Thursday, March 22, 2012

मुद्दा :- वादों का गद्दारों का

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हमारे देश में चुनावो की घोषणा होते ही सभी क्षेत्रिय  वा राष्ट्रीय पार्टिया अपने अपने वादों की लिस्ट बनाती है / कहने को तो ये लिस्ट  जनता के लिए होती है लेकिन इससे सबसे ज्यादा फायदा किये गए व्यदो  का सिर्फ और सिर्फ नेताओ को ही होता है / सभी पार्टिया एक मेले में लगने वाले स्टालों  की तरह ही चुनावी मेले में अपने वादों के स्टाल लगाती है और लुभावने आफर देती है , आम जनता गरीब जनता भोली भाली  जनता इस देश की,हमेशा की तरह फ्री सैम्पल  और एक के साथ एक फ्री वाले स्टालों  पर ज्यादा भीड़ लगा देती है / ऐसे में पार्टिया  भी उनकी शक्ल सूरत देखकर  ( शक्ल का अर्थ यहाँ जाती और संप्रदाय से है ) उनके हिसाब से ही वायदे करते है मौजूदा समय में हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में भी यही हाल रहा , सभी ने वायदे किये लुभावने आफर दिए लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ एक  पार्टी के स्टाल  पर हुई और जनता ने हमेशा की तरह ही उस स्टाल (पार्टी) पर ही भीड़ (मोहर ) लगा दी / जहा सबसे ज्यादा आफर या फिर यु कहे की वायदे किये गए थे /अब देखना ये है की स्क्रेच और विन की तरह ही हॉल हो जैसा  की हमेशा  होता है की कुछ को फायदा उठा ले जाते है और बाकि हाथ मलते रह जाते है /अब बेरोगारी  भत्ते की ही बात ले लीजिये जिसमे चुनाव से पहले तो वायदा किया गया लेकिन चुनाव के बाद टर्म एंड कंडीशन लागू कर दी गई  /
कुल मिलाकर मुद्दा ये है की पार्टिया जनता से वायदे करती है और फिर दगा बाज़ी  भी कर जाती है किये गए वायदे अभी तक कितनी बार  पूरे  हुए है जनता खुद इसका जवाब जानती है /और गर पुरे होते भी है तो ठीक उसी तरह ही जैसे किसी मल्टीनेशनल कंपनी  जिसको अंत के माह में अपना टार्गेट  पूरा करने के लिए कई तरह की आफर देने पड़ते है और प्रचार प्रसार करना पड़ता है /ठीक इसी प्रकार राजनितिक पार्टिया अपने कार्यकाल के अंतिम समय में उन योजनाओ को लागू कर देते है जो उन्होने चुनाव से पहले किये थे / एक बात ये भी  है की पार्टियों को अपनी पहुच भी मालूम होती है की वो कितनी सीट  निकाल सकती है और सरकार बना सकती है और इसी फेर में वो वायदे कर देती है की हमारी    सरकार तो बन नहीं पायेगी बोलने में कौन पैसा लगता है / लेकिन आज की जनता थोड़ी होशियार हो गई  है तभी तो पिछली बार मायावती को को पूर्ण बहुमत से ला दिया और किये गए वायदे  पूरा करने पर करते भी कहा से राज्य के पास इतना पैसा भी नहीं है की वो नेताओ के मुह  से निकली हर बात को पूरा कर सके ये अल्लादीन का चिराग तो है नहीं  घोटाले भी करो और वायदे  भी बस घिसो और मांगते जाओ / और इस बार जनता ने मौका दिया है समाजवादी  पार्टी को अब ये कैसे अपने किये गए वायदे पुरे करंगे ये सबसे ज्यादा चिंता  का विषय बना हुआ है समाजवादी  पार्टी के लिए मौजूदा समय में /
हर बार जनता बेब्कुफ़ बनती है उन बडबोले नेताओ की जुबान  पर और चंद  नेता हजारो की भीड़ लगा कर वायदे कर के चले जाते है /और जनता को दिखाय गए ड्रीम प्रोजेक्ट्स हमेशा  ड्रीम में ही  बने रहते है / और जनता चाय की दुकान नुक्कड़ और चौराहों  आफिसो में अपने आप को और उस सरकारों को कोसते रह जाते है /
एक बात और है की जनता को इतने सारे वायदे करने वाले नेताओ को और कुछ नहीं दिखाई  पड़ता है क्या , क्या सिर्फ जनता को वायदे करो  बस और कुछ  नहीं ,आज किसी भी राजनितिक पार्टी के  घोषणा पत्र में पतित पावनी गंगा और गो हत्या के लिए एक लाइन भी नहीं होती है क्योँ जानते है कितने  लोग पतित पावनी गंगा  को निर्मल करने के लिए  संघर्ष करते करते म्रत्यु  को प्राप्त हो गए  और इस देश की जनता को उन लोगो के नाम तक याद नहीं होने की वो कौन थे जिन्होने गंगा को निर्मल करने के लिए संघर्ष किया था /
आज नेताओ को अपना अस्तित्व खो रही उस गंगा मैया उनको चुनाव जिताने  का फार्मूला नहीं दिखती है / इसलिए ही उनके घोषणा   पत्र में शामिल  नहीं करते  है / क्या अभी तक किसी भी चुनावी मंच पर किसी भी पार्टी ने गंगा   को स्वच्छ  करने के लिए एक लाइन भी बोली होगी शायद नहीं क्या उनको अपने घोषणा   पत्र में गंगा को गन्दा करने वालो के लिए कठोर  दंण्ड का प्रावधान और कानून बनाने की जरूत जैसी बाते नहीं लिखनी चहिये ,गंगा  को निर्मल बनाये जाने  की लिए सरकार में एक अलग विभाग एक अलग कोष नहीं बनाना चाहिए  लेकिन ऐसा नहीं होता है क्योँ, क्योंकि इससे ही राजनितिक पार्टियों को फायदा होगा और नहीं जनता को  /
क्या सोचते है नेता और क्या सोचती है जनता की अपने क्षेत्र  का विकास  होने पर मतदान का बहिस्कार कर देंगे ,लेकिन गंगा को गन्दा करने वालो के लिए क्या  और क्योँ ?
क्या ये समझा जाय की नेता नहीं जनता मौका परस्त है / सैकड़ो बेजुबान गाय रोज़ काट दी जाती और जाने कितनी सड़क पर आवारा  घुमती हुए दुर्घटना के कारण म़र  जाती है क्या गाय की रक्षा के  लिए जनता नेताओ से मांग नहीं कर सकती है ?क्या उन लोगो को दण्डित नहीं किया जाना चाहिए  जो यु ही गाय को खुला छोड़ देते है और सरकार को कुछ ऐसे जगह बनानी चहिये जहा ऐसे गायो  को पला जाय जो उनके लिए बेकार हो जाती है जो उन्हे पालते  थे और आज चंद रुपयों में कटने के लिए बेच दिया /
बलत्कार की शिकार लडकियों को सरकारी नौकरी का वायदा  तो कर सकते है लेकिन गाय की हत्या और गंगा को गन्दा  करने वालो के लिए कोई कठोर कानून नहीं ऐसा देश है मेरा / जहा माँ की जरूरत एक समय के बाद ख़त्म हो जाती है  और उनके पापो को धो देने वाली उनकी मान्यतो को पूरा करने वाली माँ को ऐसे उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है / माँ की ममता है की फिर भी वो अपने बेटो बे सहारा  नहीं छोड़ती है बिना लालच के उनको पापो को धो रही है चाहे  कितनी भी गन्दी हो जाय लेकिन अपनी बची हुई तनिक भी शुद्धता  से वो उनके पाप धो रही है जो वास्तव में पापी है /
मुद्दा ये भी है की नेता अपने  किये गए  वायदों को पूरा करे तो दगाबाज लेकिन क्या वास्तव में जनता नेताओ  से कुछ मांगती है नहीं कुछ भी ऐसा नहीं मांगती जो जायज हो ,जब नाजायज  चीज़ पूरी ही नहीं हो सकती तो दोष किसका  हुआ अगर जनता सही मायनो में सही मुद्दे राजनीतक पार्टियों के सामने रखे तो उनके ऊपर भी दबाव होगा उन्हे पूरा करने का / नहीं तो ऐसे वो वायदे करते रहंगे और आप कोसते रहंगे /


Posted By KanpurpatrikaThursday, March 22, 2012

Saturday, February 25, 2012

कौन बनेगा मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश का ? 10 अंदाजे और आपका अंदाज़ा क्या कहता है ?

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कौन बनेगा मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश का ? 10  अंदाजे और आपका  अंदाज़ा क्या कहता है ?
इस बार उत्तर प्रदेश चुनाव में क्या होगा क्या नहीं सभी कयास ही लगा रहे है /
  1. कांग्रेस कहती है की उसकी ही सर्कार बनेगी क्योंकि राहुल फैक्टर  काम कर रहा है 
  2. मायावती कहती है की सभी ने उत्तर प्रदेश को लुटा है हमने करोडो रूपये के विकास कार्य कराय है और केंद्र ने हमारे   साथ सौतेला व्यवहार  किया है /
  3. समाजवादी पार्टी कहती है की बहुजन समाज पार्टी ने मूर्तियों को सजाने और सवरने के अलवा कुछ भी नहीं किया और इस सरकार में ही सबसे ज्यादा घोटाले ही है /
  4. वही भा.जा.पा.  का कहना है की कांग्रेस 22  सालो में कुछ न कर पाई    और केंद्र में रहते हुए उसने क्या किया सभी जानते है और माया की माया सबने देखि और समाजवादी पार्टी को भी लोग भूले नहीं है हम है जो उत्तर प्रदेश को सुधार सकते है /
  5. जनता कह रही है की कांग्रेस की ही सरकार बन सकती है उसमे कुछ लोगो का कहना है की बहुजन समाज पार्टी का इस बार सफाया हो जायेगा वही कुछ लोगो का कहना है की कांग्रेस  और समाजवादी   पार्टी आपस में मिलकर सरकार बनाएगी .कुछ लोग ये भी कह रहे है की भरतीय जनता पार्टी बी.एस.पी. के साथ मिल कर सरकार बनाने की सोच रही है /
  6. वही पंडित  और ज्योतिषियों का भी मानना है की सरकार तो मायावती की ही बनेगी चाहे वो कांग्रेस के समर्थन से या फिर बी,.जे.पी के समर्थन से .
  7. और एक्जिट पोल वालो का कहना है की त्रिशंकु क्या पांचशंकु  यानि खिचड़ी पकने के असार है /
  8. चुनाव से पहले जिस प्रकार से नेता इधर से उधर भाग रहे थे टिकट के लिए वैसे ही नतीजे आने  के बाद एक बार फिर से यु पी पी एल होगा यानि उतर प्रदेश प्रीमियर लीग जहा विधयाको की बोली लगेगी अन्दर ही अन्दर /
  9. जी के   अनुसार बी एस पी में 7  विधायक वापस आने की सम्ब्वना जताई जा रही है समाजवादी  पार्टी को टाटा कह सकते है 10  के आस पास विधायक बी जे पी ज्यादा नहीं बी एस पी के 5  विधायको को अपनी पार्टी में लाने में सफल रहेगी वही कांग्रेस अन्दर ही अन्दर  खेल खेलते ही बाज़ी मारने में कामयाब रहगी ./
  10. अंत में बी एस पी और कांग्रेस के सहयोग से उत्तर प्रदेश में मुक्यमंत्री की कुर्सी पर रीता बहुगुणा जोशी बैठेगी और पंद्रह महीनो बाद फिर से दोनों में यानि कांग्रेस और बहुजन समजवादी पार्टी में लड़ाई   होगी और फिर क्या होगा आप सब जानते है / 
  11. इस बारे ,में आपका क्या अंदाज़ा है ?

Posted By KanpurpatrikaSaturday, February 25, 2012

Thursday, February 16, 2012

बोलो खरीदोगे ?

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बोलो खरीदोगे ?
आज के समय में हर वस्तु बिकाऊ है चाहे  वो निर्जीव हो या सजीव इन्सान हो या जानवर किसी की मौत बिकती है तो किसी की जिंदगी किसी की लाश बिकती है तो किसी का जिस्म खरीदोगे क्या ? नेता पुलिस चोर या डाक्टर बिकते है भगवान यहाँ पर पुजारियों के हाथ खरीदोगे क्या ? मोल लगाओगे क्या यहाँ सब बिकता है बस खरीदने वाले की जेब में पैसा चहिये /बस कुछ भी बिक सकता है इंसानियत ईमानदारी तक बिक रही है आज के समय में /
नेता देश को बेच रहे है डाक्टर इलाज और मर्ज़ को पुलिस अपराध को पुजारी भगवान को और पाखंडी धर्म  को  सब अपनी दुकान सजाए बैठे है खरीदने वाले और बेचने वाले / कभी दुर्घटना में घायल व्यक्ति मदद  के लिए तडपता सड़क पर पड़ा होता है तो कोई मदद करने के बजाए   उसकी जेव और शरीर  से पैसे निकाल कर चलता बनता है उससे बचा तो पुलिस है ,अब जिन्दा बचे तो मरने के लिए डाक्टर  है ,बिना पैसो के इलाज कैसे होगा ? क्योंकि डाक्टर भी अपने आप को बेच रहा  है /
लड़की का पिता अपनी लड़की को पढाता  है लिखाता है काबिल बनता है लेकिन जब वही पिता अपनी लड़की के रिश्ते के लिए लड़का ढूँढने  जाता है तो  लडके के माँ बाप और लड़का खुद अपनी बोली लगाता है अगर डाक्टर है तो 10  से 20  लाख इंजिनियर की भी ऐसी ही कीमत सरकरी नौकरी की कीमत पद के हिसाब से बढता जाता है क्यों क्या लड़की के पिता ने लड़की को पड़ने  और उसे काबिल बनाने में पैसा नहीं खर्चा किया ! किया लेकिन यहाँ पर वो अपनी लड़की के जीवन साथी की खरीददारी  में जो निकला है हर चीज़ बिकती है बोलो खरीदोगे ?
संस्कार मर्यादा संस्कृति और गुणों की कीमत नहीं है कीमत है कीमत की जो पैसे के आगे  बौने हो जाते है /आपकी जेब में पैसे होने  चहिये बस आप अपनी बेईज्ज़त को इज्ज़त  में बदल सकते है और जो आपकी इज्ज़त करते है वो आपकी इज्ज़त करके आपके पैसो की इज्ज़त करते है जानते है फिर भी खरीदते   है इज्ज़त /
गरीब लड़की चाहे  कितनी भी सुन्दर सुसंस्कारित क्यों हो कितनी भी पड़ी लिखी क्यों हो उसे अच्छा पति मिलना मुश्किल होगा अच्छा घर मिलना मुश्किल होगा वही अगर उसके पास पैसा है यानि वो आमिर है तो सब मैनेज हो जायेगा !कुछ लोग ऐसे गरीब लड़कियों को अपने घर की बहु बनाते  भी है दहेज़ लेने की कुरूतियों को दिखाते भी है /लेकिन सच क्या है वही पैसो का मोल यानि इन आमिर  लडको में कुछ कुछ कमी होती है और पैसे वाला तो इनके पास आयेगा नहीं सो गरीब लड़की के संस्कार मर्यादा संस्कृति और गुणों की कीमत लगा देत है ये उसको बताते है की आज के समय में पैसे  का ही मोल है की आपका अगर आपके  पास पैसा है तो सब कुछ  है / उस लड़की के सपनो को खरीदते है उसकी मुस्कराहट को तौलते है और उसकी उम्मीदों को तोडते  है उसकी हर एक चीज़ को पैसे के तराजू पर तौल के दिखाते  है की कीमत किसकी है इन्सान की या पैसो की /सबकुछ बिकता है खरीदोगे ?
दोस्त हो या भाई बहन हो या माता पिता आज के समय में सब पैसे से रिश्ते  बना रहे है आज आपको भाई भी मिल जायेगा और दोस्त भी बहन भी मिल जाएगी अगर आपके पास पैसा है तो !या यु कहे की  अगर आप गरीब है और आपका ही सगा भाई आमिर तो सारे रिश्तेदार भाई बहन और माता पिता उसको ही तवज्जो देंगे उसकी ज्यादा इज्ज़त करंगे की आपकी !क्यों और आखिर क्यों रिश्ते बिक रहे और क्यों रिश्ते बेच रहे है लोग ? सभी माया के मोह्पास में फसते जा रहे है /
नेता पैसे के लिए अपना ईमान अपने संस्कार अपना धर्म तक बेच रहे है आज उन्हे इन्सान और इंसानियत से कोई सरोकार ही नहीं रह गया है पैसे की राजनीती हो गई है मतदातो को पैसे के दम पर खरीद रहे है तो कोई नेता को ही पैसे की दम  पर खरीद रहा है 8 वी पास नेता पडे लिखे आई एस और प़ी सी एस अधिकारियो की ऐसी तैसी कर देता है क्योंकि उसके पास पैसा था और उसने पैसे की दम पर चुनाव जीत कर वहा बैठ गया जहा सालो की मेहनत के बाद एक आई एस बैठा था !क्या पैसा ही सब कुछ है ?

क्या आज के परिवेश  में सभी चीजों का सौदा किया जा रहा है जो सबसे बड़ा सौदा हो रह है वो है इंसानियत का अगर अपने अपनी इंसानियत बेच दी तो सब कुछ बेच सकते है आप !कोई बलात्कारकी शिकार महिला या लड़की को सरकारी नौकरी देने की बात कर रह है तो कोई उसका भी मजाक उड़ा रहा है क्या एक सरकारी नौकरी उसकी इज्ज़त वापस कर सकती है लेकिन नेताओ ने यहाँ भी वोट की राजनीती के पीछे औरत की इज्ज़त का सौदा कर दिया /बात कुल मिलकर यहाँ पर भी यही है की नेता ने अपनी  इंसानियत मार कर ही ये कहा है उसने अपनी इंसानियत बेच दी है क्योंकि यहाँ सब बिकता है बोलो खरीदोगे ?
यहाँ जिंदगी बिकती है बिकती है मौत यहाँ 
यहाँ लाश बिकती है बिकता है जिश्म यहाँ 
यहाँ भक्त बिकते  है बिकते है भगवान यहाँ 
 बोलो खरीदोगे ?
यहाँ डाक्टर बिकते है बिकते है ईमान यहाँ 
बिकते है नेता यहाँ बिकती है जुबान यहाँ 
बिकते है अपराध यहाँ बेचती  है पुलिस यहाँ  
बोलो खरीदोगे ?
बिकती है इज्ज़त यहाँ बिकती है शर्म हया
बिकती है बेटी यहाँ बिकती है बहने यहाँ 
बिकती है ममता यहाँ बेचती  है माँ  यहाँ   
बोलो खरीदोगे ?
बिक रहा है ईमान यहाँ बेच रहे ईमानदारी  यहाँ 
बिक रहा गुनाह यहाँ बेच रहे गुनहगार यहाँ   
बिक रहा देश यहाँ बिक रहे देशवाशी यहाँ
बोलो खरीदोगे ? 
आशीष त्रिपाठी 







Posted By KanpurpatrikaThursday, February 16, 2012