Wednesday, March 3, 2010

साईं के नाम पर सच

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साईं के नाम पर सच 
साईं बाबा पर पिछले कुछ दिनों से चर्चा का बाज़ार बड़ा गर्म है न्यूज़ चैनल से लेकर पान की दुकान और भिखारी से लेकर पूजारी तक सभी इस चर्चा में शामिल है की क्या वाकई साईं बाबा का पूजन हिन्दू धर्म के अनुसार नहीं है /
असल में ये एक दिन की बात नहीं है की जो शंकराचार्य जी ने कह दी इस के पीछे का सच ये है की ये अभियान पिछले कुछ सालो से निरंतर चल रहा था जो अब सबके सामने आ चूका है ये एक चिंगारी थी जो अन्दर ही अन्दर सुलग रही दी जिका विस्फोट शंकराचार्य  जी ने कर दिया जिससे सबकी आँखों के आगे अँधेरा छा  गया /
किसी भगवान या धर्म पर आस्था रखने वाले लोग धर्म और भगवान क्या है जानना ही नहीं चाहते है जैसे एक लड़का और एक लड़की जब तक एक दुसरे से प्यार करते है तब तक एक दुसरे  के खिलाफ कुछ भी नहीं सुनना चाहते है / लड़का लड़की के खिलाफ और लडकी लडके के खिलाफ / जो प्यार मात्र कुछ दिनों और सालो का ही होता है / फिर धर्म और अन्धविश्वास में पागल लोग क्या सुनेंगे / यहाँ पर तो धर्म आस्था चमत्कार और अन्धविश्वास की बड़ी नदी  दीवारे खड़ी है / ये सब इनके शरीर में गहरी जड़े बना चुके है / इन जड़ो से बने विशाल भ्रम को तोडना बड़ा मुश्किल होता है उसको समझ में ही नहीं आता की पागल वो है या सामने वाला लेकिन नज़र सामने वाला ही आता  है /
क्योंकि उसने जो चमत्कार देखे है वो उसको झूठ बता रहा है जो उसने देखे  जो उसके अपने अनुभव सच्चे  नज़र आते है / बाकि पूरी दुनिया झूठ ?
किसी पेड़ या वृक्ष को कटने के लिए ये जरुरी है की पहले उसकी जड़ो को कमज़ोर किया जाय  फिर एक दिन वो पेड़ खुद ही गिर पड़ेगा /  या फिर धीरे धीरे उसकी डाले तोडना चालू कर दिया जाय /  बीजों को पेड़ बनाने में जो समय लगा उसका आधा समय तो उसको नष्ट करने में लगेगा ही लगेगा या फिर एक साथ  एक ही समय में तोड़ना चाहते है तो कुछ नुकसान भी उठाने पड़  सकते है /
अब जानते है की साईं बाबा कौन थे क्या था उनका कहना ....साईं बाबा वास्तव में चमत्कारी पुरुष थे इस बात को सब मानते है लेकिन वास्तव में जानता  कोई भी  नही है और जो जानते थे वो सब की सब शिर्डी वाले ही थे उस समय पर साईं बाबा शिर्डी के आलवा कही जाते भी कही नहीं थे जैसा  साईं सच्चरित्र में वर्णन है / न ही उस समय में दूर संचार और मीडिया का इतना योगदान था की वो बात दूर दराज़ तक पहुच जाय / शिर्डी जैसे गावोमें उस समय पर करीब 40 के आस पास परिवार रहते थे जिनके बीच में ही बाबा रहते थे और अपना जीवन यापन बडे ही सादे तरीके से करते थे अंत समय में वो बीमार ज्यादा रहने लगे थे और अंत समय में बीमार रहते हुए ही उनकी म्रत्यु हो गई थी /
 लेकिन असली कहानी तो यहाँ से ही शुरू होती है की साईं बाबा के मरने के बाद मरने से पहले वो कैसे थे ये कोई न जानता हो लेकिन मरने के बाद एक किताब सबको ये बता देती है की वो कैसे थे और उस किताब के चमत्कार से ही आज इतना चमत्कार हो रहा है /कुल मिलकर साईं बाबा के मरने के बाद ही असली मार्केटिंग चालू हुई और आज कुछ लोग उस किताब को आधार बना कर ही उस सच्चाई को झूठा बता रहे है या तो किताब झूठी है या फिर जो इसको झूठा बता रहे है वो सच्चाई कुछ भी हो लेकिन पूरा फंडा एक शातिर दिमाग का नहीं कई शातिर दिमागों ने काम किया / 
या ये भी हो सकता है कि साईं बाबा के होते हुए भी कुछ  गाव  के लोग वहा पर आते हो और जिससे वहां  का कारोबार कुछ  ज्यादा चलने लगा  हो और साईं बाबा के जाने  के बाद वो धीमा  पड़   गया हो तो उन्हे  ये तरकिब सूझी हो / या फिर कुछ हो ही  न यनि  साईं बाबा नाम सोचि समझी  सोच का हो / क्योंकि कोई भी पुख्ता प्रमाण नहीं मिलते है साईं सच्चरित्र के आधार पर /
आज भी कई संत महात्मा है जो कई सालो से भक्तो को मोह पास में बंधे है और भक्त अंध भक्ति में बंधे ही है जिसको तोडना आसान  नहीं है/
जैसे अभी हाल में ही कई साईं भक्तो ने हरिद्वार में गंगा स्नान किया उनसे कोई ये पूछे क्या साईं बाबा ने कभी गंगा देखि थी या उन्होने कभी गंगा में स्नान किया था क्या साईं ने कभी पूजा पाठ करने के लिए कहाफिर क्यों घुटनों के बल चल रहे हो ये भीड़ अंध भक्तो की ही है जो साईं के मंदिर बना कर साईं भजन गा रहे है कुछ अपनी दुकान चला रहे है अरे खडे हो कर सच्चाई तो देखो जहा जा रहे हो वहा कुछ है ही नहीं / किसी ने कहा साईं के यहाँ जाने से केंसर ठीक हो जाता है तो आप भी चल दिए कैसे कब और कहा का पता किये बैगर ये इनका विश्वास नहीं अन्धविश्वाश है जो व्यापार करने वालो ने बना दिया है / 90 % साईं भक्त तो साईं बाबा के बारे में पूरा जानते ही नहीं है बस चले जा रहे है उस राह पर जहा सब जा रहे है हो क्यों जा रहे है किसी को नहीं पता /
1977 में सुपर ब्लाकबस्टर फिल्म अमर अकबर अन्थोनी के गाने शिर्डी वाले साईं बाबा जिसको मोहद रफ़ी ने गया था से इनको ज्यादा प्रसिद्धी मिली जिसके बाद भी साईं को पूजने वाले या यु कहे की मनाने वालो का कहना था की साईं के चित्र को कभी भगवान के बगल में मत रखना वो भगवान नहीं है और उनके चित्र के आगे जब पूजा पाठ कर लेना तब अगर बत्ती जलाना , न सिदूर न चन्दन न रोली लेकिन अब ? / लेकिन समय के साथ साईं भगवान के साथ में बैठाल दिए गय इसमे साईं का दोष नहीं बल्कि साईं भक्तो का दोष है /
व्यापार  करने वालो ने मूर्ति बनाना चालू कर दिया तो किताबो वालो ने साईं चालीसा और पता नहीं क्या क्या असफल गायकों ने गायकी साईं भजनों से कर दी देवी देवताओ के गानों को रूपांतरित करके साईं के गाने बना दिए और आज सब सफल हो गय / वो कैसे मान ले की साईं भगवान नहीं है / आज दिवाली में साईं और राम साथ साथ पूजे जाते है /
ये सब पडने के बाद कई लोग मुझे भी साईं का घोर विरोधी बताएँगे लेकिन सच्चाई में मेरा साईं के प्रति विरोध पिछले दो सालो से ही है ज्यादा समय नहीं हुआ जब मैं भी साईं भक्त था और वो भी सन 1997  से / और पिछले दो सालो में साईं के खिलाफ खड़ा होकर करीब 50  से 60 लोगो को साईं की अंधभक्ति से दूर कर चूका हु / मैने साईं को जानना सन 1992 से शुरू किया था फिर उनके बारे में सुनते सुनते सन 1996 से उनके दर्शन को कानपूर के बिठूर स्थित स्थान में जाने लगा वो भी गर्मी हो जाड़ा हो बरसात हो सुबह 5 बजे पहुच ही जाता था प्रत्येक गुरुवार और रविवार / लगातार 5 सालो तक ये सिलसिला चलता रहा फिर जहा नौकरी करने गया वो भी साईं भक्त थे तो वहा भी साईं दर्शन हो ही जाते थे / साईं के ऊपर स्थानीय स्तर पर साईं के अनुभव पर आधारित टी वी  सीरियल भी बनाना चालू किया लेकिन समय के साथ अन्धविश्वास कम होता जा रहा था फिर करीब ढाई साल पहले इन्टरनेट पर इसे ही सर्च करते  हुए भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड  नाम का पेज देखा जब पड़ा तो आंखे खुली रह गई जैसे मौजूदा समय में सबकी खुली रह गई है / लेकिन तीन महीने तक इस पर ही लगा रहा की सच्चाई कहा तक है तब जा कर विश्वास हुआ की हा साईं को मानना सनातन धर्म के अनुरूप है ही नहीं मैं किसी भी धर्म की बुराई नहीं कर रहा लेकिन जो हमारे धर्मानुरूप है ही नहीं वो कैसे स्वीकार करू /
कल ही एक सज्जन से बात हुई वो गुस्से में आ गय तब उन्हे हमने बताया की मैं भी किसी समय साईं भक्त हुआ करता था लेकिन अब नहीं हु तो वो आश्चर्य से देखने लगे फिर सवाल एसा क्यों तो मैने कहा की जब तक मैं जो खाना खा रहा था बहूत ही स्वादिष्ट लग रहा था लेकिन जब उस स्वाद के पीछे की सच्चाई पता चली तो मुझे वो स्वाद पसंद ही नहीं आ रहा था / अब जान बुझ कर मैं गन्दा खाना तो खा नहीं सकता /
सच ये है की अगर साईं सच्चरित्र को आप ध्यान पूर्वक पड़ते है तो तश्वीर अपने आप सामने आ जाती है जो भी लिखा गया है उसके अनुसार हमारे धर्म के अनुरूप कुछ भी नहीं है / मैने साईं सच्चरित्र पुस्तक को करीब करीब सौ से ज्यादा बार पड़ा हुआ है इस लिए मुझे उसको समझने में देर नहीं लगी / मैं साईं के चमत्कारों से और उनके अनुभवों से ओत प्रोत भी था एक डर भी था अगर मैने मानना छोड़ दिया ,तो कुछ गलत न हो जाय / लेकिन अपने आराध्य पर पूरा विश्वास करके मैने साईं का चित्र और मूर्ति को फाड़ कर फेक दिया और इस अभियान से जुड़ गया आज मैं खुश हु /
मैने किसी की भावनाओ से न खेलना चाहता हु और ना ही मुझे खेलने का कोई अधिकार है लेकिन कम से कम अपने दिमाग को खोल कर एक बार सच्चे मन से सोच कर देखे क्या वास्तव में  आप सही कर रहे है क्या सारे सबूत गलत है क्या कही आप अन्धविश्वास से जकडे तो नहीं है / आप अपने उस देव या देवी को मानते है जिस पर आपको सबसे ज्यादा विश्वास है उसको साक्षी मान कर छोड़ दे कुछ नहीं होगा कभी नहीं होगा आपके साथ बुरा
सच्चे मन से किया गया कोई भी काम पूरा हो जाता है उसके लिए ये बने हुए लोगो पर अंध भक्ति करना ठीक नहीं / हमारे  सनातन धर्म में इतने भगवान कम है और जो है उनका इतिहास भी गवाह है चाहे वो भगवान श्री राम हो या श्री कृष्णा सभी के पुख्ता प्रमाण मौजूद है फिर साईं के बारे में जो कुछ ही सालो पहले की बात है का कोई सबूत नहीं कुछ अजीब सा नहीं लगता या कोई बताना नहीं चाहता है /
गीता के अध्याय 9 में भगवान श्री कृष्णा ने कहा भी है की
देवताओ को पूजने वाले देवताओ को प्राप्त होते है
पितरो को पूजने वाले पितरो को
भूतो को पूजने वाले भूतो को
और मुझे पूजने वाले मुझे प्राप्त होते है /

यान्ति देवव्रता देवान पितृन्यान्ति पितृव्रता: ।
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मधाजिनोपि माम् ।।
(गीता ९:२५)

 हम हिन्दू अनजाने में उन्हे पूजने लगे । इस पाप को करना बंद करे । आपका "सर" केवल और केवल अपने "श्री भगवान, राम आदि " के चरणो मे झुकना चाहिए, केवल अपने भगवान पर विश्वास बना कर रखे, जिस दिन आप अन्य सब को छोडकर केवल अपने भगवान पर अपना विश्वास स्थिर करने लगेंगे उस दिन से उनकी कृपा का अनुभव आपको होना प्रारम्भ हो जाएगा।
जय श्री राम ।
  आशीष त्रिपाठी


 

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