Wednesday, December 1, 2010

वहशी दरिन्दे

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कानपुर किसी समय औद्योगिक राजधानी के नाम से जाना जाता था लेकिन धीरे धीरे कुछ एसा हुआ की राजनीती ने कानपुर की वास्तिविक पहचान को जला दिया और कई मिलो के बंद होने से हजारो लोग रोज़ी रोटी के लिए परेशान हो गय .. फिर क्या था किसी तरह अपने बच्चो को तंग हाली में पला .. लेकिन अब वो समय आ गया है कि कानपुर की औद्योगिक पहचान तो खो गई है लेकिन यहाँ क्राइम का स्तर बढ गया है और सबसे चौकाने वाली बात ये है की जोघटनाएँ घट रही है उसमे सबसे ज्यादा घटनाओ में युवा सम्लित है और शिकार बन रही है लडकिया और महिलाय कही चैन स्नेचिंग तो कही रेप तो कही सामूहिक दुष्कर्म .. स्थान भी इसे की किसी को भगवान कहा जाता है तो किसी स्थान को मंदिर जी मैं बात कर रहा हु की कभी कानपुर के एक नामी अस्पताल में वार्ड बॉय एक बीमार लड़की से रेप करता है और लड़की की मौत हो जाती है .. तो कही एक स्कूल के तथाकथित प्रधानचर्या के स्कूल में ही एक मासूम बच्ची से रेप के बाद हत्या कर दी जाती है इसको हत्या ही कहेंगे की अपना शिकार बनाया और जब हालात बिगड़ी तो उसको उसके घर भिजवा दिया और बच्ची रास्ते मे ही मर गई .. इधर कुछ महीनो में वहशी दरिंदो की संख्या में काफी इजाफा हुआ है इन वहशी दरिंदो में एक बीमारी होती है जिसको की पीडोफिलिया कहते है इनकी हरकते अजीब होती है ये अपने सगे रिश्तो को भी नहीं बख्सते है और इनको पहचानना बड़ा ही मुश्किल काम होता है इस तरह का एक वाकया कानपुर के ही जाजमऊ इलाके में हुआ जहा एक व्यक्ति अपनी ही 4 और 6 साल की लडकियों के साथ छेड़खानी करता था ...जिसकी इन आदतो से उसकी पत्नी भी परेशां रहती और उसको समझाती थी इस बीमारी से ग्रसित लोग बडे ही खतरनाक होते है . इस बीमारी की शुरुआत बचपन से ही होती है लेकिन इसकी पहचान करना बड़ा ही मुश्किल काम होता है इस तरह के रोगियों में बच्चो के साथ सेक्स करने में मज़ा आता है .. लेकिन बात ये है की इस तरह के लोगो का पता घटना होने के बाद ही चलता है कानपुर में इसे अनगिनत केश हो चुके है जिसमे वहशी दरिन्दे बच्चियों को अपना शिकार बना चुके है जिसमे कई की तो मौत तक हो चुकी है ... तारीख २९ नवम्बर शाम के करीब ६ बज चुके थे तभी एक घर से चीखने की आवाज़ आती है जब मोहल्ले के लोग पहुचे तो वहा का नज़ारा देख कर चौक जाते है .. क्योकि उनके पड़ोस में रहने वाले बर्रा दामोदर नगर निवासी राज मिस्त्री का काम करने वाले किशन साहू की 12 साल की लड़की की साबड़ से पीट पित कर हत्या कर दी गई थी और उसका पिता किशन साहू चिला चिल्ला कर रो रहा था .. लड़की पूजा की माँ कुछ ही दिन पहले अपने गृह प्रदेश छत्तीसगढ़ गई हुई थी घर में पिता किशन साहू ने बेटी पूजा को रोक लिया था की पूजा घर में राह कर खाना बनाएगी .. वो इलाके में बने एक खली प्लाट में झोपडी बना कर रहते थे .. किशन साहू के अनुसार वो रोज़ की तरह अपने काम पर चले गई थे और शाम को आकार देखा तो बच्ची खून से लथ पथ पड़ी थी तब उन्होने अपने रिश्तेदार के यहाँ सूचना दी और उनके साथ जा कर के पुलिस को सूचना दी पुलिस भी मौके पर पहुची और घटना स्थल का नज़ारा देख कर पुलिस के भी होश उड़ गय क्योकि पूजा के सर पर साबड़ जैसी किसी चीज़ से मरा गया था और मारने वालो की संख्या दो से ज्यादा ही थी और उसकी स्थित को देख कर पुलिस को रेप की आशंका लगी और उन्होने डॉग स्क्वायेड बुला कर छान बीन भी कराइ लेकिन शुरुआत में कोई भी सुराग नहीं मिला बल्कि कुत्ता बगल के प्लाट में जा कर कुछ देर बैठा रहा जिससे की पुलिस को आस पास के ही लोगो पर शक हुआ और उसने पूजा के शव को सबसे पहले देखने वाली उसकी सहेली संध्या से कई बार पूछ ताछ की और और आखिर में पुलिस ने प्रेम संबंधो के बारे में संध्या से पूछा तो तो उसने बताया की पूजा की ही एक सहेली का मोहल्ले के ही राज बहादुर से प्रेम सम्बन्ध थे जो की अक्सर पूजा से राज बहादुर के बारे में बात किया करती थी .. लेकिन राज बहादुर आए दिन पूजा से भी छेड़ छाड़ करने लगा इस पर उसने एतराज़ किया और और एक दिन पूजा ने राज बहादुर को मुहल्ले की ही एक अन्य युवती के साथ देखा .. तब पूजा को पता चल की राज बहादुर का कई लडकियों से प्रेम सम्बन्ध है इस बात को पूजा ने अपनी सहली से भी बताया .. जिस पर राज बहादुर और उसकी सहेली में झगड़ा भी हुआ .. इस पर राज बहादुर ने पूजा खिलाफ कुछ करने का मन बना लिया ... और 29 नवम्बर को सुबह ११ बजे के करीब राज बहादुर शराब और मांस लेकर आया और अपने दोस्तों जो की पूजा के घर के पास रहने वाले और प्रेस करने वाले दयाराम और चट्टा संचालक के साथ बैठ कर शराब प़ी और पूजा के बारे में राज बहादुर दोनों से बाते करने लगा की उसने मेरे प्यार में अडंगा ड़ाल दिया है और खुद भी कुछ नहीं करने देती है .. शराब के नशे में तीनो ने पूजा के साथ रेप करने की योजना बना डाली .. उधर पूजा इन सब बातो से अन्जान .. पिता किशन के जाने के बाद घर की सफाई कर रही थी और घर की सफाई करने के बाद उसने गैस पर नहाने के लिए गर्म पानी रखा और चारपाई पर बैठ कर पानी गर्म होने का इंतज़ार करने लगी .. तभी राज बहदुर अपने साथियों दया राम और राजेश के साथ पूजा के घर में दाखिल होगया और पूजा ने तीनो को देखते ही पूछा की आप लोग यहाँ क्या करने आये है इस पर राज बहादुर ने कहा हम तो पका ही दीदार करने आये है ..पूजा ने राज बहादुर को धक्का देते ही चिल्ला कर बहार भागने का प्रयास किया लेकिन राजेश ने उसको धर दबोचा और उसका मुह बंद कर के जमीन पर पटक दिया और उसके साथ हरकते करने लगा .. जबकि राज बहादुर और दया राम पूजा को कस कर पकडे ही थे फिर बारी बारी से तीनो ने रेप कर दिया ... बीच बीच में जब पूजा चिल्लाती तो शराब के नशे में वहशी दरिन्दे उसको लोहे की राड से पिटते भी जा रहे थे ... लेकिन राजेश और राज बहादुर के रेप करने के बाद ही पूजा बेहोश हो चुकी थी ...लेकिन इन लोगो ने उसके बाद किसी को पता न चले इस पर राज बहादुर ने राजेश से साबड़ लाने को कहा और राजेश बगल के प्लाट से साबड़ ले आया और फिर राज बहादुर ने पूजा के सर अपर अनगिनत वार कर के उसकी जिंदगी ख़त्म कर दी ..... और फिर तीनो वहा से एक एक करके वहा से भाग गय . जब किशन साहू पूजा के पिता घर आये तो उनके होश उड़ गय ..क्योकि खून इतना ज्याद बह गया था की झोपड़ी के बाहर तक आ गया था ... पुलिस ने शुरू में ही गैंग रेप की बात कही और शक के घेरे में आस पास के 15 लोगो को हिरासत में लेकर पूछ ताछ की लेकिन 9 लोगो को दुसरे ही दिन छोड़ दिया गया .. 3 दिन बीत जाने के बाद भी अभी पुलिस किसी नतीजे में नहीं पहुची थी ...उधर पूजा की खून से ;लथपथ लाश देखकर पूजा के पिता किशन बहुत ज्यादा सहेम गया और उसने अपना घर छोड़ कर अपने रिश्ते दार चचेरे जीजा के साकेत नगर स्थित घर में शरण ली लेकिन वो एक ही बात कहे रहा था की हमने किसका क्या बिगाड़ा था जो मेरी बेटी की हत्या कर दी.. ऐसा न हो की हत्यारे मुझे भी मार दे .. वाही मुहल्ले के लोग भी काफी ज्यादा सहेम गय थे और किसी भी दरवाजे में दस्तक होती है किसी अनजाने डर से सभी सहेम जाते थे .. इलाकाई लोगो का कहना था की अब बच्चो के बहार खेलने में भी डर लगता है वही राजनिति कर रहे नेता भी अपनी तरह से उसको सान्तवना देते रहे वही कुछ संस्थाओ ने उसका केस लडने में मदद करने का भरोसा दिलाया ...वही जब पूजा की लाश को देखकर पोस्टमार्टम हाउस के डाक्टरों को भी बड़ी ही हैरानी हुई और उन्होने पुलिस के शक को पुख्ता कर दिया की पूजा के साथ गैंग रेप हुआ है ...और इनकी संख्या करीब तीन या चार ही हो सकती है ...जिन्होने बड़ी ही बेरहमी से क़त्ल किया है क्योकि पूजा के शरीर के हर हिस्से में चोट के निशान है ..वही तीसरे दिन शाम तक पुलिस यह कह रही थी की हमे सुराग मिल चुके और हम हत्यारे के काफी करीब पहुच चुके है .. और चुठेय दिन डी आई जी ए के मुथा जैन ने पत्रकारों के सामने तीन वहेशी दरिंदो को पेश किया जिन्होने पूजा को बेरहेमी से रेप करने के बाद साबड़ से पीट पीट कर हत्या कर दी थी ..

Posted By KanpurpatrikaWednesday, December 01, 2010

Wednesday, November 24, 2010

कानपुर में शेर आया.....

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कानपुर में शेर
यु तो देश में क्या दुनिया में लगातार शेर (बाघ) काम होते जा रहे है एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ भारत में ही पिछले 3 सालो में करीब 75 शेरो की मौत हो चुकी है ...लेकिन फिर भी भारत में कुछ अलग तरह के शेरो ( भ्रष्टाचारी लोग ) की संख्या लगातार बडती जा रही है ये शेर उन शेरो से ज्यादा खतरनाक है..ओर ये विलुप्त भी नहीं होंगे ...
लेकिन एक अजीब वाक्या हुआ पिछले दिनों कानपुर में एक शेर आया बीच शहर में घूम रहा था ...शेर कब आया कहा से आया क्यों आया किसके बुलाने पर ये किसी को नहीं पता ...लेकिन अजूबे की तरह जिसने भी देखा देखता रह गया...क्योंकि न तो कानपुर ओर न ही उसके आस पास के जिलो में कही सर्कस लगा है न ही कोई एसा जंगल है जहा शेर हो सो आश्चर्य तो होना ही था.... तभी एक मिश्रा जी तपाक से वहा पहुचे ओर वो भी देखते हुए बोले की भैया भीड़ क्यों लगी है लोगो ने बताया मिश्रा जी शेर आया है.. मिश्रा जी ने तुरंत ही पूछ दिया की किसके यहाँ आया है भीड़ ने जवाब दिया की आपके यहाँ ही ये है कब से आपका इंतज़ार कर रहा है आप कहा थे लेकिन मिश्रा जी ने बुरा नहीं माना ओर मुह बना कर अपना मोबाइल निकला ओर तपाक से अपने परिचित के पत्रकार को मिला दिया फिर क्या था पत्रकार महोदय ने उनसे कुछ देर में वहा आने का आश्वाशन दिया ओर मिश्रा जी से कहा की आप की भी फोटो आयेगी आप वही पर रुकियेगा ओर ये बताइए की कब कहा कैसे आया ... मिश्रा जी समाज की हर एक बातो पर नज़र रखते थे सो उन्होने तुरंत ही बता दिया की कहा से आया कहा है ओर क्या हो रहा है .. फिर क्या था पत्रकार महोदय ने तुरंत ही BREAKING न्यूज़ चलवा दी अपने चैनल पर ...

कानपुर में शेर आया लोग भयभीत ..

और पत्रकार महोदय तुरंत ही कैमरामैन लेकर घटना स्थल पर पहुच गए .. फिर क्या था कुछ ही देर में नेशनल चैनल से लेकर प्रादेशिक ओर लोकल से लेकर मोहल्ला स्तर के चैनल ओर समाचार पत्र के पत्रकार पहुच गय ओर सभी अपनी अपनी अपनी दलील देने लगे ...

और तो ओर सभी चैनल अपने अपने स्तर पर दावा भी करने लगे की सबसे पहले उनके चैनल ने ये खबर दी ओर उन्ही के पास EXCLUSIVE तस्वीर है...और तुरंत ही फ़ोनों का क्रम चालू हुआ तो सभी चैनल ही उस और दौड़ पडे...
की शेर कैसे आया
दूसरी और से पत्रकार ने जवाब दिया
की किसी ने देखा तो नहीं लेकिन फिर भी स्थानीय लोगो ने बताया की पैदल ही आया है ...
जान मॉल का कोई खतरा हुआ क्या ...
जवाब आया की अभी तक तो नहीं हुआ है आगे की संभावना जताई जा रही है ...
और लोगो ने कहा है की शेर ने आकर सभी प्रमुख मार्गो को जाम कर दिया है अभी तक जाम से जूझ रहा शहर एक बार फिर जाम की गिरफ्त में
ऐसी भी हेड लाइन चलने लगी...

लेकिन शेर अभी भी अपने स्थान पर खड़ा चुप चाप शांत और एकाग्र मन से सबकी बाते सुन रहा था ..
तभी एंकर का सवाल आता है की सुरक्षा व्यवस्था की क्या स्थित है..
रिपोर्टर ...जैसे ही शेर आने की खबर आई वैसे ही स्थानीय थाने से लेकर आला अधिकारी सभी दल बल के साथ तुरंत ही हमेशा की तरह दो घंटे बाद पहुचे है...लेकिन कोई भी अधिकारी अभी भी कुछ बता पाने में असमर्थ है ..वही वन विभाग के अधिकारी अभी तक नहीं पहुचे है और जब हमने उनसे बात करने की कोशिश की तो उनका जवाब था की शहर में शेर आ ही नहीं सकता है ..शेर जैसा ही कोई जानवर आया होगा फिर भी हम पूरी स्थित पर नज़र रखे  हुए है ...
और इस तरह से पूरे दिन स्थानीय नेता से लेकर सांसद तक शेर के चक्कर में अपने काम छोड़ कर न्यूज़ चैनल के फ़ोनों में व्यस्त रहे ...
मौजूदा सरकार ने अपने कार्यकाल में हुए कार्यो का गुणगान किया और शेर को विपक्षी पार्टियों का काम बता दिया वही विपक्षी पार्टी के नेता ये कहते नज़र आय की उनके कार्यकाल में शेर क्या गधे भी कभी सडको पर नहीं दिखाई दिए इसी सुरक्षा व्यवस्था की हमरी सरकार में ...और मौजूदा सरकार पूरी तरह से खोखली है ...और इस तरह शेर पर राजनेता भी राजनीती करने लगे ...

लेकिन शेर अभी भी वही पर खडे अपनी शांत मुद्रा में खड़ा राजनेताओ से लेकर सभी की बाते सुन रहा था ...और सोचने लगा की क्या अगर इस धरती में आने की जगह अगर हम मंगल पर जाते तो शायद इतना बवाल नहीं होता मैं तो सिर्फ रास्ता भूल गया था सो शहर की ओर आ गया ..कोई मुझे सही जगह पहुचने की जगह मेरे को शेर ही मानने से इंकार कर रहे है तो कोई विपक्षी पार्टी का कारनामा बता रही है ..वही मीडिया अपने कैमरे लगाय फोटो खीचते जा रही थी लेकिन मुझे लगता है इस सरकार में और मौजूदा सरकार में पता नहीं कितने शेर मौजूद है और उन्हे पकडने के लिए कभी किसी ने कदम नहीं उठाय  .....
फिर मेरे आने में इतना हंगामा क्यों समझ में नहीं आता की गलती किसकी है शायद मीडिया की जिसने जरा सी बात को इतना तूल दे दिया जिसने कभी शायद हमारी घटती आबादी पर इतना हल्ला नहीं मचाया होगा लेकिन किसी फिल्म के प्रमोशन के लिए अपना स्टूडियो तक बेच देते है .. .
मुझे तो लगता है की हम जंगल में ही ठीक है कम से कम धीरे धीरे हमारी आबादी कम तो हो रही है .. अगर हम भी इन शेरो की तरह लगातार बदते रहते तो शायद इंसानों के रहने के लिए जगह ही नहीं बचती ...
इतनी बाते शेर सोच ही रहा था की वन विभाग की टीम आती है और और शेर को चिड़ियाघर ले जाती है और सभी चैनेल्स की हेड लाइंस भी बदल जाती है...और फिर किसी बेखबर सी खबर को BREAKING NEWS बनाकर फिर हल्ला मचाना चालू कर दिया।
पंडित आशीष त्रिपाठी ।

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Posted By KanpurpatrikaWednesday, November 24, 2010