहते है खुली अखो से देखे गय  सपने सच होते है लेकिन कौन होगा जो खुली आँखों  से सपने देखना पसंद नहीं करेगा, सभी चाहते है / सपनो का संसार एक चमत्कारिक संसार तो है ही साथ  में रहस्यमई  भी है / इसे जितना सुलझाया जाता है उससे ज्यादा ये उलझता जाता है /
काफी सोचा, पड़ा और फिर सोचा की आखिर सपने होते क्या है ! कुछ लोगो का  कहना है की सपने वो है जिन्हे हम दिन भर सोचेत है और जो काम करते है वो नींद में सपने बनकर जाते है वही मशहूर मनोवैज्ञानिक सिगमंड फ्रायड के अनुसार सपने हमारी वो अतृप्त इच्छाए है जिन्हे  हम अपने जीवन में सोचते है या  करते  है वो सपने बनकर आते है / सिगमंड फ्रायड ने मनुष्य के मष्तिष्क को बहूत गहरे से पडने की कोशिश की और सपनो पर आधारित उनकी किताब इंशपरेशन  आफ ड्रीम्स काफी लोक प्रिय हुई /
सभी ने कुल मिलाकर   सपनो की जो व्याख्या की वो यही थी की दैनिक जीवन में किये जाने वाले  वो कार्य जो हम सोचते जो मन में रखते है या जो कर चुके है नींद आने पर हमे सपने के रूप में दिखाई देते है / लेकिन अगर इन्हे सपने कहते है तो फिर वो क्या है जो नींद आने पर दिखाई देते है और ठीक वैसे  ही भविष्य  में घटित हो जाता है ! क्या इन्हे स्वप्न  या सपने नहीं कहेंगे  / या फिर बच्चे जन्म लेने   के कुछ महीनो तक अपने आप ही हस्ता है और आपने  आप हो रोने लगते है सोते सोते / जब की उस अवस्था में वो अपनी माँ को भी ठीक तरह से नहीं पहचान  पाते है/ फिर  उस छोटे से बच्चे की कौन  सी अतृप्त इच्छा हो गई या फिर उसने दिन में  कौन सा काम  किया नहीं या कौन सा कार्य उसने सोचा / जबकि उसने ज्यादातर समय तो सोने में बिता दिया होता है / क्या ये भी स्वप्न है या कुछ और ?
अगर वो चीजे हमे नींद आने के बाद आती है जिनकी बारे में हमने कभी देखा पड़ा और ही सोचा  और  वो नींद आने के बाद रही है और  वैसा ही जीवन में घटित हो रहा है तो ये स्वप्न नहीं  है क्या ये पूर्व आभास  है या फिर कुछ और अगर पूर्वाभास है तो ये कैसे संभव है / ये भी एक अबूझ पहेली है  /इस बारे में हमने भी काफी सोचा कई लोगो से बात की और जिसके बाद कुछ तथ्य निकले जो शायद सपनो की दुनिया से कुछ पर्दा हटा सके !
हमारे अनुसार सपने दो प्रकार के होते है या हम सभी ये जानते है की हमे दो प्रकार के सपने आते है 
एक वो जो हम अपने दैनिक जीवन  में जो कार्य या विचार लाते है वो नींद में स्वप्न बनकर आते है
और दुसरे  वो जिन्हे  हम सोचते है और नहीं करते है और किसी किसी संकेत के रूप में सपने में आते है /
इस निष्कर्ष पर स्वप्न दो प्रकार के होते है
सांसारिक स्वप्न और सांकेतिक स्वप्न
सांसारिक स्वप्न वो स्वप्न होते है जो हमे नींद आने के डेड़  से दो घंटे बाद आते है और वो हमारे  विचारो और कार्यो की एक ऐसी टूटीं फूटी कहानी होती है जो कड़ी कड़ी जुड़ कर एक पूरी कहानी बन जाती है और हम स्वप्न में पत्रों को भी अपने अनुसार ही जोड़ लेते है /
सांकेतिक स्वप्न सांकेतिक स्वप्न वो स्वप्न होते है जो की हमे नींद आने के तीन  से चार घंटे के बाद आते है या फिर रात्रि के चौथे पहर में आते है जो हमे हमारे  जीवन या हमारे आस पास घटित हनी  वाली घटनाओं के संकेत  के रूप में आते है / सांकेतिक स्वप्न भी  प्रायः  दो प्रकार के होते है
एक जिन्हे  हम अपने परिवार या अपने जीवन में घटित होने  से पहले  स्वप्न के रूप में देख लेते है /
दुसरे  वो जिन्हे  हम अपने  जीवन में होने  वाली शुभ अशुभ घटनाओ  को भी स्वप्न के माध्यम से देख लेते है ऐसे  स्वप्न  व्यक्ति प्रायः भूल जाता है / जिन्हे पूर्वाभास भी कह सकते है/
इस संसार में आने के बाद एक बात तो निश्चित होती है की हम जो भी कर रहे है या जो भी करेंगे वो पहले से ही पूर्वनियोजित है ! हम सभी एक कहानी के पात्र  के रूप  में आते है और अपना कार्य कर के चले जाते है / अपना चरित्र कहानी से ख़त्म होने  के बाद जीवन के रंग मंच से चले जाते है किसी और कहनी में अभिनय करने के लिए /
इसका मतलब ये है की जब सब कुछ पूर्वनियोजित है तो वो विचार जो हमे आते है वो या तो घट चुके होते है या घटने  वाले होते है / हम वर्तमान में होते है और भूत हमारे पीछे और भविष्य हमारे आगे खड़ा  होता है हम अपने जीवन  में ज्यादा तर   भूत काल में किये गए  कार्यो पर ही विचार या चिंतन करते है / जो हमे सांसारिक स्वप्न के रूप में आते है / और  जो भविष्य के लिए सोच बनाते रहते  है वो सांकेतिक स्वप्न के रूप में सामने आती है /
अब ये ठीक वैसे ही हो सकता है की डाकिया किसी और का पत्र हमारे   पते पर दे जाय  और वो पत्र हम पड़  ले / मतलब किसी और के स्वप्नों की  जो उर्जा तरंगो के रूप में  हम  तक पहुच रहे है किसी और तक पहुचना था लेकिन उन्हे  हमने या हमरी उर्जा तरंगो  ने अपनी  और आकर्षित  कर लिया/ ऐसे संकेत्तिक स्वप्नों में हम येकहते  नज़र आते है की इसका तो मैने सोच ही नहीं था या इस जगह पर मैं कभी आया ही नहीं और वो हमे स्वप्न के रूप में जाते है / हम वही सोचते है वही बोलते है जो पहले  से तय है या पहले हो चूका होता है या होने वाला होता है या हम कुछ  भी लिखते है तो वो भी पहले घट चूका होता है या घटित होने  वाला होता है / हमे जो भी विचार इस संसार में रहे है उर्जा तरंगो के रूप  में और हम उसे कर रहे या लिख रहे है / या काफी बार हुआ है की कई लेखको ने कई कहानिया लिखी और भविष्य  में घटित  हुई / क्या इन्हे भी हम सांकेतिक स्वप्न कह सकते है या खुली अखो से देखे गय  स्वप्न /
अब बात करते  है की स्वप्न के बारे में ही .......
प्रत्येक  मनुष्य जब भी सोता है तो सोने के डेड़  घंटे बाद तक हमारा  मस्तिस्क पूरी तरह से सुप्त अवस्था  मेंचला  जाता है यहाँ तक की हमारा शारीर भी /और इस दौरान ज्यादातर लोगो को कोई स्वप्न नहीं आते है / यदि आता भी है तो  याद नहीं रहता है / इसके बाद दिमाग की थकावट दूर होने  के बाद  दिन भर किये गए  कार्यो  और विचारो को जिसे हमारे मस्तिष्क ने  ग्रहण  किया होता है उन्हे व्यवस्थित तरीके से एकत्रित  करता है और और पूरे दिन भर के घटना क्रम को एक कहानी के रूप में जोड़ कर पत्रों का चयन करता है और फिर चालू होता है सपनो का रंगमंच / ऐसे  सपनो में कभी ऐसा  भी होता है की जब मस्तिष्क  अपने  अनुसार पत्रों का चयन   कर लेता है और जब हम सुबह  उठते है तो आश्चर्य में पड़ जाते है की ये कैसे संभव हुआ / जैसे की स्कूल की प्रधानआचार्य को हम अपने घर में देखते और वो हमारे  साथ हमारे  किसी  ऐसे  रिश्तेदार के घर में पहुच जाते जिनका   उसने कोई लेना देना ही नहीं होता है कभी कुछ और /
 
वैज्ञानिको ने नींद को कुछ इस प्रकार से समझाया है की जिसमे शरीर तो निष्क्रिय हो जाता है लेकिन आंखे गतिशील रहती है जिन्हें वैज्ञानिको ने R .E .M यानि रैपिड आई मोवमेंट / दुसरे  प्रकार के सपने हमे ऐसी स्थित आते है जिनमे आँखों के साथ शारीर भी गति शील हो जाता है जिसमे कई बार व्यक्ति आँखों के साथ शारीर को भी चलाता  है कभी  बोलता भी है और कई बार नींद में चलने भी  लगता है / जिसे एक प्रकार की बीमारी में कहते है,Sleepwalking disorder या (Somnambulism)  / कई बार लोग इस बात पर विश्वास नहीं करते हैं कि नींद में चलते समय भी बच्चा हकीकत में गहरी नींद में ही होता है और उसे अपनी उस स्थिति का अहसास तक नहीं होता क्योंकि नींद में चलते वक्त भी उसकी आँखे खुली रहती हैं, लेकिन चेहरा पूरी तरह सोई हुई स्थित में  रहता है। कई बार तो चलते चलते वो चीजों से टकरा कर घायल भी हो जाता है  नींद में चलते वक्त इसे लोग अपने आस पास हो रही  बातचीत या घटनाओ पर भी ध्यान नहीं दे पाते  है / नींद के प्रारंभिक दो घंटो के मध्य ही नींद में चलने की घटनाएं सबसे आम होती है। नींद में चलने का समय 15 मिनट से लेकर दो घंटे तक का हो सकता है। इस अवस्था में बच्चा तैयार होकर घर से बाहर भी जा सकता है।
इन सब का कारण है की हमारा  शारीर एक Energy  उर्जा से चल रह है तभी कुछ लोगो को कहते भी सुना जा सकता है की मेरे शारीर में अब इतनी Energy  उर्जा नहीं बची है की मैं चल सकू ,इस Energy  उर्जा को   वैज्ञानिको ने भी शोध से पता लगाया है की अगर किसी जीवित व्यक्ति को शीशे के बॉक्स में बंद कर दिया जय और उसकी मृत्यु  के 30  सेकेंड्स के बाद वो शीशे का बॉक्स चटक जायेगा / यानि उस व्यक्ति के शरीर से निकली वो उर्जा ( आत्मा ) उस शीशे को भी तोड़ के पार निकल जाती है / ऐसी उर्जाओ  को अक्सर हम अपने आस पास महसूस कर सकते है जिन्हें  हम भूत या आत्मा  कहते है /
खैर  ये बात दूसरी ओर  की है अब वापस आते है की स्वप्न क्या है सपनो के बारे में हमारे प्राचीन काल के ग्रंथो भी लिखा गया है जिसमे स्वप्न विज्ञान से सम्बंथित रहस्यों  को बताया गया है / जिसमे प्रश्नोउप्निशद में श्लोक  के माध्यम से समझाया गया है की सभी प्राणियो  को स्वप्न आते है फिर वो मनुष्य के अतरिक्त पशु हो पक्षी हो या कोई और / और ऐसा  बताया गया है की ईश्वर  की और से आने वाली तरंगे ही स्वप्न होती है / इसे स्वप्न सांकेतिक होते है जो भविष्य में घटने वाली घटनाओ के बारे में बताते है /अक्सरसाल से 12   और कभी 14  साल कि उम्र तक के बच्चे छत  से या उचाई से गिरने के , किसी के दौड़ने पर दौड़ पाने के .एक दम आसहाय  से होने  वाले स्वप्न देखते रहते है  / ऐसे  स्वप्न उन्हे इस लिए आते है की उन्हे एक अनजाना  सा भय रहता है या विचार होता है जिसे वो किसी  से कह नहीं पाते   है  जो नींद के आने पर ऐसे स्वप्न के रूप में सामने आता है /
अक्सर सीने  पर हाथ रख कर सोने पर कही से भी गिरने या पैर फिसलने जैसे स्वप्न आते जो हमरे हृदय  पर बड़ रहे दबाव के संकेतक होते है जिसमे हम चौक से जाते है /
किसी सोते व्यक्ति के चेहरे पर यदि पानी की कुछ बूंदे डाली जाय  तो उसे बारिश का या नहाने  सम्बंधित स्वप्न आने लगते है /
परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को अक्सर परीक्षा  के छुट जाने के या फेल  हो जाने के स्वप्न आते है / किसी व्यक्ति के शरीर में किसी  गर्म वस्तु को छुलाने  पर उसे आग के या आग से जलने के स्वप्न  आने लगते है /
कभी हम दिन में भी सोते ही स्वप्नों के संसार में खो जाते है है कारन हमारा   दिमाग और शरीर इतनी थकावट महसूस  ही नहीं कर रहा था और हम सपनो में खो जाते है / यदि हम रात्रि में ११  बजे सो जाय  और सुबह   बजे उठे ऐसा  वर्णन हमारे   धर्म ग्रंथो में भी है की सुबह  ब्रम्ह मुहूर्त में उठाना चैचाहिए / तो हमे स्वप्न  नहीं आयेंगे कारन हमारे शरीर और मष्तिष्क  का पूरी तरह से सुप्तअवस्था में चला जाना और और जब वो  सक्रिय  होता है तब तक हम उठ जाते है इसी स्थित में सपने के बराबर आते  है या फिर हम अक्सर भूल जाते है /
सपनो को ज्योतिषयो ने घटित घटनाओ  के आधार पर विश्लेषण करके उनके अर्थ निकाले जिन्हे स्वप्न के शुभ  और अशुभ विचार कहा जाता है /
जैसे की अगर  रात्रि  के प्रथम प्रहर में देखे गय  सपने का शुभ और अशुभ फल एक साल के अंदर मिलता है /
रात्रि के दुसरे प्रहर में देखे  गय स्वप्न का शुभ और अशुभ फल आठ  महीने  में /
रात्रि के तीसरे प्रहर में देखे गय स्वप्न का शुभ और अशुभ फल तीन महीने में /
रात्रि के चौथे  प्रहर में देखे गय स्वप्न  का शुभ और अशुभ फल एक महीने में / और भोर के समय देखे गय  स्वप्न का फल एक माह में  मिलने का विचार ज्योतिष विद्या करती है या ज्योतिषी करते है /
इन सब बातो से निष्कर्ष यही निकलता है की स्वप्न विज्ञान एक अबूझ  पहेली है  जिसको सुलझाने  पर ये उलझती ही जाती है जिसको सालो से खोज जा रहा है और खो जा जाता रहेगा /
शिव बिना शरीर  है ही नहीं  जय शिव

                                      

Posted By KanpurpatrikaMonday, July 29, 2013

Friday, July 26, 2013

क्या है प्यार ?

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क्या है प्यार ?

आज की २१ सदी में प्यार होना लडके और लड़की के बीच में आम बात  है लेकिन ये आम बात कभी कभी दो ज़िन्दगियो और कई परिवारों और पीदियो की दुश्मनी और जान लेने का कारण तक  बन जाती है /कभी दोस्त कभी फ्रेंड तो कभी घर के रिश्तेदार से ही हो जाता है प्यार क्यों ?
क्या प्यार कोई दवा है या कोई दुआ है क्या है ये प्यार ?
और क्यों हो जाता है हमे किसी और से प्यार /
आज के समय में लडके लड़कियों को एक दुसरे तीसरे और चौथे  और न जाने  कितनो से दिन महीनो और सालो के हिसाब से प्यार हो जाता है /
प्यार करने वाले बदलते रहते है क्यों ?
प्यार न दिखाई पड़ता है न ही उसे हम  है छू सकते है न ही हवा और खुशबू की तरह उसकी सुगन्ध महसूस कर सकते है \
बस यु ही प्यार हो जाता है किसी ने कहा  है की इश्क यानि प्यार और मुश्क यानि खुशबु छुपाए नही छुपते , तो ये दिखाई भी कैसे  पड़ते  है ,कोई कहता है की शैतानी आँखों की और गलती दिमाग  सज़ा बेचारे दिल को भुगतनी पड़ती है /तो कोई कहता है की इश्क और गम एक ही सिक्के के दो पहलू है जिसको उछालने पर कई चक्कर घुमाने के बाद  हमेशा गम ही हाथ में आता है /ये गम जहा आंशुओ के रूप में गुमशुम निगाहों के रूप  में दिखाई पड़ जाता है वही प्यार आँखों की चहल कदमी  और चेहरे की ख़ुशी से मालूम पड़ जाता है ./
लेकिन ऐसा  क्या होता है की जन्म देनी वाले माँ पिता से ज्यादा कोई और अच्छा  लगने लगता है उनके प्यार देने के बाद हमे किसी और का प्यार ज्यादा अच्छा लगने लगता है /अपने बच्चो की प्रत्येक जरूत को पूरा करने के बाद भी चलना। और बोलना खाना खिलाना सिखाने  के बाद भी बच्चे अपने मम्मी पापा के प्यार को  भुला देते है और चन्द  दिनों के प्यार में उनको प्यार के देवता नज़र आते है  /
आखिर माता पिता के प्यार में कमी  रह गई थी क्या, या फिर उस  लडके या लड़की के प्यार में माँ बाप के प्यार के मुकाबले ज्यादा शक्ति थी /
लेकिन क्या बच्चो की जरूरते को पूरा करना  ही प्यार है ?
क्या अच्छी शिक्षा  दिलवाना प्यार है ?
क्या अच्छे कपडे दिलवाना प्यार है ?
या अच्छी सोसाइटी में रहना प्यार है  नहीं नहीं ये  प्यार नहीं ये तो बच्चो की अवश्यक्ताओ को  पूरा करना है यहाँ प्यार तो है ही नहीं ये तो बच्चो की अवश्यक्ताओ की पूर्ति थी/  उनके कहने और न कहने पर  हर जरोरतजरोरत  को पूरा जरूर किया लेकिन हमने उन्हे जरुरी प्यार तो दिया ही नहीं /
कई लडके लडकियों  से बात करने पर ये बात सामने आई की  वो लड़का  या  लड़की ज्यादा प्यार करते है जिन्हे घर से  कम प्यार मिला या जिनके माता पिता घर पर बच्चो को कम समय देते है / ये प्यार शारीर  में खून  की तरह  ही जरुरी है जब  शरीर में खून की कमी होती है तो  डाक्टर खून चडाने के लिए बोलते है   और हम उसी ब्लड  ग्रुप का खून चडाते है  / लेकिन जब प्यार की शक्ति या उर्जा शरीर में  कम होती है तो वो उर्जा प्यार की हमे बाहर से लेने पड़ती है /जो प्यार का नाम कहलाता है /अब ये कैसे  पता चले की हमारे बच्चे के शरीर  में कितना है और कितना  प्यार  हमने उसे  दिया ये कैसे पता चले इसकी तो कोई मशीन  भी नहीं आती / लेकिन अमेरिका में हुई एक घटना जिसमे  जन्म के एक हफ्ते के बाद  नवजात शिशु की मौत हो जाती  है वेंटी लेटर पर खने के  बाद भी डाक्टर उसे नहीं बचा पाए और उसे मृत घोषित कर दिया लेकिन  उस माँ ने जिसने  जन्म दिया था नहीं  मानी और उसे अपने  सीने से लगा कर इतना प्यार दिया की वो शिशु फिर  से जिन्दा हो गया /  ये डाक्टरों  लिए आश्चर्य की बात थी / लेकिन ये एक चमत्कार था ,क्योंकि ईश्वर भी उस माँ के प्यार के आगे  झुक गया /
प्यार शरीर में खून ,नसों और हड्डियों ,मांस में बहने वाली वो उर्जा है जो हमेशा शरीर को स्वस्थ और हमे खुश  रखती  है ,खून तो शारीर को  बाहर से मजबूत बनाने में मदद करता है  लेकिन प्यार शरीर को अन्दर से मजबूत बनाने में मदद करता है,प्यार एक प्रकार की उर्जा तरंगे होती है जिसकी  जरुरत प्रत्येक  शरीर को होती है /और वो उर्जा तरंगे हमे हमारे अपनों से ज्यादा मिलती  है तब हम अपनों से ज्यादा प्यार करते है और वही उर्जा तरंगे हमे दूसरो  से मिलती है तो हम दूसरो से ज्यादा प्यार करते है /
आज के समय में क्या  है जो बच्चे दूसरो से ज्यादा प्यार करते है अपनों की तुलना में उनके यहाँ होता क्या है की बचपन  से ही माँ बाप का प्यार कम मिलता  है  वो कैसे ?
जो बच्चे फॅमिली प्लानिंग। से पहले ही आ गए उनसे माँ कम प्यार करती है क्योंकि वो अपनों जिंदगी का एंजोयमेंट उसकी वजह  से  खो चुके होते है दूसरा की बच्चो को खुद चुप न करवाकर दूसरो का सहारा लेना देखो न बच्चा  क्यों रो रहा है चुप ही नहीं हो रहा है  मेरी समझ में ही नहीं आ रहा है जो माँ - माँ होकर बच्चे   को न चुप करवा  सके जिसने जन्म दिया है जिसका शरीर का ही अंश  है वो अपने ही अंश  का दर्द  नहीं समझ पा रहे है/ और बच्चे रात में माँ और डैड  की नींद न ख़राब  कर दे  इसलिएडायपर्स है न , डायपर्स का प्रयोग करने लगते है /  विदेश में हुई एक घटना   में माता पिता अपने बच्चे को रात में सोने  से  पहले पैरासिटामाल   की दुगनी खुराख देते थे ताकि बच्चा रात में उन्हे परेशान न करे / ऐसे मामले में माता पिता को जेल तक जाना पड़ा था /
बच्चा और बड़ा हुआ तो   ड्राई फ्रुड देना चुप करवाने के लिए खिलौने और  बड़ा हुआ तो कार्टून टी वी चालू कर  के बैठाल दिया /अब  बच्चा खुद ही शांत  हो गया अब उसे माँ से ज्यादा कार्टून अच्छे लगने लगे/ 
   बहूत से  घरो में इन सब कामो के लिए  बच्चो  के लिए आया  लगी  हुई है जो  बच्चो की देखभाल  करती है न की उसे प्यार देती है / अब इतनी  सब बातो से ये मालूम पड़ा की जो उर्जा तरंगे माता पिता के शरीर से निकल कर  बच्चो तक जानी थी वो  तो पहले डायपर्स ने रोक ली क्योंकि बच्चा  अगर रात में चार  बार  भी गीला करता तो माँ या पिता या दोनों  उसे चुप करवाकर  फिर से. सुलाते ये  प्यार होता दोनों का अपने  बच्चे के लिए जो नहीं पंहुचा बच्चो तक /फिर बड़ा हुआ रोया तो कार्टून और बहार की चीजों  से चुप हो गया , अगर आप खुद चुप करवाते तो कम से कम पांच  मिनट तो उसे अपने सीने से  चुप करवाते प्यार की उर्जा तरंगे उस तक पहुचती लेकिन नहीं अपने फिर उसके हिस्से  का  प्यार नहीं दिया /अब शरीर में प्यार की कमी तो होगी ही न ! फिर काम वाली आया जो पैसे लेकर बच्चो की देख भाल कर रही है या वो स्कूल जो बच्चो की देख भाल करने के लिए खोले गए है वो पैसे लेकर भी वो उर्जा तरंगे अपने शारीर से नहीं निकाल  सकते जो बच्चो को अपने माता पिता से मिलनी थी /
आपकी प्यार की उर्जा जब जब बच्चो को पड़ती है तब तब बच्चे उनसे दूर हो जाते है और ऐसे न जाने  कितने मौके होते है दिन  में जब हम उन्हे जरुरी प्यार नहीं दे पाते  आवश्यकता तो पूरी  कर देते  है, ऐसे धीरे धीरे उनके शरीर में प्यार की कमी होने लगती है और बच्चा जब बड़ा होता है तो उसका शरीर प्यार की उर्जा तरंगो की आवश्यकता महसूस करता है जो उसके शारीर के लिए जरुरी   होती है और जब उस बच्चे की ओर  कोई प्यार भरी निगाहों से देखता  है इन्ही आँखों से प्यार की उर्जा तरंगे भेजता है तो शरीर  उन्हे स्वीकार कर लेता  है और हमे प्यार हो जाता है उससे और हमे वो अच्छा लगने लगता है /और माता पिता के प्यार की उर्जा तरंगे तो पहले से ही कम थी अब वो प्यार दूसरो  ने पूरा किया तो उसे ज्यादा मनाने लगते है माता पिता से ज्यादा क्योंकि शरीर में जिसका प्यार ज्यादा होगा  शरीर  उस ओर ही खिचेगा ,और उसकी ही बात ज्यादा मानेगा /अब आप सालो  बाद जब आपके  लड़का या लड़की  प्यार के जाल में फस  जाते है और आप ये कहते नज़र आते है की मेरे प्यार में कहा कमी रहा गई  थी तो आप बखूबी  जानते है की कमी कहा रह गई  थी /अब अगर  शरीर में जरुरी चीजों की कमी होगी तो  शरीर  उनकी  मांग  करता है और बहार से अगर मिल रही है तो  शरीर  उन्हे ले लेता है /लेकिन वो बच्चे जिन्हे घर से पूरा प्यार मिलता है उन्हे न बहार की चीजे अच्छी लगती है न बहार के लोग अब अगर उनकी ओर कोई प्यार से देखता भी है तो  उनका   शरीर  उन प्यार की उर्जा तरंगो  को ग्रहण ही नहीं करता है /क्योंकि  उनके  शरीर  में पहले से ही प्यार है अपने माता पिता का और बहरी व्यक्ति का   माता पिता  के प्यार से टकराकर वापस चाला जाता है /हमे हमारे माता पिता से ज्यादा प्यार कोई नहीं दे सकता क्योंकि माता पिता का प्यार अतुलनीय है औरों के प्यार से तौला नहीं जा सकता है /और इस दुनिया में  माता पिता और उनके प्यार जैसा कोई है ही नहीं /इसलिए अगर हम बचपन से बच्चो का अपना प्यार दे रहे है जो प्यार बच्चो को स्पर्श  करने से उन तक  पहुच  रहा है वो कार्टून खिलौनों से नहीं मिल सकता /और ऐसे बच्चो  की आंखे किसी से  मिलकर  दो चार नहीं होती है  बल्कि  माता पिता का वो प्यार उन्हे अन्दर से मजबूत बना देता है की वो ऐसे ही अपना दिल और दिमाग किसी को न दे दे /क्योंकि माँ और पिता का प्यार ही निःस्वार्थ है बाकि तो प्यार स्वार्थ वश करते है इसका एहसास जब सब कुछ ख़त्म हो जाता है तब होता है /         
ASHISH TRIPATHI
KANPUR
UTTER PRADESH
09307950278

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Posted By KanpurpatrikaFriday, July 26, 2013

Tuesday, July 23, 2013

जिसको देखा करते थे आसमान में चमकते हुए

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मनोभाव:

जिसको देखा करते थे आसमान में चमकते हुए
आज उसी मां को देखते है सरे राह तडपते हुए
रोती थी वो बिलखती थी वो सारी रात
पर पहले
  नहीं थे उसके ऐसे  हालात
अपनी इज्ज़त अपने घर में ही तो है ऐसा कहते
  थे वो
लेकिन अपनी माँ को नीलाम घर पर ही तो करते थे वो
इन चंद नेताओ ने कर दिया अपनी माँ का सौदा
क्या कभी कोई बेटा करता था ऐसा
इन मतलबी लोगों ने कर दिया अपनी माँ को नीलाम
क्या उस माँ ने पाला
  था ऐसा अरमान
जो देती थी भूखे
  पेट को भरी हुई थाली
आज उसी माँ को देते है वो गाली
कभी रोते हुए बेटो को दिया करती थी अपनी आँचल
  का छाव
आज वही दिया करते उस छाती पर तरह तरह के घाव
गर्मी की तेज़ धूप
  हो या जाड़े की सर्द राते
आज लगती है उनको बेमानी वो राते
क्योंकि उनको मिला किसी और का साथ
इसलिए ही तो छोड़ दिया अपनी माँ का हाथ
 

Posted By KanpurpatrikaTuesday, July 23, 2013